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कोचर ने कहा कि जिले में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी एवं गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी है, किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक की स्थिति न बनाएं। कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी डीजल, पेट्रोल, गैस की कोई कमी नहीं कलेक्टर दमोह -कलेक्टर श्री सुधीर कोचर ने कहा कि जिले में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी एवं गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी है, किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक की स्थिति न बनाएं। कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी दल गठित किए गए हैं तथा शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम भी सक्रिय किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।

20 hrs ago
user_Reeport 100
Reeport 100
Artist पटेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
20 hrs ago

कोचर ने कहा कि जिले में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी एवं गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी है, किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक की स्थिति न बनाएं। कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी डीजल, पेट्रोल, गैस की कोई कमी नहीं कलेक्टर दमोह -कलेक्टर श्री सुधीर कोचर ने कहा कि जिले में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी एवं गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी है, किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक की स्थिति न बनाएं। कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी दल गठित किए गए हैं तथा शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम भी सक्रिय किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।

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  • अफवाहों पर ध्यान न दें, जिले में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं: कलेक्टर दमोह। जिले में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर प्रशासन ने स्पष्टीकरण दिया है। Sudhir Kumar Kochar कलेक्टर ने कहा कि जिले में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर अनावश्यक खरीदारी न करें। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कहीं जमाखोरी या कालाबाजारी की शिकायत मिलती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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    अफवाहों पर ध्यान न दें, जिले में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं: कलेक्टर
दमोह। जिले में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर प्रशासन ने स्पष्टीकरण दिया है। Sudhir Kumar Kochar कलेक्टर ने कहा कि जिले में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कमी नहीं है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर अनावश्यक खरीदारी न करें। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कहीं जमाखोरी या कालाबाजारी की शिकायत मिलती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    user_Bhupendra Rai दबंग इंडिया
    Bhupendra Rai दबंग इंडिया
    Journalist Damoh, Madhya Pradesh•
    19 hrs ago
  • पूरा मामला कटनी जिले के ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द का है जहां पर पदस्थ सचिव सुलेखा गुप्ता ने दिनांक 20फरवरी से कम नहीं कर रही बगैर किसी ट्रांसफर आदेश की जनपद पंचायत कटनी में लिखकर यह कह दिया कि ग्राम पंचायत केलवाड़ा खुर्द में काम नहीं करना चाहती और काम बंद कर दिया सरपंच की भाग दौड़ के पश्चात मीडिया पर उछल रही खबरों के पश्चात जनपद पंचायत कटनी हरकत में आया कारण बताओं नोटिस दिया नोटिस में तीन दिवस के भीतर जवाब देने को कहा जिस पर सुलेख गुप्ता ने मनमानी करते हुए आज तक जवाब नहीं दिया सूत्रों की माने जिला पंचायत कटनी के द्वारा दूसरी सचिन की व्यवस्था कर दी गई है लेकिन प्रशासन पर प्रश्न चिन्ह लगने लगे लजीब है अब जिला पंचायत जनपद पंचाय फेलियर नहीं है क्या ऐसी सचिव पर कड़ी कार्यवाही नहीं बनती है सवाल है सिस्टम पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों से
