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सिधौना बाजार में अंधेरा बना हादसे की वजह, मजदूर की मौत
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सिधौना बाजार में अंधेरा बना हादसे की वजह, मजदूर की मौत
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- वाराणसी की कैंट थाना की कचहरी पुलिस चौकी पर मुस्लिम महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उनकी पुस्तैनी जमीन पर पुलिस कब्जा करा रहा है और उनकी कही कोई सुनवाई नहीं हों रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले का संज्ञान लेकर कार्यवाही की मांग किया है। Varanasi Breking News2
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही बनेगा बच्चों का उज्ज्वल भविष्य : डॉ. शशि भूषण सिंह1
- जाल्हूपुर कच्चा बाबा आश्रम में कृष्ण जन्मोत्सव की धूम, शिल्पी राज और विजय चौहान ने बांधा समां जनता न्यूज़ टीवी संवाददाता संजय कुमार वाराणसी वाराणसी। जाल्हूपुर स्थित श्री कच्चा बाबा आश्रम में 5 से 7 सितंबर तक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। तीन दिवसीय आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन-पूजन किए और धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। आश्रम परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। भजन-कीर्तन और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सांस्कृतिक संध्या में भोजपुरी की प्रसिद्ध गायिका शिल्पी राज और गायक विजय चौहान ने शानदार प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं का मन मोह लिया। वहीं म्यूजिक डायरेक्टर वीर बहादुर यादव, बिरहा गायक धर्मेंद्र सोलंकी और ओमप्रकाश दीवाना ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगाए। कार्यक्रम में मंदिर कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्य, श्रद्धालु, श्रोतागण और क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए चौबेपुर पुलिस टीम सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए मौके पर तैनात रही। पुलिस की व्यवस्था के बीच कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। मंदिर कमेटी ने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों, कलाकारों, पुलिस टीम और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया।1
- वाराणसी में पार्षदों की बैठक आयोजित मेयर ने दिया सख्त निर्देश 15 दिन चलेगा विशेष अभियान1
- कलम के तेज धार से जनपद अयोध्या में नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों तथा सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संबोधन अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जनपद अयोध्या में नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों तथा सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा - आज से 9 वर्ष पहले, 2017 से पहले आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति क्या थी! आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर थे, अव्यवस्था थी, रेसिपी ईमानदारी से केंद्रों तक नहीं पहुंचती थी। जब नहीं पहुंचेगी तो बदनामी आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री और सहायिकाओं की होती थी। बेईमानी तत्कालीन सरकार करती थी। उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी की रेसिपी और पोषाहार एक शराब माफिया संचालित करता था। उसकी ऐसी पहुंच थी कि हर व्यवस्था को प्रभावित कर सकता था, कोई उसके सामने बोलता नहीं था। पोषाहार की शिकायतें होती थीं, गलती कोई करता था, भुगतना पड़ता था। सरकार और माफिया मिलकर व्यवस्था चौपट करते थे, गाली आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री और सहायिकाओं को सुनने को मिलती थी।1
- बीएचयू में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी के नाम पर छह लाख ठगने वाला गिरफ्तार वाराणसी। बीएचयू में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी दिलाने के नाम पर पीड़िता से करीब छह लाख रुपये ठगने और कूटरचित नियुक्ति पत्र देने के आरोपी चन्द्रमणि शर्मा को सिगरा पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसे सोनिया रोड स्थित उसके कार्यालय से मुखबिर की सूचना पर पकड़ा। आरोपी के खिलाफ सिगरा थाने में धोखाधड़ी और कूटरचना समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज है। पुलिस के मुताबिक, चन्द्रमणि शर्मा पुत्र विंध्याचल शर्मा (32) निवासी 14/120 टी-4ए, त्रिदेव नगर कॉलोनी, सरायनंदन, भेलूपुर और हाल पता आनंद नगर, कंदवा, चितईपुर ने पीड़िता को बीएचयू में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। आरोप है कि नौकरी लगवाने के नाम पर उसने करीब छह लाख रुपये लिए। इसके बाद पीड़िता को विश्वास में लेने के लिए कूटरचित नियुक्ति पत्र भी दे दिया।