सावधान! बच्चों में मोबाइल की लत बन रही है 'खतरनाक', सामने आया चौंकाने वाला मामला नई दिल्ली/डिजिटल डेस्क: आधुनिक तकनीक ने जहाँ हमारे जीवन को आसान बनाया है, वहीं छोटे बच्चों के लिए यह एक 'साइलेंट किलर' साबित हो रही है। हाल ही में एक मासूम बच्ची से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विशेषज्ञों और अभिभावकों के होश उड़ा दिए हैं। क्या है पूरा मामला? वायरल हो रही रिपोर्ट्स के अनुसार, मोबाइल स्क्रीन के सामने घंटों बिताने के कारण एक छोटी बच्ची के व्यवहार और स्वास्थ्य में गंभीर बदलाव देखे गए। अत्यधिक स्क्रीन टाइम की वजह से बच्चों में 'डिजिटल ऑटिज्म' जैसे लक्षण, आंखों की रोशनी कम होना और चिड़चिड़ापन तेजी से बढ़ रहा है। यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जो यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम मनोरंजन के नाम पर बच्चों का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं? मोबाइल की लत के 5 बड़े खतरे विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों को मोबाइल थमाना इन समस्याओं को न्यौता देना है: मानसिक विकास में बाधा: लगातार वीडियो देखने से बच्चों की सोचने और समझने की शक्ति कम हो जाती है। आंखों पर बुरा असर: मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) छोटी उम्र में ही चश्मा लगने का मुख्य कारण है। नींद की कमी: देर रात तक मोबाइल देखने से बच्चों के स्लीप पैटर्न में गड़बड़ी आती है, जिससे वे सुस्त और थके हुए रहते हैं। सामाजिक दूरी: बच्चे बाहरी खेलों और परिवार से कटकर आभासी दुनिया (Virtual World) में खो जाते हैं। व्यवहार में आक्रामकता: मोबाइल छीनने पर बच्चों में गुस्सा और हिंसक प्रवृत्ति देखी जा रही है। डॉक्टरों की सलाह: 2 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखें। बड़े बच्चों के लिए भी स्क्रीन टाइम 1 घंटे से अधिक न हो और उनके खेलने के लिए फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ावा दें।
सावधान! बच्चों में मोबाइल की लत बन रही है 'खतरनाक', सामने आया चौंकाने वाला मामला नई दिल्ली/डिजिटल डेस्क: आधुनिक तकनीक ने जहाँ हमारे जीवन को आसान बनाया है, वहीं छोटे बच्चों के लिए यह एक 'साइलेंट किलर' साबित हो रही है। हाल ही में एक मासूम बच्ची से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विशेषज्ञों और अभिभावकों के होश उड़ा दिए हैं। क्या है पूरा मामला? वायरल हो रही रिपोर्ट्स के अनुसार, मोबाइल स्क्रीन के सामने घंटों बिताने के कारण एक छोटी बच्ची के व्यवहार और स्वास्थ्य में गंभीर बदलाव देखे गए। अत्यधिक स्क्रीन टाइम की वजह से बच्चों में 'डिजिटल ऑटिज्म' जैसे लक्षण, आंखों की रोशनी कम होना और चिड़चिड़ापन तेजी से बढ़ रहा है। यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जो यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम मनोरंजन के नाम पर बच्चों का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं? मोबाइल की लत के 5 बड़े खतरे विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों को मोबाइल थमाना इन समस्याओं को न्यौता देना है: मानसिक विकास में बाधा: लगातार वीडियो देखने से बच्चों की सोचने और समझने की शक्ति कम हो जाती है। आंखों पर बुरा असर: मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) छोटी उम्र में ही चश्मा लगने का मुख्य कारण है। नींद की कमी: देर रात तक मोबाइल देखने से बच्चों के स्लीप पैटर्न में गड़बड़ी आती है, जिससे वे सुस्त और थके हुए रहते हैं। सामाजिक दूरी: बच्चे बाहरी खेलों और परिवार से कटकर आभासी दुनिया (Virtual World) में खो जाते हैं। व्यवहार में आक्रामकता: मोबाइल छीनने पर बच्चों में गुस्सा और हिंसक प्रवृत्ति देखी जा रही है। डॉक्टरों की सलाह: 2 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखें। बड़े बच्चों के लिए भी स्क्रीन टाइम 1 घंटे से अधिक न हो और उनके खेलने के लिए फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ावा दें।
- सिविल सर्जन द्वारा किया गया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण हुलासगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का आज सिविल सर्जन डॉक्टर हरिश्चंद्र चौधरी के द्वारा औचक निरीक्षण किया गया। इस दरमियान यहां एक्स रे की सुविधा बंद रहने की जानकारी मिलने पर इसके कारणो की जानकारी प्राप्त की तथा प्रभारी डॉक्टर चंद्रशेखर प्रकाश से इस समस्या को शीघ्र ही दूर करने का आश्वासन दिया। स्थानीय लोगों द्वारा यहां अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहाली करने की भी मांग की गई ।साथ ही यहां जांच के मुकम्मल सुविधा भी उपलब्ध कराने की मांग की गई। लोगों ने बताया कि चुके सदर अस्पताल से यहां की दूरी काफी है इसके कारण यहां अल्ट्रासाउंड की भी व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने लोगों को बताया कि शिघ्र ही यहां जांच की सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी ।तथा प्रभारी चिकित्सक से अन्य बिंदुओं पर भी चर्चा की गई। उन्होंने अस्पताल के संचालन के लिए और दिशा निर्देश भी दिया।1
- Post by Amit Kumar1
- Post by RANJIT KUMAR CHAUDHARY4
- जय बाबा शिव गुरु विडियो न0-463🚩🌅⛲🪷♥️👋1
- Post by MD aurangzeb4
- नालंदा में इंडिया गठबंधन के नेता कौशलेंद्र कुमार उर्फ छोटे मुखिया द्वारा नालंदा विधानसभा के डॉयमंड रेसॉर्ट में होली मिलन समारोह का आयोजन.., नालंदा में इंडिया गठबंधन के नेता कौशलेंद्र कुमार उर्फ छोटे मुखिया द्वारा नालंदा विधानसभा के रेसॉर्ट में होली मिलन समारोह का आयोजन..1
- जहानाबाद में भारतीय किसान मजदूर विकास संगठन ( बिहार ) की ओर से कारगिल चौक के समीप विभिन्न मांगों को लेकर एकदिवसीय धरना आयोजित किया गया। धरना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन आजादी के इतने वर्षों बाद भी किसानों के लिए सिंचाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा यूरिया का मूल्य निर्धारित किया गया है, लेकिन किसानों को इस दर पर खाद उपलब्ध नहीं हो रही है। मजबूरन किसानों को ऊंचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है और आमदनी घट रही है। उन्होंने कहा कि सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण कई किसान खेती छोड़ने को विवश हैं। नहरों की सफाई और मरम्मत नहीं होने से खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। वहीं, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में अंचलाधिकारी से लेकर उच्च अधिकारियों तक पैसे लेने का आरोप भी लगाया गया। किसानों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि रसीद की ऑनलाइन व्यवस्था तो कर दी गई है, लेकिन परिमार्जन का कार्य लंबित पड़ा है, जिससे किसानों को बार-बार कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं और अफसरशाही हावी है। धरना के दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा। किसानों ने सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने, खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और राजस्व संबंधित कार्यों में पारदर्शिता लाने की मांग की।1
- Post by Amit Kumar1