जनपद संभल में ₹101 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 38 बीघा सरकारी जमीन को अवैध रूप से निजी भू-स्वामियों के नाम दर्ज कर बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। एक शिकायत के बाद हुई गहन जांच में पता चला कि यह बेशकीमती 'नवीन परती' भूमि, जो संभल-मुरादाबाद हाईवे पर चार जुड़े हुए प्लॉट नंबरों के रूप में स्थित है, का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। लगभग 60 साल बाद, डीडीसी कोर्ट के आदेश पर अब खतौनी से निजी खातेदारों के नाम हटा दिए गए हैं और भूमि को राज्य सरकार तथा ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने रविवार शाम को तहसील संभल के थाना रायसत्ती क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं का दौरा किया और गाटा संख्या 206, 207, 233, 242/378 और 279 में लगभग डेढ़ घंटे तक जांच की। जिलाधिकारी ने बताया कि यह भूमि वर्ष 1954 में नगर पालिका परिषद संभल को प्रबंधन के लिए दी गई थी। इसके 13 साल बाद, वर्ष 1967 में, नगर पालिका परिषद ने कथित तौर पर कुछ पट्टेदारों को इस जमीन का पट्टा आवंटित कर दिया था। प्रथम दृष्टया, नगर पालिका को प्रबंधन के लिए दी गई जमीन का पट्टा करने का अधिकार नहीं था, जिसके कारण यह पट्टा शुरू से ही शून्य था। इसके बाद यह जमीन पट्टेदारों के कब्जे में आ गई। वर्ष 1991 में, अपर तहसीलदार कोर्ट ने सईदउल्लाह सहित इन अवैध कब्जाधारियों को अवैध घोषित करते हुए उनकी बेदखली का आदेश दिया। वर्ष 1992 में अपर जिलाधिकारी कोर्ट में की गई अपील भी खारिज हो गई और कोर्ट ने कब्जाधारियों को अवैध मानते हुए इसे सरकारी जमीन घोषित किया था। बाद में, चकबंदी कोर्ट में दायर एक वाद के बाद, वर्ष 2005 में चकबंदी अधिकारी ने सुनवाई कर इसे ग्राम सभा की भूमि के रूप में यथावत रखने का आदेश दिया। हालांकि, वर्ष 2008 में तत्कालीन डीडीसी प्रेम सिंह खड़क ने अपने क्षेत्राधिकार से परे जाकर और गलत तथ्यों के आधार पर इस जमीन को निजी खातेदारों का बता दिया और उन्हें कब्जा दिए जाने के आदेश भी जारी कर दिए। 2008 के इस आदेश के खिलाफ नगर पालिका प्रबंधन ने हाईकोर्ट में अपील दायर करने का प्रयास किया, लेकिन वर्ष 2013 में तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर कर कहा कि नगर पालिका इस मामले में पैरवी करने की इच्छुक नहीं है। हाल ही में जब यह पूरा प्रकरण अधिकारियों के संज्ञान में आया, तो 1954 से अब तक की पूरी जांच कराई गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह 'नवीन परती' की जमीन है और इसका उपयोग गलत लोगों द्वारा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया गया था। तत्काल संज्ञान लेते हुए एक टीम का गठन किया गया और डीडीसी कोर्ट में पुनर्स्थापना याचिका दायर की गई, जिसकी सुनवाई प्रतिदिन सुनिश्चित की गई। जिलाधिकारी के अनुसार, सुनवाई रोकने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुछ लोगों द्वारा प्रयास भी किए गए, लेकिन अंततः डीडीसी कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में निर्णय सुनाया। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, खतौनी से उन खातेदारों के नाम तुरंत हटाकर राज्य सरकार और ग्राम सभा का नाम 'नवीन परती' के अंतर्गत दर्ज किया गया। अब इस मामले में तत्कालीन ईओ, उस समय के नगर पालिका के मानचित्र बनाने वाले कर्मी, वर्ष 2005 और 2008 के डीडीसी, बैनामा कराने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों और मूल पट्टेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। साथ ही, विभागीय कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है।
