राजगढ़ जमीन विवाद: राजगढ़ में 50 करोड़ की जमीन को लेकर विवाद, मूंदड़ा परिवार पर कब्जे का आरोप; किसान ने पेश किए दस्तावेज राजगढ़ ..मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में करीब 50 करोड़ रुपये कीमत की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय किसान देवकरण गुर्जर ने मूंदड़ा परिवार पर उसकी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। किसान का दावा है कि वर्ष 2003 में जमीन की रजिस्ट्री उसके नाम हुई थी, लेकिन इसके बाद से ही मूंदड़ा परिवार ने जमीन पर कब्जा कर लिया। आरोप है कि जमीन पर होटल, कोठी और दुकानों का निर्माण भी कराया गया। किसान के नाम दर्ज है जमीन, टैक्स भी जमा करने का दावा देवकरण गुर्जर का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री अब भी उसके नाम दर्ज है और वह नियमित रूप से संपत्ति कर जमा कर रहा है। ऐसे में दस्तावेजों में स्वामित्व और जमीन पर वास्तविक कब्जे को लेकर विवाद बना हुआ है। मामले में पटवारी ने भी उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जमीन देवकरण गुर्जर के नाम दर्ज होने की बात कही है। पटवारी के अनुसार, जमीन का प्रॉपर्टी टैक्स भी किसान द्वारा जमा किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड में जमीन का नक्शा नहीं होने की बात भी सामने आई है। जमीन पर निर्माण को लेकर भी सवाल किसान का आरोप है कि जिस जमीन का मालिकाना हक दस्तावेजों में उसके नाम है, उसी पर होटल, कोठी और दुकानें बना दी गई हैं। उसका कहना है कि वह कागजों में जमीन का मालिक है और टैक्स भी चुका रहा है, लेकिन जमीन का वास्तविक कब्जा उसके पास नहीं है। ऐसे में पूरे मामले में रजिस्ट्री, राजस्व रिकॉर्ड, संपत्ति कर के दस्तावेज और मौके की स्थिति का मिलान करना अहम हो गया है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है और मौके पर निर्माण किस आधार पर किया गया। मूंदड़ा परिवार से जुड़े पुराने मामले की भी चर्चा मूंदड़ा परिवार का नाम इससे पहले श्योपुर में सामने आए एक अलग मामले को लेकर भी चर्चा में रहा था। हाईवे किनारे एक बच्ची मिलने के मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बच्ची को छह दिन की उम्र में करीब एक लाख रुपये में खरीदे जाने का दावा किया था। इस मामले में राजगढ़ के आकाश मूंदड़ा और उनकी पत्नी कृतिका मूंदड़ा समेत छह लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई थी। हालांकि, यह मामला मौजूदा जमीन विवाद से अलग है और दोनों मामलों के तथ्यों को अलग-अलग जांच के आधार पर देखा जाना जरूरी है। आनंद मूंदड़ा ने आरोपों को किया खारिज जमीन विवाद को लेकर आनंद मूंदड़ा ने किसान के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यदि जमीन पर अवैध कब्जा है तो सरकार और प्रशासन कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि वे वर्षों से जमीन पर हैं और उनके पास भी जमीन से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। जब उनसे इन दस्तावेजों के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी गई, तो फोन पर बातचीत बीच में समाप्त हो गई। इसके बाद संपर्क करने की कोशिशों का भी जवाब नहीं मिला। प्रशासनिक जांच से साफ होगी तस्वीर करीब 50 करोड़ रुपये की जमीन से जुड़े इस विवाद में अब प्रशासन और राजस्व विभाग की जांच महत्वपूर्ण होगी। रजिस्ट्री, खसरा रिकॉर्ड, संपत्ति कर, जमीन का नक्शा और मौके पर मौजूद निर्माण की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड और रजिस्ट्री किसान के नाम है और संपत्ति कर भी उसके द्वारा जमा किया जा रहा है, तो जमीन पर दूसरे पक्ष का कब्जा किस आधार पर है। इसका जवाब दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा।
