बीकानेर में मानसून से पहले नालों की सफाई, सीवरेज लाइनों के रखरखाव और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रशासनिक दावों की पोल पहली ही बारिश में खुल गई। समाचार इकबाल खान और भवानी भाई के वीडियो के अनुसार, शहर के कई इलाकों में जलभराव, ओवरफ्लो होती सीवरेज लाइनें और सड़कों पर फैली गंदगी ने नगर निगम और संबंधित विभागों की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थोड़ी सी बारिश होते ही बीकानेर की सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सफाई अभियान के नाम पर अक्सर खानापूर्ति ही होती है और नालों व जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति बारिश के समय सामने आ जाती है। प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिबंध के बावजूद रेहड़ी-पटरी और कई दुकानों पर इनका खुलेआम उपयोग जारी है, जिस पर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शहर की सफाई केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की भी इसमें बराबर की भागीदारी और जिम्मेदारी है। लोग अक्सर चाय पीने के बाद कप सड़क पर फेंक देते हैं, जहां खड़े होते हैं वहीं कचरा डाल देते हैं और सार्वजनिक स्थानों को गंदा करने से नहीं हिचकते, जिससे शहर की स्वच्छता प्रभावित होती है। विदेशों में सार्वजनिक स्वच्छता को लेकर नागरिकों में जागरूकता देखने को मिलती है, जबकि बीकानेर में कई स्थानों पर कचरे के ढेर आम दृश्य बन चुके हैं। बीकानेर आने वाले विदेशी पर्यटक भी गंदगी और कचरे के ढेरों की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, जो शहर की छवि को नुकसान पहुंचाता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियां ईमानदारी से निभानी चाहिए, प्लास्टिक प्रतिबंध और सफाई व्यवस्था को सख्ती से लागू करना चाहिए, वहीं नागरिकों को भी शहर को स्वच्छ रखने का संकल्प लेना होगा। केवल आलोचना से नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी निभाने से ही बीकानेर को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सकता है, क्योंकि पहली बारिश ने शहर को बेनकाब कर दिया है और यह सवाल खड़ा हो गया है कि गंदगी पर कब शर्म आएगी।
बीकानेर में मानसून से पहले नालों की सफाई, सीवरेज लाइनों के रखरखाव और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रशासनिक दावों की पोल पहली ही बारिश में खुल गई। समाचार इकबाल खान और भवानी भाई के वीडियो के अनुसार, शहर के कई इलाकों में जलभराव, ओवरफ्लो होती सीवरेज लाइनें और सड़कों पर फैली गंदगी ने नगर निगम और संबंधित विभागों की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थोड़ी सी बारिश होते ही बीकानेर की सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सफाई अभियान के नाम पर अक्सर खानापूर्ति ही होती है और नालों व जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति बारिश के समय सामने आ जाती है। प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिबंध के बावजूद रेहड़ी-पटरी और कई दुकानों पर इनका खुलेआम उपयोग जारी है, जिस पर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शहर की सफाई केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की भी इसमें बराबर की भागीदारी और जिम्मेदारी है। लोग अक्सर चाय पीने के बाद कप सड़क पर फेंक देते हैं, जहां खड़े होते हैं वहीं कचरा डाल देते हैं और सार्वजनिक स्थानों को गंदा करने से नहीं हिचकते, जिससे शहर की स्वच्छता प्रभावित होती है। विदेशों में सार्वजनिक स्वच्छता को लेकर नागरिकों में जागरूकता देखने को मिलती है, जबकि बीकानेर में कई स्थानों पर कचरे के ढेर आम दृश्य बन चुके हैं। बीकानेर आने वाले विदेशी पर्यटक भी गंदगी और कचरे के ढेरों की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, जो शहर की छवि को नुकसान पहुंचाता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियां ईमानदारी से निभानी चाहिए, प्लास्टिक प्रतिबंध और सफाई व्यवस्था को सख्ती से लागू करना चाहिए, वहीं नागरिकों को भी शहर को स्वच्छ रखने का संकल्प लेना होगा। केवल आलोचना से नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी निभाने से ही बीकानेर को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सकता है, क्योंकि पहली बारिश ने शहर को बेनकाब कर दिया है और यह सवाल खड़ा हो गया है कि गंदगी पर कब शर्म आएगी।
