ग्राम प्रधान बनकर अवैध लगान वसूली के आरोप पर सीओ को जांच का आदेश, जल छाजन योजना में 15 लाख से अधिक की कथित फर्जी निकासी की शिकायत पर डीडीसी करेंगे जांच जामताड़ा:जिले में आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय प्रकोष्ठ में डीसी आलोक कुमार की अध्यक्षता में जनता दरबार आयोजित किया गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे दर्जनों ग्रामीणों और फरियादियों ने जमीन, ग्राम प्रधान, विकास योजनाओं, वित्तीय अनियमितता समेत कई मामलों से जुड़ी शिकायतें उपायुक्त के समक्ष रखीं। डीसी ने प्रत्येक मामले को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना और संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करते हुए शिकायतों का शीघ्र निष्पादन करने का निर्देश दिया। डीसी ने अधिकारियों को अधिकांश मामलों का एक सप्ताह के भीतर निष्पादन कर इसकी जानकारी डीसी कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा। वहीं, जिन मामलों का तत्काल समाधान संभव था, उन्हें मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। जनता दरबार में नारायणपुर प्रखंड के सबज्जाकनाली गांव से पहुंचे ग्रामीणों ने एक व्यक्ति पर खुद को गांव का ग्राम प्रधान बताकर ग्रामीणों और रैयतों को गुमराह करने तथा अवैध रूप से लगान वसूली करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने डीसी को दिए आवेदन में बताया कि मौजा सज्जाकनाली के रिकॉर्डेड ग्राम प्रधान मनोहर नारायण सिंह की कई वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद से गांव में ग्राम प्रधान की नियुक्ति नहीं हुई है। आरोप है कि चामगड़ा निवासी शिवलाल किस्कू स्वयं को सबज्जाकनाली नंबर-1 का रेवेन्यू ग्राम प्रधान बताकर ग्रामीणों और रैयतों को गुमराह कर रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति प्रधानी जोत की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है तथा विरोध करने पर ग्रामीणों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की। इस पर डीसी आलोक कुमार ने कहा कि नारायणपुर प्रखंड में कुछ ग्राम प्रधान के पद रिक्त हैं। उन्होंने नारायणपुर के अंचलाधिकारी को पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। डीसी ने स्पष्ट किया कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, फतेहपुर प्रखंड के बांदरनाचा गांव से पहुंचे जल छाजन समिति के अध्यक्ष, सदस्यों और ग्रामीणों ने भी गंभीर शिकायत उपायुक्त के समक्ष रखी। समिति की ओर से एक स्वयंसेवी संस्था पर योजना के संचालन में मनमानी, वित्तीय अनियमितता और समिति के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया। आवेदन में दावा किया गया कि NABARD समर्थित जल छाजन योजना में अब तक 15 लाख रुपये से अधिक की कथित अवैध एवं फर्जी निकासी की गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि स्थानीय ग्रामीणों द्वारा कार्य किए जाने के बावजूद भुगतान स्थानीय मजदूरों या आपूर्तिकर्ताओं के खातों में नहीं किया गया, बल्कि देवघर जिले के कथित फर्जी खाताधारकों के खातों में राशि भेजी गई। शिकायत में कुछ खाताधारकों और एक हार्डवेयर प्रतिष्ठान के नाम भी दिए गए हैं। साथ ही सीमेंट, बालू, गिट्टी आदि सामग्री स्थानीय स्तर से लिए जाने के बावजूद भुगतान अन्य जिले के कथित वेंडर के खाते में किए जाने का आरोप लगाया गया है। समिति के सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि योजना स्थल पर आवश्यक सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया। इसके अलावा डोभा, तालाब और मेड़ निर्माण जैसे तकनीकी कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों और विशेषज्ञों की देखरेख का पालन नहीं किए जाने की शिकायत की गई। जल छाजन समिति के सदस्यों ने शिकायत में आरोप लगाया कि समिति का बैठक रजिस्टर, चेकबुक और बैंक पासबुक भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। उनका कहना है कि समिति के अध्यक्ष-सचिव की सहमति और आमसभा के प्रस्ताव के बिना ही योजना से जुड़े कई कार्य कराए जा रहे हैं। समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि