बैतूल जिले की आमला तहसील के ग्राम नाँदपुर में सड़क और जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण एक ग्रामीण के घर में बारिश का पानी घुसने का मामला सामने आया है। पीड़ित हेमंत पटवारी ने बताया कि सड़क और नाली का निर्माण न होने की वजह से हर बारिश में उनके घर में पानी भर जाता है, जिससे परिवार को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। हेमंत पटवारी के अनुसार, उन्होंने ग्राम पंचायत नाँदपुर के सरपंच, उपसरपंच और सचिव को इस समस्या की जानकारी दी थी, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों ने उन्हें "कंप्लेंट कर दो" कहकर टाल दिया। शिकायत दर्ज कराने के दो-तीन दिन बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया। पीड़ित ने यह भी बताया कि घर में छोटे बच्चे होने के कारण उन्हें सांप-बिच्छू के डर से रात को सोना मुश्किल हो गया है। हाल ही में हुई बारिश में उनके घर में एक बार फिर पानी घुस गया, जिसके बाद नाली निर्माण के अनुरोध पर उन्हें जवाब मिला कि "कल आकर देखता हूं और अपने घर के सामने ऊंचा करवा लो।" ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क और नाली का निर्माण कराया जाता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने पंचायत से शीघ्र जल निकासी की व्यवस्था करने और स्थायी समाधान की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो किसी भी प्रकार की जनहानि के लिए पंचायत जिम्मेदार होगी।
बैतूल जिले की आमला तहसील के ग्राम नाँदपुर में सड़क और जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण एक ग्रामीण के घर में बारिश का पानी घुसने का मामला सामने आया है। पीड़ित हेमंत पटवारी ने बताया कि सड़क और नाली का निर्माण न होने की वजह से हर बारिश में उनके घर में पानी भर जाता है, जिससे परिवार को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। हेमंत पटवारी के अनुसार, उन्होंने ग्राम पंचायत नाँदपुर के सरपंच, उपसरपंच और सचिव को इस समस्या की जानकारी दी थी, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों ने उन्हें "कंप्लेंट कर दो" कहकर टाल दिया। शिकायत दर्ज कराने के दो-तीन दिन बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया। पीड़ित ने यह भी बताया कि घर में छोटे बच्चे होने के कारण उन्हें सांप-बिच्छू के डर से रात को सोना मुश्किल हो गया है। हाल ही में हुई बारिश में उनके घर में एक बार फिर पानी घुस गया, जिसके बाद नाली निर्माण के अनुरोध पर उन्हें जवाब मिला कि "कल आकर देखता हूं और अपने घर के सामने ऊंचा करवा लो।" ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क और नाली का निर्माण कराया जाता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने पंचायत से शीघ्र जल निकासी की व्यवस्था करने और स्थायी समाधान की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो किसी भी प्रकार की जनहानि के लिए पंचायत जिम्मेदार होगी।
- बैतूल जिले की आमला तहसील के ग्राम नाँदपुर में सड़क और जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण एक ग्रामीण के घर में बारिश का पानी घुसने का मामला सामने आया है। पीड़ित हेमंत पटवारी ने बताया कि सड़क और नाली का निर्माण न होने की वजह से हर बारिश में उनके घर में पानी भर जाता है, जिससे परिवार को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। हेमंत पटवारी के अनुसार, उन्होंने ग्राम पंचायत नाँदपुर के सरपंच, उपसरपंच और सचिव को इस समस्या की जानकारी दी थी, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों ने उन्हें "कंप्लेंट कर दो" कहकर टाल दिया। शिकायत दर्ज कराने के दो-तीन दिन बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया। पीड़ित ने यह भी बताया कि घर में छोटे बच्चे होने के कारण उन्हें सांप-बिच्छू के डर से रात को सोना मुश्किल हो गया है। हाल ही में हुई बारिश में उनके घर में एक बार फिर पानी घुस गया, जिसके बाद नाली निर्माण के अनुरोध पर उन्हें जवाब मिला कि "कल आकर देखता हूं और अपने घर के सामने ऊंचा करवा लो।" ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क और नाली का निर्माण कराया जाता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने पंचायत से शीघ्र जल निकासी की व्यवस्था करने और स्थायी समाधान की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो किसी भी प्रकार की जनहानि के लिए पंचायत जिम्मेदार होगी।1
- विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबीजी रामजी) योजना की शुरुआत 1 जुलाई 2026 से हो गई है। इसका राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री ग्रामीण विकास मंत्रालय नई दिल्ली श्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में आंध्र प्रदेश राज्य के तिरूपति जिले के मुक्कारवरिपल्लीर ग्राम में आयोजित किया गया। इसी क्रम में, बैतूल के जनपद पंचायत प्रभातपट्टन में विधायक मुलताई श्री चन्द्रशेखर देशमुख और अध्यक्ष जिला पंचायत श्री राजा पंवार सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में जिला स्तरीय जन सम्मेलन सह-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक श्री देशमुख ने बताया कि जहां मनरेगा में 100 दिन का रोजगार मिलता था, वहीं वीबीजी रामजी योजना के तहत अब 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम पंचायतें अपने कार्यों का निर्धारण स्वयं कर सकेंगी, जिससे वे अपनी परिस्थितियों के अनुसार प्राथमिकताएं तय कर सकें। इस योजना से श्रमिकों को समय पर मजदूरी का भुगतान मिलेगा, जिससे वे अधिक संख्या में काम पर आ सकेंगे। इसके अतिरिक्त, जल संरक्षण और ग्रामीण अधोसंरचना विकास के कार्यों को प्राथमिकता मिलने से गांवों में अधिक विकास कार्य हो सकेंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजा पंवार ने कहा कि वीबीजी रामजी योजना के तहत मजदूरी दर बढ़ाकर ₹300 कर दी गई है। ग्राम सभा के माध्यम से योजनाओं के बनने से गांव अपने विकास के लिए आत्मनिर्भर बनेंगे और अंतिम छोर पर स्थित गांवों तथा वंचित वर्गों को भी लाभ मिल पाएगा। उन्होंने बताया कि काम मांगने के बाद समय सीमा में रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता भी प्राप्त होगा। केन्द्र और राज्य सरकार की 60:40 की भागीदारी से गांवों को अधिक राशि मिलेगी, जिससे अधिक विकास कार्य किए जा सकेंगे। श्री पंवार ने इस योजना को केवल एक योजना के रूप में न देखकर, बल्कि 'सेवा भाव' के साथ क्रियान्वित करने पर जोर दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण के उद्देश्यों, ग्रामीण रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन तथा ग्राम स्तर पर विकास गतिविधियों को गति प्रदान करने संबंधी विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, आर्थिक सशक्तिकरण तथा आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री हंसराज धुर्वे, जि.पं.सदस्य श्रीमती सरस्वती नागले, श्रीमती उर्मिला गव्हाडे, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सोनाली विनोद पटेल, ज.पं. उपाध्यक्ष श्री देवीराम बनखेडे, अति.मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती इंदिरा मेहतो, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सुश्री आंचल पवार, कार्यपालन यंत्री ग्रायांसे श्री धाकरे सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।2
- मध्यप्रदेश सरकार द्वारा समाज में जल संरक्षण और संवर्धन के प्रति व्यापक जनजागरण के उद्देश्य से चलाए गए 'जल गंगा संवर्धन अभियान' का समापन हो गया है। यह अभियान पूरे प्रदेश में संचालित किया गया था। अभियान का समापन मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के आठनेर विकासखंड के निर्देशन में, नगर परिषद आठनेर के सहयोग और जन कल्याण संस्था आठनेर के संयोजन से हुआ। आठनेर नगर के ताप्ती सरोवर स्थित जलकुंड पर आयोजित इस समापन कार्यक्रम में सामूहिक श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता कार्यक्रम चलाया गया और जल संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया गया।1
- मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की प्रभात पट्टन जनपद पंचायत के ग्राम बघोड़ा में दो वर्ष पूर्व निर्मित एक उप स्वास्थ्य केंद्र लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। इस स्थिति के कारण स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है, और वे इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं।1
- आमला जनपद की ग्राम पंचायत बोरदही में लगभग ₹15 लाख की लागत से निर्मित हुआ एक घाट अपनी पहली ही तेज बारिश की परीक्षा में असफल साबित हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों तक लोगों की सुविधा के लिए बनाए जा रहे इस घाट का निर्माण पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया, जहाँ नदी के तेज बहाव से घाट के दोनों ओर की मिट्टी बह गई। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, घाट के निर्माण में तकनीकी मानकों की घोर अनदेखी की गई। आरोप है कि बिना मजबूत बेस तैयार किए, सीधे रेत पर ही सीमेंट-कंक्रीट की ढलाई कर दी गई, न तो निर्माण स्थल की भूमि को कंप्रेसर से दबाया गया और न ही रोलर चलाकर उसे मजबूत किया गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण निर्धारित मापदंडों के अनुसार हुआ होता तो पहली ही बारिश में ऐसी स्थिति नहीं बनती। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर समय पर निगरानी न करने और गुणवत्ता से समझौता करने का आरोप लगाया है, जिससे निर्माण कार्य में शुरुआत से ही अनियमितताएं हुईं। अब यह सवाल उठ रहा है कि ₹15 लाख की सरकारी राशि आखिर किस गुणवत्ता के निर्माण पर खर्च की गई। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी और निष्पक्ष गुणवत्ता जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अनियमितता साबित होने पर संबंधित सरपंच, सचिव, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की भी मांग की है, ताकि भविष्य में सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके और ग्रामीणों को सुरक्षित एवं टिकाऊ घाट मिल सके। जनता यह भी जानना चाहती है कि इस पहली बारिश में हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी तय होगी और क्या प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करेगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।4