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होली के पूर्व कोतवाली कुलपहाड़ में आयोजित पीस कमेटी के हुई बैठक
इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
होली के पूर्व कोतवाली कुलपहाड़ में आयोजित पीस कमेटी के हुई बैठक
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- Post by Star City School Mahoba1
- पनवाड़ी के किल्हौवा गांव में लाखों की चोरी, अलमारी से 250 ग्राम की पायल व सोने के आभूषण पार महोबा। थाना पनवाड़ी क्षेत्र के किल्हौवा गांव में अज्ञात चोरों द्वारा घर में घुसकर लाखों रुपये के आभूषण चोरी किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित बिहारी लाल (57) पुत्र स्व. देशराज ने थाना पनवाड़ी में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित के अनुसार वह 26 फरवरी 2026 की शाम करीब 7 बजे आवश्यक कार्य से घर में ताला बंद कर पनवाड़ी चले गए थे। अगले दिन सुबह लगभग 7 बजे जब वह अपनी पत्नी के साथ घर लौटे तो मुख्य दरवाजे पर ताला लगा मिला, लेकिन अंदर कमरे में सामान बिखरा पड़ा था। अलमारी की तलाशी लेने पर उसमें रखे सोने के आभूषण गायब मिले। चोरी गए सामान में तीन सोने की अंगूठियां, बृजबाला तथा करीब 250 ग्राम की पायल शामिल है। बिहारी लाल ने चोरी गए आभूषणों की कीमत लगभग 2 लाख 80 हजार रुपये बताई है। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई, जिसके बाद थाना पनवाड़ी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की और साक्ष्य जुटाए। इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में पारिवारिक विवाद की बात भी सामने आई है, क्योंकि पीड़ित के तीन बेटे हैं और आपसी कहासुनी की स्थिति रहती है। हालांकि पुलिस हर पहलू पर बारीकी से जांच कर रही है। क्षेत्र में हुई इस चोरी की घटना से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही घटना का खुलासा कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- होली के पूर्व कोतवाली कुलपहाड़ में आयोजित पीस कमेटी के हुई बैठक1
- #महोबा राह चलती श्रमिक महिलाओं को रौंदने वाले पिकअप वाहन को पुलिस ने खोजा, वाहन चालक की पुलिस ने पहचान की। उपरोक्त जानकारी अपर पुलिस अधीक्षक ने दी है। #ikvnews #mahobainsight1
- Post by Crime Kab Tak1
- हमीरपुर के सरीला तहसील के चंडौत गांव में बेतवा नदी में अवैध खनन का मामला सामने आया है। आरोप है कि खनन पट्टाधारक हैवीवेट पोकलेन मशीनों से नदी की जलधारा में खनन कर रहे हैं, जिससे नदी का सीना छलनी हो रहा है। इस मामले में खनिज विभाग पर भी सवाल उठ रहे हैं, जो अवैध खनन को रोकने में असमर्थ दिख रहा है [1]। report by Nirdosh Rajpoot3
- मोबाइल की बढ़ती लत छोटे बच्चों के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है, इसका एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक बच्ची मोबाइल में इस कदर खो गई कि उसने खुद को कमरे में अंदर से बंद कर लिया। परिजनों ने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया और समझाने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। स्थिति गंभीर होती देख घरवालों को मजबूरन पास के कमरे की दीवार तोड़नी पड़ी, तब जाकर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। यह घटना बच्चों पर मोबाइल के बढ़ते प्रभाव और अभिभावकों की बढ़ती चिंता को साफ तौर पर उजागर करती है।1
- गौशाला के जानवरों ने उजाड़ी 10 बीघा गन्ने की फसल, किसानों ने थाने में दी तहरीर पनवाड़ी ब्लॉक की सलैया खालसा ग्राम पंचायत का मामला, मुआवजे की मांग तेज महोबा। विकासखंड पनवाड़ी की ग्राम पंचायत सलैया खालसा में गौशाला के जानवरों द्वारा किसानों की गन्ने की फसल बर्बाद किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित किसानों का आरोप है कि गौशाला में लगभग एक सैकड़ा से अधिक निराश्रित पशु संरक्षित हैं, जिनके लिए शासन स्तर से भूसा-चारा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार कर्मचारियों द्वारा पशुओं को खुले में छोड़ दिया जाता है, जिससे आसपास के खेतों में खड़ी फसल को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों के मुताबिक, इस समय उनके खेतों में गन्ने की फसल लहलहा रही थी, लेकिन गौशाला से छोड़े गए जानवरों ने करीब 9 से 10 बीघा फसल पूरी तरह चौपट कर दी। किसानों ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में पहले ग्राम प्रधान से शिकायत की, परंतु कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद मजबूर होकर किसानों ने गौशाला कर्मचारियों एवं अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। किसानों ने खंड विकास अधिकारी पनवाड़ी को भी लिखित शिकायत सौंपकर नुकसान का सर्वे कराते हुए मुआवजा दिलाने की मांग की है। पंचायत सचिव निर्देश पटेल का कहना है कि गौशाला के पशु हमेशा बंद रहते हैं और प्राप्त शिकायत की जांच कराई जाएगी। ग्राम प्रधान इन्द्रजीत राजपूत ने भी बताया कि पशुओं की देखरेख के लिए चरवाहे तैनात हैं और उन्हें नियमित रूप से गौशाला में रखा जाता है। वहीं सहायक विकास अधिकारी कमलेश अनुरागी ने बताया कि वह इस संबंध में दो बार प्रधान सचिव को अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। फिलहाल किसान प्रशासनिक हस्तक्षेप और मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं।1