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    पूरा मामला कटनी जिले के ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द  का है जहां पर पदस्थ सचिव सुलेखा गुप्ता ने दिनांक 20फरवरी से कम नहीं कर रही बगैर किसी ट्रांसफर आदेश की जनपद पंचायत कटनी में लिखकर यह कह दिया कि ग्राम पंचायत केलवाड़ा खुर्द में 
काम नहीं करना चाहती और काम बंद कर दिया सरपंच की भाग दौड़ के पश्चात मीडिया पर उछल रही खबरों के पश्चात जनपद पंचायत कटनी हरकत में आया कारण बताओं नोटिस दिया नोटिस में तीन दिवस के भीतर जवाब देने को कहा जिस पर सुलेख गुप्ता ने मनमानी करते हुए आज तक जवाब नहीं दिया सूत्रों की माने जिला पंचायत कटनी के द्वारा दूसरी सचिन की व्यवस्था कर दी गई है लेकिन प्रशासन पर प्रश्न चिन्ह लगने लगे लजीब है अब जिला पंचायत जनपद पंचाय फेलियर नहीं है क्या ऐसी सचिव पर कड़ी कार्यवाही नहीं बनती है सवाल है सिस्टम पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों से
    user_प्रधान संपादक Rudradatt Pande
    प्रधान संपादक Rudradatt Pande
    Accountant कटनी नगर, कटनी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • “काला कानून वापस लो” के नारों से दहला बरही: करणी सेना की हुंकार, सैकड़ों वाहनों के साथ सवर्ण समाज सड़कों पर बरही (कटनी)। यूजीसी के प्रस्तावित नए कानून के खिलाफ बरही नगर में गुरुवार को जबरदस्त जनआक्रोश देखने को मिला। श्री राजपूत करणी सेना के नेतृत्व में सवर्ण समाज के सैकड़ों युवाओं और नागरिकों ने विशाल वाहन रैली निकालकर सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लंबे काफिले के साथ निकली यह रैली जब नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी तो पूरा बरही “काला कानून वापस लो”, “सवर्ण समाज के अधिकारों का हनन बंद करो” और “तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे गगनभेदी नारों से गूंज उठा। काले झंडों के साथ सड़कों पर उतरा सवर्ण समाज प्रदर्शनकारियों के हाथों में काले झंडे, बैनर और तख्तियां थीं। नगर के मुख्य चौराहों पर रैली के पहुंचते ही माहौल पूरी तरह आंदोलनमय हो गया। जगह-जगह लोगों ने रैली का समर्थन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। रैली में युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। सैकड़ों वाहनों की कतारों ने बरही की सड़कों को मानो आंदोलन की आवाज में बदल दिया। करणी सेना की दो टूक: “अधिकारों पर वार बर्दाश्त नहीं” सभा को संबोधित करते हुए श्री राजपूत करणी सेना के संभाग अध्यक्ष विशाल सिंह ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यूजीसी का यह नया कानून सवर्ण समाज के अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा— “यदि सरकार ने इस अन्यायपूर्ण कानून को जल्द वापस नहीं लिया तो सवर्ण समाज पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन छेड़ने के लिए मजबूर होगा। यह लड़ाई अब आर-पार की होगी।” मुख्यमंत्री के दौरे पर होगा बड़ा विरोध आंदोलनकारियों ने ऐलान किया कि यह संघर्ष यहीं नहीं थमेगा। आंदोलन की अगली कड़ी में 14 मार्च को बरही दौरे पर आ रहे मुख्यमंत्री को सवर्ण समाज द्वारा ज्ञापन सौंपा जाएगा। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के सामने इस कानून को निरस्त करने की मांग जोरदार तरीके से रखी जाएगी और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।
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    “काला कानून वापस लो” के नारों से दहला बरही: करणी सेना की हुंकार, सैकड़ों वाहनों के साथ सवर्ण समाज सड़कों पर
बरही (कटनी)। यूजीसी के प्रस्तावित नए कानून के खिलाफ बरही नगर में गुरुवार को जबरदस्त जनआक्रोश देखने को मिला। श्री राजपूत करणी सेना के नेतृत्व में सवर्ण समाज के सैकड़ों युवाओं और नागरिकों ने विशाल वाहन रैली निकालकर सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया।
दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लंबे काफिले के साथ निकली यह रैली जब नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी तो पूरा बरही “काला कानून वापस लो”, “सवर्ण समाज के अधिकारों का हनन बंद करो” और “तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे गगनभेदी नारों से गूंज उठा।
काले झंडों के साथ सड़कों पर उतरा सवर्ण समाज
प्रदर्शनकारियों के हाथों में काले झंडे, बैनर और तख्तियां थीं। नगर के मुख्य चौराहों पर रैली के पहुंचते ही माहौल पूरी तरह आंदोलनमय हो गया। जगह-जगह लोगों ने रैली का समर्थन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
रैली में युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। सैकड़ों वाहनों की कतारों ने बरही की सड़कों को मानो आंदोलन की आवाज में बदल दिया।
