शिक्षक - बच्चों की तीन दिवसीय हिंदी भाषा शिक्षण सायंकालीन स्कूल सांवल्दे में कार्यशाला शुरू :: रचनात्मक शिक्षक मंडल की पहल पर शिक्षकों एवं बच्चों की तीन दिवसीय हिंदी भाषा शिक्षण की कार्यशाला आज ज्योतिबा फुले सावित्रीबाई फुले सायंकालीन स्कूल सांवल्दे(पश्चिम) में शुरू हो गई. कार्यशाला की शुरुआत बच्चों द्वारा लोक पर्व फूलदेई मना कर हुई.कार्यशाला के पहले सत्र में आज शिक्षकों और विद्यार्थियों से उनके पढ़ने लिखने के अनुभवों पर बातचीत की गई. कार्यशाला में बतौर विषय विशेषज्ञ एस सी ई आर टी में रहे वरिष्ठ प्रवक्ता मदन पांडे जी रहे. बातचीत खासकर भाषा सीखने के उनके अनुभवों पर केंद्रित रही.प्रतिभागियों ने बताया कि बचपन में भाषा सीखने में उन्हें अलग अलग लोगों और कारणों से मदद मिली.कुछ मामलों में परिवारजनों ने भूमिका निभाई कुछ में शिक्षकों ने.अनेक ने बताया कि सीखने के दौरान उन्हें भय अनुभव होता था. अनुभवों का सत्र पूरा होने के बाद मदन पांडे जी द्वारा भाषा में विभिन्न तरीकों से भाषा निर्माण की गतिविधियों को कराया गया.इनमें एक चीज पर एक वाक्य बोलना,किसी एक चीज पर दो और तीन वाक्य बोलना,किसी वस्तु पर लगातार एक मिनट बोलना तथा एक चीज के पक्ष और विपक्ष में एक ही वाक्य में बोलने के अभ्यास कराए गए.फिर दो दो की टोलियों में किसी वस्तु की प्रशंसा और निंदा में तीन तीन वाक्य बोलने के अभ्यास कराए गए. इन गतिविधियों द्वारा स्पष्ट किया गया कि जब हमारे सामने किसी विषय या वस्तु पर बोलने की चुनौती रखी जाती है तो हमारा दिमाग उसी के अनुसार भाषा खोजने लगता है. मदन पांडे जी ने कहा भाषा मनुष्य का आविष्कार है.पशु पक्षियों के पास दर्जनों ध्वनि संकेत तो होते हैं पर भाषा नहीं होती.स्कूलों और कक्षाओं में भाषा को सृजनात्मक ढंग से उपयोग करने की जरूरत होती है. बच्चों से जितना अधिक ढांचों ,तरीकों से भाषा निर्माण कराया जाएगा बच्चे उतनी ही अधिक भाषा सीखेंगे. प्रात 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और फिर सांय साढ़े तीन से 6 बजे तक चली कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी रही.कार्यशाला कल भी प्रात 9 बजे से शुरू होगी..
शिक्षक - बच्चों की तीन दिवसीय हिंदी भाषा शिक्षण सायंकालीन स्कूल सांवल्दे में कार्यशाला शुरू :: रचनात्मक शिक्षक मंडल की पहल पर शिक्षकों एवं बच्चों की तीन दिवसीय हिंदी भाषा शिक्षण की कार्यशाला आज ज्योतिबा फुले सावित्रीबाई फुले सायंकालीन स्कूल सांवल्दे(पश्चिम) में शुरू हो गई. कार्यशाला की शुरुआत बच्चों द्वारा लोक पर्व फूलदेई मना कर हुई.कार्यशाला के पहले सत्र में आज शिक्षकों और विद्यार्थियों से उनके पढ़ने लिखने के अनुभवों पर बातचीत की गई. कार्यशाला में बतौर विषय विशेषज्ञ एस सी ई आर टी में रहे
वरिष्ठ प्रवक्ता मदन पांडे जी रहे. बातचीत खासकर भाषा सीखने के उनके अनुभवों पर केंद्रित रही.प्रतिभागियों ने बताया कि बचपन में भाषा सीखने में उन्हें अलग अलग लोगों और कारणों से मदद मिली.कुछ मामलों में परिवारजनों ने भूमिका निभाई कुछ में शिक्षकों ने.अनेक ने बताया कि सीखने के दौरान उन्हें भय अनुभव होता था. अनुभवों का सत्र पूरा होने के बाद मदन पांडे जी द्वारा भाषा में विभिन्न तरीकों से भाषा निर्माण की गतिविधियों को कराया गया.इनमें एक चीज पर एक वाक्य बोलना,किसी एक चीज
पर दो और तीन वाक्य बोलना,किसी वस्तु पर लगातार एक मिनट बोलना तथा एक चीज के पक्ष और विपक्ष में एक ही वाक्य में बोलने के अभ्यास कराए गए.फिर दो दो की टोलियों में किसी वस्तु की प्रशंसा और निंदा में तीन तीन वाक्य बोलने के अभ्यास कराए गए. इन गतिविधियों द्वारा स्पष्ट किया गया कि जब हमारे सामने किसी विषय या वस्तु पर बोलने की चुनौती रखी जाती है तो हमारा दिमाग उसी के अनुसार भाषा खोजने लगता है. मदन पांडे जी ने कहा
