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डीग में सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल! अमर दीप सेन डीग किन्नर समाज की बेबी मौसी ने किया विधि-विधान से होली पूजन। समाज को दिया भाईचारे और एकता का बड़ा संदेश। जहाँ परंपरा और आधुनिक सोच का एक अद्भुत संगम देखने को मिला है। यहाँ किन्नर समाज से जुड़ी बेबी मौसी ने दशकों पुरानी रूढ़ियों को तोड़ते हुए इस वर्ष पहली बार पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होली पूजन किया है।" ये तस्वीरें गवाह हैं बदलते भारत की और बदलते समाज की। डीग में बेबी मौसी ने न केवल मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की, बल्कि समाज में सुख-शांति और आपसी प्रेम का संकल्प भी दोहराया। इस खास आयोजन में इलाके के गणमान्य नागरिक और स्थानीय लोग भी साक्षी बने।" होली सिर्फ गुलाल उड़ाने का नाम नहीं है, ये दिलों के मैल को धोने का त्योहार है। हमने आज ये पूजा इसलिए की ताकि हमारे समाज में कोई भेदभाव न रहे। हम सब एक हैं और प्रेम ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है।" स्थानीय लोगों ने बेबी मौसी की इस पहल को 'सामाजिक क्रांति' करार दिया है। लोगों का कहना है कि जब दुआ देने वाले हाथ खुद ईश्वर की आराधना में जुड़ते हैं, तो वह दृश्य पूरे समाज को प्रेरणा देता है।" वाकई, डीग से आई ये तस्वीरें सुकून देने वाली हैं। बेबी मौसी की इस पहल ने ये साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो, तो त्योहारों के रंग और भी गहरे हो जाते हैं।

20 hrs ago
user_Amardeep sain ripoter
Amardeep sain ripoter
Advertising Photographer डीग, भरतपुर, राजस्थान•
20 hrs ago

डीग में सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल! अमर दीप सेन डीग किन्नर समाज की बेबी मौसी ने किया विधि-विधान से होली पूजन। समाज को दिया भाईचारे और एकता का बड़ा संदेश। जहाँ परंपरा और आधुनिक सोच का एक अद्भुत संगम देखने को मिला है। यहाँ किन्नर समाज से जुड़ी बेबी मौसी ने दशकों पुरानी रूढ़ियों को तोड़ते हुए इस वर्ष पहली बार

पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होली पूजन किया है।" ये तस्वीरें गवाह हैं बदलते भारत की और बदलते समाज की। डीग में बेबी मौसी ने न केवल मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की, बल्कि समाज में सुख-शांति और आपसी प्रेम का संकल्प भी दोहराया। इस खास आयोजन में इलाके के गणमान्य नागरिक और स्थानीय लोग भी साक्षी बने।" होली सिर्फ

गुलाल उड़ाने का नाम नहीं है, ये दिलों के मैल को धोने का त्योहार है। हमने आज ये पूजा इसलिए की ताकि हमारे समाज में कोई भेदभाव न रहे। हम सब एक हैं और प्रेम ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है।" स्थानीय लोगों ने बेबी मौसी की इस पहल को 'सामाजिक क्रांति' करार दिया है। लोगों का कहना है कि

जब दुआ देने वाले हाथ खुद ईश्वर की आराधना में जुड़ते हैं, तो वह दृश्य पूरे समाज को प्रेरणा देता है।" वाकई, डीग से आई ये तस्वीरें सुकून देने वाली हैं। बेबी मौसी की इस पहल ने ये साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो, तो त्योहारों के रंग और भी गहरे हो जाते हैं।

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  • डीग में सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल! अमर दीप सेन डीग किन्नर समाज की बेबी मौसी ने किया विधि-विधान से होली पूजन। समाज को दिया भाईचारे और एकता का बड़ा संदेश। जहाँ परंपरा और आधुनिक सोच का एक अद्भुत संगम देखने को मिला है। यहाँ किन्नर समाज से जुड़ी बेबी मौसी ने दशकों पुरानी रूढ़ियों को तोड़ते हुए इस वर्ष पहली बार पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होली पूजन किया है।" ये तस्वीरें गवाह हैं बदलते भारत की और बदलते समाज की। डीग में बेबी मौसी ने न केवल मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की, बल्कि समाज में सुख-शांति और आपसी प्रेम का संकल्प भी दोहराया। इस खास आयोजन में इलाके के गणमान्य नागरिक और स्थानीय लोग भी साक्षी बने।" होली सिर्फ गुलाल उड़ाने का नाम नहीं है, ये दिलों के मैल को धोने का त्योहार है। हमने आज ये पूजा इसलिए की ताकि हमारे समाज में कोई भेदभाव न रहे। हम सब एक हैं और प्रेम ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है।" स्थानीय लोगों ने बेबी मौसी की इस पहल को 'सामाजिक क्रांति' करार दिया है। लोगों का कहना है कि जब दुआ देने वाले हाथ खुद ईश्वर की आराधना में जुड़ते हैं, तो वह दृश्य पूरे समाज को प्रेरणा देता है।" वाकई, डीग से आई ये तस्वीरें सुकून देने वाली हैं। बेबी मौसी की इस पहल ने ये साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो, तो त्योहारों के रंग और भी गहरे हो जाते हैं।
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    डीग में सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल!