जनपद संभल में ₹101 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 38 बीघा सरकारी जमीन को अवैध रूप से निजी भू-स्वामियों के नाम दर्ज कर बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। एक शिकायत के बाद हुई गहन जांच में पता चला कि यह बेशकीमती 'नवीन परती' भूमि, जो संभल-मुरादाबाद हाईवे पर चार जुड़े हुए प्लॉट नंबरों के रूप में स्थित है, का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। लगभग 60 साल बाद, डीडीसी कोर्ट के आदेश पर अब खतौनी से निजी खातेदारों के नाम हटा दिए गए हैं और भूमि को राज्य सरकार तथा ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने रविवार शाम को तहसील संभल के थाना रायसत्ती क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं का दौरा किया और गाटा संख्या 206, 207, 233, 242/378 और 279 में लगभग डेढ़ घंटे तक जांच
की। जिलाधिकारी ने बताया कि यह भूमि वर्ष 1954 में नगर पालिका परिषद संभल को प्रबंधन के लिए दी गई थी। इसके 13 साल बाद, वर्ष 1967 में, नगर पालिका परिषद ने कथित तौर पर कुछ पट्टेदारों को इस जमीन का पट्टा आवंटित कर दिया था। प्रथम दृष्टया, नगर पालिका को प्रबंधन के लिए दी गई जमीन का पट्टा करने का अधिकार नहीं था, जिसके कारण यह पट्टा शुरू से ही शून्य था। इसके बाद यह जमीन पट्टेदारों के कब्जे में आ गई। वर्ष 1991 में, अपर तहसीलदार कोर्ट ने सईदउल्लाह सहित इन अवैध कब्जाधारियों को अवैध घोषित करते हुए उनकी बेदखली का आदेश दिया। वर्ष 1992 में अपर जिलाधिकारी कोर्ट में की गई अपील भी खारिज हो गई और कोर्ट ने कब्जाधारियों को अवैध मानते हुए इसे सरकारी जमीन घोषित किया था। बाद में, चकबंदी कोर्ट में दायर एक वाद के बाद,
वर्ष 2005 में चकबंदी अधिकारी ने सुनवाई कर इसे ग्राम सभा की भूमि के रूप में यथावत रखने का आदेश दिया। हालांकि, वर्ष 2008 में तत्कालीन डीडीसी प्रेम सिंह खड़क ने अपने क्षेत्राधिकार से परे जाकर और गलत तथ्यों के आधार पर इस जमीन को निजी खातेदारों का बता दिया और उन्हें कब्जा दिए जाने के आदेश भी जारी कर दिए। 2008 के इस आदेश के खिलाफ नगर पालिका प्रबंधन ने हाईकोर्ट में अपील दायर करने का प्रयास किया, लेकिन वर्ष 2013 में तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर कर कहा कि नगर पालिका इस मामले में पैरवी करने की इच्छुक नहीं है। हाल ही में जब यह पूरा प्रकरण अधिकारियों के संज्ञान में आया, तो 1954 से अब तक की पूरी जांच कराई गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह 'नवीन परती' की जमीन है और इसका उपयोग गलत
लोगों द्वारा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया गया था। तत्काल संज्ञान लेते हुए एक टीम का गठन किया गया और डीडीसी कोर्ट में पुनर्स्थापना याचिका दायर की गई, जिसकी सुनवाई प्रतिदिन सुनिश्चित की गई। जिलाधिकारी के अनुसार, सुनवाई रोकने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुछ लोगों द्वारा प्रयास भी किए गए, लेकिन अंततः डीडीसी कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में निर्णय सुनाया। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, खतौनी से उन खातेदारों के नाम तुरंत हटाकर राज्य सरकार और ग्राम सभा का नाम 'नवीन परती' के अंतर्गत दर्ज किया गया। अब इस मामले में तत्कालीन ईओ, उस समय के नगर पालिका के मानचित्र बनाने वाले कर्मी, वर्ष 2005 और 2008 के डीडीसी, बैनामा कराने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों और मूल पट्टेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। साथ ही, विभागीय कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है।