भाषा मनुष्य का आविष्कार है.पशु पक्षियों के पास दर्जनों ध्वनि संकेत तो होते हैं पर भाषा नहीं होती.स्कूलों और कक्षाओं में भाषा को सृजनात्मक ढंग से उपयोग करने की जरूरत होती है. बच्चों से जितना अधिक ढांचों ,तरीकों से भाषा निर्माण कराया जाएगा बच्चे उतनी ही अधिक भाषा सीखेंगे. प्रात 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और फिर सांय साढ़े तीन से 6 बजे तक चली कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी रही.कार्यशाला कल भी प्रात 9 बजे से शुरू होगी..
- विडियो देखें- विदाई ऐसी कि पत्थर दिल भी रो पड़े! हरीश राणा का ये वीडियो कर देगा आंखें नम। हरीश राणा का यह अंतिम भावुक विडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है । 19 साल का एक नौजवान बी-टेक करने के लिए चंडीगढ़ गया था। बहन से बात कर रहा था। और वही चौथी मंजिल से नीचे गिर गया। और तब से ही बीमार और कोमा में हैं। माता -पिता जो कि गाजियाबाद में रहते हैं। लगातार बीमार बेटे के इलाज के लिए धन-दौलत पुरखों की जमीन सब चला गया। लेकिन बेटे का दर्द देखा नहीं जा रहा था सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु मांगी उसके बाद एम्स में एडमिट करने के लिए कहा गया। ब्रह्मकुमारी केंद्र की वरिष्ठ लवली दीदी जिसमें वो कहती नजर आ रही है सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए सो जाओ। जिसने भी यह विडियो देखी और सुनी बहुत ही भावुक हो गया।1
- रचनात्मक शिक्षक मंडल की पहल पर शिक्षकों एवं बच्चों की तीन दिवसीय हिंदी भाषा शिक्षण की कार्यशाला आज ज्योतिबा फुले सावित्रीबाई फुले सायंकालीन स्कूल सांवल्दे(पश्चिम) में शुरू हो गई. कार्यशाला की शुरुआत बच्चों द्वारा लोक पर्व फूलदेई मना कर हुई.कार्यशाला के पहले सत्र में आज शिक्षकों और विद्यार्थियों से उनके पढ़ने लिखने के अनुभवों पर बातचीत की गई. कार्यशाला में बतौर विषय विशेषज्ञ एस सी ई आर टी में रहे वरिष्ठ प्रवक्ता मदन पांडे जी रहे. बातचीत खासकर भाषा सीखने के उनके अनुभवों पर केंद्रित रही.प्रतिभागियों ने बताया कि बचपन में भाषा सीखने में उन्हें अलग अलग लोगों और कारणों से मदद मिली.कुछ मामलों में परिवारजनों ने भूमिका निभाई कुछ में शिक्षकों ने.अनेक ने बताया कि सीखने के दौरान उन्हें भय अनुभव होता था. अनुभवों का सत्र पूरा होने के बाद मदन पांडे जी द्वारा भाषा में विभिन्न तरीकों से भाषा निर्माण की गतिविधियों को कराया गया.इनमें एक चीज पर एक वाक्य बोलना,किसी एक चीज पर दो और तीन वाक्य बोलना,किसी वस्तु पर लगातार एक मिनट बोलना तथा एक चीज के पक्ष और विपक्ष में एक ही वाक्य में बोलने के अभ्यास कराए गए.फिर दो दो की टोलियों में किसी वस्तु की प्रशंसा और निंदा में तीन तीन वाक्य बोलने के अभ्यास कराए गए. इन गतिविधियों द्वारा स्पष्ट किया गया कि जब हमारे सामने किसी विषय या वस्तु पर बोलने की चुनौती रखी जाती है तो हमारा दिमाग उसी के अनुसार भाषा खोजने लगता है. मदन पांडे जी ने कहा भाषा मनुष्य का आविष्कार है.पशु पक्षियों के पास दर्जनों ध्वनि संकेत तो होते हैं पर भाषा नहीं होती.स्कूलों और कक्षाओं में भाषा को सृजनात्मक ढंग से उपयोग करने की जरूरत होती है. बच्चों से जितना अधिक ढांचों ,तरीकों से भाषा निर्माण कराया जाएगा बच्चे उतनी ही अधिक भाषा सीखेंगे. प्रात 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और फिर सांय साढ़े तीन से 6 बजे तक चली कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी रही.कार्यशाला कल भी प्रात 9 बजे से शुरू होगी..4
- Post by 7News Live Uk1