अमर दीप सेन डीग किन्नर समाज की बेबी मौसी ने किया विधि-विधान से होली पूजन।
समाज को दिया भाईचारे और एकता का बड़ा संदेश।
जहाँ परंपरा और आधुनिक सोच का एक अद्भुत संगम देखने को मिला है। यहाँ किन्नर समाज से जुड़ी बेबी मौसी ने दशकों पुरानी रूढ़ियों को तोड़ते हुए इस वर्ष पहली बार पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होली पूजन किया है।"
ये तस्वीरें गवाह हैं बदलते भारत की और बदलते समाज की। डीग में बेबी मौसी ने न केवल मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की, बल्कि समाज में सुख-शांति और आपसी प्रेम का संकल्प भी दोहराया। इस खास आयोजन में इलाके के गणमान्य नागरिक और स्थानीय लोग भी साक्षी बने।"
होली सिर्फ गुलाल उड़ाने का नाम नहीं है, ये दिलों के मैल को धोने का त्योहार है। हमने आज ये पूजा इसलिए की ताकि हमारे समाज में कोई भेदभाव न रहे। हम सब एक हैं और प्रेम ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है।"
स्थानीय लोगों ने बेबी मौसी की इस पहल को 'सामाजिक क्रांति' करार दिया है। लोगों का कहना है कि जब दुआ देने वाले हाथ खुद ईश्वर की आराधना में जुड़ते हैं, तो वह दृश्य पूरे समाज को प्रेरणा देता है।"
वाकई, डीग से आई ये तस्वीरें सुकून देने वाली हैं। बेबी मौसी की इस पहल ने ये साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो, तो त्योहारों के रंग और भी गहरे हो जाते हैं।
    user_Amardeep sain ripoter
    Amardeep sain ripoter
    Advertising Photographer डीग, भरतपुर, राजस्थान•
    20 hrs ago
  • आज 04/03/2026 का पंचांग नदबई भरतपुर से लाइव।
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    आज 04/03/2026 का पंचांग 
नदबई भरतपुर से लाइव।
    user_मोरध्वज सिंह (आयुर्वैदिक सलाहकार)
    मोरध्वज सिंह (आयुर्वैदिक सलाहकार)
    Speech Therapist नदबई, भरतपुर, राजस्थान•
    50 min ago
  • rto adhikari ko suspend karo
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    rto adhikari ko suspend karo
    user_Pawan Kumar
    Pawan Kumar
    Voice of people मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by ATV INDIA HD (Ajeet chauhan)
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    Post by ATV INDIA HD  (Ajeet chauhan)
    user_ATV INDIA HD  (Ajeet chauhan)
    ATV INDIA HD (Ajeet chauhan)
    Local News Reporter मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • मथुरा जनपद के कोसीकलां के राठौर नगर में एक युवक ने लगाई फांसी जिसके कारण आसपास फैल गई सनसनी मौके पर पहुंची इलाका पुलिस
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    मथुरा जनपद के कोसीकलां के राठौर नगर में एक युवक ने लगाई फांसी जिसके कारण आसपास फैल गई सनसनी मौके पर पहुंची इलाका पुलिस
    user_Lokesh Garg
    Lokesh Garg
    छाता, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • मथुरा थाना कोसीकला क्षेत्र के अंतर्गत गांव फलेंन में विगत वर्षों की बात इस साल भी पंडा होली की ऊंची ऊंची लपटों के बीच से गुजरता दिखाई दिया। बताया जाता है भक्त प्रहलाद की शक्ति समाहित होती है तब आज के दरिया को पार किया जाता है पुजारी के बाहर निकलते ही लोगों के मुंह से वक्त प्रहलाद के जय जयकारे उड़ घोषित किए गए
