देवली उपखंड क्षेत्र के गांवड़ी पंचायत के दुर्गापुरा ढाणी निवासी धनराज बैरवा की दो सप्ताह तक चली जिंदगी की जंग जयपुर के एसएमएस अस्पताल की बर्न यूनिट में रविवार सुबह समाप्त हो गई। गत 2 जून को विद्युत विभाग की घोर लापरवाही के कारण 11 हजार वोल्ट की चपेट में आए धनराज के निधन की खबर ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है, और उनके गांव व परिजनों में मातम पसर गया है। यह दर्दनाक घटना 2 जून को हुई थी, जब लाइनमैन जयशेखर के बुलावे पर धनराज बिजली के खंभे पर चढ़ा था। उसे यह भरोसा दिलाया गया था कि विद्युत सप्लाई बंद है, लेकिन जीएसएस की लापरवाही के चलते अचानक सप्लाई चालू हो गई, जिससे धनराज बुरी तरह झुलस गया। जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उसके दोनों हाथ काटने का कठिन निर्णय लेना पड़ा था। धनराज अपने माता-पिता का एकमात्र सहारा था, जिस पर तीन छोटी बेटियों और गर्भवती पत्नी के भरण-पोषण का भार था। प्रशासन ने घटना के बाद मुआवजे और दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन भी दिया था। हालांकि लोगों ने धनराज की मदद के लिए आर्थिक सहायता भी एकत्र की थी, और विद्युत निगम के अभियंताओं ने भी आर्थिक सहयोग दिया था, लेकिन इतने प्रयासों के बावजूद भी उसका जीवन नहीं बचाया जा सका। घर के कमाऊ सदस्य को खोने के बाद अब उस असहाय परिवार के सामने केवल पेट पालने का ही नहीं, बल्कि अपने भविष्य का अस्तित्व बचाने का भी गहरा संकट खड़ा हो गया है।
देवली उपखंड क्षेत्र के गांवड़ी पंचायत के दुर्गापुरा ढाणी निवासी धनराज बैरवा की दो सप्ताह तक चली जिंदगी की जंग जयपुर के एसएमएस अस्पताल की बर्न यूनिट में रविवार सुबह समाप्त हो गई। गत 2 जून को विद्युत विभाग की घोर लापरवाही के कारण 11 हजार वोल्ट की चपेट में आए धनराज के निधन की खबर ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है, और उनके गांव व परिजनों में मातम पसर गया है। यह दर्दनाक घटना 2 जून को हुई थी,
जब लाइनमैन जयशेखर के बुलावे पर धनराज बिजली के खंभे पर चढ़ा था। उसे यह भरोसा दिलाया गया था कि विद्युत सप्लाई बंद है, लेकिन जीएसएस की लापरवाही के चलते अचानक सप्लाई चालू हो गई, जिससे धनराज बुरी तरह झुलस गया। जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उसके दोनों हाथ काटने का कठिन निर्णय लेना पड़ा था। धनराज अपने माता-पिता का एकमात्र सहारा था, जिस पर तीन छोटी बेटियों और गर्भवती पत्नी के भरण-पोषण का भार था। प्रशासन ने घटना के बाद
मुआवजे और दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन भी दिया था। हालांकि लोगों ने धनराज की मदद के लिए आर्थिक सहायता भी एकत्र की थी, और विद्युत निगम के अभियंताओं ने भी आर्थिक सहयोग दिया था, लेकिन इतने प्रयासों के बावजूद भी उसका जीवन नहीं बचाया जा सका। घर के कमाऊ सदस्य को खोने के बाद अब उस असहाय परिवार के सामने केवल पेट पालने का ही नहीं, बल्कि अपने भविष्य का अस्तित्व बचाने का भी गहरा संकट खड़ा हो गया है।
- देवली उपखंड क्षेत्र के गांवड़ी पंचायत के दुर्गापुरा ढाणी निवासी धनराज बैरवा की दो सप्ताह तक चली जिंदगी की जंग जयपुर के एसएमएस अस्पताल की बर्न यूनिट में रविवार सुबह समाप्त हो गई। गत 2 जून को विद्युत विभाग की घोर लापरवाही के कारण 11 हजार वोल्ट की चपेट में आए धनराज के निधन की खबर ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है, और उनके गांव व परिजनों में मातम पसर गया है। यह दर्दनाक घटना 2 जून को हुई थी, जब लाइनमैन जयशेखर के बुलावे पर धनराज बिजली के खंभे पर चढ़ा था। उसे यह भरोसा दिलाया गया था कि विद्युत सप्लाई बंद है, लेकिन जीएसएस की लापरवाही के चलते अचानक सप्लाई चालू हो गई, जिससे धनराज बुरी तरह झुलस गया। जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उसके दोनों हाथ काटने का कठिन निर्णय लेना पड़ा था। धनराज अपने माता-पिता का एकमात्र सहारा था, जिस पर तीन छोटी बेटियों और गर्भवती पत्नी के भरण-पोषण का भार था। प्रशासन ने घटना के बाद मुआवजे और दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन भी दिया था। हालांकि लोगों ने धनराज की मदद के लिए आर्थिक सहायता भी एकत्र की थी, और विद्युत निगम के अभियंताओं ने भी आर्थिक सहयोग दिया था, लेकिन इतने प्रयासों के बावजूद भी उसका जीवन नहीं बचाया जा सका। घर के कमाऊ सदस्य को खोने के बाद अब उस असहाय परिवार के सामने केवल पेट पालने का ही नहीं, बल्कि अपने भविष्य का अस्तित्व बचाने का भी गहरा संकट खड़ा हो गया है।3
