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*महुआडांड़ जेएसएलपीएस में धान खरीद में गड़बड़ी का आरोप, किसानों से नहीं बाजार से हुई खरीद* महुआडांड़ क्षेत्र के जेएसएलपीएस में धान खरीद प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि जहां धान की खरीद सीधे किसानों से की जानी थी, वहीं नियमों को दरकिनार करते हुए बाजार से खरीद की गई।सूत्रों के अनुसार, जिला से करीब 700 टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन वास्तविकता में केवल 50 से 55 टन धान ही खरीदा गया। इतना ही नहीं, इस सीमित खरीद को भी किसानों के बजाय बाजार से किया गया, जो सरकारी नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि खरीद की वास्तविक मात्रा कम होने के बावजूद रजिस्टर में आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर दर्ज किया गया। इससे पूरे मामले में हेराफेरी और भ्रष्टाचार की आशंका गहरा गई है।इस मामले को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि किसानों से सीधे खरीद नहीं की गई, तो यह उनकी मेहनत के साथ अन्याय है। साथ ही, उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।फिलहाल, संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस मामले की जांच कर सच्चाई सामने लाए।

10 hrs ago
user_Manoj dutt dev
Manoj dutt dev
Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
10 hrs ago

*महुआडांड़ जेएसएलपीएस में धान खरीद में गड़बड़ी का आरोप, किसानों से नहीं बाजार से हुई खरीद* महुआडांड़ क्षेत्र के जेएसएलपीएस में धान खरीद प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि जहां धान की खरीद सीधे किसानों से की जानी थी, वहीं नियमों को दरकिनार करते हुए बाजार से खरीद की गई।सूत्रों के अनुसार, जिला से करीब 700 टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन वास्तविकता में केवल 50 से 55 टन धान ही खरीदा गया। इतना ही नहीं, इस सीमित खरीद को भी किसानों के बजाय बाजार से किया गया, जो सरकारी नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि खरीद की वास्तविक मात्रा कम होने के बावजूद रजिस्टर में आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर दर्ज किया गया। इससे पूरे मामले में हेराफेरी और भ्रष्टाचार की आशंका गहरा गई है।इस मामले को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि किसानों से सीधे खरीद नहीं की गई, तो यह उनकी मेहनत के साथ अन्याय है। साथ ही, उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।फिलहाल, संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस मामले की जांच कर सच्चाई सामने लाए।