खर्च का हिसाब और बैंक रिकॉर्ड मांगने पर संस्था के पदाधिकारियों की ओर से उन्हें धमकी दी जाती है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की विशेष ऑडिट कराने, संदिग्ध भुगतान पर रोक लगाने, दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और समिति के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त आलोक कुमार ने उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को जांच का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जल छाजन योजना में बिना काम किए किसी भी प्रकार की अवैध निकासी सामने आती है तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनता दरबार के दौरान डीसी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि आम लोगों को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि नियमानुसार किए जा सकने वाले कार्यों को बिना अनावश्यक विलंब के पूरा किया जाए और प्रशासन की संवेदनशीलता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो। उन्होंने अधिकारियों से शिकायतों पर केवल खानापूर्ति नहीं, बल्कि मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा। गौरतलब है कि जामताड़ा में जनता दरबार प्रत्येक मंगलवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित किया जाता है। इसमें आम लोग सीधे उपायुक्त के समक्ष अपनी समस्याएं और शिकायतें रख सकते हैं।
ग्राम प्रधान बनकर अवैध लगान वसूली के आरोप पर सीओ को जांच का आदेश, जल छाजन योजना में 15 लाख से अधिक की कथित फर्जी निकासी की शिकायत पर डीडीसी करेंगे जांच जामताड़ा:जिले में आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय प्रकोष्ठ में डीसी आलोक कुमार की अध्यक्षता में जनता दरबार आयोजित किया गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे दर्जनों ग्रामीणों और फरियादियों ने जमीन, ग्राम प्रधान, विकास योजनाओं, वित्तीय अनियमितता समेत कई मामलों से जुड़ी शिकायतें उपायुक्त के समक्ष रखीं। डीसी ने प्रत्येक मामले को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना और संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करते हुए शिकायतों का शीघ्र निष्पादन करने का निर्देश दिया। डीसी ने अधिकारियों को अधिकांश मामलों का एक सप्ताह के भीतर निष्पादन कर इसकी जानकारी डीसी कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा। वहीं, जिन मामलों का तत्काल समाधान संभव था, उन्हें मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। जनता दरबार में नारायणपुर प्रखंड के सबज्जाकनाली गांव से पहुंचे ग्रामीणों ने एक व्यक्ति पर खुद को गांव का ग्राम प्रधान बताकर ग्रामीणों और रैयतों को गुमराह करने तथा अवैध रूप से लगान वसूली करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने डीसी को दिए आवेदन में बताया कि मौजा सज्जाकनाली के रिकॉर्डेड ग्राम प्रधान मनोहर नारायण सिंह की कई वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद से गांव में ग्राम प्रधान की नियुक्ति नहीं हुई है। आरोप है कि चामगड़ा निवासी शिवलाल किस्कू स्वयं को सबज्जाकनाली नंबर-1 का रेवेन्यू ग्राम प्रधान बताकर ग्रामीणों और रैयतों को गुमराह कर रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति प्रधानी जोत की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है तथा विरोध करने पर ग्रामीणों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की। इस पर डीसी आलोक कुमार ने कहा कि नारायणपुर प्रखंड में कुछ ग्राम प्रधान के पद रिक्त हैं। उन्होंने नारायणपुर के अंचलाधिकारी को पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। डीसी ने स्पष्ट किया कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, फतेहपुर प्रखंड के बांदरनाचा गांव से पहुंचे जल छाजन समिति के अध्यक्ष, सदस्यों और ग्रामीणों ने भी गंभीर शिकायत उपायुक्त के समक्ष रखी। समिति की ओर से एक स्वयंसेवी संस्था पर योजना के संचालन में मनमानी, वित्तीय अनियमितता और समिति के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया। आवेदन में दावा किया गया कि NABARD