- फरीदाबाद में एक हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है, जहाँ हरियाणा पुलिस ने एक आलीशान होटल से आईटी इंजीनियर को नकली नोट छापते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान विनायक झा के रूप में हुई है, जो फरीदाबाद के सेक्टर-17 का निवासी है और आईआईटी बेंगलुरु से पासआउट है। वह नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में ₹34 लाख के सालाना पैकेज पर आईटी प्रोफेशनल के तौर पर कार्यरत था। पुलिस के अनुसार, विनायक झा पिछले दो दिनों से फरीदाबाद के एक लक्जरी होटल में कमरा बुक करके रुका हुआ था। गुप्त सूचना के आधार पर सूरजकुंड थाना पुलिस ने होटल के कमरे में छापा मारा, जहाँ उसे नकली नोट बनाते हुए पकड़ा गया। यह भी सामने आया है कि विनायक झा एक बेहद संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता है, जिसके माता और पिता दोनों ही सरकारी नौकरी में ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं। पुलिस ने होटल के कमरे से ₹500 का एक नकली नोट और ₹100 के 10 नकली नोट बरामद किए हैं। इसके साथ ही, नकली नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, जिनमें एक लैपटॉप, एक हाई-क्वालिटी प्रिंटर और विशेष कागज शामिल हैं, भी जब्त किए गए हैं। सूरजकुंड थाना पुलिस ने विनायक झा के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह ने बताया कि बरामद किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और लैपटॉप की तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी ने पहले भी कहीं जाली नोटों की आपूर्ति की है और इस रैकेट में उसके साथ कोई और भी शामिल है या नहीं।1
- जनपद संभल में ₹101 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 38 बीघा सरकारी जमीन को अवैध रूप से निजी भू-स्वामियों के नाम दर्ज कर बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। एक शिकायत के बाद हुई गहन जांच में पता चला कि यह बेशकीमती 'नवीन परती' भूमि, जो संभल-मुरादाबाद हाईवे पर चार जुड़े हुए प्लॉट नंबरों के रूप में स्थित है, का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। लगभग 60 साल बाद, डीडीसी कोर्ट के आदेश पर अब खतौनी से निजी खातेदारों के नाम हटा दिए गए हैं और भूमि को राज्य सरकार तथा ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने रविवार शाम को तहसील संभल के थाना रायसत्ती क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं का दौरा किया और गाटा संख्या 206, 207, 233, 242/378 और 279 में लगभग डेढ़ घंटे तक जांच की। जिलाधिकारी ने बताया कि यह भूमि वर्ष 1954 में नगर पालिका परिषद संभल को प्रबंधन के लिए दी गई थी। इसके 13 साल बाद, वर्ष 1967 में, नगर पालिका परिषद ने कथित तौर पर कुछ पट्टेदारों को इस जमीन का पट्टा आवंटित कर दिया था। प्रथम दृष्टया, नगर पालिका को प्रबंधन के लिए दी गई जमीन का पट्टा करने का अधिकार नहीं था, जिसके कारण यह पट्टा शुरू से ही शून्य था। इसके बाद यह जमीन पट्टेदारों के कब्जे में आ गई। वर्ष 1991 में, अपर तहसीलदार कोर्ट ने सईदउल्लाह सहित इन अवैध कब्जाधारियों को अवैध घोषित करते हुए उनकी बेदखली का आदेश दिया। वर्ष 1992 में अपर जिलाधिकारी कोर्ट में की गई अपील भी खारिज हो गई और कोर्ट ने कब्जाधारियों को अवैध मानते हुए इसे सरकारी जमीन घोषित किया था। बाद में, चकबंदी कोर्ट में दायर एक वाद के बाद, वर्ष 2005 में चकबंदी अधिकारी ने सुनवाई कर इसे ग्राम सभा की भूमि के रूप में यथावत रखने का आदेश दिया। हालांकि, वर्ष 2008 में तत्कालीन डीडीसी प्रेम सिंह खड़क ने अपने क्षेत्राधिकार से परे जाकर और गलत तथ्यों के आधार पर इस जमीन को निजी खातेदारों का बता दिया और उन्हें कब्जा दिए जाने के आदेश भी जारी कर दिए। 2008 के इस आदेश के खिलाफ नगर पालिका प्रबंधन ने हाईकोर्ट में अपील दायर करने का प्रयास किया, लेकिन वर्ष 2013 में तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर कर कहा कि नगर पालिका इस मामले में पैरवी करने की इच्छुक नहीं है। हाल ही में जब यह पूरा प्रकरण अधिकारियों के संज्ञान में आया, तो 1954 से अब तक की पूरी जांच कराई गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह 'नवीन परती' की जमीन है और इसका उपयोग गलत लोगों द्वारा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया गया था। तत्काल संज्ञान लेते हुए एक टीम का गठन किया गया और डीडीसी कोर्ट में पुनर्स्थापना याचिका दायर की गई, जिसकी सुनवाई प्रतिदिन सुनिश्चित की गई। जिलाधिकारी के अनुसार, सुनवाई रोकने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुछ लोगों द्वारा प्रयास भी किए गए, लेकिन अंततः डीडीसी कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में निर्णय सुनाया। