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ये पैसे रख लो बेटा... और एक दिन लौटाना, जब तुम किसी की मदद कर सको दफ्तर नहीं, जैसे उम्मीदों का घर है डीएम कार्यालय शाहजहांपुर – कभी-कभी सरकारी दफ्तरों की भीड़ में, सरकारी कुर्सियों के पीछे बैठे लोग एक ऐसा काम कर जाते हैं जो सरकारी नहीं, बल्कि दिल से होता है और दिल से किए गए कामों की दस्तावेज़ों में जगह नहीं होती, वे लोगों की यादों में दर्ज हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ शाहजहांपुर में, जब जिले के मुखिया, जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह का एक बार फिर मानवीय चेहरा सामने आया।हुआ यूं कि एक साधारण से परिवार का लड़का, जो किसी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था, उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी पढ़ाई के लिए ज़रूरी किताबें खरीद सके।उसने शायद कई दरवाज़े खटखटाए होंगे लेकिन आखिर में उम्मीद की एक रौशनी लेकर वह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। न कोई सिफारिश, न कोई परिचय बस एक सादा सा अनुरोध कि “सर, पढ़ाई के लिए किताबें चाहिए, लेकिन घर की हालत ऐसी नहीं है कि खरीद सकूं।” जिन अफसरों को लोग अक्सर सख्त मानते हैं, उसी अफसर का दिल उस दिन किसी पिता की तरह पिघल गया। धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जेब से रुपए निकाले और मुस्कराकर कहा जाओ बेटे, किताबें खरीद लो। पढ़ाई कभी रुकनी नहीं चाहिए।" अगले दिन वही लड़का वापस आया। हाथ में किताबें थीं और साथ में वे बचे हुए रुपए भी, जो किताबें खरीदने के बाद शेष रह गए थे।ईमानदारी देखिए वो लड़का बोला सर ये पैसे बचे हैं,आप ले लीजिए।यह सुनकर जिलाधिकारी साहब मुस्कराए… एक गहरी, सच्ची मुस्कान जो शायद उस लड़के की ईमानदारी और संघर्ष को देखकर अपने आप चली आई थी।उन्होंने कहा –ये पैसे रख लो बेटा मौज करो, एक पेन और डायरी खरीद लेना तुम्हारे काम आएंगे। इस दौर में जहां अधिकतर लोग सिर्फ अपनी सुविधा, अपनी कुर्सी और अपने अधिकारों तक सीमित हो जाते हैं, वहीं कुछ अधिकारी ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ अफसर नहीं, राह दिखाने वाले दीपक बन जाते हैं,धर्मेंद्र प्रताप सिंह उन्हीं चंद चिरागों में से एक हैं।उन्होंने न केवल एक छात्र की मदद की, बल्कि उस बच्चे के आत्मविश्वास को भी रोशनी दी। उसे यह यकीन दिलाया कि इस दुनिया में मदद के लिए हाथ भी बढ़ते हैं, मुस्कराहटें भी मिलती हैं और पढ़ाई की राह में कोई अकेला नहीं होता। शाहजहांपुर ने एक बार फिर देखा एक जिलाधिकारी, जो सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि जरूरतमंद की आँखों में उम्मीद पढ़ता है।एक अफ़सर, जो किताबें नहीं… सपनों की कुंजी देता है।ये पैसे रख लो बेटा... और एक दिन लौटाना, जब तुम किसी की मदद कर सको दफ्तर नहीं, जैसे उम्मीदों का घर है डीएम कार्यालय शाहजहांपुर – कभी-कभी सरकारी दफ्तरों की भीड़ में, सरकारी कुर्सियों के पीछे बैठे लोग एक ऐसा काम कर जाते हैं जो सरकारी नहीं, बल्कि दिल से होता है और दिल से किए गए कामों की दस्तावेज़ों में जगह नहीं होती, वे लोगों की यादों में दर्ज हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ शाहजहांपुर में, जब जिले के मुखिया, जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह का एक बार फिर मानवीय चेहरा सामने आया।हुआ यूं कि एक साधारण से परिवार का लड़का, जो किसी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था, उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी पढ़ाई के लिए ज़रूरी किताबें खरीद सके।उसने शायद कई दरवाज़े खटखटाए होंगे लेकिन आखिर में उम्मीद की एक रौशनी लेकर वह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। न कोई सिफारिश, न कोई परिचय बस एक सादा सा अनुरोध कि “सर, पढ़ाई के लिए किताबें चाहिए, लेकिन घर की हालत ऐसी नहीं है कि खरीद सकूं।” जिन अफसरों को लोग अक्सर सख्त मानते हैं, उसी अफसर का दिल उस दिन किसी पिता की तरह पिघल गया। धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जेब से रुपए निकाले और मुस्कराकर कहा जाओ बेटे, किताबें खरीद लो। पढ़ाई कभी रुकनी नहीं चाहिए।" अगले दिन वही लड़का वापस आया। हाथ में किताबें थीं और साथ में वे बचे हुए रुपए भी, जो किताबें खरीदने के बाद शेष रह गए थे।ईमानदारी देखिए वो लड़का बोला सर ये पैसे बचे हैं,आप ले लीजिए।यह सुनकर जिलाधिकारी साहब मुस्कराए… एक गहरी, सच्ची मुस्कान जो शायद उस लड़के की ईमानदारी और संघर्ष को देखकर अपने आप चली आई थी।उन्होंने कहा –ये पैसे रख लो बेटा मौज करो, एक पेन और डायरी खरीद लेना तुम्हारे काम आएंगे। इस दौर में जहां अधिकतर लोग सिर्फ अपनी सुविधा, अपनी कुर्सी और अपने अधिकारों तक सीमित हो जाते हैं, वहीं कुछ अधिकारी ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ अफसर नहीं, राह दिखाने वाले दीपक बन जाते हैं,धर्मेंद्र प्रताप सिंह उन्हीं चंद चिरागों में से एक हैं।उन्होंने न केवल एक छात्र की मदद की, बल्कि उस बच्चे के आत्मविश्वास को भी रोशनी दी। उसे यह यकीन दिलाया कि इस दुनिया में मदद के लिए हाथ भी बढ़ते हैं, मुस्कराहटें भी मिलती हैं और पढ़ाई की राह में कोई अकेला नहीं होता। शाहजहांपुर ने एक बार फिर देखा एक जिलाधिकारी, जो सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि जरूरतमंद की आँखों में उम्मीद पढ़ता है।एक अफ़सर, जो किताबें नहीं… सपनों की कुंजी देता है।