राजगढ़ जमीन विवाद: राजगढ़ में 50 करोड़ की जमीन को लेकर विवाद, मूंदड़ा परिवार पर कब्जे का आरोप; किसान ने पेश किए दस्तावेज राजगढ़ ..मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में करीब 50 करोड़ रुपये कीमत की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय किसान देवकरण गुर्जर ने मूंदड़ा परिवार पर उसकी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। किसान का दावा है कि वर्ष 2003 में जमीन की रजिस्ट्री उसके नाम हुई थी, लेकिन इसके बाद से ही मूंदड़ा परिवार ने जमीन पर कब्जा कर लिया। आरोप है कि जमीन पर होटल, कोठी और दुकानों का निर्माण भी कराया गया। किसान के नाम दर्ज है जमीन, टैक्स भी जमा करने का दावा देवकरण गुर्जर का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री अब भी उसके नाम दर्ज है और वह नियमित रूप से संपत्ति कर जमा कर रहा है। ऐसे में दस्तावेजों में स्वामित्व और जमीन पर वास्तविक कब्जे को लेकर विवाद बना हुआ है। मामले में पटवारी ने भी उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जमीन देवकरण गुर्जर के नाम दर्ज होने की बात कही है। पटवारी के अनुसार, जमीन का प्रॉपर्टी टैक्स भी किसान द्वारा जमा किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड में जमीन का नक्शा नहीं होने की बात भी सामने आई है। जमीन पर निर्माण को लेकर भी सवाल किसान का आरोप है कि जिस जमीन का मालिकाना हक दस्तावेजों में उसके नाम है, उसी पर होटल, कोठी और दुकानें बना दी गई हैं। उसका कहना है कि वह कागजों में जमीन का मालिक है और टैक्स भी चुका रहा है, लेकिन जमीन का वास्तविक कब्जा उसके पास नहीं है। ऐसे में पूरे मामले में रजिस्ट्री, राजस्व रिकॉर्ड, संपत्ति कर के दस्तावेज और मौके की स्थिति का मिलान करना अहम हो गया है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है और मौके पर निर्माण किस आधार पर किया गया। मूंदड़ा परिवार से जुड़े पुराने मामले की भी चर्चा मूंदड़ा परिवार का नाम इससे पहले श्योपुर में सामने आए एक अलग मामले को लेकर भी चर्चा में रहा था। हाईवे किनारे एक बच्ची मिलने के मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बच्ची को छह दिन की उम्र में करीब एक लाख रुपये में खरीदे जाने का दावा किया था। इस मामले में राजगढ़ के आकाश मूंदड़ा और उनकी पत्नी कृतिका मूंदड़ा समेत छह लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई थी। हालांकि, यह मामला मौजूदा जमीन विवाद से अलग है और दोनों मामलों के तथ्यों को अलग-अलग जांच के आधार पर देखा जाना जरूरी है। आनंद मूंदड़ा ने आरोपों को किया खारिज जमीन विवाद को लेकर आनंद मूंदड़ा ने किसान के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यदि जमीन पर अवैध कब्जा है तो सरकार और प्रशासन कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि वे वर्षों से जमीन पर हैं और उनके पास भी जमीन से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। जब उनसे इन दस्तावेजों के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी गई, तो फोन पर बातचीत बीच में समाप्त हो गई। इसके बाद संपर्क करने की कोशिशों का भी जवाब नहीं मिला। प्रशासनिक जांच से साफ होगी तस्वीर करीब 50 करोड़ रुपये की जमीन से जुड़े इस विवाद में अब प्रशासन और राजस्व विभाग की जांच महत्वपूर्ण होगी। रजिस्ट्री, खसरा रिकॉर्ड, संपत्ति कर, जमीन का नक्शा और मौके पर मौजूद निर्माण की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड और रजिस्ट्री किसान के नाम है और संपत्ति कर भी उसके द्वारा जमा किया जा रहा है, तो जमीन पर दूसरे पक्ष का कब्जा किस आधार पर है। इसका जवाब दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा।
- राजगढ़ जमीन विवाद: राजगढ़ में 50 करोड़ की जमीन को लेकर विवाद, मूंदड़ा परिवार पर कब्जे का आरोप; किसान ने पेश किए दस्तावेज राजगढ़ ..मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में करीब 50 करोड़ रुपये कीमत की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय किसान देवकरण गुर्जर ने मूंदड़ा परिवार पर उसकी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। किसान का दावा है कि वर्ष 2003 में जमीन की रजिस्ट्री उसके नाम हुई थी, लेकिन इसके बाद से ही मूंदड़ा परिवार ने जमीन पर कब्जा कर लिया। आरोप है कि जमीन पर होटल, कोठी और दुकानों का निर्माण भी कराया गया। किसान के नाम दर्ज है जमीन, टैक्स भी जमा करने का दावा देवकरण गुर्जर का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री अब भी उसके नाम दर्ज है और वह नियमित रूप से संपत्ति कर जमा कर रहा है। ऐसे में दस्तावेजों में स्वामित्व और जमीन पर वास्तविक