मामले में सिगरा थाने में मुकदमा अपराध संख्या 0338/2026 के तहत बीएनएस की धारा 318(4), 352, 336(3), 338 और 340(2) में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने मंगलवार को आरोपी को सी-14/160, डीपी सोनिया रोड स्थित कार्यालय से गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक शिवाकांत मिश्र, उपनिरीक्षक विवेक सिंह, मुख्य आरक्षी कृपा सिंधु भारती और आरक्षी उमेश यादव शामिल रहे।2
- मिर्जापुर: द मूवी देखकर सच कहूँ तो बेहद रोमांचित हूँ। मेरे हिसाब से यह फिल्म एक हिट वेब सीरीज को सफल फिल्म में बदलने का ब्लॉकबस्टर टेम्प्लेट है। ये फ़िल्म एक जबरदस्त बिजनेस मॉडल है! जैसे स्वादिष्ट खाना बनाने के लिए हर मसाले का सही अनुपात जरूरी होता है, वैसे ही एक अच्छी मनोरंजक फिल्म बनाने के लिए इमोशंस, एक्शन, ड्रामा, रिश्ते, किरदार और कहानी का संतुलन जरूरी होता है। मिर्जापुर: द मूवी ने यही साबित किया है कि जब हर चीज़ सही अनुपात में मिले तो नतीजा कितना शानदार हो सकता है। मिर्जापुर वेब सीरीज लगभग सभी ने देखी है। जिन्होंने देखी है, उन्हें इसमें वही सब मिलेगा जो उन्हें सीरीज में पसंद था और जिन्होंने नहीं देखी है, वे भी कहानी से कटे हुए महसूस नहीं करेंगे। फिल्म को इस तरह से रचा गया है कि नए दर्शक भी आसानी से इससे जुड़ सकें। सबसे पहले यह साफ कर दूँ कि वेब सीरीज की तरह यह भी एडल्ट कंटेंट है। इसमें भरपूर वायलेंस है, इंटिमेट सीन हैं लेकिन इसका वायलेंस सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है। हर हिंसा के पीछे भावनाएँ हैं, रिश्ते हैं, बदले की आग है और कहानी का मजबूत कारण है। इसलिए यह अनावश्यक नहीं लगता। सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म ने वेब सीरीज के किरदार तो लिए हैं, लेकिन कहानी को नया रास्ता दिया है। मिर्जापुर हमेशा से अपने कैरेक्टराइजेशन के लिए जानी जाती रही है और फिल्म में भी हर किरदार उसी मजबूती के साथ सामने आता है। यह फिल्म इस बात की बेहतरीन मिसाल है कि किरदारों को कैसे गढ़ा और स्थापित किया जाता है। फ़िल्म का लेखन और निर्देशन शानदार है। एक-एक दृश्य को जिस बारीकी से फिल्माया गया है, वह प्रभावित करता है। कई जगह दिए गए पॉज़ सीन की गहराई को और बढ़ा देते हैं। अनगिनत डायलॉग्स कमाल के हैं, जो कई दृश्यों को साधारण से असरदार बनाते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके इमोशंस हैं। पति-पत्नी, भाई-भाई, दोस्ती, बाप-बेटा, मां-बेटा, प्रेमी-प्रेमिका, बहन-भाई, हर रिश्ते को जिस संवेदनशीलता से जोड़ा गया है, वह लाजवाब है। यही भावनात्मक जुड़ाव दर्शक को कहानी के भीतर बनाए रखता है। अभिनय की बात करूँ तो एक भी कलाकार ऐसा नहीं लगा जिसने निराश किया हो। हर कलाकार अपने किरदार में पूरी तरह ढला हुआ दिखाई देता है। खासतौर पर रवि किशन द्वारा निभाया गया बब्बन का किरदार। वेब सीरीज में यह किरदार नहीं था, लेकिन फिल्म को एक मुकम्मल सिनेमाई क्लाइमेक्स देने के लिए इसकी जरूरत थी और रवि किशन ने इसे यादगार बना दिया है। मुझे एक और बात बहुत पसंद आई। रॉबिन अग्रवाल का किरदार। उसका एक छोटा सा सीन है, लेकिन उसे देखकर लगा कि निर्माता-निर्देशक अच्छी तरह समझते हैं कि दर्शकों के दिल में कौन-सा किरदार बस चुका है। हालांकि ये सीन नहीं होता तो कहानी पर कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन वह एक खूबसूरत नॉस्टेलजिया पैदा करता है। उसका तकिया कलाम है ये भी ठीक है! मुझे ये किरदार बहुत पसंद है! राजनीति, सत्ता का खेल, ट्विस्ट एंड टर्न्स तो मिर्जापुर की पहचान रहे ही हैं, लेकिन इस फिल्म की असली सफलता इस बात में है कि इसने इमोशंस, एक्शन, वायलेंस, कहानी और किरदारों के विकास के बीच अद्भुत संतुलन बनाया है। मुझे लगता है कि आने वाले वर्षों में जब भी किसी सफल वेब सीरीज को फिल्म में बदलने की बात होगी, मिर्जापुर का उदाहरण जरूर दिया जाएगा। जिस तरह मिर्जापुर वेब सीरीज ने भारतीय वेब कंटेंट को नया रास्ता दिखाया था, उसी तरह यह फिल्म वेब सीरीज से फिल्मों में रूपांतरण का नया बिजनेस मॉडल और नया रास्ता दिखाती है। मेरी रेटिंग- ⭐⭐⭐⭐ (4/5)1
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