करणी सेना की दो टूक: “अधिकारों पर वार बर्दाश्त नहीं”
सभा को संबोधित करते हुए श्री राजपूत करणी सेना के संभाग अध्यक्ष विशाल सिंह ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यूजीसी का यह नया कानून सवर्ण समाज के अधिकारों पर सीधा हमला है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा—
“यदि सरकार ने इस अन्यायपूर्ण कानून को जल्द वापस नहीं लिया तो सवर्ण समाज पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन छेड़ने के लिए मजबूर होगा। यह लड़ाई अब आर-पार की होगी।”
मुख्यमंत्री के दौरे पर होगा बड़ा विरोध
आंदोलनकारियों ने ऐलान किया कि यह संघर्ष यहीं नहीं थमेगा। आंदोलन की अगली कड़ी में 14 मार्च को बरही दौरे पर आ रहे मुख्यमंत्री को सवर्ण समाज द्वारा ज्ञापन सौंपा जाएगा।
समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के सामने इस कानून को निरस्त करने की मांग जोरदार तरीके से रखी जाएगी और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।
    user_Balkishan Namdev
    Balkishan Namdev
    Electrician कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • छतरपुर जिले से लगे हुए पन्ना जिले से खबर आ रही है निकालकर केन–बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना और रूँझ मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों द्वारा जय किसान संगठन के बैनर तले चलाया जा रहा “न्याय सत्याग्रह” आंदोलन दूसरे दिन कई उतार-चढ़ावों के बाद एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा। दिन भर चले तनावपूर्ण घटनाक्रम, ताला बंदी, गिरफ्तारी और हल्के लाठीचार्ज जैसे घटनाक्रमों के बीच अंततः प्रशासन को किसानों के साथ वार्ता करनी पड़ी और कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि आंदोलन स्थगित किया गया है, समाप्त नहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा “यदि प्रशासन अपने वादे से मुकरा या तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन पहले से ज्यादा व्यापक और तेज होगा। आंदोलन का दूसरा दिन रहा बेहद तनावपूर्ण दूसरे दिन भी हजारों किसान और आदिवासी महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर में डटी रहीं। प्रशासन द्वारा पानी की सप्लाई रोक दिए जाने के बावजूद आंदोलनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ बल्कि लोगों की संख्या और बढ़ती गई। भीड़ बढ़ने और आंदोलन मजबूत होने से जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ता गया। इसी बीच प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के कुछ हिस्सों को बंद कर दिया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। जब प्रशासन ने आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर को चर्चा के लिए बुलाया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी प्राथमिक मांग है कि परियोजना से संबंधित सभी दस्तावेज प्रभावित ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे पूरी जानकारी के साथ आगे की प्रक्रिया तय कर सकें। बताया जाता है कि प्रशासन ने उन्हें दस्तावेज दिखाने के नाम पर अंदर बुलाया, लेकिन उसी दौरान परिसर में धारा 144 लागू करने की घोषणा कर दी गई और अमित भटनागर को उससे संबंधित नोटिस थमा दिया गया। इस कार्रवाई को आंदोलनकारियों ने प्रशासन की तानाशाही और अमानवीय रवैया बताते हुए विरोध किया। इसी दौरान एसडीएम और आंदोलनकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। गिरफ्तारी की घोषणा, महिलाओं का आक्रोश स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमित भटनागर ने अपनी गिरफ्तारी देने की घोषणा कर दी। उनकी घोषणा के बाद पन्ना एसडीएम ने उनको गिरफ्तार कर अंदर ले जाने लगे। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में मौजूद महिलाओं और किसानों ने भी गिरफ्तारी देने का ऐलान कर दिया। