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मोहन बड़ोदिया तहसील क्षेत्र के ग्राम निपानिया, करजू, सरसोदिया, बिरागांव सहित अन्य गावों से निकली कावड़ यात्रा
Rajesh jamliya
मोहन बड़ोदिया तहसील क्षेत्र के ग्राम निपानिया, करजू, सरसोदिया, बिरागांव सहित अन्य गावों से निकली कावड़ यात्रा
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- मोहन बड़ोदिया तहसील क्षेत्र के ग्राम निपानिया, करजू, सरसोदिया, बिरागांव सहित अन्य गावों से निकली कावड़ यात्रा1
- मंदिर के नाम से धंधा चल रहा है श्रद्धालु हो रहे है परेशान उज्जैन के प्रसिद्ध नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी के अवसर पर दर्शन व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की भारी लापरवाही को लेकर जनता में తీవ్ర आक्रोश देखा जा रहा है। नागपंचमी के पावन पर्व पर महाकाल परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया, लेकिन कुप्रबंध के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मुख्य शिकायतें और लापरवाही के बिंदु: लंबी कतारें और घंटों इंतजार: श्रद्धालुओं का कहना है कि नागपंचमी की रात 12 बजे से ही लोग लंबी लाइनों में खड़े थे, लेकिन सुबह 9 बजे तक भी कई लोगों को दर्शन नहीं मिल पाए। पुलिस-प्रशासन की अनुपस्थिति: कतारों में खड़े बुजुर्गों, महिलाओं और बहनों की सुध लेने वाला लाइन में एक भी पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था। जनता घंटियों और धूप में अपनी बारी का इंतजार करती रही, जबकि प्रशासनिक मदद नदारद रही। VIP कल्चर और भेदभाव: आम जनता घंटों लाइन में भूखे-प्यासे खड़ी रही, जबकि पुलिस प्रशासन द्वारा वीआईपी (VIP) लोगों को सीधे और सुगम दर्शन कराए जा रहे थे। आरोप है कि पुलिस और होमगार्ड के जवान अपनी मनमानी कर रहे हैं और आम जनता की तकलीफों से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। पैसे लेकर प्रवेश के आरोप: जनता में इस बात को लेकर भी भारी गुस्सा है कि वीआईपी दर्शन के नाम पर कथित तौर पर 300 रुपए जैसी बातें सामने आ रही हैं, जिससे गरीब और आम जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। आम आदमी के पास इन व्यवस्थाओं के लिए पैसे न होने के कारण उन्हें दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। प्रशासन और एसपी उज्जैन की कार्यप्रणाली पर सवाल: जनता का आरोप है कि उज्जैन एसपी और स्थानीय प्रशासन की इस घोर लापरवाही के कारण हालात बेकाबू हुए। आम जनता की चीख-पुकार और समस्याओं की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे लोगों में व्यवस्था के प्रति गहरी नाराजगी है। नोट: नागपंचमी जैसे बड़े पर्व पर जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं, वहां इस तरह की अव्यवस्था और वीआईपी संस्कृति का हावी होना प्रशासन की बड़ी चूक को दर्शाता है। जनता की मांग है कि इस मामले की उच्च स्तर पर जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों व लापरवाह पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।1
- विश्व आदिवासी दिवस पर भिलाला समाज ने निकाली भव्य रैली बड़ी संख्या में समाजजन हुए शामिल, शहर के प्रमुख मार्गों से निकली रैली विश्व आदिवासी दिवस पर भिलाला समाज ने निकाली भव्य रैली बड़ी संख्या में समाजजन हुए शामिल, शहर के प्रमुख मार्गों से निकली रैली1
