राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने गुमला परिषदन में गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जिलों से संबंधित मामलों की विस्तृत सुनवाई की। इस दौरान आयोग के समक्ष प्रस्तुत लगभग 16 मामलों की समीक्षा की गई, जिनमें मुख्य रूप से भूमि विवाद, भूमि अधिग्रहण, शिक्षा, जाति प्रमाण पत्र और अन्य सामाजिक विषय शामिल थे। गुमला जिले के 09 मामलों का सुनवाई के बाद निष्पादन किया गया। सुनवाई में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के मुआवजे संबंधी लंबित मामलों के निष्पादन और भुगतान की जानकारी दी गई। वहीं, भारतमाला परियोजना से प्रभावित उन परिवारों के मामलों पर विशेष संज्ञान लिया गया, जिनकी भूमि अधिग्रहण के बाद आजीविका के साधन सीमित हो गए हैं। उपायुक्त को इन मामलों की पुनः जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने और आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। शिक्षा विभाग से जुड़े भरनो प्रखंड के एक विद्यालय की शिक्षिका के उत्पीड़न और लंबित वेतन भुगतान की शिकायत पर बताया गया कि प्रशासनिक कार्रवाई की जा चुकी है और वेतन का भुगतान भी सुनिश्चित किया गया है। सिमडेगा जिले के पारिवारिक भूमि बंटवारा विवाद में पक्षकारों को विधिसम्मत प्रक्रिया से समाधान की दिशा में बढ़ने का सुझाव दिया गया, जबकि लोहरदगा के पुराने भूमि विवाद में अगली सुनवाई आवश्यक अभिलेखों और वंशावली के परीक्षण के बाद निर्धारित की गई। डॉ. आशा लकड़ा ने गुमला जिले में जनजातीय समाज की पारंपरिक पड़हा व्यवस्था और ग्राम स्तरीय सामाजिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने उपायुक्त को पाहन, पुजार, कोटवार और अन्य पारंपरिक पदों के चिह्नीकरण तथा पंचायत व्यवस्था के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने हेतु पहल करने तथा विस्तृत प्रतिवेदन आयोग को सौंपने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े मामलों का समयबद्ध निष्पादन, उनके अधिकारों का संरक्षण और विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आयोग की प्राथमिकता है, जिस हेतु अधिकारियों को संवेदनशीलता और गंभीरता से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। इस अवसर पर उपायुक्त गुमला दिलेश्वर महत्तो, पुलिस अधीक्षक गुमला हारिस बिन ज़मा, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, अपर समाहर्ता राजीव नीरज, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी महेश कुमार, डीसीएलआर राजीव कुमार, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, विभागीय पदाधिकारी एवं संबंधित कर्मी उपस्थित थे। आयोग की टीम से असिस्टेंट डायरेक्टर प्रदीप कुमार दास, इन्वेस्टिगेटर राहुल, इन्वेस्टिगेटर रिया, सलाहकार राहुल यादव, निजी सचिव कुशेश्वर साहू सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने गुमला परिषदन में गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जिलों से संबंधित मामलों की विस्तृत सुनवाई की। इस दौरान आयोग के समक्ष प्रस्तुत लगभग 16 मामलों की समीक्षा की गई, जिनमें मुख्य रूप से भूमि विवाद, भूमि अधिग्रहण, शिक्षा, जाति प्रमाण पत्र और अन्य सामाजिक विषय शामिल थे। गुमला जिले के 09 मामलों का सुनवाई के बाद निष्पादन किया गया। सुनवाई में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के मुआवजे संबंधी लंबित मामलों के निष्पादन और भुगतान की जानकारी दी गई। वहीं, भारतमाला परियोजना से प्रभावित उन परिवारों
के मामलों पर विशेष संज्ञान लिया गया, जिनकी भूमि अधिग्रहण के बाद आजीविका के साधन सीमित हो गए हैं। उपायुक्त को इन मामलों की पुनः जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने और आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। शिक्षा विभाग से जुड़े भरनो प्रखंड के एक विद्यालय की शिक्षिका के उत्पीड़न और लंबित वेतन भुगतान की शिकायत पर बताया गया कि प्रशासनिक कार्रवाई की जा चुकी है और वेतन का भुगतान भी सुनिश्चित किया गया है। सिमडेगा जिले के पारिवारिक भूमि बंटवारा विवाद में पक्षकारों को विधिसम्मत प्रक्रिया से समाधान
की दिशा में बढ़ने का सुझाव दिया गया, जबकि लोहरदगा के पुराने भूमि विवाद में अगली सुनवाई आवश्यक अभिलेखों और वंशावली के परीक्षण के बाद निर्धारित की गई। डॉ. आशा लकड़ा ने गुमला जिले में जनजातीय समाज की पारंपरिक पड़हा व्यवस्था और ग्राम स्तरीय सामाजिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने उपायुक्त को पाहन, पुजार, कोटवार और अन्य पारंपरिक पदों के चिह्नीकरण तथा पंचायत व्यवस्था के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने हेतु पहल करने तथा विस्तृत प्रतिवेदन आयोग को सौंपने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े मामलों का