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    मथुरा थाना कोसीकला क्षेत्र के अंतर्गत गांव फलेंन में विगत वर्षों की बात इस साल भी पंडा होली की ऊंची ऊंची लपटों के बीच से गुजरता दिखाई दिया। बताया जाता है भक्त प्रहलाद की शक्ति समाहित होती है तब आज के दरिया को पार किया जाता है पुजारी के बाहर निकलते ही लोगों के मुंह से वक्त प्रहलाद के जय जयकारे उड़ घोषित किए गए
    user_Murli Thakur Reporter
    Murli Thakur Reporter
    Court reporter मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • मथुरा, 3 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित फालेन गांव, जो भक्त प्रह्लाद की नगरी के रूप में जाना जाता है, ने एक बार फिर अपनी अनोखी होलिका दहन परंपरा को जीवंत किया. यहां पंडा समाज के सदस्य संजू पंडा ने धधकते अंगारों के बीच से नंगे पांव गुजरकर हजारों श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर दिया. यह परंपरा कथित तौर पर 5300 वर्ष पुरानी है और प्रह्लाद-होलिका की कथा से जुड़ी हुई है. सोमवार देर रात फालेन गांव में होलिका दहन का आयोजन हुआ. होलिका की विशाल संरचना लगभग 20 फीट ऊंची और 30 फीट लंबी थी, जिसे गांववासियों ने मिलकर तैयार किया था. शुभ मुहूर्त में संजू पंडा ने प्रह्लाद मंदिर में हवन किया, प्रह्लाद कुंड में स्नान किया और फिर आग के बीच से सुरक्षित निकल आए. इस दौरान उनके शरीर पर कोई खरोंच तक नहीं आई. हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रह्लाद के जयकारे लगाए और ढोल-नगाड़ों के साथ उत्सव मनाया। फालेन गांव मथुरा शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर छाता तहसील में स्थित है. यहां मान्यता है कि यह भक्त प्रह्लाद का जन्मस्थान है, जहां होलिका ने प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की थी लेकिन खुद जल गईं. इस घटना की स्मृति में हर वर्ष पंडा समाज का एक सदस्य इस रिवाज को निभाता है. संजू पंडा पिछले दो वर्षों से यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, इससे पहले उनके पिता और भाई यह करते थे. परंपरा निभाने के लिए संजू पंडा ने 45 दिनों की कठोर तपस्या की, जिसमें एक समय का फलाहार और मंदिर परिसर में एकांतवास शामिल था. तपस्या के दौरान किसी से मिलना वर्जित होता है. होलिका दहन से पहले उनकी बहन दूध की धार से रास्ता बनाती हैं, फिर वे अंगारों से गुजरते हैं. इस आयोजन को देखने के लिए भारत भर से और विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं. जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि कोई दुर्घटना न हो. इस वर्ष भी सबकुछ सुचारू रूप से संपन्न हुआ. यह परंपरा ब्रज क्षेत्र की होली की विविधता को दर्शाती है, जहां लठमार होली, फूलों की होली और अन्य रिवाज भी प्रचलित हैं. फालेन का पंडा न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है.
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    मथुरा, 3 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित फालेन गांव, जो भक्त प्रह्लाद की नगरी के रूप में जाना जाता है, ने एक बार फिर अपनी अनोखी होलिका दहन परंपरा को जीवंत किया. यहां पंडा समाज के सदस्य संजू पंडा ने धधकते अंगारों के बीच से नंगे पांव गुजरकर हजारों श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर दिया. यह परंपरा कथित तौर पर 5300 वर्ष पुरानी है और प्रह्लाद-होलिका की कथा से जुड़ी हुई है.