- टोंक जिले के देवली उपखंड के रघुनाथपुरा गांव में दुर्गापुरा ढाणी निवासी धनराज बैरवा की मौत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों का धैर्य जवाब दे गया है। जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उपचार के दौरान रविवार सुबह धनराज की मृत्यु की खबर मिलने के बाद से क्षेत्र में गहरा मातम छा गया और साथ ही सिस्टम के प्रति भारी रोष फैल गया। धनराज की मौत विद्युत निगम कर्मचारियों की कथित लापरवाही का परिणाम बताई जा रही है। बताया गया है कि गत 2 जून को एक लाइनमैन के कहने पर धनराज बिजली के खंभे पर मरम्मत का काम करने चढ़ा था, उसे भरोसा दिलाया गया था कि सप्लाई बंद है। हालांकि, अचानक जीएसएस से बिजली चालू कर दी गई, जिससे धनराज 11 हजार वोल्ट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया था। इस हादसे में उसने अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे और तभी से वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था। रविवार सुबह करीब 9 बजे उसकी स्थिति बिगड़ने से उसकी असामयिक मृत्यु हो गई, जिससे उसका परिवार बेसहारा हो गया। पीड़ित परिवार आरोप लगा रहा है कि लाइनमैन की जल्दबाजी और लापरवाही ने उनके हंसते-खेलते परिवार का सहारा छीन लिया। न्याय की मांग को लेकर अंबेडकर विचार मंच के बैनर तले सैंकड़ों कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने देवली के डाक बंगला परिसर में एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। मंच के अध्यक्ष पांचूलाल मीणा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने डाक बंगले से नारेबाजी करते हुए उपखंड कार्यालय के पास रोडवेज बस स्टैंड के प्रवेश द्वार को जाम कर दिया। इस दौरान सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने विद्युत निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर पहुंचे डीएसपी हेमराज चौधरी, प्रशिक्षु आरपीएस कुसुम मीणा और थाना प्रभारी दौलतराम गुर्जर सहित पुलिस बल ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। डीएसपी हेमराज ने बताया कि विरोध का यह तरीका जनहित में नहीं है और आमजन को इससे असुविधा हो रही है। इस पर प्रदर्शनकारी कुछ समय के लिए सड़क से हट गए, लेकिन उनकी नारेबाजी जारी रही। मुकेश मीणा ने स्पष्ट किया कि धनराज के साथ अन्याय हुआ है और उसकी भरपाई के लिए वे मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग पर अड़े हुए हैं। बारिश के बावजूद परिजन और ग्रामीण सड़क पर धरना देकर बैठे रहे। प्रशासन के आश्वासनों के बावजूद अब तक कोई ठोस परिणाम न निकलने से आक्रोशित ग्रामीण अब संघर्ष के मूड में हैं और अपनी मांगों को पूरा करने के लिए दृढ़ हैं। धरना प्रदर्शन के लिए उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर एक टेंट भी लगा दिया गया है। अंबेडकर विचार मंच ने धनराज बैरवा को न्याय दिलाने के लिए 15 जून सोमवार को देवली बंद का आह्वान किया है और इस बंद को सफल बनाने के लिए व्यापार महासंघ से भी समर्थन मांगा है।1
- मुख्यमंत्री भजनलाल की पहल पर, जयपुर नगर-निगम ने आगामी निर्जला एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं को दान-पुण्य करने के लिए विशेष सुविधाएँ प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत, निगम शहर में सौ से अधिक स्थानों पर जगह, टेंट और कुर्सियों की व्यवस्था करेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए, इन सुविधाओं के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे निर्जला एकादशी पर इस पहल का लाभ उठा सकें।1
