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राजस्थान में दो महीने के भीतर 18 गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री का असंवेदनशील रवैया सामने आया है। जब एक पत्रकार ने उनसे सवाल पूछा कि इस पर सरकार क्या कर रही है, तो स्वास्थ्य मंत्री ने भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'मिलते हैं ब्रेक के बाद!' कह दिया। यह कहने के बाद मंत्री जी भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में फूहड़ता से हँसने लगे। इस घटना पर तीव्र आक्रोश जताते हुए पूछा गया है कि ये बीजेपी वाले इतने क्रूर और बेशर्म क्यों होते हैं?
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राजस्थान में दो महीने के भीतर 18 गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री का असंवेदनशील रवैया सामने आया है। जब एक पत्रकार ने उनसे सवाल पूछा कि इस पर सरकार क्या कर रही है, तो स्वास्थ्य मंत्री ने भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'मिलते हैं ब्रेक के बाद!' कह दिया। यह कहने के बाद मंत्री जी भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में फूहड़ता से हँसने लगे। इस घटना पर तीव्र आक्रोश जताते हुए पूछा गया है कि ये बीजेपी वाले इतने क्रूर और बेशर्म क्यों होते हैं?
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- कानपुर के आईरा प्रेस क्लब में मंगलवार को आयोजित प्रेसवार्ता में पीड़ित पक्ष ने उन्नाव जनपद के अचलगंज थानाध्यक्ष व पुलिसकर्मियों पर गाली-गलौज करने और झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। प्रेसवार्ता में पीड़ित आशीष उर्फ शबनम ने बताया कि वे करीब 15 वर्षों तक अपनी गुरु कुसुम किन्नर के साथ चेले के रूप में कार्य करती थीं। जेंडर परिवर्तन के बाद वे किन्नर समाज की परंपराओं के अनुसार कार्य कर रही थीं, लेकिन करीब दो वर्ष पूर्व गुरु के निधन के बाद जब उन्होंने क्षेत्र में नेग मांगना शुरू किया, तो कमल किन्नर ने उनसे 20 लाख रुपये की मांग की। रुपये देने से इनकार करने पर उनके साथ मारपीट की गई और काम करने से रोका गया, जिसके चलते उन्हें कानपुर आकर रहना पड़ा। शबनम ने आरोप लगाया कि कमल, तानिया मिश्रा, कशिश, अविनाश, नगमा, वैशाली और सद्दाम समेत अन्य लोगों ने उनके साथ कई बार मारपीट की। इस संबंध में उन्होंने थाना अवलगढ़, पुलिस आयुक्त कानपुर नगर और मुख्यमंत्री पोर्टल सहित विभिन्न अधिकारियों को शिकायतें भी भेजी थीं। पीड़ित पक्ष के अनुसार, 29 नवंबर 2025 को उन्नाव के ईश्वरीखेड़ा क्षेत्र में एक बरात के दौरान 35 से 40 लोगों ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से उन पर हमला कर दिया, जिससे कई लोग घायल हो गए। आरोप है कि हमलावर सोने के आभूषण, नकदी और अन्य सामान भी लूट ले गए। पीड़ित पक्ष ने अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे उच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग की शरण लेंगे।1