समर्थित जल छाजन योजना में अब तक 15 लाख रुपये से अधिक की कथित अवैध एवं फर्जी निकासी की गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि स्थानीय ग्रामीणों द्वारा कार्य किए जाने के बावजूद भुगतान स्थानीय मजदूरों या आपूर्तिकर्ताओं के खातों में नहीं किया गया, बल्कि देवघर जिले के कथित फर्जी खाताधारकों के खातों में राशि भेजी गई। शिकायत में कुछ खाताधारकों और एक हार्डवेयर प्रतिष्ठान के नाम भी दिए गए हैं। साथ ही सीमेंट, बालू, गिट्टी आदि सामग्री स्थानीय स्तर से लिए जाने के बावजूद भुगतान अन्य जिले के कथित वेंडर के खाते में किए जाने का आरोप लगाया गया है। समिति के सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि योजना स्थल पर आवश्यक सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया। इसके अलावा डोभा, तालाब और मेड़ निर्माण जैसे तकनीकी कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों और विशेषज्ञों की देखरेख का पालन नहीं किए जाने की शिकायत की गई। जल छाजन समिति के सदस्यों ने शिकायत में आरोप लगाया कि समिति का बैठक रजिस्टर, चेकबुक और बैंक पासबुक भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। उनका कहना है कि समिति के अध्यक्ष-सचिव की सहमति और आमसभा के प्रस्ताव के बिना ही योजना से जुड़े कई कार्य कराए जा रहे हैं। समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि खर्च का हिसाब और बैंक रिकॉर्ड मांगने पर संस्था के पदाधिकारियों की ओर से उन्हें धमकी दी जाती है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की विशेष ऑडिट कराने, संदिग्ध भुगतान पर रोक लगाने, दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और समिति के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त आलोक कुमार ने उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को जांच का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जल छाजन योजना में बिना काम किए किसी भी प्रकार की अवैध निकासी सामने आती है तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनता दरबार के दौरान डीसी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि आम लोगों को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि नियमानुसार किए जा सकने वाले कार्यों को बिना अनावश्यक विलंब के पूरा किया जाए और प्रशासन की संवेदनशीलता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो। उन्होंने अधिकारियों से शिकायतों पर केवल खानापूर्ति नहीं, बल्कि मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा। गौरतलब है कि जामताड़ा में जनता दरबार प्रत्येक मंगलवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित किया जाता है। इसमें आम लोग सीधे उपायुक्त के समक्ष अपनी समस्याएं और शिकायतें रख सकते हैं।
- जामताड़ा में SIR की समीक्षा, सीईओ ने दिए पारदर्शी एवं निष्पक्ष पुनरीक्षण के निर्देश जामताड़ा। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 को लेकर मंगलवार देर शाम परिसदन सभागार, जामताड़ा में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड के. रवि कुमार ने की। उन्होंने जिले के दोनों विधानसभा क्षेत्र 08-नाला और 09-जामताड़ा के ईआरओ एवं एईआरओ से पुनरीक्षण कार्य की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त आलोक कुमार भी मौजूद रहे। बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दावा एवं आपत्ति से संबंधित मामलों में समय पर नोटिस तामिला कराते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में दर्ज प्रत्येक व्यक्ति की पात्रता का सत्यापन जरूरी है। यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित मतदाता भारत का नागरिक हो, 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का हो और संबंधित मतदान केंद्र क्षेत्र का निवासी हो। उन्होंने कहा कि एक भी पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं छूटना चाहिए और किसी विदेशी नागरिक का नाम सूची में शामिल नहीं होना चाहिए। के. रवि कुमार ने आवेदन, दावा-आपत्ति, नोटिस एवं उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की गहन जांच करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले का निष्पादन तथ्यों और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद स्पष्ट एवं सकारण आदेश के माध्यम से किया जाए। सुनवाई के दौरान संबंधित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर भी दिया जाए। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने नजरी नक्शे के सही सत्यापन पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने ईआरओ को नजरी नक्शे के साथ गृह संख्या और नोशनल नंबर का सावधानीपूर्वक सत्यापन करने का निर्देश दिया, ताकि एक ही परिवार के सदस्य अलग-अलग मतदान केंद्रों की मतदाता सूची में विभाजित न हों। उन्होंने कहा कि SIR का उद्देश्य शुद्ध, त्रुटिरहित और समावेशी मतदाता सूची तैयार करना है। मतदाताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए और किसी भी शिकायत या समस्या का त्वरित एवं नियमानुसार समाधान किया जाए। बैठक के दौरान उपायुक्त आलोक कुमार ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार को शॉल ओढ़ाकर एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया। मौके पर ईआरओ 08 नाला सह अपर समाहर्ता पूनम कच्छप, ईआरओ 09 जामताड़ा सह अनुमंडल पदाधिकारी अनंत कुमार, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सत्यप्रकाश, जिला पंचायत राज पदाधिकारी पंकज कुमार रवि, उप निर्वाचन पदाधिकारी कयूम अंसारी सहित अन्य पदाधिकारी एवं सभी प्रखंडों के एईआरओ उपस्थित रहे।1
- जामताड़ा समाचार:24 घंटे से रुक-रुककर बारिश, जनजीवन अस्त-व्यस्त; धान किसानों के लिए बारिश बनी वरदान3
- कर्माटांड़ शिव मंदिर में धूमधाम से मनाया गया सावन का तीसरा सोमवार, भजन-कीर्तन और महाआरती के साथ हुआ प्रसादी का वितरण 1
- झीलिया डायवर्सन फिर बारिश में बहा, 50 हजार लोगों पर पेयजल संकट; ग्रामीणों ने सड़क जाम कर जताया आक्रोश* लोकेशन : निरस : कुमारधुबी ओपी क्षेत्र के शंकर टॉकीज के समीप झीलिया पुल के पास बना डायवर्सन एक बार फिर मूसलाधार बारिश की भेंट चढ़ गया। डायवर्सन के क्षतिग्रस्त होने के साथ ही जलापूर्ति पाइपलाइन भी बह गई, जिससे कुमारधुबी, शिब्लीबाड़ी, कालीमंडा, चिरकुंडा समेत आसपास के इलाकों में पेयजल संकट गहरा गया है। इससे करीब 50 हजार की आबादी प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति पाइप टूटने के कारण इलाके में पानी की समस्या बनी हुई थी। सोमवार को जिला परिषद सदस्य गुलाम कुरैशी की पहल पर उनके निजी खर्च से पाइपलाइन की मरम्मत कराई गई थी। हालांकि, सोमवार रात हुई तेज बारिश ने डायवर्सन सड़क के साथ-साथ मरम्मत की गई पाइपलाइन को भी बहा दिया। इसके बाद क्षेत्र में जलापूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई। डायवर्सन क्षतिग्रस्त होने से मैथन-कुमारधुबी और चिरकुंडा के बीच आवागमन भी प्रभावित हुआ है। ऑटो और टोटो चालकों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने बार-बार डायवर्सन और जलापूर्ति पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के लिए PHED, PWD विभाग और निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तीन बार डायवर्सन क्षतिग्रस्त होने के बावजूद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर पहल नहीं की गई। उनका यह भी कहना है कि स्थानीय स्तर के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना जरूरी नहीं समझा। लगातार बढ़ती परेशानी के बीच मंगलवार को बारिश के बावजूद ग्रामीण सड़क पर उतर आए। जिला परिषद सदस्य गुलाम कुरैशी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने शिब्लीबाड़ी पुराने चेकपोस्ट के समीप सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। सड़क जाम की सूचना मिलने पर PHED विभाग के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि एक दिन के भीतर जलापूर्ति पाइपलाइन की मरम्मत कर पेयजल आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम समाप्त कर दिया। वहीं, माले नेता नागेंद्र कुमार ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर यातायात और जलापूर्ति की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो भाकपा माले के बैनर तले जोरदार आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों की नजर विभाग के आश्वासन पर है। अब देखना होगा कि एक दिन में जलापूर्ति बहाल होती है या फिर 50 हजार लोगों को पेयजल संकट से राहत के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।5