- अल्मोड़ा। जनपद में रविवार को लोकपर्व फूलदेई उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में चैत्र माह की संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला यह विशेष लोकपर्व प्रकृति और संस्कृति के अनूठे संगम का प्रतीक माना जाता है। बच्चों के बीच इसकी विशेष लोकप्रियता के कारण इसे बालपर्व भी कहा जाता है। फूलों की खुशबू से महकता यह पर्व चैत्र माह के पहले दिन मनाया जाता है, जो प्रायः मार्च के मध्य में पड़ता है। इस वर्ष फूलदेई का पर्व रविवार, 15 मार्च को मनाया गया। इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और इसका संबंध उत्तराखंड के ग्रामीण समाज में सामूहिकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और आपसी सद्भाव से जुड़ा है। इस दिन छोटे बच्चे सुबह जल्दी उठकर बगीचों और जंगलों से रंग-बिरंगे फूल तोड़कर लाते हैं और उन्हें गांव व कस्बों के घरों की दहलीज पर सजाते हैं। यह परंपरा घर-परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना से जुड़ी मानी जाती है। बच्चे घर-घर जाकर 'फूलदेई, छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार' गाकर आशीर्वाद मांगते हैं, जिसका अर्थ है कि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। बदले में उन्हें चावल, गुड़, पैसे या अन्य उपहार दिए जाते हैं। रात्रि में बच्चों द्वारा एकत्रित चावल और गुड़ से पारंपरिक पकवान ‘सेई’ बनाया जाता है। फूलदेई पर्व की जड़ें उत्तराखंड की कृषि परंपराओं से भी जुड़ी हुई हैं। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है, जब पेड़-पौधे नई कोंपलों और फूलों से लद जाते हैं। घरों की चौखट पर फूल सजाने का अर्थ प्रकृति का स्वागत करना और परिवार की खुशहाली की कामना करना होता है। रविवार सुबह ठंड के मौसम के साथ हल्की बारिश के छींटे भी पड़े। इसके बावजूद अल्मोड़ा में फूलदेई के दिन बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चे एक घर से दूसरे घर जाकर दहलीज पर फूल डालते हुए 'फूलदेई, छम्मा देई' गाते नजर आए और पूरे क्षेत्र में पर्व का उल्लास दिखाई दिया।1
- हिन्दू नव वर्ष और चैत्र मास आगमन के अवसर पर नगर पालिका चिलियानौला की ओर से रविवार की देर शाम यहां चौमूथान मंदिर परिसर के निर्माणाधीन पार्क में झोड़ा गायन का आयोजन हुआ। पारम्परिक संस्कृति को बचाने और युवा पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से झोड़ा गायन का आयोजन हुआ, जिसमें क्षेत्र की महिलाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की। पालिकाध्यक्ष अरुण रावत ने कहा कि भविष्य में इस आयोजन को वृहद रूप दिया जाएगा। सभासद सुंदर कुवार्बी ने बताया कि शार्ट नोटिस में महिलाएं पहुंच गई यह प्राचीन परम्परा को लेकर उनके उत्साह को दर्शाता है। यहां व्यापार मंडल अध्यक्ष कमलेश बोरा, ललित बिष्ट, हरीश सिंह देव, धर्मेंद्र सिंह अधिकारी सहित पालिका कि महिलाओं ने सहयोग किया।1
- Post by Peshkar1
- Post by Kanchan Kanchan1
- हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 24 फरवरी 2026 को दिए गए आदेश के क्रम में उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल द्वारा जिला प्रशासन नैनीताल के साथ हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न 6 स्थानों- *रेलवे स्टेशन हल्द्वानी, अंजुमन इस्लामिया बालिका पूर्व माध्यमिक विद्यालय किदवई नगर,राजकीय प्राथमिक विद्यालय बनभूलपुरा, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज बनभूलपुरा, राजकीय इंटर कॉलेज बनभूलपुरा, मदरसा नैनीताल पब्लिक स्कूल बनभूलपुरा* में आगामी 20 मार्च से 31 मार्च 2026 तक शिविर लगाए जाने हैं। इन लगाए जाने वाले कैम्पों के आयोजन के संबंध में रविवार को जिलाधिकारी कैंप कार्यालय हल्द्वानी