कब्जे को लेकर विवाद बना हुआ है। मामले में पटवारी ने भी उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जमीन देवकरण गुर्जर के नाम दर्ज होने की बात कही है। पटवारी के अनुसार, जमीन का प्रॉपर्टी टैक्स भी किसान द्वारा जमा किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड में जमीन का नक्शा नहीं होने की बात भी सामने आई है। जमीन पर निर्माण को लेकर भी सवाल किसान का आरोप है कि जिस जमीन का मालिकाना हक दस्तावेजों में उसके नाम है, उसी पर होटल, कोठी और दुकानें बना दी गई हैं। उसका कहना है कि वह कागजों में जमीन का मालिक है और टैक्स भी चुका रहा है, लेकिन जमीन का वास्तविक कब्जा उसके पास नहीं है। ऐसे में पूरे मामले में रजिस्ट्री, राजस्व रिकॉर्ड, संपत्ति कर के दस्तावेज और मौके की स्थिति का मिलान करना अहम हो गया है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है और मौके पर निर्माण किस आधार पर किया गया। मूंदड़ा परिवार से जुड़े पुराने मामले की भी चर्चा मूंदड़ा परिवार का नाम इससे पहले श्योपुर में सामने आए एक अलग मामले को लेकर भी चर्चा में रहा था। हाईवे किनारे एक बच्ची मिलने के मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बच्ची को छह दिन की उम्र में करीब एक लाख रुपये में खरीदे जाने का दावा किया था। इस मामले में राजगढ़ के आकाश मूंदड़ा और उनकी पत्नी कृतिका मूंदड़ा समेत छह लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई थी। हालांकि, यह मामला मौजूदा जमीन विवाद से अलग है और दोनों मामलों के तथ्यों को अलग-अलग जांच के आधार पर देखा जाना जरूरी है। आनंद मूंदड़ा ने आरोपों को किया खारिज जमीन विवाद को लेकर आनंद मूंदड़ा ने किसान के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यदि जमीन पर अवैध कब्जा है तो सरकार और प्रशासन कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि वे वर्षों से जमीन पर हैं और उनके पास भी जमीन से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। जब उनसे इन दस्तावेजों के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी गई, तो फोन पर बातचीत बीच में समाप्त हो गई। इसके बाद संपर्क करने की कोशिशों का भी जवाब नहीं मिला। प्रशासनिक जांच से साफ होगी तस्वीर करीब 50 करोड़ रुपये की जमीन से जुड़े इस विवाद में अब प्रशासन और राजस्व विभाग की जांच महत्वपूर्ण होगी। रजिस्ट्री, खसरा रिकॉर्ड, संपत्ति कर, जमीन का नक्शा और मौके पर मौजूद निर्माण की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड और रजिस्ट्री किसान के नाम है और संपत्ति कर भी उसके द्वारा जमा किया जा रहा है, तो जमीन पर दूसरे पक्ष का कब्जा किस आधार पर है। इसका जवाब दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा।1
- सावन के सोमवार को सुठालिया निकाली महादेव की शाही सवारी *धूम-धाम से निकली भोलेनाथ की शाही पालकी, जयकारों से गूंजा नगर* *बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, महिलाएं भी पहुंचीं चुनरी में* राजगढ़ जिले के सुठालिया सावन माह के तीसरे सोमवार को नगर में तीसरी बार भगवान भोलेनाथ की शाही पालकी बड़े उत्साह के साथ निकाली गई। शाही पालकी में बड़ी संख्या में शिवभक्त शामिल हुए और पूरे नगर में शिवमय माहौल रहा। शाही पालकी शाम साढ़े चार बजे स्थानीय नर्मदेश्वर महादेव शिव मंदिर से ढोल-ताशे और बैंड-बाजे के साथ रवाना हुई। पालकी नगर के मुख्य मार्गों सदर बाजार, नाटाटाल मोहल्ला, बंदा नाला, परलापुरा, गड़ी दरवाजा, श्री राम मंदिर चोक, सदर बाजार, गांधी चोक, शंकर रोड, मधुसुदनगढ़ रोड, बस स्टैंड होते हुए पुनः शिव मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। भक्तिमय माहौल में निकली पालकी पालकी में भगवान भोलेनाथ की आकर्षक साज-सज्जा की गई थी। भक्तों ने अपने कंधों पर पालकी उठाई और मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर पूजा-अर्चना व आरती की गई। एवम केले खीर का वितरण किया गया ।