- एसपी ने 15 अगस्त पर मोहन बड़ोदिया थाना के पुलिसकर्मी को सम्मानित कर प्रशस्ति पत्र वितरित किए 📡 *_साधना प्लस न्यूज_* *एसपी ने 15 अगस्त पर मोहन बड़ोदिया थाना के पुलिसकर्मी को सम्मानित कर प्रशस्ति पत्र वितरित किए* *गोविंद कुम्भकार की रिपोर्ट* 📱 *9584097180* 📡📡 *साधना प्लस नेशनल न्यूज चैनल* _टाटा प्ले के चैनल नंबर 1138_ और _जियो टीवी_ सहित विभिन्न केबल टीवी पर उपलब्ध है ।1
- राजगढ़ जमीन विवाद: राजगढ़ में 50 करोड़ की जमीन को लेकर विवाद, मूंदड़ा परिवार पर कब्जे का आरोप; किसान ने पेश किए दस्तावेज राजगढ़ ..मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में करीब 50 करोड़ रुपये कीमत की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय किसान देवकरण गुर्जर ने मूंदड़ा परिवार पर उसकी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। किसान का दावा है कि वर्ष 2003 में जमीन की रजिस्ट्री उसके नाम हुई थी, लेकिन इसके बाद से ही मूंदड़ा परिवार ने जमीन पर कब्जा कर लिया। आरोप है कि जमीन पर होटल, कोठी और दुकानों का निर्माण भी कराया गया। किसान के नाम दर्ज है जमीन, टैक्स भी जमा करने का दावा देवकरण गुर्जर का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री अब भी उसके नाम दर्ज है और वह नियमित रूप से संपत्ति कर जमा कर रहा है। ऐसे में दस्तावेजों में स्वामित्व और जमीन पर वास्तविक कब्जे को लेकर विवाद बना हुआ है। मामले में पटवारी ने भी उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जमीन देवकरण गुर्जर के नाम दर्ज होने की बात कही है। पटवारी के अनुसार, जमीन का प्रॉपर्टी टैक्स भी किसान द्वारा जमा किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड में जमीन का नक्शा नहीं होने की बात भी सामने आई है। जमीन पर निर्माण को लेकर भी सवाल किसान का आरोप है कि जिस जमीन का मालिकाना हक दस्तावेजों में उसके नाम है, उसी पर होटल, कोठी और दुकानें बना दी गई हैं। उसका कहना है कि वह कागजों में जमीन का मालिक है और टैक्स भी चुका रहा है, लेकिन जमीन का वास्तविक कब्जा उसके पास नहीं है। ऐसे में पूरे मामले में रजिस्ट्री, राजस्व रिकॉर्ड, संपत्ति कर के दस्तावेज और मौके की स्थिति का मिलान करना अहम हो गया है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है और मौके पर निर्माण किस आधार पर किया गया। मूंदड़ा परिवार से जुड़े पुराने मामले की भी चर्चा मूंदड़ा परिवार का नाम इससे पहले श्योपुर में सामने आए एक अलग मामले को लेकर भी चर्चा में रहा था। हाईवे किनारे एक बच्ची मिलने के मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बच्ची को छह दिन की उम्र में करीब एक लाख रुपये में खरीदे जाने का दावा किया था। इस मामले में राजगढ़ के आकाश मूंदड़ा और उनकी पत्नी कृतिका मूंदड़ा समेत छह लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई थी। हालांकि, यह मामला मौजूदा जमीन विवाद से अलग है और दोनों मामलों के तथ्यों को अलग-अलग जांच के आधार पर देखा जाना जरूरी है। आनंद मूंदड़ा ने आरोपों को किया खारिज जमीन विवाद को लेकर आनंद मूंदड़ा ने किसान के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यदि जमीन पर अवैध कब्जा है तो सरकार और प्रशासन कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि वे वर्षों से जमीन पर हैं और उनके पास भी जमीन से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। जब उनसे इन दस्तावेजों