7 hrs ago
user_ब्यूरो चीफ एवीपी न्यूज चैनल
ब्यूरो चीफ एवीपी न्यूज चैनल
Photographer शाहजहाँपुर, शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश•
7 hrs ago

ये पैसे रख लो बेटा... और एक दिन लौटाना, जब तुम किसी की मदद कर सको दफ्तर नहीं, जैसे उम्मीदों का घर है डीएम कार्यालय शाहजहांपुर – कभी-कभी सरकारी दफ्तरों की भीड़ में, सरकारी कुर्सियों के पीछे बैठे लोग एक ऐसा काम कर जाते हैं जो सरकारी नहीं, बल्कि दिल से होता है और दिल से किए गए कामों की दस्तावेज़ों में जगह नहीं होती, वे लोगों की यादों में दर्ज हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ शाहजहांपुर में, जब जिले के मुखिया, जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह का एक बार फिर मानवीय चेहरा सामने आया।हुआ यूं कि एक साधारण से परिवार का लड़का, जो किसी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था, उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी पढ़ाई के लिए ज़रूरी किताबें खरीद सके।उसने शायद कई दरवाज़े खटखटाए होंगे लेकिन आखिर में उम्मीद की एक रौशनी लेकर वह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। न कोई सिफारिश, न कोई परिचय बस एक सादा सा अनुरोध कि “सर, पढ़ाई के लिए किताबें चाहिए, लेकिन घर की हालत ऐसी नहीं है कि खरीद सकूं।” जिन अफसरों को लोग अक्सर सख्त मानते हैं, उसी अफसर का दिल उस दिन किसी पिता की तरह पिघल गया। धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जेब से रुपए निकाले और मुस्कराकर कहा जाओ बेटे, किताबें खरीद लो। पढ़ाई कभी रुकनी नहीं चाहिए।" अगले दिन वही लड़का वापस आया। हाथ में किताबें थीं और साथ में वे बचे हुए रुपए भी, जो किताबें खरीदने के बाद शेष रह गए थे।ईमानदारी देखिए वो लड़का बोला सर ये पैसे बचे हैं,आप ले लीजिए।यह सुनकर जिलाधिकारी साहब मुस्कराए… एक गहरी, सच्ची मुस्कान जो शायद उस लड़के की ईमानदारी और संघर्ष को देखकर अपने आप चली आई थी।उन्होंने कहा –ये पैसे रख लो बेटा मौज करो, एक पेन और डायरी खरीद लेना तुम्हारे काम आएंगे। इस दौर में जहां अधिकतर लोग सिर्फ अपनी सुविधा, अपनी कुर्सी और अपने अधिकारों तक सीमित हो जाते हैं, वहीं कुछ अधिकारी ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ अफसर नहीं, राह दिखाने वाले दीपक बन जाते हैं,धर्मेंद्र प्रताप सिंह उन्हीं चंद चिरागों में से एक हैं।उन्होंने न केवल एक छात्र की मदद की, बल्कि उस बच्चे के आत्मविश्वास को भी रोशनी दी। उसे यह यकीन दिलाया कि इस दुनिया में मदद के लिए हाथ भी बढ़ते हैं, मुस्कराहटें भी मिलती हैं और पढ़ाई की राह में कोई अकेला नहीं होता। शाहजहांपुर ने एक बार फिर देखा एक जिलाधिकारी, जो सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि जरूरतमंद की आँखों में उम्मीद पढ़ता है।एक अफ़सर, जो किताबें नहीं… सपनों की कुंजी देता है।ये पैसे रख लो बेटा... और एक दिन लौटाना, जब तुम किसी की मदद कर सको दफ्तर नहीं, जैसे उम्मीदों का घर है डीएम कार्यालय शाहजहांपुर – कभी-कभी सरकारी दफ्तरों की भीड़ में, सरकारी कुर्सियों के पीछे बैठे लोग एक ऐसा काम कर जाते हैं जो सरकारी नहीं, बल्कि दिल से होता है और दिल से किए गए कामों की दस्तावेज़ों में जगह नहीं होती, वे लोगों की यादों में दर्ज हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ शाहजहांपुर में, जब जिले के मुखिया, जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह का एक बार फिर मानवीय चेहरा सामने आया।हुआ यूं कि एक साधारण से परिवार का लड़का, जो किसी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था, उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी पढ़ाई के लिए ज़रूरी किताबें खरीद सके।उसने शायद कई दरवाज़े खटखटाए होंगे लेकिन आखिर में उम्मीद की एक रौशनी लेकर वह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। न कोई सिफारिश, न कोई परिचय बस एक सादा सा अनुरोध कि “सर, पढ़ाई के लिए किताबें चाहिए, लेकिन घर की हालत ऐसी नहीं है कि खरीद सकूं।” जिन अफसरों को लोग अक्सर सख्त मानते हैं, उसी अफसर का दिल उस दिन किसी पिता की तरह पिघल गया। धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जेब से रुपए निकाले और मुस्कराकर कहा जाओ बेटे, किताबें खरीद लो। पढ़ाई कभी रुकनी नहीं चाहिए।" अगले दिन वही लड़का वापस आया। हाथ में किताबें थीं और साथ में वे बचे हुए रुपए भी, जो किताबें खरीदने के बाद शेष रह गए थे।ईमानदारी देखिए वो लड़का बोला सर ये पैसे बचे हैं,आप ले लीजिए।यह सुनकर जिलाधिकारी साहब मुस्कराए… एक गहरी, सच्ची मुस्कान जो शायद उस लड़के की ईमानदारी और संघर्ष को देखकर अपने आप चली आई थी।उन्होंने कहा –ये पैसे रख लो बेटा मौज करो, एक पेन और डायरी खरीद लेना तुम्हारे काम आएंगे। इस दौर में जहां अधिकतर लोग सिर्फ अपनी सुविधा, अपनी कुर्सी और अपने अधिकारों तक सीमित हो जाते हैं, वहीं कुछ अधिकारी ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ अफसर नहीं, राह दिखाने वाले दीपक बन जाते हैं,धर्मेंद्र प्रताप सिंह उन्हीं चंद चिरागों में से एक हैं।उन्होंने न केवल एक छात्र की मदद की, बल्कि उस बच्चे के आत्मविश्वास को भी रोशनी दी। उसे यह यकीन दिलाया कि इस दुनिया में मदद के लिए हाथ भी बढ़ते हैं, मुस्कराहटें भी मिलती हैं और पढ़ाई की राह में कोई अकेला नहीं होता। शाहजहांपुर ने एक बार फिर देखा एक जिलाधिकारी, जो सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि जरूरतमंद की आँखों में उम्मीद पढ़ता है।एक अफ़सर, जो किताबें नहीं… सपनों की कुंजी देता है।

