आमला जनपद की ग्राम पंचायत बोरदही में लगभग ₹15 लाख की लागत से निर्मित हुआ एक घाट अपनी पहली ही तेज बारिश की परीक्षा में असफल साबित हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों तक लोगों की सुविधा के लिए बनाए जा रहे इस घाट का निर्माण पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया, जहाँ नदी के तेज बहाव से घाट के दोनों ओर की मिट्टी बह गई। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, घाट के निर्माण में तकनीकी मानकों की घोर अनदेखी की गई। आरोप है कि बिना मजबूत बेस तैयार किए, सीधे रेत पर ही सीमेंट-कंक्रीट की ढलाई कर दी गई, न तो निर्माण स्थल की भूमि को कंप्रेसर से दबाया गया और न ही रोलर चलाकर उसे मजबूत किया गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण निर्धारित मापदंडों के अनुसार हुआ होता तो पहली ही बारिश में ऐसी स्थिति नहीं बनती। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर समय पर निगरानी न करने और गुणवत्ता से समझौता करने का आरोप लगाया है, जिससे निर्माण कार्य में शुरुआत से ही अनियमितताएं हुईं। अब यह सवाल उठ रहा है कि ₹15 लाख की सरकारी राशि आखिर किस गुणवत्ता के निर्माण पर खर्च की गई। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी और निष्पक्ष गुणवत्ता जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अनियमितता साबित होने पर संबंधित सरपंच, सचिव, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की भी मांग की है, ताकि भविष्य में सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके और ग्रामीणों को सुरक्षित एवं टिकाऊ घाट मिल सके। जनता यह भी जानना चाहती है कि इस पहली बारिश में हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी तय होगी और क्या प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करेगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
आमला जनपद की ग्राम पंचायत बोरदही में लगभग ₹15 लाख की लागत से निर्मित हुआ एक घाट अपनी पहली ही तेज बारिश की परीक्षा में असफल साबित हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों तक लोगों की सुविधा के लिए बनाए जा रहे इस घाट का निर्माण पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया, जहाँ नदी के तेज बहाव से घाट के दोनों ओर की मिट्टी बह गई। इस घटना ने निर्माण कार्य
की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, घाट के निर्माण में तकनीकी मानकों की घोर अनदेखी की गई। आरोप है कि बिना मजबूत बेस तैयार किए, सीधे रेत पर ही सीमेंट-कंक्रीट की ढलाई कर दी गई, न तो निर्माण स्थल की भूमि को कंप्रेसर से दबाया गया और न ही रोलर चलाकर उसे मजबूत किया गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण निर्धारित मापदंडों के अनुसार हुआ होता तो पहली
ही बारिश में ऐसी स्थिति नहीं बनती। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर समय पर निगरानी न करने और गुणवत्ता से समझौता करने का आरोप लगाया है, जिससे निर्माण कार्य में शुरुआत से ही अनियमितताएं हुईं। अब यह सवाल उठ रहा है कि ₹15 लाख की सरकारी राशि आखिर किस गुणवत्ता के निर्माण पर खर्च की गई। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी और निष्पक्ष गुणवत्ता जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अनियमितता
साबित होने पर संबंधित सरपंच, सचिव, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की भी मांग की है, ताकि भविष्य में सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके और ग्रामीणों को सुरक्षित एवं टिकाऊ घाट मिल सके। जनता यह भी जानना चाहती है कि इस पहली बारिश में हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी तय होगी और क्या प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करेगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
- मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की प्रभात पट्टन जनपद पंचायत के ग्राम बघोड़ा में दो वर्ष पूर्व निर्मित एक उप स्वास्थ्य केंद्र लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। इस स्थिति के कारण स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है, और वे इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं।1