पालकी के आगे चल रहे शिवभक्त ढोल-ताशे और डमरू की गूंज पर जमकर थिरके। रास्ते भर हर हर महादेव के जयकारों से नगर गूंजायमान रहा। इस दौरान भक्तों को भांग की ठंडाई भी वितरित की गई। पुरुष धोती-कुर्ता और चुनरी में पहुंची महिलाए आयोजकों द्वारा पालकी में शामिल होने वाले भक्तों के लिए धोती-कुर्ता की पोशाक तय की गई थी। इसलिए अधिकांश भक्त धोती-कुर्ते में नजर आए, वहीं महिलाएं चुनरी धारण कर बड़ी संख्या में पालकी में शामिल हुईं। बीते दिनों से ही नगर के युवाओं में पालकी को लेकर खासा उत्साह देखा गया। नगर को केसरिया झंडियों से सजाया गया था। उल्लेखनीय है कि नगर में लगातार तीसरी बार निकली शाही पालकी में इस बार भी भक्तों का उत्साह देखते ही बना। कार्यक्रम के अंत में महाआरती के पश्चात फलहारी खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया गया। आयोजनकर्ताओं ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।1
- Post by तलेन की हलचल1
- उज्जैन में निकली बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी! 🙏 हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा शहर उज्जैन में निकली बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी! उज्जैन की पावन धरती पर बाबा महाकाल की शाही सवारी धूमधाम से निकली। सवारी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। पूरे मार्ग पर हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। बाबा महाकाल ने नगर भ्रमण कर भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद दिए। 🙏🚩1
- सुठालिया नगर परिषद में सतता.रसूख के दबाव में प्रोटोकॉल का उल्लंघन :-- प्रोटोकॉल तार-तार, निर्वाचित महिला अध्यक्ष के अधिकार पर सांसद 'प्रतिनिधि' का कब्जा ! स्वतंत्रता दिवस झंडा वंदन समारोह का वीडियो वायरल,:--- महिलाअध्यक्ष ने झंडा वंदन के लिए.बढ़ाया हाथ,...सांसद प्रतिनिधि ने खींच दी तिरंगे की डोर;... प्रशासनिक अमला रहा मूकदर्शक ....? {श्याम रानोलिया राजगढ़ }7049220386 सुठालिया नगर परिषद में सतता.रसूख के दबाव में प्रोटोकॉल का उल्लंघन :-- प्रोटोकॉल तार-तार, निर्वाचित महिला अध्यक्ष के अधिकार पर सांसद 'प्रतिनिधि' का कब्जा ! स्वतंत्रता दिवस झंडा वंदन समारोह का वीडियो वायरल,:--- महिलाअध्यक्ष ने झंडा वंदन के लिए.बढ़ाया हाथ,...सांसद प्रतिनिधि ने खींच दी तिरंगे की डोर;... प्रशासनिक अमला रहा मूकदर्शक ....? {श्याम रानोलिया राजगढ़ }7049220386 राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर राजगढ़ जिले की सुठालिया नगर परिषद परिसर में आयोजित मुख्य शासकीय समारोह विवादों के घेरे में आ गया है । समारोह के दौरान गरिमामय ध्वजारोहण के तय प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, इस वीडियो ने न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था बल्कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, विशेषकर महिला नेतृत्व के सम्मान को लेकर गंभीर प्रशासनिक और नैतिक सवाल खड़े कर दिए । "क्या है पूरा घटनाक्रम" ? प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के अनुसार,मुख्य समारोह के दौरान नगर परिषद की निर्वाचित महिला अध्यक्ष लक्ष्मीबाई लोधी निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत ध्वजारोहण के लिए मंच पर आगे बढ़ती हैं । जैसे ही वह राष्ट्रीय ध्वज की रस्सी को खींचने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाती हैं,ठीक उसी समय पास में मौजूद सांसद प्रतिनिधि अध्यक्ष प्रतिनिधि गिरिराज लोधी नियमों को दरकिनार करते हुए अचानक आगे आते हैं और अध्यक्ष के हाथ बढ़ाने के बावजूद खुद रस्सी खींचकर ध्वजारोहण कर देते हैं । इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद मुख्य नगर पालिका अधिकारी और अन्य जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी मूकदर्शक बने तमाशा देखते रहे । "नियमों की कसौटी पर उठे गंभीर सवाल".... मध्य प्रदेश शासन के नगरीय निकाय नियमों और गृह विभाग के स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी नगर परिषद या नगरीय संस्था के परिसर में आयोजित राष्ट्रीय पर्व के मुख्य समारोह में ध्वजारोहण का वैधानिक व सर्वोच्च अधिकार केवल और केवल 'निर्वाचित नगर परिषद अध्यक्ष' का होता है । सांसद प्रतिनिधि एक मनोनीत समन्वयकर्ता होता है,जिसके पास किसी भी शासकीय या आधिकारिक समारोह में निर्वाचित अध्यक्ष की जगह मुख्य ध्वजारोहण करने का कोई कानूनी या प्रोटोकॉल संबंधी अधिकार नहीं है । ऐसे में यह सीधे तौर पर पद के दुरुपयोग और नियमों की अनदेखी का मामला प्रतीत हो रहा है। "अधिकारियों की चुप्पी और महिला सशक्तीकरण. का अपमान":---- इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल स्थानीय प्रशासन और मुख्य नगर पालिका अधिकारी वीरेंद्र चक्रवर्ती.