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रामपुर में 'बेशर्म कार्ड' नामक स्थिति जिलाधिकारी पर भारी पड़ रही है। यह स्थिति सीधे तौर पर जिलाधिकारी को प्रभावित कर रही है।

5 hrs ago
user_Amit kumar
Amit kumar
Farmer शाहबाद, रामपुर, उत्तर प्रदेश•
5 hrs ago

रामपुर में 'बेशर्म कार्ड' नामक स्थिति जिलाधिकारी पर भारी पड़ रही है। यह स्थिति सीधे तौर पर जिलाधिकारी को प्रभावित कर रही है।

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  • रामपुर में 'बेशर्म कार्ड' नामक स्थिति जिलाधिकारी पर भारी पड़ रही है। यह स्थिति सीधे तौर पर जिलाधिकारी को प्रभावित कर रही है।
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    रामपुर में 'बेशर्म कार्ड' नामक स्थिति जिलाधिकारी पर भारी पड़ रही है। यह स्थिति सीधे तौर पर जिलाधिकारी को प्रभावित कर रही है।
    user_Amit kumar
    Amit kumar
    Farmer शाहबाद, रामपुर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • बरेली में 30 जून को प्रस्तावित वीवीआईपी दौरे को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में है। इस महत्वपूर्ण दौरे की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्वयं सभी कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया है। उन्होंने अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक भी की, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था सहित सभी आवश्यक इंतजामों का गहनता से जायजा लिया गया।
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    बरेली में 30 जून को प्रस्तावित वीवीआईपी दौरे को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में है। इस महत्वपूर्ण दौरे की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्वयं सभी कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया है। उन्होंने अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक भी की, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था सहित सभी आवश्यक इंतजामों का गहनता से जायजा लिया गया।
    user_News Network Bharatvarsh
    News Network Bharatvarsh
    Local News Reporter मीरगंज•
    3 hrs ago
  • कस्बा मीरगंज के मोहल्ला शिवपुरी स्थित पुरानी बाजार के प्राचीन शिव मंदिर में भारी बारिश के दौरान गंभीर जलभराव की समस्या बनी हुई है। मंदिर परिसर में पानी भर जाने के कारण श्रद्धालुओं को आने-जाने और पूजा-अर्चना करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, फिसलन के चलते कई बार श्रद्धालुओं के गिरकर चोटिल होने का खतरा बना रहता है, जिससे उनकी सुरक्षा पर सवाल उठते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ समय पहले बिजली गिरने से मंदिर का त्रिशूल भी टेढ़ा हो गया था, जिसकी मरम्मत आज तक नहीं कराई गई है। इन प्रमुख समस्याओं के साथ-साथ, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए पेयजल (प्याऊ) की भी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे असुविधा और बढ़ जाती है। क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर से जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, क्षतिग्रस्त त्रिशूल की शीघ्र मरम्मत कराई जाए और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसका उद्देश्य यह है कि सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सुगमता से दर्शन-पूजन कर सकें।
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    कस्बा मीरगंज के मोहल्ला शिवपुरी स्थित पुरानी बाजार के प्राचीन शिव मंदिर में भारी बारिश के दौरान गंभीर जलभराव की समस्या बनी हुई है। मंदिर परिसर में पानी भर जाने के कारण श्रद्धालुओं को आने-जाने और पूजा-अर्चना करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, फिसलन के चलते कई बार श्रद्धालुओं के गिरकर चोटिल होने का खतरा बना रहता है, जिससे उनकी सुरक्षा पर सवाल उठते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ समय पहले बिजली गिरने से मंदिर का त्रिशूल भी टेढ़ा हो गया था, जिसकी मरम्मत आज तक नहीं कराई गई है। इन प्रमुख समस्याओं के साथ-साथ, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए पेयजल (प्याऊ) की भी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे असुविधा और बढ़ जाती है।