- गोबिंदपुर थाना क्षेत्र के विद्यापति निवासी एक 40 वर्षीय महिला ने अपने गोतनी पर अन्य लोगों के साथ मिलकर उनके परिवार के साथ मारपीट करने का लगाया आरोप1
- सच बोलने की कीमत? या गरीब का हक मांगने का इनाम? जब मेरा पूरा परिवार बाहर था, तब मेरे घर पर हमला किया गया। गनीमत यह रही कि उस वक्त घर में कोई नहीं था और कोई अनहोनी नहीं हुई, लेकिन इस कायरतापूर्ण हमले के बाद से मेरी मां और भाई गहरे खौफ में हैं। आखिर मेरा कसूर क्या था? मेरा कसूर सिर्फ इतना था कि मैंने दुमदुम गाँव की एक असहाय वृद्ध महिला, पार्वती पुजहरनि (जो आदिम जनजाति से आती हैं), की आवाज उठाई। दो साल पहले उन्हें 'आवास योजना' का लाभ मिला था, लेकिन एक बिचौलिया उनका पूरा पैसा हड़पकर बैठ गया। आज वो बुजुर्ग महिला अपने ही हक की छत के लिए बिचौलियों और अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जब मैंने उस बुजुर्ग मां के हक के लिए आवाज उठाई, तो बिचौलियों ने अपनी औकात दिखाते हुए मेरे घर पर हमला करवा दिया। यह हमला सिर्फ मेरे घर पर नहीं, बल्कि हर उस इंसान की आवाज पर है जो जुल्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होता है। अगर हमलावरों को लगता है कि वो इस तरह की गीदड़ भभकियों से मुझे डरा देंगे, तो यह उनकी भूल है। गरीबों का हक मारने वाले बिचौलियों के खिलाफ यह लड़ाई जारी रहेगी। प्रशासन से मेरी मांग है कि इस हमले के दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और पार्वती पुजहरनि जी को उनका हक जल्द से जल्द दिलाया जाए। #Justice #StandAgainstCorruption #VoiceForUnvoiced #Jharkhand #AwaasYojna #Kumar #thekblive DC Dumka Dumka live News.1
- छाताबाद भू-धंसान पर कोयला भवन की वार्ता रही बेनतीजा पीड़ितों का दर्द और गुस्सा फिर आया सामने मुआवजा-पुनर्वास की मांग पर शहाबुद्दीन का आंदोलन तेज हक की लड़ाई में बोले—पीछे हटने का सवाल ही नहीं1
- हिंगलो नदी का जलस्तर बढ़ने से गढ़शिमला काली मंदिर में घुसा पानी, पूजा-पाठ प्रभावित जामताड़ा:लगातार हो रही बारिश के कारण कुंडहित प्रखंड क्षेत्र के गढ़शिमला गांव में हिंगलो नदी का जलस्तर बढ़ गया है। नदी का पानी बढ़ने से गांव स्थित प्रसिद्ध गढ़शिमला काली मंदिर परिसर में पानी प्रवेश कर गया है। मंदिर परिसर में पानी जमा होने से पुजारियों और श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि लगातार बारिश के बाद हिंगलो नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी मंदिर की ओर पहुंच गया। पानी मंदिर परिसर में जमा होने के साथ ही मंदिर के अंदर भी प्रवेश कर गया, जिससे प्रतिदिन होने वाली पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान प्रभावित हो रहे हैं। पुजारियों को पूजा कराने के साथ-साथ मंदिर की साफ-सफाई में भी काफी दिक्कत हो रही है। वहीं, मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भी जलजमाव के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। मंदिर के आसपास लगातार पानी जमा रहने से आवागमन भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में हिंगलो नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद मंदिर परिसर में पानी घुसने की समस्या सामने आती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मंदिर परिसर में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कराने तथा भविष्य में नदी का पानी मंदिर में प्रवेश न करे, इसके लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर गांव के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में बरसात के दिनों में बार-बार पानी घुसने की समस्या का स्थायी समाधान होना जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं और पुजारियों को परेशानी न हो तथा नियमित पूजा-पाठ सुचारु रूप से जारी रह सके।2