- उत्तराखंड स्पोर्ट्स साइंस कॉन्क्लेव-2026 में खेल आधारित आर्थिक विकास और युवाओं के लिए रोजगार सृजन के नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। उत्तराखंड राज्य खेल विश्वविद्यालय द्वारा हल्द्वानी के गैलापार स्थित आईजी खेल विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस राष्ट्रीय आयोजन का शुभारंभ कुलपति प्रो. अमित सिंहा ने किया। उन्होंने बताया कि राज्य के प्रत्येक जिले में 'खेल हब परियोजना' क्रियान्वित की जा रही है, तथा विश्वविद्यालय में जुलाई से प्रवेश और अगस्त से पाठ्यक्रम शुरू होंगे। कॉन्क्लेव में कोटा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. अनुकृति शर्मा की 'स्पोर्ट्स मैनेजमेंट फॉर स्पोर्ट्स-लेड इकोनॉमिक डेवलपमेंट एंड यूथ जॉब अपॉर्च्युनिटीज इन उत्तराखंड' विषय पर प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। डॉ. शर्मा ने तर्क दिया कि उत्तराखंड अपनी अद्वितीय भौगोलिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विशेषताओं के कारण देश का एक अग्रणी स्पोर्ट्स इकोनॉमी हब बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने रेखांकित किया कि हिमालयी क्षेत्र साहसिक, शीतकालीन और पर्वतीय खेलों के लिए विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करता है, वहीं राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से राज्य की खेल अधोसंरचना मजबूत हुई है। इसके अतिरिक्त, ऋषिकेश और हरिद्वार ने योग एवं वेलनेस पर्यटन में वैश्विक पहचान स्थापित की है। प्रो. अनुकृति शर्मा ने स्पोर्ट्स मैनेजमेंट को खेल संगठनों, प्रतियोगिताओं, खिलाड़ियों और खेल व्यवसाय के वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़ा एक बहुआयामी अनुशासन बताया। उन्होंने स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर पर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया, जिससे खेल आयोजन प्रबंधक, स्पोर्ट्स मार्केटिंग विशेषज्ञ, खेल विश्लेषक, स्टेडियम प्रबंधक, खेल पत्रकार और एडवेंचर टूरिज्म प्रबंधक जैसे विभिन्न व्यवसायों में युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर खुलेंगे। डॉ. शर्मा ने स्पोर्ट्स इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना पर भी जोर दिया, ताकि युवाओं को स्टार्टअप, नवाचार और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर मिलें। इस दिशा में खेलो इंडिया, राष्ट्रीय खेल विकास कोष, स्टार्टअप इंडिया और उत्तराखंड स्टार्टअप नीति-2023 जैसी केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को सहायक बताया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की उपकुलपति डॉ. रशिका सिद्दीकी ने बताया कि खेल विश्वविद्यालय और फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PFI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिससे दोनों संस्थानों के छात्र खेल संसाधनों का परस्पर उपयोग कर सकेंगे। कॉन्क्लेव में प्रस्तुत कार्ययोजना के अनुसार, वर्ष 2026-27 से स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कार्यक्रम आरंभ करने, उद्योग एवं सरकारी संस्थाओं के साथ समझौते करने तथा आगामी वर्षों में शोध एवं नवाचार केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। वक्ताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि विश्वविद्यालयों, सरकार और उद्योग जगत के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड को देश की 'स्पोर्ट्स कैपिटल' के रूप में स्थापित किया जा सकता है। कार्यक्रम में एनएसीआईटी के सलाहकार डॉ. अरुण कुमार, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंहा, अभिषेक इस्तार, गौतम विर्क और डी टाउन रोबोटिक्स के अविनाश चंद पाल ने भी अपने विचार साझा किए।4
- राजस्थान के पोकरण में एक मालगाड़ी बीच ट्रैक पर रुक गई, जिससे एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई। हालांकि, लोको पायलट ने तुरंत कार्यवाही करते हुए एक बड़े संकट को टाल दिया और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया।1
- मध्य प्रदेश के मुरैना में मोबाइल ब्लास्ट की अफवाह फैलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। इस घटनाक्रम के बीच चार लोगों की दर्दनाक मौत होने की खबर सामने आई है, जिसने हालात को और चिंताजनक बना दिया है।1