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  • महुआडांड़ क्षेत्र के जेएसएलपीएस में धान खरीद प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि जहां धान की खरीद सीधे किसानों से की जानी थी, वहीं नियमों को दरकिनार करते हुए बाजार से खरीद की गई।सूत्रों के अनुसार, जिला से करीब 700 टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन वास्तविकता में केवल 50 से 55 टन धान ही खरीदा गया। इतना ही नहीं, इस सीमित खरीद को भी किसानों के बजाय बाजार से किया गया, जो सरकारी नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि खरीद की वास्तविक मात्रा कम होने के बावजूद रजिस्टर में आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर दर्ज किया गया। इससे पूरे मामले में हेराफेरी और भ्रष्टाचार की आशंका गहरा गई है।इस मामले को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि किसानों से सीधे खरीद नहीं की गई, तो यह उनकी मेहनत के साथ अन्याय है। साथ ही, उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।फिलहाल, संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस मामले की जांच कर सच्चाई सामने लाए।
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    महुआडांड़ क्षेत्र के जेएसएलपीएस में धान खरीद प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि जहां धान की खरीद सीधे किसानों से की जानी थी, वहीं नियमों को दरकिनार करते हुए बाजार से खरीद की गई।सूत्रों के अनुसार, जिला से करीब 700 टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन वास्तविकता में केवल 50 से 55 टन धान ही खरीदा गया। इतना ही नहीं, इस सीमित खरीद को भी किसानों के बजाय बाजार से किया गया, जो सरकारी नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि खरीद की वास्तविक मात्रा कम होने के बावजूद रजिस्टर में आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर दर्ज किया गया। इससे पूरे मामले में हेराफेरी और भ्रष्टाचार की आशंका गहरा गई है।इस मामले को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि किसानों से सीधे खरीद नहीं की गई, तो यह उनकी मेहनत के साथ अन्याय है। साथ ही, उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।फिलहाल, संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस मामले की जांच कर सच्चाई सामने लाए।
    user_Manoj dutt dev
    Manoj dutt dev
    Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    10 hrs ago
  • लातेहार प्रखंड सभागार में भारत की आगामी जनगणना 2027 के तहत तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जनगणना के प्रथम चरण—मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना—को लेकर आयोजित किया गया है। इस दौरान प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को घर-घर जाकर सटीक जानकारी संकलित करने की विधि, प्रपत्र भरने की प्रक्रिया, मानकों का पालन तथा डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण में जनगणना कार्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह प्रक्रिया देश की विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और नीतियों के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। प्रशिक्षकों ने प्रगणकों को समझाया कि वे प्रत्येक मकान की स्थिति, उपयोग, निवासियों की संख्या और आवश्यक विवरण सावधानीपूर्वक दर्ज करें, ताकि वास्तविक स्थिति का सही आंकलन हो सके। कार्यक्रम के दौरान व्यावहारिक सत्र भी आयोजित किए गए, जिसमें फॉर्म भरने और संभावित परिस्थितियों से निपटने का अभ्यास कराया गया। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि कार्य के दौरान पारदर्शिता, धैर्य और जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखा जाए। तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण से प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को जनगणना कार्य के लिए पूर्ण रूप से तैयार किया जा रहा है।
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    लातेहार प्रखंड सभागार में भारत की आगामी जनगणना 2027 के तहत तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जनगणना के प्रथम चरण—मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना—को लेकर आयोजित किया गया है। इस दौरान प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को घर-घर जाकर सटीक जानकारी संकलित करने की विधि, प्रपत्र भरने की प्रक्रिया, मानकों का पालन तथा डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण में जनगणना कार्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह प्रक्रिया देश की विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और नीतियों के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। प्रशिक्षकों ने प्रगणकों को समझाया कि वे प्रत्येक मकान की स्थिति, उपयोग, निवासियों की संख्या और आवश्यक विवरण सावधानीपूर्वक दर्ज करें, ताकि वास्तविक स्थिति का सही आंकलन हो सके।
कार्यक्रम के दौरान व्यावहारिक सत्र भी आयोजित किए गए, जिसमें फॉर्म भरने और संभावित परिस्थितियों से निपटने का अभ्यास कराया गया। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि कार्य के दौरान पारदर्शिता, धैर्य और जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखा जाए। तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण से प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को जनगणना कार्य के लिए पूर्ण रूप से तैयार किया जा रहा है।
    user_Nihit Kumar
    Nihit Kumar
    Latehar, Jharkhand•
    14 hrs ago
  • Post by Shamsher Alam
    1
    Post by Shamsher Alam
    user_Shamsher Alam
    Shamsher Alam
    Local News Reporter मनिका, लातेहार, झारखंड•
    7 hrs ago
  • Post by Jharkhand local news
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    Post by Jharkhand local news
    user_Jharkhand local news
    Jharkhand local news
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    10 min ago
  • #video#viral# Kashmir view # travel view # sad songs #
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    #video#viral# Kashmir view # travel view # sad songs #
    user_Er KHAN Sir
    Er KHAN Sir
    कुरु, लोहरदगा, झारखंड•
    12 hrs ago
  • Post by AAM JANATA
    1
    Post by AAM JANATA
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    12 hrs ago
  • Post by Neeraj kumar
    1
    Post by Neeraj kumar
    user_Neeraj kumar
    Neeraj kumar
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    16 hrs ago
  • लातेहार। जिले के बसिया पंचायत अंतर्गत तेतरिया खाड़ गांव में संचालित सीसीएल परियोजना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। पीएनएम कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि बीते करीब पांच वर्षों से कंपनी द्वारा ओवरबर्डन (ओबी) हटाने और कोयला निकासी का कार्य किया जा रहा है, लेकिन इस दौरान कोयले की गुणवत्ता बेहद खराब रही है। कोयले में मिट्टी और पत्थर मिलाकर निकासी किए जाने से न केवल इसकी कीमत प्रभावित हो रही है, बल्कि करीब 700 ट्रकों की आजीविका पर भी संकट गहरा गया है। इससे सैकड़ों परिवारों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने कंपनी की नीयत पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जानबूझकर कम दर पर लंबी अवधि का टेंडर लेकर स्थानीय ट्रक मालिकों को कमजोर किया जा रहा है, ताकि उन्हें कारोबार से बाहर कर कंपनी अपने निजी डंपरों का संचालन कर सके। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सीसीएल पिछले 35 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्यरत है, बावजूद इसके अब तक कंपनी का खुद का सड़क मार्ग नहीं है और वह ग्रामीणों के सहयोग से ही संचालित होती रही है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कंपनी द्वारा कोयले में आग लगाकर इसका दोष ग्रामीणों पर मढ़ने और झूठे मुकदमे दर्ज कराने की साजिश की जा सकती है। साथ ही एससी/एसटी कानून के नाम पर डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया गया है, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे और लोगों की आजीविका सुरक्षित रह सके।
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    लातेहार। जिले के बसिया पंचायत अंतर्गत तेतरिया खाड़ गांव में संचालित सीसीएल परियोजना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। पीएनएम कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बीते करीब पांच वर्षों से कंपनी द्वारा ओवरबर्डन (ओबी) हटाने और कोयला निकासी का कार्य किया जा रहा है, लेकिन इस दौरान कोयले की गुणवत्ता बेहद खराब रही है। कोयले में मिट्टी और पत्थर मिलाकर निकासी किए जाने से न केवल इसकी कीमत प्रभावित हो रही है, बल्कि करीब 700 ट्रकों की आजीविका पर भी संकट गहरा गया है। इससे सैकड़ों परिवारों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।
ग्रामीणों ने कंपनी की नीयत पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जानबूझकर कम दर पर लंबी अवधि का टेंडर लेकर स्थानीय ट्रक मालिकों को कमजोर किया जा रहा है, ताकि उन्हें कारोबार से बाहर कर कंपनी अपने निजी डंपरों का संचालन कर सके।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सीसीएल पिछले 35 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्यरत है, बावजूद इसके अब तक कंपनी का खुद का सड़क मार्ग नहीं है और वह ग्रामीणों के सहयोग से ही संचालित होती रही है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कंपनी द्वारा कोयले में आग लगाकर इसका दोष ग्रामीणों पर मढ़ने और झूठे मुकदमे दर्ज कराने की साजिश की जा सकती है। साथ ही एससी/एसटी कानून के नाम पर डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया गया है, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे और लोगों की आजीविका सुरक्षित रह सके।
    user_Manoj dutt dev
    Manoj dutt dev
    Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    12 hrs ago
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