“कानून में कमी मतलब कानून फेल नहीं” – हरनौत में गरजे प्रमोद चंद्रवंशी हरनौत (बिहार): बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधान पार्षद प्रमोद चंद्रवंशी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। हरनौत में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी कानून के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का अर्थ उसकी विफलता नहीं होता। शराबबंदी पर विपक्ष को दिया कड़ा जवाब पिछले कुछ समय से बिहार में शराबबंदी को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगाते हुए प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा: "अगर कानून में कहीं कोई कमी दिखती है, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि कानून फेल हो गया है। सरकार की मंशा समाज को नशा मुक्त बनाना है और हम उस लक्ष्य की ओर अडिग हैं।" प्रमुख बिंदु: सियासी पारा गरम: बिहार में शराबबंदी को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। प्रशासनिक मुस्तैदी: चंद्रवंशी ने स्थानीय प्रशासन और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस सामाजिक सुधार को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। सामाजिक संदेश: उन्होंने शराबबंदी को केवल सरकारी आदेश नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बताया जिससे महिलाओं और गरीब परिवारों के जीवन में सुधार आया है।
“कानून में कमी मतलब कानून फेल नहीं” – हरनौत में गरजे प्रमोद चंद्रवंशी हरनौत (बिहार): बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधान पार्षद प्रमोद चंद्रवंशी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। हरनौत में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी कानून के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का अर्थ उसकी विफलता नहीं होता। शराबबंदी पर विपक्ष को दिया कड़ा जवाब पिछले कुछ समय से बिहार में शराबबंदी को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगाते हुए प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा: "अगर कानून में कहीं कोई कमी दिखती है, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि कानून फेल हो गया है। सरकार की मंशा समाज को नशा मुक्त बनाना है और हम उस लक्ष्य की ओर अडिग हैं।" प्रमुख बिंदु: सियासी पारा गरम: बिहार में शराबबंदी को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। प्रशासनिक मुस्तैदी: चंद्रवंशी ने स्थानीय प्रशासन और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस सामाजिक सुधार को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। सामाजिक संदेश: उन्होंने शराबबंदी को केवल सरकारी आदेश नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बताया जिससे महिलाओं और गरीब परिवारों के जीवन में सुधार आया है।
- सिविल सर्जन द्वारा किया गया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण हुलासगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का आज सिविल सर्जन डॉक्टर हरिश्चंद्र चौधरी के द्वारा औचक निरीक्षण किया गया। इस दरमियान यहां एक्स रे की सुविधा बंद रहने की जानकारी मिलने पर इसके कारणो की जानकारी प्राप्त की तथा प्रभारी डॉक्टर चंद्रशेखर प्रकाश से इस समस्या को शीघ्र ही दूर करने का आश्वासन दिया। स्थानीय लोगों द्वारा यहां अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहाली करने की भी मांग की गई ।साथ ही यहां जांच के मुकम्मल सुविधा भी उपलब्ध कराने की मांग की गई। लोगों ने बताया कि चुके सदर अस्पताल से यहां की दूरी काफी है इसके कारण यहां अल्ट्रासाउंड की भी व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने लोगों को बताया कि शिघ्र ही यहां जांच की सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी ।तथा प्रभारी चिकित्सक से अन्य बिंदुओं पर भी चर्चा की गई। उन्होंने अस्पताल के संचालन के लिए और दिशा निर्देश भी दिया।1
- Post by Amit Kumar1
- Post by RANJIT KUMAR CHAUDHARY4
- जय बाबा शिव गुरु विडियो न0-463🚩🌅⛲🪷♥️👋1
- Post by MD aurangzeb4
- गया जी “अधिकार और प्रक्रिया पर उठे सवाल: सिविल ड्रेस अधिकारी की निगरानी में चालान”1
- जहानाबाद में भारतीय किसान मजदूर विकास संगठन ( बिहार ) की ओर से कारगिल चौक के समीप विभिन्न मांगों को लेकर एकदिवसीय धरना आयोजित किया गया। धरना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन आजादी के इतने वर्षों बाद भी किसानों के लिए सिंचाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा यूरिया का मूल्य निर्धारित किया गया है, लेकिन किसानों को इस दर पर खाद उपलब्ध नहीं हो रही है। मजबूरन किसानों को ऊंचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है और आमदनी घट रही है। उन्होंने कहा कि सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण कई किसान खेती छोड़ने को विवश हैं। नहरों की सफाई और मरम्मत नहीं होने से खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। वहीं, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में अंचलाधिकारी से लेकर उच्च अधिकारियों तक पैसे लेने का आरोप भी लगाया गया। किसानों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि रसीद की ऑनलाइन व्यवस्था तो कर दी गई है, लेकिन परिमार्जन का कार्य लंबित पड़ा है, जिससे किसानों को बार-बार कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं और अफसरशाही हावी है। धरना के दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा। किसानों ने सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने, खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और राजस्व संबंधित कार्यों में पारदर्शिता लाने की मांग की।1
- Post by Amit Kumar1