क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर से जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, क्षतिग्रस्त त्रिशूल की शीघ्र मरम्मत कराई जाए और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसका उद्देश्य यह है कि सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सुगमता से दर्शन-पूजन कर सकें।
    user_Jitendra Mishra
    Jitendra Mishra
    Astrologer मीरगंज, बरेली, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • फरीदाबाद में एक हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है, जहाँ हरियाणा पुलिस ने एक आलीशान होटल से आईटी इंजीनियर को नकली नोट छापते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान विनायक झा के रूप में हुई है, जो फरीदाबाद के सेक्टर-17 का निवासी है और आईआईटी बेंगलुरु से पासआउट है। वह नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में ₹34 लाख के सालाना पैकेज पर आईटी प्रोफेशनल के तौर पर कार्यरत था। पुलिस के अनुसार, विनायक झा पिछले दो दिनों से फरीदाबाद के एक लक्जरी होटल में कमरा बुक करके रुका हुआ था। गुप्त सूचना के आधार पर सूरजकुंड थाना पुलिस ने होटल के कमरे में छापा मारा, जहाँ उसे नकली नोट बनाते हुए पकड़ा गया। यह भी सामने आया है कि विनायक झा एक बेहद संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता है, जिसके माता और पिता दोनों ही सरकारी नौकरी में ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं। पुलिस ने होटल के कमरे से ₹500 का एक नकली नोट और ₹100 के 10 नकली नोट बरामद किए हैं। इसके साथ ही, नकली नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, जिनमें एक लैपटॉप, एक हाई-क्वालिटी प्रिंटर और विशेष कागज शामिल हैं, भी जब्त किए गए हैं। सूरजकुंड थाना पुलिस ने विनायक झा के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह ने बताया कि बरामद किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और लैपटॉप की तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी ने पहले भी कहीं जाली नोटों की आपूर्ति की है और इस रैकेट में उसके साथ कोई और भी शामिल है या नहीं।
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    फरीदाबाद में एक हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है, जहाँ हरियाणा पुलिस ने एक आलीशान होटल से आईटी इंजीनियर को नकली नोट छापते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान विनायक झा के रूप में हुई है, जो फरीदाबाद के सेक्टर-17 का निवासी है और आईआईटी बेंगलुरु से पासआउट है। वह नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में ₹34 लाख के सालाना पैकेज पर आईटी प्रोफेशनल के तौर पर कार्यरत था।

पुलिस के अनुसार, विनायक झा पिछले दो दिनों से फरीदाबाद के एक लक्जरी होटल में कमरा बुक करके रुका हुआ था। गुप्त सूचना के आधार पर सूरजकुंड थाना पुलिस ने होटल के कमरे में छापा मारा, जहाँ उसे नकली नोट बनाते हुए पकड़ा गया। यह भी सामने आया है कि विनायक झा एक बेहद संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता है, जिसके माता और पिता दोनों ही सरकारी नौकरी में ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं।

पुलिस ने होटल के कमरे से ₹500 का एक नकली नोट और ₹100 के 10 नकली नोट बरामद किए हैं। इसके साथ ही, नकली नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, जिनमें एक लैपटॉप, एक हाई-क्वालिटी प्रिंटर और विशेष कागज शामिल हैं, भी जब्त किए गए हैं। सूरजकुंड थाना पुलिस ने विनायक झा के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह ने बताया कि बरामद किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और लैपटॉप की तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी ने पहले भी कहीं जाली नोटों की आपूर्ति की है और इस रैकेट में उसके साथ कोई और भी शामिल है या नहीं।
    user_आशीष कुमार मिश्रा
    आशीष कुमार मिश्रा
    Local News Reporter Chandausi, Sambhal•
    4 hrs ago
  • राम मंदिर से जुड़े एक घोटाले को लेकर एक खबर सामने आई है। यह पोस्ट इस मामले पर लोगों की राय जानना चाहती है।
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    राम मंदिर से जुड़े एक घोटाले को लेकर एक खबर सामने आई है। यह पोस्ट इस मामले पर लोगों की राय जानना चाहती है।
    user_Ayub Pasha
    Ayub Pasha
    Rampur, Uttar Pradesh•
    7 hrs ago
  • सोमवार दोपहर एक बजे उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने रामपुर नगर पालिका की विभिन्न समस्याओं को उठाते हुए सिटी मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधि मंडल ने स्पष्ट किया कि नगर पालिका की इन समस्याओं के कारण लोग पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
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    सोमवार दोपहर एक बजे उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने रामपुर नगर पालिका की विभिन्न समस्याओं को उठाते हुए सिटी मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधि मंडल ने स्पष्ट किया कि नगर पालिका की इन समस्याओं के कारण लोग पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
    user_Rampur Express
    Rampur Express
    Rampur, Uttar Pradesh•
    9 hrs ago
  • सोमवार को रामपुर की तहसील स्वार क्षेत्र में तमाम उलेमाओं ने सोशल मीडिया पर चर्चित नाजिया इलाही खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन स्वार SDM को सौंपा। यह ज्ञापन दोपहर करीब एक बजे दिया गया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि नाजिया इलाही खान ने एक इंटरव्यू के दौरान इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब और हजरत आयशा के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे मुस्लिम समुदाय के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उलेमाओं ने अपने ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया कि हजरत मोहम्मद साहब और हजरत आयशा का जीवन मानवता और समाज की सेवा के लिए एक आदर्श है। उन्होंने कथित टिप्पणी को गंभीर और निंदनीय करार दिया। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और संबंधित के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।
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    सोमवार को रामपुर की तहसील स्वार क्षेत्र में तमाम उलेमाओं ने सोशल मीडिया पर चर्चित नाजिया इलाही खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन स्वार SDM को सौंपा। यह ज्ञापन दोपहर करीब एक बजे दिया गया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि नाजिया इलाही खान ने एक इंटरव्यू के दौरान इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब और हजरत आयशा के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे मुस्लिम समुदाय के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