- मध्यप्रदेश सरकार द्वारा समाज में जल संरक्षण और संवर्धन के प्रति व्यापक जनजागरण के उद्देश्य से चलाए गए 'जल गंगा संवर्धन अभियान' का समापन हो गया है। यह अभियान पूरे प्रदेश में संचालित किया गया था। अभियान का समापन मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के आठनेर विकासखंड के निर्देशन में, नगर परिषद आठनेर के सहयोग और जन कल्याण संस्था आठनेर के संयोजन से हुआ। आठनेर नगर के ताप्ती सरोवर स्थित जलकुंड पर आयोजित इस समापन कार्यक्रम में सामूहिक श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता कार्यक्रम चलाया गया और जल संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया गया।1
- पांढुर्णा के ग्राम खेड़ीकला में आवागमन की समस्या विकराल रूप ले चुकी है, जिससे ग्रामीण घंटों तक जूझ रहे हैं। एक ओर गाँव के पास स्थित रेलवे अंडरपास में भीषण जलभराव के कारण आना-जाना पूरी तरह बाधित है, वहीं दूसरी ओर रेलवे फाटक का अक्सर घंटों तक बंद रहना लोगों की मुसीबतें और बढ़ा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, अंडरपास में पानी भरा होने से वहाँ से निकलना बेहद जोखिमभरा हो गया है। इस मार्ग का कोई अन्य विकल्प उपलब्ध न होने के कारण ग्रामीण मजबूरन तिगांव बायपास मार्ग का लंबा चक्कर काटने पर विवश हैं, जिससे उनके समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। अंडरपास की स्थिति इतनी गंभीर है कि पानी निकालने के लिए इंजन और मोटर का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। इसके अतिरिक्त, रेल फाटक के बार-बार और लंबे समय तक बंद रहने से स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और मरीजों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुँचने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। हाईवे तक पहुँचने का यह एकमात्र रास्ता होने के बावजूद प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीण काफी आक्रोशित हैं। खेड़ीकला के निवासियों ने प्रशासन और रेलवे विभाग से तत्काल मांग की है कि रेलवे अंडरपास की जल निकासी की समस्या को तुरंत दुरुस्त किया जाए और रेल फाटक पर लगने वाले जाम से निपटने के लिए उचित प्रबंध किए जाएं, ताकि आम जनता को इस परेशानी से जल्द से जल्द राहत मिल सके।1
- छिपन्या-पिपरिया मार्ग पर स्थित भैंसाईं नदी में उफान आ गया है, जिसके कारण एक दर्जन से भी अधिक गांवों का संपर्क टूट गया है। इस स्थिति के चलते ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- आमला-बोरदेही क्षेत्र में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है, जिसके चलते लगातार हो रही बारिश से कई नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। भैसाई नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत ग्राम नरेरा और मुवारिया के कोटवारों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया है। प्रशासन द्वारा नरेरा, मुवारिया, छिपनिया और पिपरिया जोड़ सहित अन्य जलभराव वाले क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। लोगों से अपील की गई है कि वे तेज बहाव के दौरान नदी-नालों को पार करने का प्रयास न करें और अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। स्थानीय लोगों से भी आग्रह किया गया है कि किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।1
- पांढुर्णा के रामाकोना स्थित वार्ड नंबर-12 में नाली और पाइपलाइन से जुड़ी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत रामाकोना के सचिव और उपसरपंच को एक ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, जिसके कारण वार्डवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन के माध्यम से पंचायत प्रशासन को यह स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि दो दिनों के भीतर इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो समस्त वार्डवासी पानी की घघरी लेकर ग्राम पंचायत कार्यालय के सामने आंदोलन करेंगे। इस दौरान चंद्रशेखर गुरुदेव, सुनील तिवारी, उमाजी पोपटे, संदीप लोणारे, हरिभाऊ भाले, राजेश वाघमारे, सुखदेव कायदा, बादल वाघमारे, सहदेव डोंगरे, आशा भाले, संगीता कायदा, शकील शाह, दीपा वाघमारे, डॉ. सुधीर विश्वास सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण उपस्थित थे।3
- आमला पुलिस ने खेती से जुड़े एक विवाद में हुई हत्या के एक सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है। इस मामले में एक बेटे ने अपनी मां के साथ मिलकर अपने पिता की गला घोंटकर हत्या कर दी। अपराध को छिपाने के लिए हत्यारों ने पिता के लापता होने की झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, आमला पुलिस की गहन जांच में यही झूठी गुमशुदगी की रिपोर्ट उनके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गई और इस पूरे हत्याकांड का राज खुल गया।1