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  • Post by ब्यूरो चीफ एवीपी न्यूज चैनल
    4
    Post by ब्यूरो चीफ एवीपी न्यूज चैनल
    user_ब्यूरो चीफ एवीपी न्यूज चैनल
    ब्यूरो चीफ एवीपी न्यूज चैनल
    Photographer शाहजहाँपुर, शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • "तहसील में 'सुविधा शुल्क' का खेल? लेखपाल के कथित निजी कर्मी का रिश्वत लेते वीडियो वायरल, 👉सरकारी अभिलेखों पर भी उठे सवाल" शाहजहांपुर। महानगर की कांशीराम कॉलोनी में प्रमाण पत्र की रिपोर्ट लगवाने के नाम पर एक लेखपाल के कथित निजी कर्मी द्वारा एक महिला से सुविधा शुल्क लेते हुए वीडियो सामने आने के बाद तहसील व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई है, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले में संबंधित लेखपाल अखिलेश वर्मा ने उक्त व्यक्ति से किसी भी प्रकार का संबंध होने से इनकार किया है। हालांकि, इस दावे के बाद एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि संबंधित व्यक्ति का लेखपाल से कोई संबंध नहीं था, तो उसके पास तहसील सदर से जुड़े सरकारी अभिलेख कैसे पहुंचे। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है कि सरकारी दस्तावेज किसी अनधिकृत व्यक्ति के पास थे, तो यह न केवल सरकारी अभिलेखों के अनधिकृत उपयोग बल्कि उनके संभावित दुरुपयोग का भी गंभीर मामला माना जा सकता है। घटना के बाद तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही हैं। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। जनमानस की मांग है कि जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराएं तथा जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
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    "तहसील में 'सुविधा शुल्क' का खेल? लेखपाल के कथित निजी कर्मी का रिश्वत लेते वीडियो वायरल, 