उलेमाओं ने अपने ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया कि हजरत मोहम्मद साहब और हजरत आयशा का जीवन मानवता और समाज की सेवा के लिए एक आदर्श है। उन्होंने कथित टिप्पणी को गंभीर और निंदनीय करार दिया। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और संबंधित के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।
    user_गुलफाम बक्श  9837568678
    गुलफाम बक्श 9837568678
    सुआर, रामपुर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • जनपद संभल में ₹101 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 38 बीघा सरकारी जमीन को अवैध रूप से निजी भू-स्वामियों के नाम दर्ज कर बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। एक शिकायत के बाद हुई गहन जांच में पता चला कि यह बेशकीमती 'नवीन परती' भूमि, जो संभल-मुरादाबाद हाईवे पर चार जुड़े हुए प्लॉट नंबरों के रूप में स्थित है, का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। लगभग 60 साल बाद, डीडीसी कोर्ट के आदेश पर अब खतौनी से निजी खातेदारों के नाम हटा दिए गए हैं और भूमि को राज्य सरकार तथा ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने रविवार शाम को तहसील संभल के थाना रायसत्ती क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं का दौरा किया और गाटा संख्या 206, 207, 233, 242/378 और 279 में लगभग डेढ़ घंटे तक जांच की। जिलाधिकारी ने बताया कि यह भूमि वर्ष 1954 में नगर पालिका परिषद संभल को प्रबंधन के लिए दी गई थी। इसके 13 साल बाद, वर्ष 1967 में, नगर पालिका परिषद ने कथित तौर पर कुछ पट्टेदारों को इस जमीन का पट्टा आवंटित कर दिया था। प्रथम दृष्टया, नगर पालिका को प्रबंधन के लिए दी गई जमीन का पट्टा करने का अधिकार नहीं था, जिसके कारण यह पट्टा शुरू से ही शून्य था। इसके बाद यह जमीन पट्टेदारों के कब्जे में आ गई। वर्ष 1991 में, अपर तहसीलदार कोर्ट ने सईदउल्लाह सहित इन अवैध कब्जाधारियों को अवैध घोषित करते हुए उनकी बेदखली का आदेश दिया। वर्ष 1992 में अपर जिलाधिकारी कोर्ट में की गई अपील भी खारिज हो गई और कोर्ट ने कब्जाधारियों को अवैध मानते हुए इसे सरकारी जमीन घोषित किया था। बाद में, चकबंदी कोर्ट में दायर एक वाद के बाद, वर्ष 2005 में चकबंदी अधिकारी ने सुनवाई कर इसे ग्राम सभा की भूमि के रूप में यथावत रखने का आदेश दिया। हालांकि, वर्ष 2008 में तत्कालीन डीडीसी प्रेम सिंह खड़क ने अपने क्षेत्राधिकार से परे जाकर और गलत तथ्यों के आधार पर इस जमीन को निजी खातेदारों का बता दिया और उन्हें कब्जा दिए जाने के आदेश भी जारी कर दिए। 2008 के इस आदेश के खिलाफ नगर पालिका प्रबंधन ने हाईकोर्ट में अपील दायर करने का प्रयास किया, लेकिन वर्ष 2013 में तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर कर कहा कि नगर पालिका इस मामले में पैरवी करने की इच्छुक नहीं है। हाल ही में जब यह पूरा प्रकरण अधिकारियों के संज्ञान में आया, तो 1954 से अब तक की पूरी जांच कराई गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह 'नवीन परती' की जमीन है और इसका उपयोग गलत लोगों द्वारा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया गया था। तत्काल संज्ञान लेते हुए एक टीम का गठन किया गया और डीडीसी कोर्ट में पुनर्स्थापना याचिका दायर की गई, जिसकी सुनवाई प्रतिदिन सुनिश्चित की गई। जिलाधिकारी के अनुसार, सुनवाई रोकने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुछ लोगों द्वारा प्रयास भी किए गए, लेकिन अंततः डीडीसी कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में निर्णय सुनाया। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, खतौनी से उन खातेदारों के नाम तुरंत हटाकर राज्य सरकार और ग्राम सभा का नाम 'नवीन परती' के अंतर्गत दर्ज किया गया। अब इस मामले में तत्कालीन ईओ, उस समय के नगर पालिका के मानचित्र बनाने वाले कर्मी, वर्ष 2005 और 2008 के डीडीसी, बैनामा कराने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों और मूल पट्टेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। साथ ही, विभागीय कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है।
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    जनपद संभल में ₹101 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 38 बीघा सरकारी जमीन को अवैध रूप से निजी भू-स्वामियों के नाम दर्ज कर बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। एक शिकायत के बाद हुई गहन जांच में पता चला कि यह बेशकीमती 'नवीन परती' भूमि, जो संभल-मुरादाबाद हाईवे पर चार जुड़े हुए प्लॉट नंबरों के रूप में स्थित है, का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। लगभग 60 साल बाद, डीडीसी कोर्ट के आदेश पर अब खतौनी से निजी खातेदारों के नाम हटा दिए गए हैं और भूमि को राज्य सरकार तथा ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया है।

जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने रविवार शाम को तहसील संभल के थाना रायसत्ती क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं का दौरा किया और गाटा संख्या 206, 207, 233, 242/378 और 279 में लगभग डेढ़ घंटे तक जांच की। जिलाधिकारी ने बताया कि यह भूमि वर्ष 1954 में नगर पालिका परिषद संभल को प्रबंधन के लिए दी गई थी। इसके 13 साल बाद, वर्ष 1967 में, नगर पालिका परिषद ने कथित तौर पर कुछ पट्टेदारों को इस जमीन का पट्टा आवंटित कर दिया था। प्रथम दृष्टया, नगर पालिका को प्रबंधन के लिए दी गई जमीन का पट्टा करने का अधिकार नहीं था, जिसके कारण यह पट्टा शुरू से ही शून्य था। इसके बाद यह जमीन पट्टेदारों के कब्जे में आ गई। वर्ष 1991 में, अपर तहसीलदार कोर्ट ने सईदउल्लाह सहित इन अवैध कब्जाधारियों को अवैध घोषित करते हुए उनकी बेदखली का आदेश दिया। वर्ष 1992 में अपर जिलाधिकारी कोर्ट में की गई अपील भी खारिज हो गई और कोर्ट ने कब्जाधारियों को अवैध मानते हुए इसे सरकारी जमीन घोषित किया था। बाद में, चकबंदी कोर्ट में दायर एक वाद के बाद, वर्ष 2005 में चकबंदी अधिकारी ने सुनवाई कर इसे ग्राम सभा की भूमि के रूप में यथावत रखने का आदेश दिया। हालांकि, वर्ष 2008 में तत्कालीन डीडीसी प्रेम सिंह खड़क ने अपने क्षेत्राधिकार से परे जाकर और गलत तथ्यों के आधार पर इस जमीन को निजी खातेदारों का बता दिया और उन्हें कब्जा दिए जाने के आदेश भी जारी कर दिए। 2008 के इस आदेश के खिलाफ नगर पालिका प्रबंधन ने हाईकोर्ट में अपील दायर करने का प्रयास किया, लेकिन वर्ष 2013 में तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर कर कहा कि नगर पालिका इस मामले में पैरवी करने की इच्छुक नहीं है।

हाल ही में जब यह पूरा प्रकरण अधिकारियों के संज्ञान में आया, तो 1954 से अब तक की पूरी जांच कराई गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह 'नवीन परती' की जमीन है और इसका उपयोग गलत लोगों द्वारा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया गया था। तत्काल संज्ञान लेते हुए एक टीम का गठन किया गया और डीडीसी कोर्ट में पुनर्स्थापना याचिका दायर की गई, जिसकी सुनवाई प्रतिदिन सुनिश्चित की गई। जिलाधिकारी के अनुसार, सुनवाई रोकने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुछ लोगों द्वारा प्रयास भी किए गए, लेकिन अंततः डीडीसी कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में निर्णय सुनाया। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, खतौनी से उन खातेदारों के नाम तुरंत हटाकर राज्य सरकार और ग्राम सभा का नाम 'नवीन परती' के अंतर्गत दर्ज किया गया।

अब इस मामले में तत्कालीन ईओ, उस समय के नगर पालिका के मानचित्र बनाने वाले कर्मी, वर्ष 2005 और 2008 के डीडीसी, बैनामा कराने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों और मूल पट्टेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। साथ ही, विभागीय कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है।
    user_Nitin Sagar
    Nitin Sagar
    Court reporter चंदौसी, संभल, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
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