में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल,जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, रेलवे के अधिकारियों के मध्य एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के समयबद्ध अनुपालन पर जोर दिया गया। बैठक में सदस्य सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण प्रदीप कुमार मणि त्रिपाठी ने अवगत कराया कि हमारा प्रयास रहेगा कि इन 6 कैंप वाले स्थानों से अधिक से अधिक परिवारों तक हम पहुंच पाए और यह कोशिश करें कि कोई भी परिवार न छूटे और उन्हें इन पुनर्वास कैंपों के बारे में जागरूक करें। उनके प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो आवेदन हैं वह आमंत्रित किए जाएं और भरवाए जाएं। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि जिला प्रशासन नैनीताल के अनुसार लगभग 5300 से अधिक परिवार हैं, प्रयास रहेगा कि विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम तथा न्यायिक अधिकारियों टीम के साथ रेलवे और प्रशासन की टीम के साथ उन परिवारों तक पहुंच जाए और उनको इस योजना के बारे में बता पाएं जो पात्र व्यक्ति हैं उन तक इस योजना का लाभ पंहुचा जाए। उन्होंने कहा कि यह प्रयास रहेगा कि 31 मार्च 2026 तक कार्य पूर्ण कर माननीय उच्चतम न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकें। बैठक में 20 मार्च से 31 मार्च तक आयोजित होने वाले कैंपों की आवश्यक तैयारी के बारे में विचार विमर्श किया गया तथा तैयारी की जानकारी से अवगत कराया गया। सदस्य सचिव राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि प्रत्येक कैंप में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था हेतु आरपीएफ भी मौजूद रहेगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मंगलवार से क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित फॉर्म का वितरण विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल एवं जिला प्रशासन की टीम के माध्यम से घर घर जाकर वितरित किए जाएंगे। साथ ही कैंपों में भी पर्याप्त संख्या में यह आवेदन रखे जाएंगे। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने अवगत कराया कि इस कार्य में स्थानीय पार्षदों के अतिरिक्त सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी प्रचार प्रसार किया जाय, आवेदकों को फार्मों का वितरण सुनिश्चित करते हुए, उनकी पात्रता की गहनता से जांच का कार्य भी समय पर पूर्ण किया जाय। उन्होंने यह भी कहा कि सभी टीम फार्म वितरण से संबंधित सूचना पंजिका में अंकित करेंगे और मॉनिटरिंग भी लगातार की जाएगी। जिला अधिकारी ने कहा कि फार्म वितरण से पूर्व संबंधित टीम को सोमवार को प्रशिक्षण दिया जाएगा। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के क्रम में सभी विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर निर्धारित अवधि में, सौपी गयी जिम्मेदारियों को पूर्ण करना सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। बैठक से पूर्व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम द्वारा जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ इन सभी 6 कैम्प स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ मंजूनाथ टीसी,उप सचिव राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण अभिषेक कुमार श्रीवास्तव, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल पारुल थपलियाल, पुलिस अधीक्षक मनोज कत्याल, सिटी मजिस्ट्रेट ए.पी. वाजपेयी, आयुक्त नगर निगम परितोष वर्मा उपजिलाधिकारी हल्द्वानी प्रमोद कुमार, तहसीलदार कुलदीप पाण्डे सहित वीसी के माध्यम से रेलवे के एडीआरएम मनोज कुमार, सुरक्षा प्रभारी पवन, बृजेश कुमार एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।4