की भूमिका पर उठ रहे हैं । राष्ट्रीय पर्व के गरिमा मय संचालन की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों की होती है, मंच पर अध्यक्ष की मौजूदगी और उनके प्रयास के बावजूद किसी अन्य व्यक्ति द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर भी अधिकारियों द्वारा स्थिति स्पष्ट न करना उनकी प्रशासनिक शिथिलता को दर्शाता है । सजग नागरिकों का कहना है कि एक तरफ सरकार महिला सशक्तीकरण और स्थानीय निकायों में महिलाओं की शत-प्रतिशत भागीदारी की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर एक निर्वाचित महिला अध्यक्ष के अधिकारों का सार्वजनिक रूप से हनन हो रहा है । "जनता और प्रबुद्ध वर्ग मांग रहा जवाब" यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक चूक तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि सुठालिया की जनता और नगर परिषद के पार्षदों में इसे लेकर गहरा असंतोष है । नागरिकों का कहना है कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि का स्थान सर्वोच्च होता है,किसी भी मनोनीत व्यक्ति का नहीं, प्रबुद्ध वर्ग ने जिला कलेक्टर (राजगढ़) और नगरीय प्रशासन विभाग के उच्च अधिकारियों से इस गंभीर लापरवाही का संज्ञान लेने और जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है । अब देखना यह है कि सुठालिया नगर परिषद प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करते हुए सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी करता है, या फिर सत्ता और रसूख के दबाव में इस गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन के मामले को दबाने का प्रयास किया जाता है। इनका कहना है:---- अध्यक्ष जी छोटे कद. {ठिगनी} की होने के कारण उनका हाथ नहीं पहुंच रहा था इसलिए पास खड़े संसद /अध्यक्ष प्रतिनिधि ने डोरी सुलझाने का प्रयास किया था...? वीरेंद्र चक्रवर्ती CMO नगर परिषद सुठालिया1
- प्लॉट विवाद में खूनी खेल! तलेन में गोलीबारी, एक की मौत, दो घायल घटना के 30 मिनट में पुलिस ने दोनों आरोपियों को पकड़ा, लाइसेंसी 12 बोर बंदूक जब्त राजगढ़ जिले के तलेन थाना क्षेत्र से बड़ी खबर सामने आई है। इकलेरा गांव में प्लॉट के पुराने विवाद को लेकर हुई गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई, जबकि दो लोग घायल हुए हैं। घटना 16 अगस्त की दोपहर करीब 12 बजे शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल चक्की के पास बिरालखेड़ी रोड की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, प्लॉट को लेकर दिलीप और सुरेश प्रजापति का मुकेश जाटव से विवाद हुआ। इसी दौरान दिलीप ने कथित तौर पर 12 बोर बंदूक से फायरिंग कर दी। गोली लगने से मुकेश और सतीश घायल हुए, जबकि दीपक महोबे गंभीर रूप से घायल हो गए। दीपक को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही तलेन पुलिस ने इलाके में घेराबंदी और नाकाबंदी कर दी। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी मोटरसाइकिल से तलेन की ओर भाग रहे थे, जिन्हें घटना के करीब 30 मिनट के भीतर पकड़ लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल लाइसेंसी 12 बोर बंदूक भी जब्त की है। मामले में बीएनएस और एससी-एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस हथियार के लाइसेंस और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। राजगढ़ पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जमीन या प्लॉट विवाद में कानून हाथ में लेने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना दें।1
- baiheda tahsil byavara jila Rajgarh1
- ये हालत हे राजगढ़ के जिला अस्पताल की स्वच्छता के लाख दावे ,लेकिन हकीकत ये वीडियो राजगढ़ के जिला अस्पताल का हे जहां करोड़ो रु से भवन बना,शौचालय बाथरूम बनाए लेकिन उनमें भी ताला लगा हुआ हे।मरीज ओर उनके परिजन परेशान होते हे लेकिन टायलेट ताले में बंद हे ।1