उत्तर प्रदेश के कानपुर में 13 जून को बुनकरों के फ्लैट रेट मुद्दे पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिससे बुनकर समुदाय में भारी नाराज़गी है। बुनकरों में इस बात को लेकर विशेष असंतोष है कि उनके प्रतिनिधियों द्वारा 75 किलोवाट की मांग उठाई गई, जबकि सरकार 20 किलोवाट तक फ्लैट रेट देने को तैयार थी। बुनकरों का कहना है कि जब 20 किलोवाट की व्यवस्था से प्रदेश के अधिकांश बुनकरों को सीधा लाभ मिल सकता था, तो 75 किलोवाट की मांग उठाकर मामले को अनावश्यक रूप से क्यों उलझाया गया। वे महसूस करते हैं कि इस उच्च मांग ने एक संभावित समाधान में बाधा डाली है। इस संदर्भ में, जिला मेरठ से मो. याकूब अंसारी, जिन्हें समस्त बुनकर समाज की आवाज़ बताया गया है, ने अपनी चिंता व्यक्त की है। दानिश आज़ाद अंसारी और राकेश सचान का भी उल्लेख है। लोक मंच न्यूज़ ने सीधे बुनकरों के बीच जाकर एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें उनकी नाराज़गी और मांगों को उजागर करने का प्रयास किया गया है, ताकि यह समझा जा सके कि बुनकर समुदाय वास्तव में क्या सोचता है।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में 13 जून को बुनकरों के फ्लैट रेट मुद्दे पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिससे बुनकर समुदाय में भारी नाराज़गी है। बुनकरों में इस बात को लेकर विशेष असंतोष है कि उनके प्रतिनिधियों द्वारा 75 किलोवाट की मांग उठाई गई, जबकि सरकार 20 किलोवाट तक फ्लैट रेट देने को तैयार थी। बुनकरों का कहना है कि जब 20 किलोवाट की व्यवस्था से प्रदेश के अधिकांश बुनकरों को सीधा लाभ मिल सकता था, तो 75 किलोवाट की मांग उठाकर मामले को अनावश्यक रूप से क्यों उलझाया गया। वे महसूस करते हैं कि इस उच्च मांग ने एक संभावित समाधान में बाधा डाली है। इस संदर्भ में, जिला मेरठ से मो. याकूब अंसारी, जिन्हें समस्त बुनकर समाज की आवाज़ बताया गया है, ने अपनी चिंता व्यक्त की है। दानिश आज़ाद अंसारी और राकेश सचान का भी उल्लेख है। लोक मंच न्यूज़ ने सीधे बुनकरों के बीच जाकर एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें उनकी नाराज़गी और मांगों को उजागर करने का प्रयास किया गया है, ताकि यह समझा जा सके कि बुनकर समुदाय वास्तव में क्या सोचता है।
- मेरठ के सरधना में, याकूब अंसारी ने खुद को बुनकर समाज की आवाज के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका उद्देश्य है कि वे हर एक बुनकर से संपर्क करें, विशेष रूप से उन बुनकरों से जिनकी बिजली खपत 5 किलो वाट है, ताकि फ्लैट रेट को लेकर उनके विचारों को समझा जा सके। इस पहल के तहत, बुनकर समाज से सीधा पूछा जा रहा है कि क्या वे इस प्रयास में साथ हैं।1
- उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर, जहाँ 500 वर्षों के वनवास के बाद प्रभु श्री राम को स्थान मिला, वहाँ मंदिर बनने के चंद वर्षों बाद ही इसके दानपात्र से चोरी की एक बड़ी वारदात सामने आई है। इस घटना से समस्त उत्तर प्रदेश शुब्ध है। इसे लेकर तल्ख टिप्पणी की गई है कि जहाँ 'योगी राज' है, वहाँ चोर को चोरी न करने की सजा मिले ऐसा हो ही नहीं सकता, बस एक बार पूरी घटना का प्रकरण सामने आने की देर है। इस चोरी के प्रकरण को लेकर समस्त देश में यह मांग उठ रही है कि इसमें शामिल व्यक्तियों को जल्द से जल्द पकड़कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। इसी मामले पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी गहरा रोष व्याप्त है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मेरठ में धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध प्रकट किया।1
- मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र में अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है, जहां हाल ही में उधार के पैसों को लेकर एक दुकानदार को उसकी दुकान में घुसकर बुरी तरह पीटा गया। दबंगों ने दुकानदार के साथ मारपीट करते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया और जान से मारने की धमकी दी, जिसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। यह घटना दिनदहाड़े हुई, जिससे योगी सरकार में खुलेआम गुंडागर्दी का आरोप लगाया जा रहा है। पोस्ट में दावा किया गया है कि पुलिस रात में गश्त नहीं करती और दबंगों पर कार्रवाई करने में पुलिस 'नमस्तक' हो जाती है। आरोप है कि थाना भावनपुर के प्रभारी को वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है या फिर वे सत्ता के दबाव में काम कर रहे हैं। यहाँ तक कि यह गंभीर आरोप भी लगाया गया है कि बलात्कारी, गो तस्कर, खनन माफिया और नशीले पदार्थों की बिक्री करने वाले तस्कर सहित सभी प्रकार के अपराधी थाने से 'मैनेज' किए जा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए, आरोप लगाया जा रहा है कि थाना और चौकी कार्रवाई के नाम पर केवल 'परचून की दुकान' बनकर रह गए हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर थाने को अधिकारियों का संरक्षण मिल रहा है या सत्ता का दबाव है, जिसके चलते अपराध पर लगाम नहीं लग पा रही है।1
- उत्तराखंड से एक बेहद प्यारा वीडियो सामने आया है, जिसमें एक बंदर अपने बच्चे को मोबाइल फोन वापस करने के लिए समझाता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो में दिखाया गया है कि जैसे ही बंदर ने अपने बच्चे को मोबाइल लौटाने के लिए कहा, बच्चे ने तुरंत उसकी बात मान ली और मोबाइल वापस कर दिया। यह घटना लोगों का दिल जीत रही है।1
- मेरठ में 25 जून 2026 को बेटियां फाउंडेशन द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय कैंट विधायक अमित अग्रवाल रहे। फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक डा. ज्योत्सना जैन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जहाँ उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों की ताजपोशी करते हुए उन्हें समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण और बेटियों के उत्थान के लिए कार्य करने की शपथ दिलाई। साथ ही, फाउंडेशन की वार्षिक सामरिका 'बढ़ते कदम' का भी विमोचन किया गया।1
- मेरठ के मवाना थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में, एक युवक को पकड़ने आए एक दरोगा पर मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। यह आरोप सीधे उस पुलिसकर्मी पर लगाया गया है जो युवक को गिरफ्तार करने के लिए मौके पर पहुंचा था।3
- उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में स्थित प्रसिद्ध घंटाघर आज भी अपनी जगह पर कायम है। इसकी एक प्रमुख खासियत वह घड़ी है जिसे अंग्रेजों ने जर्मनी से लाकर यहाँ स्थापित किया था। हालांकि, यह घड़ी फिलहाल अस्त-व्यस्त और बंद हालत में है, फिर भी यह पूरा क्षेत्र आज भी घंटाघर के नाम से ही जाना जाता है। इस घंटाघर की प्रसिद्धि सन 1930 में विशेष रूप से बढ़ी थी, जब भारत आजाद नहीं हुआ था। यह वही ऐतिहासिक स्थान था जहाँ महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस ने आंदोलन की अलख जगाई और अपना पहला संबोधन दिया था। इसके बाद भी, यह स्थल अक्सर महत्वपूर्ण भाषणों और संबोधनों का केंद्र बना रहता था। आज वही इलाका इतना अस्त-व्यस्त हो चुका है कि उसके चारों तरफ भारी भीड़भाड़ और कारोबार दिखाई देता है। मेरठ शहर का यह जाना-माना प्रसिद्ध स्थल, जो कभी क्रांति का केंद्र था, आज भी लोगों के मन में यह सवाल पैदा करता है कि इसकी प्रसिद्धि का आखिर रहस्य क्या है, बावजूद इसके कि यह अब अव्यवस्था में घिरा है।1
- वेनेजुएला में 7.1 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है, जिससे लगभग 1 लाख लोगों के मारे जाने की आशंका है। इन भूकंपों से कई ऊंची इमारतें जमींदोज हो गई हैं। भूकंप का केंद्र राजधानी काराकास से मात्र 16 किलोमीटर दूर होने के कारण, शहर में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।1