- यदि आप अस्थमा, नजला, जुकाम, बार-बार छींके आने, सांस लेने में दिक्कत या एलर्जी जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं, तो आप दिए गए नंबर 7568628143 पर संपर्क कर सकते हैं।1
- बीकानेर के बाबूलाल फाटक पुलिया पर इन दिनों भारी ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है। यह जाम पिछले दो-तीन दिन से जारी है, जिसका मुख्य कारण बी.डी.ए. (BDA) द्वारा क्षेत्र में नाले का कार्य किया जाना बताया गया है।1
- श्रीकोलायत के समुचित विकास और नागरिक सुविधाओं के सुचारू संचालन को लेकर स्थानीय श्री गौतम ऋषि आश्रम प्रांगण में प्रबुद्ध नागरिकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी हनुमान प्रसाद सांखी ने की। बैठक में कोलायत क्षेत्र की शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, बिजली-पानी, सड़क, नाली निर्माण, झझू चौराहे पर गंदे पानी की निकासी और कपिल सरोवर के समुचित विकास जैसे विभिन्न जनहित से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रबुद्धजनों ने जोर दिया कि कोलायत जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का स्थायी समाधान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इसके लिए स्थानीय नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ शासन-प्रशासन स्तर पर ठोस पहल करने की आवश्यकता बताई। इस बैठक में शिक्षाविद् भगाराम ढाल, पूर्व लोकपाल किशोर सिंह राठौड़, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मुरलीधर सेन, भंवर सिंह राजपुरोहित, चतुर्भुज जोशी, दाऊदयाल पंचारिया, ओमप्रकाश गिरी, समाजसेवी एवं तैराक रमण शर्मा, जगदीश प्रसाद राजपुरोहित, शीशपाल मेघवाल और स्वरूप शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि कोलायत के विकास से संबंधित सभी मुद्दों को संगठित रूप से प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सके।1
- लेखक ने अपनी सोशल मीडिया फैमिली को राम राम कहकर गर्मजोशी से अभिवादन किया। उन्होंने अपने प्यारे से गांव मालसर का एक नज़ारा साझा किया, जो भानीपुरा तहसील का एक छोटा सा गांव है। लेखक ने गांव की झलक दिखाते हुए बताया कि उनके न्यूज़ चैनल पर रोज़ाना आस-पास के इलाकों की खबरें और रिपोर्ट मिलेंगी।1
- फलौदी के बाप उपखंड मुख्यालय स्थित सरकारी अस्पताल में शुक्रवार रात अचानक आई तेज आंधी के कारण बिजली गुल हो गई, जिससे रात 3 बजे से शनिवार सुबह 7 बजे तक विद्युत व्यवस्था ठप रही। इस दौरान संस्थागत प्रसव के लिए भर्ती प्रसूता महिलाओं और उनके नवजात शिशुओं को भीषण गर्मी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज लोहिया ने उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर इस स्थिति पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि प्रसूताएं और नवजात शिशु गर्मी से बहुत परेशान थे, और उन्हें हाथ पंखी या कपड़े से हवा देकर राहत पहुँचाने का प्रयास करना पड़ा। परिजनों ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर वार्ड में रोशनी की। अस्पताल परिसर में जनरेटर की व्यवस्था होने के बावजूद, वह खराब बताया जा रहा है। सूचना मिलने पर जागरूक नागरिकों ने रात्रि ड्यूटी के कार्मिक से पूछा तो जनरेटर खराब होने की बात सामने आई। आश्चर्यजनक रूप से, अस्पताल के किसी भी अधिकारी ने रात 3 बजे से बिजली बंद होने की सूचना विद्युत विभाग को नहीं दी। यह भी सामने आया कि इमरजेंसी वार्ड में इन्वर्टर लगा होने के कारण रात्रि ड्यूटी के कार्मिकों को कोई परेशानी नहीं हुई और वे आराम से सोते रहे। राज्य सरकार एक ओर जननी सुरक्षा और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएँ लागू कर रही है, वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सही निगरानी के अभाव में मरीजों को ऐसी कठिनाई झेलनी पड़ रही है। हाल ही में बीकानेर में एक साथ कई प्रसूताओं की मौत का मामला गरमाया हुआ है, जिस पर गंभीर चिंतन चल रहा है, फिर भी बाप का चिकित्सा विभाग प्रसूताओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं दिख रहा है।1