समयबद्ध निष्पादन, उनके अधिकारों का संरक्षण और विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आयोग की प्राथमिकता है, जिस हेतु अधिकारियों को संवेदनशीलता और गंभीरता से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। इस अवसर पर उपायुक्त गुमला दिलेश्वर महत्तो, पुलिस अधीक्षक गुमला हारिस बिन ज़मा, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, अपर समाहर्ता राजीव नीरज, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी महेश कुमार, डीसीएलआर राजीव कुमार, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, विभागीय पदाधिकारी एवं संबंधित कर्मी उपस्थित थे। आयोग की टीम से असिस्टेंट डायरेक्टर प्रदीप कुमार दास, इन्वेस्टिगेटर राहुल, इन्वेस्टिगेटर रिया, सलाहकार राहुल यादव, निजी सचिव कुशेश्वर साहू सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
- गुमला के चैनपुर स्थित कराकू पुजरा टोली में हुए बारह वर्षीय किशोर हत्याकांड का पुलिस ने उद्भेदन करने का दावा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालाँकि, घटना के लगभग बहत्तर घंटे बाद हुई इस कार्रवाई ने पुलिस की कार्यशैली और शुरुआती जाँच को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार, चैनपुर थाना कांड संख्या उन्नीस/छब्बीस के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सुनीता देवी और जागेश्वर गोप शामिल हैं, जिन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने इस गिरफ्तारी को अपनी बड़ी सफलता बताया है, लेकिन घटना और गिरफ्तारी के बीच बीते बहत्तर घंटों को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य और सुराग थे तो कार्रवाई में इतना समय क्यों लगा। प्रारंभिक दिनों में पुलिस ने मामले को लेकर कोई स्पष्ट खुलासा भी नहीं किया था। कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है, विशेषकर तब जब मामला एक नाबालिग की हत्या से जुड़ा हो। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली, जाँच की गति और संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बहस छेड़ दी है। फिलहाल, पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच जारी है और घटना से जुड़े सभी तथ्यों को खंगाला जा रहा है।1
- गुमला के चैनपुर में पुलिस ने महज चार दिनों के भीतर एक 12 वर्षीय बालक की हत्या के मामले का सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने कराकू पुजरा टोली निवासी 26 वर्षीय सुनीता देवी, जो संदीप गोप की पत्नी हैं, और उसके 27 वर्षीय देवर जागेश्वर गोप, जो रामसाय गोप के पुत्र हैं, को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।1
- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने गुमला परिषदन में गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जिलों से संबंधित मामलों की विस्तृत सुनवाई की। इस दौरान आयोग के समक्ष प्रस्तुत लगभग 16 मामलों की समीक्षा की गई, जिनमें मुख्य रूप से भूमि विवाद, भूमि अधिग्रहण, शिक्षा, जाति प्रमाण पत्र और अन्य सामाजिक विषय शामिल थे। गुमला जिले के 09 मामलों का सुनवाई के बाद निष्पादन किया गया। सुनवाई में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के मुआवजे संबंधी लंबित मामलों के निष्पादन और भुगतान की जानकारी दी गई। वहीं, भारतमाला परियोजना से प्रभावित उन परिवारों के मामलों पर विशेष संज्ञान लिया गया, जिनकी भूमि अधिग्रहण के बाद आजीविका के साधन सीमित हो गए हैं। उपायुक्त को इन मामलों की पुनः जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने और आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। शिक्षा विभाग से जुड़े भरनो प्रखंड के एक विद्यालय की शिक्षिका के उत्पीड़न और लंबित वेतन भुगतान की शिकायत पर बताया गया कि प्रशासनिक कार्रवाई की जा चुकी है और वेतन का भुगतान भी सुनिश्चित किया गया है। सिमडेगा जिले के पारिवारिक भूमि बंटवारा विवाद में पक्षकारों को विधिसम्मत प्रक्रिया से समाधान की दिशा में बढ़ने का सुझाव दिया गया, जबकि लोहरदगा के पुराने भूमि विवाद में अगली सुनवाई आवश्यक अभिलेखों और वंशावली के परीक्षण के बाद निर्धारित की गई। डॉ. आशा लकड़ा ने गुमला जिले में जनजातीय समाज की पारंपरिक पड़हा व्यवस्था और ग्राम स्तरीय सामाजिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने उपायुक्त को पाहन, पुजार, कोटवार और अन्य पारंपरिक पदों के चिह्नीकरण तथा पंचायत व्यवस्था के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने हेतु पहल करने तथा विस्तृत प्रतिवेदन आयोग को सौंपने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े मामलों का समयबद्ध निष्पादन, उनके अधिकारों का संरक्षण और विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आयोग