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी और हल्का लाठीचार्ज भी हुआ, इसी दौरान अमित भटनागर और एसडीएम पन्ना के बीच में तीखी नोकझोंक भी हुई। जय किसान संगठन के कार्यकर्ता मंगल यादव को भी इस दौरान चोट लगने की जानकारी सामने आई है। स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया, लेकिन हजारों किसानों और महिलाओं ने आंदोलन स्थल छोड़ने से साफ इनकार कर दिया और गिरफ्तारी देने पर अड़ गए। दबाव में प्रशासन को करनी पड़ी वार्ता बड़ी संख्या में महिलाओं और किसानों के गिरफ्तारी देने की घोषणा के बाद प्रशासन के सामने स्थिति जटिल हो गई। अंततः प्रशासन ने आंदोलनकारियों को वार्ता के लिए बुलाया और कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। इसके बाद जय किसान संगठन ने निम्नलिखित शर्तों पर “न्याय सत्याग्रह” आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की। सहमति के मुख्य बिंदु परियोजना प्रभावित प्रत्येक गांव में ग्रामीण प्रशासन द्वारा दिए गए प्रारूप में परियोजना से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख करेंगे। इन समस्याओं को जिला प्रशासन को सौंपने के बाद 7 दिन के भीतर उनके निराकरण की प्रक्रिया कर दी जाएगी। जब तक समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक प्रभावित गांवों में किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय और रूँझ परियोजना से संबंधित प्रशासनिक आदेश, धारा 11 की कार्यवाही, ग्राम सभा की कार्यवाही, अवार्ड तथा अन्य सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपि 5 दिन के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन के माध्यम से सरकार को भेजी जाएंगी ये मांगें प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों से उनके बसे-बसाए गांव जबरन न छीने जाएं। यदि विस्थापन आवश्यक हो तो भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास किया जाए। प्रभावित परिवारों को गांव के बदले गांव बसाकर और कृषि भूमि देकर पुनर्वास किया जाए। प्रभावित महिलाओं के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज प्रदान किया जाए। आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन आंदोलन की जानकारी मिलने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मामले का संज्ञान लिया और अपने प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव को आंदोलन स्थल भेजा। मनोज यादव ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अखिलेश यादव का संदेश पढ़कर सुनाया और किसानों के आंदोलन को खुला समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों और आदिवासी परिवारों को अपनी मांगों के लिए दो-दो दिन तक आंदोलन करना पड़ रहा है, जिससे सरकार की संवेदनहीनता उजागर होती है। व्यापक जनसमर्थन के साथ हुआ आंदोलन इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, आदिवासी महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। पन्ना जिले में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए एकजुट होते दिखाई दिए इसमें प्रमुख रूप से अमित भटनागर के साथ, बब्लू यादव, महेश आदिवासी, दिव्या अहिरवार, चिरौनिया आदिवासी,सारनिया आदिवासी, कमलाबाई मंगल यादव, पप्पू आदिवासी, राजू आदिवासी, केदार आदिवासी, लेखराम यादव, लक्ष्मी प्रसाद विश्वकर्मा, कल्लू आदिवासी गनपत, आदिवासी राजाबेटी आदिवासी, अभू आदिवासी, हल्कुश यादव, रवि आदिवासी,रामकिशोर यादव, राजकुमार तिवारी, शंकर आदिवासी, मुकुंदे आदिवासी, वंश गोपाल सोनी, कमलारानी आदिवासी, शिवरतन दयाराम आदिवासी, महेश आदिवासी, जगदीश आदिवासी, यादव, विद्या रानी, आदिवासी राजू आदिवासी सहित हजारों आदिवासी किसान सहभागी हुये। मीडिया सेल जय किसान संगठन ✊ जय किसान
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    छतरपुर जिले से लगे हुए पन्ना जिले से खबर आ रही है निकालकर 
केन–बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना और रूँझ मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों द्वारा जय किसान संगठन के बैनर तले चलाया जा रहा “न्याय सत्याग्रह” आंदोलन दूसरे दिन कई उतार-चढ़ावों के बाद एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा।
दिन भर चले तनावपूर्ण घटनाक्रम, ताला बंदी, गिरफ्तारी और हल्के लाठीचार्ज जैसे घटनाक्रमों के बीच अंततः प्रशासन को किसानों के साथ वार्ता करनी पड़ी और कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि आंदोलन स्थगित किया गया है, समाप्त नहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा 
“यदि प्रशासन अपने वादे से मुकरा या तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन पहले से ज्यादा व्यापक और तेज होगा।
आंदोलन का दूसरा दिन रहा बेहद तनावपूर्ण
दूसरे दिन भी हजारों किसान और आदिवासी महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर में डटी रहीं। प्रशासन द्वारा पानी की सप्लाई रोक दिए जाने के बावजूद आंदोलनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ बल्कि लोगों की संख्या और बढ़ती गई। भीड़ बढ़ने और आंदोलन मजबूत होने से जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ता गया। इसी बीच प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के कुछ हिस्सों को बंद कर दिया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