👉सरकारी अभिलेखों पर भी उठे सवाल"

शाहजहांपुर। महानगर की कांशीराम कॉलोनी में प्रमाण पत्र की रिपोर्ट लगवाने के नाम पर एक लेखपाल के कथित निजी कर्मी द्वारा एक महिला से सुविधा शुल्क लेते हुए वीडियो सामने आने के बाद तहसील व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई है, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
मामले में संबंधित लेखपाल अखिलेश वर्मा ने उक्त व्यक्ति से किसी भी प्रकार का संबंध होने से इनकार किया है। हालांकि, इस दावे के बाद एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि संबंधित व्यक्ति का लेखपाल से कोई संबंध नहीं था, तो उसके पास तहसील सदर से जुड़े सरकारी अभिलेख कैसे पहुंचे।
यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है कि सरकारी दस्तावेज किसी अनधिकृत व्यक्ति के पास थे, तो यह न केवल सरकारी अभिलेखों के अनधिकृत उपयोग बल्कि उनके संभावित दुरुपयोग का भी गंभीर मामला माना जा सकता है।
घटना के बाद तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही हैं। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। जनमानस की मांग है कि जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराएं तथा जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
    user_विवेक मिश्र
    विवेक मिश्र
    Voice of people शाहजहाँपुर, शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • neem ki visheshtaen like kare share Kare comment kare follow kare #viral #trending #neem ki #visheshtaen
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    neem ki visheshtaen like kare share Kare comment kare follow kare
#viral #trending #neem ki #visheshtaen
    user_Asha Rani
    Asha Rani
    City Star Shahjahanpur, Uttar Pradesh•
    8 hrs ago
  • श्रावण मास के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया #Sawan #KashiVishwanath #YogiAdityanath #HarHarMahadev #Varanasi #ShivBhakti #Shravan #JaiBholenath
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    श्रावण मास के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया

#Sawan #KashiVishwanath #YogiAdityanath #HarHarMahadev #Varanasi #ShivBhakti #Shravan #JaiBholenath
    user_Ashish Awasthi Ljp R प्रदेश सच
    Ashish Awasthi Ljp R प्रदेश सच
    Security Guard शाहजहाँपुर, शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • मानसिक विक्षिप्त युवक ने मां की ईंट-पत्थर से कुचलकर की हत्या फर्रुखाबाद से दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां थाना शमशाबाद क्षेत्र में एक कलयुगी बेटे ने रिश्तों का खून कर दिया। मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जा रहे युवक ने पारिवारिक विवाद के बाद अपनी ही मां की ईंट-पत्थर से कुचलकर निर्मम हत्या कर दी। बीच-बचाव करने आई बहन पर भी उसने जानलेवा हमला कर दिया। ​चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे साहसी ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल से युवती की जान बचाई और करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आरोपी को काबू में किया। सूचना मिलते ही एएसपी और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, और आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है।"
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    मानसिक विक्षिप्त युवक ने मां की ईंट-पत्थर से कुचलकर की हत्या
फर्रुखाबाद से दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां थाना शमशाबाद क्षेत्र में एक कलयुगी बेटे ने रिश्तों का खून कर दिया। मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जा रहे युवक ने पारिवारिक विवाद के बाद अपनी ही मां की ईंट-पत्थर से कुचलकर निर्मम हत्या कर दी। बीच-बचाव करने आई बहन पर भी उसने जानलेवा हमला कर दिया। ​चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे साहसी ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल से युवती की जान बचाई और करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आरोपी को काबू में किया। सूचना मिलते ही एएसपी और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, और आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है।"
    user_A K DIXIT
    A K DIXIT
    8 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में कार्य शाहजहाँपुर, शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • अब स्मार्ट क्लास में पढ़ेंगे गांव के बच्चे: विधायक निधि से बने डिजिटल शिक्षण कक्ष का भव्य लोकार्पण लोकेशन तहसील सवायजपुर पाली रिपोर्टर कृष्ण मोहन बाजपेई अब स्मार्ट क्लास में पढ़ेंगे गांव के बच्चे: विधायक निधि से बने डिजिटल शिक्षण कक्ष का भव्य लोकार्पण भरखनी (हरदोई), 31 जुलाई। ग्रामीण शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विकास खण्ड भरखनी के संविलयन विद्यालय कुण्डी में विधायक निधि से निर्मित अत्याधुनिक डिजिटल शिक्षण कक्ष का शुक्रवार को भव्य लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहा और छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय विधायक सवायजपुर कुंवर माधवेन्द्र प्रताप सिंह 'रानू' ने फीता काटकर एवं डिजिटल शिक्षण कक्ष का शुभारंभ करते हुए कहा कि "आज का युग तकनीक का युग है। यदि गांव का बच्चा भी डिजिटल शिक्षा से जुड़ेगा, तो वह देश-दुनिया के विद्यार्थियों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ सकेगा।" उन्होंने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए विद्यालय परिवार को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। विशिष्ट अतिथि श्री धीरेन्द्र प्रताप सिंह 'सेनानी' (अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश ब्लॉक प्रमुख संघ), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री प्रभात मिश्र, खण्ड शिक्षा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार सिंह तथा विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुनील कुमार ने डिजिटल शिक्षण कक्ष का अवलोकन किया और इसे विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बताया। इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष रोहित सिंह, पूर्व मंडल अध्यक्ष शिवम तिवारी, श्याम मोहन मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षक, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। डिजिटल शिक्षण कक्ष के शुरू होने से अब विद्यार्थियों को स्मार्ट बोर्ड, डिजिटल कंटेंट और तकनीक आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी सीखने की क्षमता और शैक्षिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।
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    अब स्मार्ट क्लास में पढ़ेंगे गांव के बच्चे: विधायक निधि से बने डिजिटल शिक्षण कक्ष का भव्य लोकार्पण
लोकेशन तहसील सवायजपुर पाली 
रिपोर्टर कृष्ण मोहन बाजपेई 
अब स्मार्ट क्लास में पढ़ेंगे गांव के बच्चे: विधायक निधि से बने डिजिटल शिक्षण कक्ष का भव्य लोकार्पण
भरखनी (हरदोई), 31 जुलाई। ग्रामीण शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विकास खण्ड भरखनी के संविलयन विद्यालय कुण्डी में विधायक निधि से निर्मित अत्याधुनिक डिजिटल शिक्षण कक्ष का शुक्रवार को भव्य लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहा और छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय विधायक सवायजपुर कुंवर माधवेन्द्र प्रताप सिंह 'रानू' ने फीता काटकर एवं डिजिटल शिक्षण कक्ष का शुभारंभ करते हुए कहा कि "आज का युग तकनीक का युग है। यदि गांव का बच्चा भी डिजिटल शिक्षा से जुड़ेगा, तो वह देश-दुनिया के विद्यार्थियों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ सकेगा।" उन्होंने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए विद्यालय परिवार को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
विशिष्ट अतिथि श्री धीरेन्द्र प्रताप सिंह 'सेनानी' (अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश ब्लॉक प्रमुख संघ), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री प्रभात मिश्र, खण्ड शिक्षा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार सिंह तथा विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुनील कुमार ने डिजिटल शिक्षण कक्ष का अवलोकन किया और इसे विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बताया।
इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष रोहित सिंह, पूर्व मंडल अध्यक्ष शिवम तिवारी, श्याम मोहन मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षक, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। डिजिटल शिक्षण कक्ष के शुरू होने से अब विद्यार्थियों को स्मार्ट बोर्ड, डिजिटल कंटेंट और तकनीक आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी सीखने की क्षमता और शैक्षिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।
    user_Babu Bajpai
    Babu Bajpai
    Newspaper publisher शाहबाद, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • डीएम की नई पहल: बिना चिकित्सक नहीं होगी मशीन संचालित, भ्रूण लिंग जांच पर लगेगी ल
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    डीएम की नई पहल: बिना चिकित्सक नहीं होगी मशीन संचालित, भ्रूण लिंग जांच पर लगेगी ल
    user_MAHARAJ SINGH
    MAHARAJ SINGH
    Court reporter शाहजहाँपुर, शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश•
    54 min ago
  • ये पैसे रख लो बेटा... और एक दिन लौटाना, जब तुम किसी की मदद कर सको दफ्तर नहीं, जैसे उम्मीदों का घर है डीएम कार्यालय शाहजहांपुर – कभी-कभी सरकारी दफ्तरों की भीड़ में, सरकारी कुर्सियों के पीछे बैठे लोग एक ऐसा काम कर जाते हैं जो सरकारी नहीं, बल्कि दिल से होता है और दिल से किए गए कामों की दस्तावेज़ों में जगह नहीं होती, वे लोगों की यादों में दर्ज हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ शाहजहांपुर में, जब जिले के मुखिया, जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह का एक बार फिर मानवीय चेहरा सामने आया।हुआ यूं कि एक साधारण से परिवार का लड़का, जो किसी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था, उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी पढ़ाई के लिए ज़रूरी किताबें खरीद सके।उसने शायद कई दरवाज़े खटखटाए होंगे लेकिन आखिर में उम्मीद की एक रौशनी लेकर वह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। न कोई सिफारिश, न कोई परिचय बस एक सादा सा अनुरोध कि “सर, पढ़ाई के लिए किताबें चाहिए, लेकिन घर की हालत ऐसी नहीं है कि खरीद सकूं।” जिन अफसरों को लोग अक्सर सख्त मानते हैं, उसी अफसर का दिल उस दिन किसी पिता की तरह पिघल गया। धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जेब से रुपए निकाले और मुस्कराकर कहा जाओ बेटे, किताबें खरीद लो। पढ़ाई कभी रुकनी नहीं चाहिए।" अगले दिन वही लड़का वापस आया। हाथ में किताबें थीं और साथ में वे बचे हुए रुपए भी, जो किताबें खरीदने के बाद शेष रह गए थे।ईमानदारी देखिए वो लड़का बोला सर ये पैसे बचे हैं,आप ले लीजिए।यह सुनकर जिलाधिकारी साहब मुस्कराए… एक गहरी, सच्ची मुस्कान जो शायद उस लड़के की ईमानदारी और संघर्ष को देखकर अपने आप चली आई थी।उन्होंने कहा –ये पैसे रख लो बेटा मौज करो, एक पेन और डायरी खरीद लेना तुम्हारे काम आएंगे। इस दौर में जहां अधिकतर लोग सिर्फ अपनी सुविधा, अपनी कुर्सी और अपने अधिकारों तक सीमित हो जाते हैं, वहीं कुछ अधिकारी ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ अफसर नहीं, राह दिखाने वाले दीपक बन जाते हैं,धर्मेंद्र प्रताप सिंह उन्हीं चंद चिरागों में से एक हैं।उन्होंने न केवल एक छात्र की मदद की, बल्कि उस बच्चे के आत्मविश्वास को भी रोशनी दी। उसे यह यकीन दिलाया कि इस दुनिया में मदद के लिए हाथ भी बढ़ते हैं, मुस्कराहटें भी मिलती हैं और पढ़ाई की राह में कोई अकेला नहीं होता। शाहजहांपुर ने एक बार फिर देखा एक जिलाधिकारी, जो सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि जरूरतमंद की आँखों में उम्मीद पढ़ता है।एक अफ़सर, जो किताबें नहीं… सपनों की कुंजी देता है।ये पैसे रख लो बेटा... और एक दिन लौटाना, जब तुम किसी की मदद कर सको दफ्तर नहीं, जैसे उम्मीदों का घर है डीएम कार्यालय शाहजहांपुर – कभी-कभी सरकारी दफ्तरों की भीड़ में, सरकारी कुर्सियों के पीछे बैठे लोग एक ऐसा काम कर जाते हैं जो सरकारी नहीं, बल्कि दिल से होता है और दिल से किए गए कामों की दस्तावेज़ों में जगह नहीं होती, वे लोगों की यादों में दर्ज हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ शाहजहांपुर में, जब जिले के मुखिया, जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह का एक बार फिर मानवीय चेहरा सामने आया।हुआ यूं कि एक साधारण से परिवार का लड़का, जो किसी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था, उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी पढ़ाई के लिए ज़रूरी किताबें खरीद सके।उसने शायद कई दरवाज़े खटखटाए होंगे लेकिन आखिर में उम्मीद की एक रौशनी लेकर वह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। न कोई सिफारिश, न कोई परिचय बस एक सादा सा अनुरोध कि “सर, पढ़ाई के लिए किताबें चाहिए, लेकिन घर की हालत ऐसी नहीं है कि खरीद सकूं।” जिन अफसरों को लोग अक्सर सख्त मानते हैं, उसी अफसर का दिल उस दिन किसी पिता की तरह पिघल गया। धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जेब से रुपए निकाले और मुस्कराकर कहा जाओ बेटे, किताबें खरीद लो। पढ़ाई कभी रुकनी नहीं चाहिए।" अगले दिन वही लड़का वापस आया। हाथ में किताबें थीं और साथ में वे बचे हुए रुपए भी, जो किताबें खरीदने के बाद शेष रह गए थे।ईमानदारी देखिए वो लड़का बोला सर ये पैसे बचे हैं,आप ले लीजिए।यह सुनकर जिलाधिकारी साहब मुस्कराए… एक गहरी, सच्ची मुस्कान जो शायद उस लड़के की ईमानदारी और संघर्ष को देखकर अपने आप चली आई थी।उन्होंने कहा –ये पैसे रख लो बेटा मौज करो, एक पेन और डायरी खरीद लेना तुम्हारे काम आएंगे। इस दौर में जहां अधिकतर लोग सिर्फ अपनी सुविधा, अपनी कुर्सी और अपने अधिकारों तक सीमित हो जाते हैं, वहीं कुछ अधिकारी ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ अफसर नहीं, राह दिखाने वाले दीपक बन जाते हैं,धर्मेंद्र प्रताप सिंह उन्हीं चंद चिरागों में से एक हैं।उन्होंने न केवल एक छात्र की मदद की, बल्कि उस बच्चे के आत्मविश्वास को भी रोशनी दी। उसे यह यकीन दिलाया कि इस दुनिया में मदद के लिए हाथ भी बढ़ते हैं, मुस्कराहटें भी मिलती हैं और पढ़ाई की राह में कोई अकेला नहीं होता। शाहजहांपुर ने एक बार फिर देखा एक जिलाधिकारी, जो सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि जरूरतमंद की आँखों में उम्मीद पढ़ता है।एक अफ़सर, जो किताबें नहीं… सपनों की कुंजी देता है।
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    ये पैसे रख लो बेटा... और एक दिन लौटाना, जब तुम किसी की मदद कर सको