- चूरू में 'ऑपरेशन उमंग-7' की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ 'उमंग' की जगह कथित तौर पर 'दर्द' देखने को मिला है। बताया गया है कि एक 11 साल के बालक के लिए उसकी माँ रातभर भटकती रही, जिसके बाद अब उसके परिजन सम्प्रेषण गृह के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। इस पूरे मामले को लेकर हरलाल सहारण, राहुल कस्वां, राजेंद्र राठौड़, CMO राजस्थान, Sp चूरू, चाइल्डहेल्पलाइन चूरू, Ministry of Women & Child Development, Government of India, भजनलाल शर्मा और अशोक गहलोत का ध्यान आकर्षित किया गया है।1
- यदि किसी व्यक्ति को अस्थमा, नजला, जुकाम, छींकें आने, साँस लेने में दिक्कत या एलर्जी जैसी समस्याएँ हैं, तो वे 7568628143 पर संपर्क कर सकते हैं।1
- राजस्थान के बज्जू उपखंड के रणजीतपुरा थाना क्षेत्र में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाके में एक संदिग्ध कबूतर मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सतर्क हो गई हैं। यह कबूतर चक 13 आरडीवाई-ए में किसान रूपाराम लेघा के खेत में पाया गया था, जिसके पंखों पर नीले रंग की मोहर लगी हुई मिली। हालांकि, उस पर अंकित शब्द स्पष्ट रूप से पढ़े नहीं जा सके हैं। किसान रामचंद्र ने जब कबूतर के पंखों पर नीली स्याही की मोहर देखी तो उन्होंने तत्काल रणजीतपुरा पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और कबूतर को अपने कब्जे में लेकर थाना परिसर ले गए। रणजीतपुरा थानाधिकारी सीआई लक्ष्मणसिंह राठौड़ ने बताया कि कबूतर को थाना परिसर में सुरक्षित रखा गया है। इस घटना की जानकारी जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, बीएसएफ की जी ब्रांच और वन विभाग को भी दे दी गई है। वर्तमान में क्षेत्र में शांति बनी हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। गौरतलब है कि भारत-पाक सीमा से लगे क्षेत्रों में पहले भी कई बार संदिग्ध परिस्थितियों में कबूतर, गुब्बारे और अन्य वस्तुएं मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों में हर पहलू की गहनता से जांच करती हैं। फिलहाल, संबंधित विभाग कबूतर पर लगी मोहर और उसके स्रोत के बारे में जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं।1
- बीकानेर में मानसून से पहले नालों की सफाई, सीवरेज लाइनों के रखरखाव और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रशासनिक दावों की पोल पहली ही बारिश में खुल गई। समाचार इकबाल खान और भवानी भाई के वीडियो के अनुसार, शहर के कई इलाकों में जलभराव, ओवरफ्लो होती सीवरेज लाइनें और सड़कों पर फैली गंदगी ने नगर निगम और संबंधित विभागों की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थोड़ी सी बारिश होते ही बीकानेर की सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सफाई अभियान के नाम पर अक्सर खानापूर्ति ही होती है और नालों व जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति बारिश के समय सामने आ जाती है। प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिबंध के बावजूद रेहड़ी-पटरी और कई दुकानों पर इनका खुलेआम उपयोग जारी है, जिस पर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शहर की सफाई केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की भी इसमें बराबर की भागीदारी और जिम्मेदारी है। लोग अक्सर चाय पीने के बाद कप सड़क पर फेंक देते हैं, जहां खड़े होते हैं वहीं कचरा डाल देते हैं और सार्वजनिक स्थानों को गंदा करने से नहीं हिचकते, जिससे शहर की स्वच्छता प्रभावित होती है। विदेशों में सार्वजनिक स्वच्छता को लेकर नागरिकों में जागरूकता देखने को मिलती है, जबकि बीकानेर में कई स्थानों पर कचरे के ढेर आम दृश्य बन चुके हैं। बीकानेर आने वाले विदेशी पर्यटक भी गंदगी और कचरे के ढेरों की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, जो शहर की छवि को नुकसान पहुंचाता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियां ईमानदारी से निभानी चाहिए, प्लास्टिक प्रतिबंध और सफाई व्यवस्था को सख्ती से लागू करना चाहिए, वहीं नागरिकों को भी शहर को स्वच्छ रखने का संकल्प लेना होगा। केवल आलोचना से नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी निभाने से ही बीकानेर को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सकता है, क्योंकि पहली बारिश ने शहर को बेनकाब कर दिया है और यह सवाल खड़ा हो गया है कि गंदगी पर कब शर्म आएगी।1