जब प्रशासन ने आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर को चर्चा के लिए बुलाया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी प्राथमिक मांग है कि परियोजना से संबंधित सभी दस्तावेज प्रभावित ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे पूरी जानकारी के साथ आगे की प्रक्रिया तय कर सकें। बताया जाता है कि प्रशासन ने उन्हें दस्तावेज दिखाने के नाम पर अंदर बुलाया, लेकिन उसी दौरान परिसर में धारा 144 लागू करने की घोषणा कर दी गई और अमित भटनागर को उससे संबंधित नोटिस थमा दिया गया। इस कार्रवाई को आंदोलनकारियों ने प्रशासन की तानाशाही और अमानवीय रवैया बताते हुए विरोध किया। इसी दौरान एसडीएम और आंदोलनकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई।
गिरफ्तारी की घोषणा, महिलाओं का आक्रोश
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमित भटनागर ने अपनी गिरफ्तारी देने की घोषणा कर दी। उनकी घोषणा के बाद पन्ना एसडीएम ने उनको गिरफ्तार कर अंदर ले जाने लगे। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में मौजूद महिलाओं और किसानों ने भी गिरफ्तारी देने का ऐलान कर दिया। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी और हल्का लाठीचार्ज भी हुआ, इसी दौरान अमित भटनागर और एसडीएम पन्ना के बीच में तीखी नोकझोंक भी हुई। जय किसान संगठन के कार्यकर्ता मंगल यादव को भी इस दौरान चोट लगने की जानकारी सामने आई है। स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया, लेकिन हजारों किसानों और महिलाओं ने आंदोलन स्थल छोड़ने से साफ इनकार कर दिया और गिरफ्तारी देने पर अड़ गए।
दबाव में प्रशासन को करनी पड़ी वार्ता
बड़ी संख्या में महिलाओं और किसानों के गिरफ्तारी देने की घोषणा के बाद प्रशासन के सामने स्थिति जटिल हो गई। अंततः प्रशासन ने आंदोलनकारियों को वार्ता के लिए बुलाया और कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनी।
इसके बाद जय किसान संगठन ने निम्नलिखित शर्तों पर “न्याय सत्याग्रह” आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की।
सहमति के मुख्य बिंदु
परियोजना प्रभावित प्रत्येक गांव में ग्रामीण प्रशासन द्वारा दिए गए प्रारूप में परियोजना से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख करेंगे।
इन समस्याओं को जिला प्रशासन को सौंपने के बाद 7 दिन के भीतर उनके निराकरण की प्रक्रिया कर दी जाएगी।
जब तक समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक प्रभावित गांवों में किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय और रूँझ परियोजना से संबंधित प्रशासनिक आदेश, धारा 11 की कार्यवाही, ग्राम सभा की कार्यवाही, अवार्ड तथा अन्य सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपि 5 दिन के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रशासन के माध्यम से सरकार को भेजी जाएंगी ये मांगें
प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों से उनके बसे-बसाए गांव जबरन न छीने जाएं।
यदि विस्थापन आवश्यक हो तो भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।
आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास किया जाए।
प्रभावित परिवारों को गांव के बदले गांव बसाकर और कृषि भूमि देकर पुनर्वास किया जाए।
प्रभावित महिलाओं के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज प्रदान किया जाए।
आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन
आंदोलन की जानकारी मिलने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मामले का संज्ञान लिया और अपने प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव को आंदोलन स्थल भेजा। मनोज यादव ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अखिलेश यादव का संदेश पढ़कर सुनाया और किसानों के आंदोलन को खुला समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों और आदिवासी परिवारों को अपनी मांगों के लिए दो-दो दिन तक आंदोलन करना पड़ रहा है, जिससे सरकार की संवेदनहीनता उजागर होती है।
व्यापक जनसमर्थन के साथ हुआ आंदोलन
इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, आदिवासी महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
