बालाघाट जिले में 'डायरिया रोको अभियान' के तहत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) जलजनित बीमारियों की रोकथाम और पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में 4 जुलाई 2026 को बालाघाट विकासखंड के ग्राम धनसुआ और ओदा में विभाग के कर्मचारियों द्वारा पेयजल स्रोतों का क्लोरीनेशन किया गया। इस दौरान हैंडपंपों और अन्य पेयजल स्रोतों में निर्धारित मानकों के अनुसार क्लोरीन का उपयोग कर पानी को सुरक्षित बनाया गया, ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके तथा डायरिया जैसी बीमारियों से बचाव किया जा सके। विभागीय कर्मचारियों ने इस अवसर पर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल के उपयोग, पानी को साफ और ढंककर रखने, घर के आसपास स्वच्छता बनाए रखने और डायरिया के लक्षण दिखने पर तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी। साथ ही, लोगों को व्यक्तिगत स्वच्छता अपनाने, भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने तथा दूषित पानी का सेवन न करने के प्रति जागरूक भी किया गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बताया कि 'डायरिया रोको अभियान' के अंतर्गत जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की नियमित निगरानी, क्लोरीनेशन और जल गुणवत्ता परीक्षण का कार्य निरंतर जारी रहेगा। इसका मुख्य उद्देश्य आमजन को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना और वर्षा ऋतु में जलजनित रोगों की प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित करना है।
बालाघाट जिले में 'डायरिया रोको अभियान' के तहत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) जलजनित बीमारियों की रोकथाम और पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में 4 जुलाई 2026 को बालाघाट विकासखंड के ग्राम धनसुआ और ओदा में विभाग के कर्मचारियों द्वारा पेयजल स्रोतों का क्लोरीनेशन किया गया। इस दौरान हैंडपंपों और अन्य पेयजल स्रोतों में निर्धारित मानकों के अनुसार क्लोरीन का उपयोग कर पानी को सुरक्षित बनाया गया, ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके तथा डायरिया जैसी बीमारियों से बचाव किया जा सके। विभागीय कर्मचारियों ने इस अवसर पर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल के उपयोग, पानी को साफ और ढंककर रखने, घर के आसपास स्वच्छता बनाए रखने और डायरिया के लक्षण दिखने पर तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी। साथ ही, लोगों को व्यक्तिगत स्वच्छता अपनाने, भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने तथा दूषित पानी का सेवन न करने के प्रति जागरूक भी किया गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बताया कि 'डायरिया रोको अभियान' के अंतर्गत जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की नियमित निगरानी, क्लोरीनेशन और जल गुणवत्ता परीक्षण का कार्य निरंतर जारी रहेगा। इसका मुख्य उद्देश्य आमजन को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना और वर्षा ऋतु में जलजनित रोगों की प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित करना है।
- मध्य प्रदेश के मोहगांव स्थित आदिवासी बहुल विकासखंड की ग्राम पंचायत सुकतरा में 93 लाख रुपये की लागत से बन रहे नए उप तहसील कार्यालय भवन के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण में शुरुआत से ही लापरवाही बरती जा रही है और फाउंडेशन में मानकों के विपरीत काली मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती पर संदेह पैदा हो गया है। जानकारी के अनुसार, पुराना उप तहसील कार्यालय जर्जर होने के बाद नए भवन की स्वीकृति मिली थी। भूमि विवाद के चलते कार्य कुछ समय तक रुका रहा, जिसके बाद ग्रामीणों की सहमति से कब्रिस्तान के समीप शासकीय भूमि पर निर्माण शुरू किया गया। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कार्य शुरू करने से पहले न तो जनप्रतिनिधियों को सूचित किया गया और न ही मौके पर निर्माण संबंधी सूचना बोर्ड लगाया गया। परियोजना की लागत, विभाग और निर्माण अवधि जैसी महत्वपूर्ण जानकारी देने वाला शिलान्यास या भूमि पूजन का शिलापट्ट भी अब तक स्थापित नहीं किया गया है। इस मामले में पीडब्ल्यूडी पीआईयू के एसडीओ दीनदयाल उपाध्याय ने स्वीकार किया कि उन्हें फाउंडेशन में कम गुणवत्ता वाली काली मिट्टी डाले जाने की जानकारी मिली है, जबकि नियमों के अनुसार वहां हार्ड मुरम और गिट्टी की चूरी का उपयोग होना चाहिए। उन्होंने बताया कि विभाग को इस स्थिति की जानकारी है। वहीं, एकेएस कंस्ट्रक्शन कंपनी, सूरत के ठेकेदार सुनील गाड़िया ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण के लिए 93 लाख रुपये स्वीकृत हैं और कार्य 1 अप्रैल से शुरू होकर जनवरी 2027 तक पूरा किया जाना है। ठेकेदार ने एसडीओ द्वारा काली मिट्टी डाले जाने की बात को गलत बताया और कहा कि शिलापट्ट निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लगाया जाएगा। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में पूरे निर्माण कार्य को संपन्न कराने की मांग की है, ताकि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।2
- मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पण किए जाने के मात्र 24 घंटे के भीतर ही ₹3.93 करोड़ की लागत से बनी एक सड़क बह गई। पहली बारिश के साथ ही सड़क का इस तरह बह जाना, इसके निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता और दावों की सच्चाई की पोल खोलता है।1
- छत्तीसगढ़ में अब कक्षा 3 की हिंदी पाठ्यपुस्तक में गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे वीर साहिबजादों, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह, की शहादत की गौरवगाथा को शामिल किया गया है। यह फैसला राज्य के शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गया है। इस महत्वपूर्ण कदम का छत्तीसगढ़ सिख समाज ने खुले दिल से स्वागत किया है और इसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की एक ऐतिहासिक पहल करार दिया है। सिख समाज का मानना है कि साहिबजादों की यह गाथा बच्चों में साहस, देशभक्ति, नैतिक मूल्यों और अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े होने की प्रेरणा जगाएगी।2
- मां नर्मदा का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। इसे देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने और सतर्क रहने की अपील की गई है, जिसमें विशेष जोर दिया गया है कि सभी की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।1
- सरकारी दफ्तरों के सामने जलभराव की गंभीर समस्या सामने आई है, जहाँ वर्ष 1914 में निर्मित तहसील कार्यालय में वर्ष 2026 तक भी उचित जल निकासी व्यवस्था का अभाव है। इस स्थिति से स्पष्ट होता है कि दशकों पुरानी यह समस्या अभी भी अनसुलझी है।1
- सिवनी पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी के निर्देशन में चलाए जा रहे "SAFE CLICK-2.0" अभियान के 11वें दिन जिले भर में रिकॉर्ड 41 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके तहत 10,278 से अधिक नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। इन कार्यक्रमों का विशेष फोकस शासकीय कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों पर रहा, जहाँ अधिकारी-कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं को डेटा सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट, और ऑनलाइन ठगी से बचाव के लिए प्रशिक्षण दिया गया और सुरक्षित रहने की शपथ दिलाई गई। जागरूकता फैलाने के लिए पुलिस टीमों ने विभिन्न स्कूलों और बैंकों का दौरा कर लोगों को सतर्क किया। साथ ही, जागरूकता रथ के माध्यम से गाँव-गाँव जाकर हेल्पलाइन नंबर 1930 का प्रचार-प्रसार किया गया। पुलिस अधीक्षक ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी के साथ भी अपनी गोपनीय बैंक डिटेल्स या ओटीपी साझा न करें।1
- राजनांदगांव के तेलीपारा आजाद चौक में आज सुबह लगभग 6 बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक गौ माता खुले नाली में गिरकर फंस गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुँचे और तुरंत उसे बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। हालाँकि, नाली के गहरी और संकरी होने के कारण स्थानीय लोग अपने स्तर पर गौ माता को निकालने में सफल नहीं हो सके। इसके बाद, गौ माता को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक मशीन मंगाई गई। मशीन की सहायता से नाली के एक हिस्से को तोड़ा गया, और काफी मशक्कत के बाद गौ माता को सफलतापूर्वक बाहर निकाला जा सका। इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में नगर निगम की व्यवस्था के प्रति गहरी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का आरोप है कि शहर में कई जगह नालियाँ खुली पड़ी हैं, जिससे आए दिन हादसों का खतरा बना रहता है। स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट किया कि यदि नगर निगम ने समय रहते नालियों की सुरक्षा, उन्हें ढकने और सफाई व्यवस्था पर ध्यान दिया होता, तो ऐसी घटना टाली जा सकती थी। लोगों ने नगर निगम से तत्काल मांग की है कि शहर के भीतर सभी खुली नालियों को जल्द से जल्द ढका जाए और ऐसे खतरनाक स्थानों की पहचान कर व्यवस्था में सुधार किया जाए। यह मांग इसलिए की गई है ताकि भविष्य में किसी पशु या व्यक्ति के साथ इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना न घटे।1
- सिवनी जिले के कान्हीवाड़ा-कलारबांकी मार्ग पर, बम्हनी के पास स्थित करीब 40 साल पुराना नहर का पुल पूरी तरह जर्जर हो चुका है। भीमगढ़ बांई तट नहर उप संभाग कान्हीवाड़ा के अंतर्गत आने वाले इस पुल की सुरक्षा दीवार (फुल वॉल) भी पूरी तरह गायब हो चुकी है, जिसके कारण इस मार्ग पर लगातार वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। इस बेहद खतरनाक स्थिति के बावजूद, जिम्मेदार विभागीय अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में भारी आक्रोश है। इस जर्जर पुल से किसी भी समय एक बड़ी अनहोनी या गंभीर हादसे की आशंका बनी हुई है, जो विभागीय लापरवाही का स्पष्ट परिणाम है।1