के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी गई, तो फोन पर बातचीत बीच में समाप्त हो गई। इसके बाद संपर्क करने की कोशिशों का भी जवाब नहीं मिला। प्रशासनिक जांच से साफ होगी तस्वीर करीब 50 करोड़ रुपये की जमीन से जुड़े इस विवाद में अब प्रशासन और राजस्व विभाग की जांच महत्वपूर्ण होगी। रजिस्ट्री, खसरा रिकॉर्ड, संपत्ति कर, जमीन का नक्शा और मौके पर मौजूद निर्माण की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड और रजिस्ट्री किसान के नाम है और संपत्ति कर भी उसके द्वारा जमा किया जा रहा है, तो जमीन पर दूसरे पक्ष का कब्जा किस आधार पर है। इसका जवाब दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा।1
- मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ सिंह पहुंचे नलखेड़ा सुप्रसिद्ध मां बगलामुखी देवी मंदिर में दर्शन कर पूजा अर्चना की। कलेक्टर डॉ शेर सिंह मीना एसपी दिलीप सोनी सहित अन्य अधिकारी एवं श्रद्धालु भी उपस्थित थे।1
- सावन के सोमवार को सुठालिया निकाली महादेव की शाही सवारी *धूम-धाम से निकली भोलेनाथ की शाही पालकी, जयकारों से गूंजा नगर* *बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, महिलाएं भी पहुंचीं चुनरी में* राजगढ़ जिले के सुठालिया सावन माह के तीसरे सोमवार को नगर में तीसरी बार भगवान भोलेनाथ की शाही पालकी बड़े उत्साह के साथ निकाली गई। शाही पालकी में बड़ी संख्या में शिवभक्त शामिल हुए और पूरे नगर में शिवमय माहौल रहा। शाही पालकी शाम साढ़े चार बजे स्थानीय नर्मदेश्वर महादेव शिव मंदिर से ढोल-ताशे और बैंड-बाजे के साथ रवाना हुई। पालकी नगर के मुख्य मार्गों सदर बाजार, नाटाटाल मोहल्ला, बंदा नाला, परलापुरा, गड़ी दरवाजा, श्री राम मंदिर चोक, सदर बाजार, गांधी चोक, शंकर रोड, मधुसुदनगढ़ रोड, बस स्टैंड होते हुए पुनः शिव मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। भक्तिमय माहौल में निकली पालकी पालकी में भगवान भोलेनाथ की आकर्षक साज-सज्जा की गई थी। भक्तों ने अपने कंधों पर पालकी उठाई और मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर पूजा-अर्चना व आरती की गई। एवम केले खीर का वितरण किया गया ।पालकी के आगे चल रहे शिवभक्त ढोल-ताशे और डमरू की गूंज पर जमकर थिरके। रास्ते भर हर हर महादेव के जयकारों से नगर गूंजायमान रहा। इस दौरान भक्तों को भांग की ठंडाई भी वितरित की गई। पुरुष धोती-कुर्ता और चुनरी में पहुंची महिलाए आयोजकों द्वारा पालकी में शामिल होने वाले भक्तों के लिए धोती-कुर्ता की पोशाक तय की गई थी। इसलिए अधिकांश भक्त धोती-कुर्ते में नजर आए, वहीं महिलाएं चुनरी धारण कर बड़ी संख्या में पालकी में शामिल हुईं। बीते दिनों से ही नगर के युवाओं में पालकी को लेकर खासा उत्साह देखा गया। नगर को केसरिया झंडियों से सजाया गया था। उल्लेखनीय है कि नगर में लगातार तीसरी बार निकली शाही पालकी में इस बार भी भक्तों का उत्साह देखते ही बना। कार्यक्रम के अंत में महाआरती के पश्चात फलहारी खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया गया। आयोजनकर्ताओं ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।1
- ये हालत हे राजगढ़ के जिला अस्पताल की स्वच्छता के लाख दावे ,लेकिन हकीकत ये वीडियो राजगढ़ के जिला अस्पताल का हे जहां करोड़ो रु से भवन बना,शौचालय बाथरूम बनाए लेकिन उनमें भी ताला लगा हुआ हे।मरीज ओर उनके परिजन परेशान होते हे लेकिन टायलेट ताले में बंद हे ।1