पन्ना जिले में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए एकजुट होते दिखाई दिए इसमें प्रमुख रूप से अमित भटनागर के साथ, बब्लू यादव, महेश आदिवासी, दिव्या अहिरवार, चिरौनिया आदिवासी,सारनिया आदिवासी, कमलाबाई मंगल यादव, पप्पू आदिवासी, राजू आदिवासी, केदार आदिवासी, लेखराम यादव, लक्ष्मी प्रसाद विश्वकर्मा, कल्लू आदिवासी गनपत, आदिवासी राजाबेटी आदिवासी, अभू आदिवासी, हल्कुश यादव, रवि आदिवासी,रामकिशोर यादव, राजकुमार तिवारी, शंकर  आदिवासी, मुकुंदे आदिवासी, वंश गोपाल सोनी, कमलारानी आदिवासी, शिवरतन दयाराम आदिवासी, महेश आदिवासी, जगदीश आदिवासी, यादव, विद्या रानी, आदिवासी राजू आदिवासी सहित हजारों आदिवासी किसान सहभागी हुये।
मीडिया सेल 
जय किसान संगठन
✊ जय किसान
    user_राजू जोशी महाराज
    राजू जोशी महाराज
    Social worker बिजावर, छतरपुर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • जबलपुर मे लगातार तापमान में हो रही वृद्धि नगर में आज का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लोगों को इस साल बहुत तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है
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    जबलपुर मे लगातार तापमान में हो रही वृद्धि नगर में आज का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
लोगों को इस साल बहुत तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है
    user_Saksham Rajpoot
    Saksham Rajpoot
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • जबलपुर के कुंडम थाना क्षेत्र के ग्राम जमुनिया बदरिया में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक युवक ने अपनी ही मां की हंसिया से वार कर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि आरोपी बेटे ने पहले मां से खाना मांगा, लेकिन मां ने कहा कि खाना अभी नहीं बना है। इसी बात पर दोनों के बीच विवाद हो गया। ⚠ गुस्से में किया हमला कुछ देर बाद आरोपी फिर घर आया और पहले तसले से हमला किया, जिससे मां जमीन पर गिर गई। इसके बाद उसने हंसिया उठाकर गले और सिर पर वार कर दिया, जिससे महिला की मौके पर ही मौत हो गई। 👨‍👩‍👧‍👦 परिवार के सामने हुई वारदात घटना के समय घर में पिता, छोटा भाई और बहन भी मौजूद थे। आरोपी ने पिता को धक्का दिया और परिवार को धमकाते हुए जंगल की ओर भाग गया। 🚔 पुलिस ने किया गिरफ्तार घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए कुंडम स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। 📍 स्थान: जबलपुर, मध्यप्रदेश 🎤 रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा 📰 सच तक पत्रिका न्यूज़ --- 👉 Follow करें: @sachtakpatrikanews 👉 Follow करें: @deepak_vishwakarma_89 --- 👇 आपकी क्या राय है? क्या गुस्से में होने वाले अपराधों को रोकने के लिए समाज को ज्यादा जागरूक होने की जरूरत है? Comment में जरूर बताएं।
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    जबलपुर के कुंडम थाना क्षेत्र के ग्राम जमुनिया बदरिया में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक युवक ने अपनी ही मां की हंसिया से वार कर हत्या कर दी।
बताया जा रहा है कि आरोपी बेटे ने पहले मां से खाना मांगा, लेकिन मां ने कहा कि खाना अभी नहीं बना है। इसी बात पर दोनों के बीच विवाद हो गया।
⚠ गुस्से में किया हमला
कुछ देर बाद आरोपी फिर घर आया और पहले तसले से हमला किया, जिससे मां जमीन पर गिर गई। इसके बाद उसने हंसिया उठाकर गले और सिर पर वार कर दिया, जिससे महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
👨‍👩‍👧‍👦 परिवार के सामने हुई वारदात
घटना के समय घर में पिता, छोटा भाई और बहन भी मौजूद थे। आरोपी ने पिता को धक्का दिया और परिवार को धमकाते हुए जंगल की ओर भाग गया।
🚔 पुलिस ने किया गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए कुंडम स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है।
📍 स्थान: जबलपुर, मध्यप्रदेश
🎤 रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा
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    user_Deepak Vishwakarma
    Deepak Vishwakarma
    Journalist जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by नीलेश विश्वकर्मा
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    Post by नीलेश विश्वकर्मा
    user_नीलेश विश्वकर्मा
    नीलेश विश्वकर्मा
    Voice of people दन्यांतिनगर, दमोह, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • एटीएम लूट आरोपी को छुड़ाने की कोशिश, हरियाणा में मेघालय पुलिस पर हमला; पुलिस फायरिंग में युवक घायल खबर: नूंह जिले के मेवात इलाके में Meghalaya Police की टीम पर भीड़ ने हमला कर एटीएम लूट के आरोपी राहुल खान को छुड़ाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि भीड़ ने पुलिस वाहन को घेर लिया और हथियार छीनने का प्रयास किया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की, जिसमें एक युवक के पैर में गोली लग गई। मामले में पुलिस ने 12 नामजद आरोपियों समेत अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 🚨