सोमवार देर रात फालेन गांव में होलिका दहन का आयोजन हुआ. होलिका की विशाल संरचना लगभग 20 फीट ऊंची और 30 फीट लंबी थी, जिसे गांववासियों ने मिलकर तैयार किया था. शुभ मुहूर्त में संजू पंडा ने प्रह्लाद मंदिर में हवन किया, प्रह्लाद कुंड में स्नान किया और फिर आग के बीच से सुरक्षित निकल आए. इस दौरान उनके शरीर पर कोई खरोंच तक नहीं आई. हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रह्लाद के जयकारे लगाए और ढोल-नगाड़ों के साथ उत्सव मनाया।
फालेन गांव मथुरा शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर छाता तहसील में स्थित है. यहां मान्यता है कि यह भक्त प्रह्लाद का जन्मस्थान है, जहां होलिका ने प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की थी लेकिन खुद जल गईं. इस घटना की स्मृति में हर वर्ष पंडा समाज का एक सदस्य इस रिवाज को निभाता है. संजू पंडा पिछले दो वर्षों से यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, इससे पहले उनके पिता और भाई यह करते थे.
परंपरा निभाने के लिए संजू पंडा ने 45 दिनों की कठोर तपस्या की, जिसमें एक समय का फलाहार और मंदिर परिसर में एकांतवास शामिल था. तपस्या के दौरान किसी से मिलना वर्जित होता है. होलिका दहन से पहले उनकी बहन दूध की धार से रास्ता बनाती हैं, फिर वे अंगारों से गुजरते हैं.
इस आयोजन को देखने के लिए भारत भर से और विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं. जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि कोई दुर्घटना न हो. इस वर्ष भी सबकुछ सुचारू रूप से संपन्न हुआ.
यह परंपरा ब्रज क्षेत्र की होली की विविधता को दर्शाती है, जहां लठमार होली, फूलों की होली और अन्य रिवाज भी प्रचलित हैं. फालेन का पंडा न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है.
    user_राहुल गौड़ पत्रकार
    राहुल गौड़ पत्रकार
    Local News Reporter मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • डीग जिले से बड़ी खबर पुलिस उपाधीक्षक सीताराम बैरवा ने होली को त्यौहार को प्रेम पूर्वक व शांति एवं भाईचारा से मनाए होली के पावन पर्व को शराब पीकर व उत्पाद मचाने वाले को नहीं बक्शा जायेगा होली के त्यौहार को देखते हुए पुलिस ने प्रमुख जगहों पर पुलिस के जवान लगाए गए हैं मनचले शराब पीकर उत्पाद मचाने वालों के खिलाफ सख्त सख्त कार्रवाई की जाएगी एलर्ट हुए शहर कोतवाल रामनरेश मीणा सब इंसपेक्टर अमरसिह मंगतु राम पैनी नजर बनाये हुए है और शराबियों एवं महिलाओं के साथ छेड़ खानी पर किसी को किसी भी हालत में नहीं बक्शा जायेगा वाइट--- सी ओ सीताराम बैरवा
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    डीग जिले से बड़ी खबर 
पुलिस उपाधीक्षक सीताराम बैरवा ने होली को त्यौहार को प्रेम पूर्वक व शांति एवं भाईचारा से मनाए होली के पावन पर्व को 
शराब पीकर व उत्पाद मचाने वाले को नहीं बक्शा जायेगा 
होली के त्यौहार को देखते हुए पुलिस ने प्रमुख जगहों पर पुलिस के जवान लगाए गए हैं 
मनचले शराब पीकर उत्पाद   मचाने वालों के खिलाफ सख्त सख्त कार्रवाई  की जाएगी एलर्ट हुए शहर कोतवाल रामनरेश मीणा सब इंसपेक्टर अमरसिह मंगतु राम पैनी नजर बनाये हुए है और  शराबियों एवं महिलाओं के साथ छेड़ खानी पर किसी को किसी भी हालत में नहीं बक्शा जायेगा
वाइट--- सी ओ सीताराम बैरवा
    user_Amardeep sain ripoter
    Amardeep sain ripoter
    Advertising Photographer डीग, भरतपुर, राजस्थान•
    23 hrs ago
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