दफ्तर नहीं, जैसे उम्मीदों का घर है डीएम कार्यालय

शाहजहांपुर – कभी-कभी सरकारी दफ्तरों की भीड़ में, सरकारी कुर्सियों के पीछे बैठे लोग एक ऐसा काम कर जाते हैं जो सरकारी नहीं, बल्कि दिल से होता है और दिल से किए गए कामों की दस्तावेज़ों में जगह नहीं होती, वे लोगों की यादों में दर्ज हो जाते हैं।

कुछ ऐसा ही हुआ शाहजहांपुर में, जब जिले के मुखिया, जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह का एक बार फिर मानवीय चेहरा सामने आया।हुआ यूं कि एक साधारण से परिवार का लड़का, जो किसी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था, उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी पढ़ाई के लिए ज़रूरी किताबें खरीद सके।उसने शायद कई दरवाज़े खटखटाए होंगे लेकिन आखिर में उम्मीद की एक रौशनी लेकर वह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। न कोई सिफारिश, न कोई परिचय बस एक सादा सा अनुरोध कि “सर, पढ़ाई के लिए किताबें चाहिए, लेकिन घर की हालत ऐसी नहीं है कि खरीद सकूं।”

जिन अफसरों को लोग अक्सर सख्त मानते हैं, उसी अफसर का दिल उस दिन किसी पिता की तरह पिघल गया। धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जेब से रुपए निकाले और मुस्कराकर कहा जाओ बेटे, किताबें खरीद लो। पढ़ाई कभी रुकनी नहीं चाहिए।"

अगले दिन वही लड़का वापस आया। हाथ में किताबें थीं और साथ में वे बचे हुए रुपए भी, जो किताबें खरीदने के बाद शेष रह गए थे।ईमानदारी देखिए वो लड़का बोला सर ये पैसे बचे हैं,आप ले लीजिए।यह सुनकर जिलाधिकारी साहब मुस्कराए… एक गहरी, सच्ची मुस्कान जो शायद उस लड़के की ईमानदारी और संघर्ष को देखकर अपने आप चली आई थी।उन्होंने कहा –ये पैसे रख लो बेटा मौज करो, एक पेन और डायरी खरीद लेना तुम्हारे काम आएंगे।

इस दौर में जहां अधिकतर लोग सिर्फ अपनी सुविधा, अपनी कुर्सी और अपने अधिकारों तक सीमित हो जाते हैं, वहीं कुछ अधिकारी ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ अफसर नहीं, राह दिखाने वाले दीपक बन जाते हैं,धर्मेंद्र प्रताप सिंह उन्हीं चंद चिरागों में से एक हैं।उन्होंने न केवल एक छात्र की मदद की, बल्कि उस बच्चे के आत्मविश्वास को भी रोशनी दी। उसे यह यकीन दिलाया कि इस दुनिया में मदद के लिए हाथ भी बढ़ते हैं, मुस्कराहटें भी मिलती हैं और पढ़ाई की राह में कोई अकेला नहीं होता।

शाहजहांपुर ने एक बार फिर देखा एक जिलाधिकारी, जो सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि जरूरतमंद की आँखों में उम्मीद पढ़ता है।एक अफ़सर, जो किताबें नहीं… सपनों की कुंजी देता है।ये पैसे रख लो बेटा... और एक दिन लौटाना, जब तुम किसी की मदद कर सको

दफ्तर नहीं, जैसे उम्मीदों का घर है डीएम कार्यालय

शाहजहांपुर – कभी-कभी सरकारी दफ्तरों की भीड़ में, सरकारी कुर्सियों के पीछे बैठे लोग एक ऐसा काम कर जाते हैं जो सरकारी नहीं, बल्कि दिल से होता है और दिल से किए गए कामों की दस्तावेज़ों में जगह नहीं होती, वे लोगों की यादों में दर्ज हो जाते हैं।

कुछ ऐसा ही हुआ शाहजहांपुर में, जब जिले के मुखिया, जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह का एक बार फिर मानवीय चेहरा सामने आया।हुआ यूं कि एक साधारण से परिवार का लड़का, जो किसी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था, उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी पढ़ाई के लिए ज़रूरी किताबें खरीद सके।उसने शायद कई दरवाज़े खटखटाए होंगे लेकिन आखिर में उम्मीद की एक रौशनी लेकर वह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। न कोई सिफारिश, न कोई परिचय बस एक सादा सा अनुरोध कि “सर, पढ़ाई के लिए किताबें चाहिए, लेकिन घर की हालत ऐसी नहीं है कि खरीद सकूं।”

जिन अफसरों को लोग अक्सर सख्त मानते हैं, उसी अफसर का दिल उस दिन किसी पिता की तरह पिघल गया। धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जेब से रुपए निकाले और मुस्कराकर कहा जाओ बेटे, किताबें खरीद लो। पढ़ाई कभी रुकनी नहीं चाहिए।"

अगले दिन वही लड़का वापस आया। हाथ में किताबें थीं और साथ में वे बचे हुए रुपए भी, जो किताबें खरीदने के बाद शेष रह गए थे।ईमानदारी देखिए वो लड़का बोला सर ये पैसे बचे हैं,आप ले लीजिए।यह सुनकर जिलाधिकारी साहब मुस्कराए… एक गहरी, सच्ची मुस्कान जो शायद उस लड़के की ईमानदारी और संघर्ष को देखकर अपने आप चली आई थी।उन्होंने कहा –ये पैसे रख लो बेटा मौज करो, एक पेन और डायरी खरीद लेना तुम्हारे काम आएंगे।