की प्राथमिकता है, जिस हेतु अधिकारियों को संवेदनशीलता और गंभीरता से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। इस अवसर पर उपायुक्त गुमला दिलेश्वर महत्तो, पुलिस अधीक्षक गुमला हारिस बिन ज़मा, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, अपर समाहर्ता राजीव नीरज, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी महेश कुमार, डीसीएलआर राजीव कुमार, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, विभागीय पदाधिकारी एवं संबंधित कर्मी उपस्थित थे। आयोग की टीम से असिस्टेंट डायरेक्टर प्रदीप कुमार दास, इन्वेस्टिगेटर राहुल, इन्वेस्टिगेटर रिया, सलाहकार राहुल यादव, निजी सचिव कुशेश्वर साहू सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।4
- झारखंड के गुमला जिले में ग्रामीणों ने बताया है कि उनके गांव में पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है। गांव के लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए नदी के पानी पर निर्भर हैं, क्योंकि उन्हें पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है।2
- गुमला समाहरणालय सभागार में सांसद सुखदेव भगत की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की विभागवार समीक्षा की गई, जहाँ सांसद ने अधिकारियों को योजनाओं का समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। बैठक के दौरान राष्ट्रीय उच्च पथ, एनएचएआई, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास, पेयजल, नगर परिषद, पशुपालन और मत्स्य सहित अन्य विभागों की योजनाओं की प्रगति पर विस्तृत चर्चा हुई। सांसद ने विशेष रूप से सड़क सुरक्षा, ब्लैक स्पॉट में सुधार, खनन प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार सृजन, किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने और स्वयं सहायता समूहों की आजीविका बढ़ाने पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, नगर परिषद क्षेत्र में साफ-सफाई, अवैध वसूली एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, ब्लड स्टोरेज यूनिट के संचालन तथा एंबुलेंस व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी विस्तृत चर्चा की गई। सांसद ने कहा कि बेहतर समन्वय, नियमित अनुश्रवण और जवाबदेही सुनिश्चित करने से जिले के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। उनका मानना है कि इन प्रयासों से योजनाओं का लाभ जिले के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।3
- आम जनता चैनल के माध्यम से लोहरदगा जिले की सभी खबरें आम जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। चैनल का उद्देश्य है कि वे दर्शकों तक लोहरदगा से जुड़ी हर जानकारी पहुंचा सकें।1
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- गुमला जिले के डुमरी स्थित उदनी पंचायत के औरापाठ माचाडीपा गांव में आदिम जनजाति परिवार भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। शनिवार दोपहर मिली जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन द्वारा गोद लिए गए आकांक्षी प्रखंड डुमरी में लगभग तेरह लाख बयालीस हजार एक सौ चौरासी रुपये (₹13,42,184) की लागत से बनी एक सोलर आधारित पेयजल आपूर्ति योजना निर्माण के कुछ ही समय बाद बंद हो गई है, जिससे यह पूरी तरह से सफेद हाथी साबित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह योजना पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल गुमला के तहत जिला अनाबद्ध निधि से बनाई गई थी। गांव के बुजुर्ग मानु कोरवा समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि जलापूर्ति योजना शुरू होने के लगभग एक माह बाद ही पूरी तरह ठप पड़ गई। ग्रामीणों ने संवेदक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें कुएं का निर्माण सही स्थान पर न कराना, बारिश के दौरान नाली का गंदा पानी कुएं में जाने की आशंका, कुएं को पर्याप्त गहराई तक न खोदना और निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतना शामिल है। पेयजल की सुविधा ठप होने के कारण इन आदिम जनजाति परिवारों को प्रतिदिन लगभग एक किलोमीटर दूर जंगल के रास्ते से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। शाम और रात के समय पानी लाने के दौरान उन्हें जंगली जानवरों के हमले का भी खतरा बना रहता है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है। ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई करने और जल्द से जल्द गांव में स्थायी पेयजल सुविधा बहाल करने की पुरजोर मांग की है। इस दौरान दुर्गा कोरवा, अश्मिता देवी, संध्या बाई, मनु कोरवा, राकेश कोरवा, मदन कोरवा, भैरव कोरवा, आनंद कोरवा और रामदयाल कोरवा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।1