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    एटीएम लूट आरोपी को छुड़ाने की कोशिश, हरियाणा में मेघालय पुलिस पर हमला; पुलिस फायरिंग में युवक घायल
खबर:
नूंह जिले के मेवात इलाके में Meghalaya Police की टीम पर भीड़ ने हमला कर एटीएम लूट के आरोपी राहुल खान को छुड़ाने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि भीड़ ने पुलिस वाहन को घेर लिया और हथियार छीनने का प्रयास किया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की, जिसमें एक युवक के पैर में गोली लग गई।
मामले में पुलिस ने 12 नामजद आरोपियों समेत अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 🚨
    user_Bhupendra Rai दबंग इंडिया
    Bhupendra Rai दबंग इंडिया
    Journalist Damoh, Madhya Pradesh•
    20 hrs ago
  • ग्राम डीडल, थाना ईशानगर जिला छतरपुर निवासी रचना कुशवाहा के यहाँ 3 फरवरी 2026 को जिला चिकित्सालय छतरपुर के लेबर रूम में एक बच्ची का जन्म हुआ। जन्म के समय बच्ची अत्यंत गंभीर अवस्था में थी, इसलिए उसे तुरंत जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) में भर्ती किया गया। बच्ची का जन्म 28 सप्ताह में ही हो गया था और उसका वजन मात्र 1 किलोग्राम था। गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने बच्ची को सीपीएपी मशीन पर रखा और एफबीएनसी गाइडलाइन के अनुसार उपचार एवं प्रबंधन शुरू किया। शुरुआती 11 दिनों तक बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया तथा इलाज के दौरान एक बार रक्त भी चढ़ाया गया। चिकित्सकों की देखरेख में बच्ची को नियमित रूप से माँ का दूध और केएमसी (कंगारू मदर केयर) दिया गया। लगातार 36 दिनों तक एसएनसीयू में चले उपचार और डॉक्टरों व स्टाफ की सतत निगरानी से बच्ची के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हुआ और उसके वजन में भी वृद्धि हुई। इलाज के बाद 11 मार्च 2026 को बच्ची पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। डिस्चार्ज के समय बच्ची का वजन 1.5 किलोग्राम हो गया था। साथ ही बच्ची की आरओपी स्क्रीनिंग भी की गई। बच्ची के सफल उपचार में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बच्ची की माँ ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। वहीं एसएनसीयू के समस्त स्टाफ ने बच्ची के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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    ग्राम डीडल, थाना ईशानगर जिला छतरपुर निवासी रचना कुशवाहा के यहाँ 3 फरवरी 2026 को जिला चिकित्सालय छतरपुर के लेबर रूम में एक बच्ची का जन्म हुआ। जन्म के समय बच्ची अत्यंत गंभीर अवस्था में थी, इसलिए उसे तुरंत जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) में भर्ती किया गया।
बच्ची का जन्म 28 सप्ताह में ही हो गया था और उसका वजन मात्र 1 किलोग्राम था। गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने बच्ची को सीपीएपी मशीन पर रखा और एफबीएनसी गाइडलाइन के अनुसार उपचार एवं प्रबंधन शुरू किया। शुरुआती 11 दिनों तक बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया तथा इलाज के दौरान एक बार रक्त भी चढ़ाया गया।
चिकित्सकों की देखरेख में बच्ची को नियमित रूप से माँ का दूध और केएमसी (कंगारू मदर केयर) दिया गया। लगातार 36 दिनों तक एसएनसीयू में चले उपचार और डॉक्टरों व स्टाफ की सतत निगरानी से बच्ची के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हुआ और उसके वजन में भी वृद्धि हुई।
इलाज के बाद 11 मार्च 2026 को बच्ची पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। डिस्चार्ज के समय बच्ची का वजन 1.5 किलोग्राम हो गया था। साथ ही बच्ची की आरओपी स्क्रीनिंग भी की गई।
बच्ची के सफल उपचार में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बच्ची की माँ ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। वहीं एसएनसीयू के समस्त स्टाफ ने बच्ची के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
    user_राजू जोशी महाराज
    राजू जोशी महाराज
    Social worker बिजावर, छतरपुर, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
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