इस दौर में जहां अधिकतर लोग सिर्फ अपनी सुविधा, अपनी कुर्सी और अपने अधिकारों तक सीमित हो जाते हैं, वहीं कुछ अधिकारी ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ अफसर नहीं, राह दिखाने वाले दीपक बन जाते हैं,धर्मेंद्र प्रताप सिंह उन्हीं चंद चिरागों में से एक हैं।उन्होंने न केवल एक छात्र की मदद की, बल्कि उस बच्चे के आत्मविश्वास को भी रोशनी दी। उसे यह यकीन दिलाया कि इस दुनिया में मदद के लिए हाथ भी बढ़ते हैं, मुस्कराहटें भी मिलती हैं और पढ़ाई की राह में कोई अकेला नहीं होता।

शाहजहांपुर ने एक बार फिर देखा एक जिलाधिकारी, जो सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि जरूरतमंद की आँखों में उम्मीद पढ़ता है।एक अफ़सर, जो किताबें नहीं… सपनों की कुंजी देता है।
    user_ब्यूरो चीफ एवीपी न्यूज चैनल
    ब्यूरो चीफ एवीपी न्यूज चैनल
    Photographer शाहजहाँपुर, शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • आधार कार्ड के बहाने घर में घुसा, महिला से दुष्कर्म के प्रयास का आरोपी गिरफ्तार; मदनापुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई शाहजहाँपुर। महिला से छेड़छाड़, दुष्कर्म के प्रयास और जान से मारने की धमकी देने के मामले में वांछित चल रहे आरोपी को मदनापुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) के निर्देशन, क्षेत्राधिकारी सदर के पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक सत्यप्रकाश सिंह के नेतृत्व में थाना मदनापुर पुलिस ने यह कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, 23 जुलाई 2026 को पीड़िता ने थाना मदनापुर में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि कुलदीप यादव आधार कार्ड मांगने के बहाने उसके घर में घुस आया। आरोप है कि उसने महिला का मुंह दबाकर जबरन चारपाई पर गिराया और उसके साथ छेड़छाड़ करते हुए दुष्कर्म का प्रयास किया। विरोध करने पर आरोपी ने मारपीट की और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गया। पीड़िता की तहरीर के आधार पर थाना मदनापुर में मु.अ.सं. 182/2026 के तहत धारा 64(1), 74, 115(2), 333 एवं 351(3) बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस लगातार आरोपी की तलाश में जुटी थी। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने शुक्रवार सुबह करीब 7:40 बजे मोहनिया मोड़ के पास से आरोपी कुलदीप यादव (25 वर्ष), निवासी ग्राम सबलपुर, थाना मदनापुर को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी के विरुद्ध मदनापुर थाने में पहले से भी एक आपराधिक मुकदमा दर्ज है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक सत्यप्रकाश सिंह, उपनिरीक्षक मोहित कुमार अधाना तथा कांस्टेबल विक्रांत तेवतिया शामिल रहे।
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    आधार कार्ड के बहाने घर में घुसा, महिला से दुष्कर्म के प्रयास का आरोपी गिरफ्तार; मदनापुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
शाहजहाँपुर। महिला से छेड़छाड़, दुष्कर्म के प्रयास और जान से मारने की धमकी देने के मामले में वांछित चल रहे आरोपी को मदनापुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस अधीक्षक  के निर्देश पर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) के निर्देशन, क्षेत्राधिकारी सदर के पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक सत्यप्रकाश सिंह के नेतृत्व में थाना मदनापुर पुलिस ने यह कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार, 23 जुलाई 2026 को पीड़िता ने थाना मदनापुर में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि कुलदीप यादव आधार कार्ड मांगने के बहाने उसके घर में घुस आया। आरोप है कि उसने महिला का मुंह दबाकर जबरन चारपाई पर गिराया और उसके साथ छेड़छाड़ करते हुए दुष्कर्म का प्रयास किया। विरोध करने पर आरोपी ने मारपीट की और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गया।
पीड़िता की तहरीर के आधार पर थाना मदनापुर में मु.अ.सं. 182/2026 के तहत धारा 64(1), 74, 115(2), 333 एवं 351(3) बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस लगातार आरोपी की तलाश में जुटी थी।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने शुक्रवार सुबह करीब 7:40 बजे मोहनिया मोड़ के पास से आरोपी कुलदीप यादव (25 वर्ष), निवासी ग्राम सबलपुर, थाना मदनापुर को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी के विरुद्ध मदनापुर थाने में पहले से भी एक आपराधिक मुकदमा दर्ज है।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक सत्यप्रकाश सिंह, उपनिरीक्षक मोहित कुमार अधाना तथा कांस्टेबल विक्रांत तेवतिया शामिल रहे।
    user_विवेक मिश्र
    विवेक मिश्र
    Voice of people शाहजहाँपुर, शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
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