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सदन में अपने ही उठा रहे हैं सवाल, सुनिए इसपर प्रशांत किशोर का बयान!! सदन में अपने ही उठा रहे हैं सवाल, सुनिए इसपर प्रशांत किशोर का बयान!!
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सदन में अपने ही उठा रहे हैं सवाल, सुनिए इसपर प्रशांत किशोर का बयान!! सदन में अपने ही उठा रहे हैं सवाल, सुनिए इसपर प्रशांत किशोर का बयान!!
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- भारत नेपाल सीमा पर संचालित संस्था स्वरांजलि सेवा संस्थान1
- 🟥 BREAKING NEWS | National 24 News Channel LIVE 📍 #Patna | #Bihar 🗓️ ग्राउंड रिपोर्ट – PART 3 🎙️ Anchor: Suraj Prasad 🎙️ Co-Anchor: Sujata Mehara 🎙️ Special Correspondent: Supriya Shah 👥 Team: National 24 News TV --- न्यायालय की स्पष्ट चेतावनी हालिया सुनवाईयों में Patna High Court ने दोहराया हैं, कि— • आपराधिक कानून का उपयोग व्यक्तिगत दुश्मनी या दबाव बनाने के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता। • यदि विवाद मूलतः सिविल प्रकृति (जमीन, लेन-देन, पारिवारिक विवाद) का है, तो उसे आपराधिक मुकदमे का रूप देना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जा सकता है। • धारा 482 CrPC के तहत हाई कोर्ट के पास FIR को Quash (रद्द) करने की संवैधानिक शक्ति है, यदि प्रथम दृष्टया मामला दुर्भावनापूर्ण या कानूनी रूप से टिकाऊ न हो। --- सर्वोच्च न्यायालय का दृष्टिकोण देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने भी विभिन्न फैसलों में कहा हैं कि— • झूठे और दुर्भावनापूर्ण मामलों से न्यायालयों का समय व्यर्थ नहीं किया जा सकता। • किसी निर्दोष व्यक्ति को गलत मुकदमे में फँसाना उसके मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21 – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन हैं। • यदि शिकायत जानबूझकर झूठी या प्रतिशोध की भावना से की गई पाई जाती है, तो अदालतें भारी लागत (Heavy Cost) और दंड लगा सकती हैं। --- कानूनी परिणाम क्या हो सकते हैं? निम्न प्रावधानों के तहत कार्रवाई संभव है: 1. IPC धारा 182 – लोक सेवक को झूठी सूचना देना 2. IPC धारा 211 – झूठा आपराधिक आरोप लगाना 3. CrPC धारा 250 – निराधार आरोप पर मुआवज़ा देने का आदेश • दोष सिद्ध होने पर जेल और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान हैं। • अदालतें मामले की प्रकृति और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देती हैं। --- तथ्यात्मक स्थिति (Official Clarification) • इस विषय पर कोई नया सार्वभौमिक कानून या आदेश जारी नहीं हुआ है। • परंतु उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। • हर मामला तथ्यों, साक्ष्यों और न्यायिक विवेक के आधार पर अलग-अलग तय किया जाता हैं। National 24 News Channel की विशेष अपील: कानून न्याय का माध्यम हैं,प्रतिशोध का नहीं। झूठी FIR दर्ज कराना न केवल नैतिक रूप से गलत हैं,बल्कि गंभीर कानूनी परिणाम भी ला सकता हैं।1
- क्या आपके साथ भी हुआ है1
- जिले के निचलौल थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब युवती अपने प्रेमी से शादी की जिद में मोबाइल टावर पर चढ़ गई। युवती के इस कदम से तीन गांवों के लोग और पुलिस प्रशासन घंटों तक परेशान रहे। बताया जा रहा है कि युवती का पड़ोसी गांव के एक युवक से पिछले कई वर्षों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे, लेकिन युवक के परिजनों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी। इसकी जानकारी मिलते ही युवती ने भावावेश में आकर अपनी जान जोखिम में डालने का फैसला कर लिया। शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे युवती घर से निकल गई थी। उसके पिता के अनुसार वह सहरी बनाकर घर से निकली थी। सुबह लगभग 7 बजे ग्रामीणों ने युवती को मोबाइल टावर पर चढ़ा देखा तो तत्काल 112 नंबर पर सूचना दी। सूचना मिलते ही पीआरबी 6326 और थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस और परिजनों ने काफी देर तक युवती को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी रही। इस बीच पता चला कि उसका प्रेमी नेपाल चला गया है। पुलिस ने तत्काल संपर्क कर युवक को बुलवाया। युवक के मौके पर पहुंचने और शादी का भरोसा देने के बाद युवती टावर से नीचे उतरने को तैयार हुई। करीब तीन घंटे चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया और युवती को सकुशल घर भेज दिया। घटना को लेकर क्षेत्र में1
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