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, खतौनी से उन खातेदारों के नाम तुरंत हटाकर राज्य सरकार और ग्राम सभा का नाम 'नवीन परती' के अंतर्गत दर्ज किया गया। अब इस मामले में तत्कालीन ईओ, उस समय के नगर पालिका के मानचित्र बनाने वाले कर्मी, वर्ष 2005 और 2008 के डीडीसी, बैनामा कराने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों और मूल पट्टेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। साथ ही, विभागीय कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है।4
- संभल के सलारपुर गाँव में एआईएमआईएम के युवा जिलाध्यक्ष नूर मोहम्मद पाशा के प्रथम आगमन पर भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने युवा जिलाध्यक्ष का फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चेयरपर्सन पति चौधरी मुशीर अली खान और जिलाध्यक्ष असद अब्दुल्ला भी शामिल हुए। समारोह को संबोधित करते हुए, चौधरी मुशीर अली खान ने वर्तमान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संभल में बुलडोजर कार्रवाई के बहाने एक विशेष समाज को निशाना बनाया जा रहा है और केवल उसी समाज के लोगों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। वहीं, जिलाध्यक्ष असद अब्दुल्ला ने आगामी चुनावों के लिए एआईएमआईएम की पूरी तैयारी का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि पार्टी कार्यकर्ता बूथ स्तर तक सक्रियता से संगठन को मजबूत कर रहे हैं। असद अब्दुल्ला ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि मजलिस का विधायक चुना जाता है, तो शहर से लेकर गाँवों तक के विकास की दिशा और दशा में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। इस कार्यक्रम में पार्टी के कई पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।1
- रामपुर में 'बेशर्म कार्ड' नामक स्थिति जिलाधिकारी पर भारी पड़ रही है। यह स्थिति सीधे तौर पर जिलाधिकारी को प्रभावित कर रही है।1
- बदायूं जिले के बिसौली में नाली बंद होने के कारण गंभीर जलभराव और कीचड़ की समस्या पैदा हो गई है, जिससे स्थानीय निवासी भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। घरों के सामने से लेकर आगे के रास्ते और पूरे मोहल्ले के लोग इस स्थिति से त्रस्त हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या के बावजूद, न तो प्रधान और न ही कोई सफाई कर्मचारी मौके पर पहुंचा है, जिसके कारण यह दिक्कत लगातार बनी हुई है और निवासियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।2
- बदायूं के उघैती थाना क्षेत्र में चोरों ने बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खितौरा विद्युत उपकेंद्र पर लगे मेन ट्रांसफार्मर से चोरों ने तेल चोरी कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 100 गांवों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। इस घटना से हजारों उपभोक्ताओं को पेयजल, घरेलू कार्यों और खेती से जुड़े कामों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह वारदात खितौरा विद्युत उपकेंद्र में हुई, जहां चोरों ने उपकेंद्र की पिछली दीवार फांदकर परिसर में प्रवेश किया और मुख्य ट्रांसफार्मर से तेल निकालकर फरार हो गए। हैरानी की बात यह रही कि चोरी की यह घटना उस समय हुई जब उपकेंद्र पर विद्युतकर्मी भी मौजूद थे, बावजूद इसके चोर आसानी से अपने मंसूबों को अंजाम देकर निकल गए। घटना की सूचना मिलते ही बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी है। विभाग अब ट्रांसफार्मर में दोबारा तेल भरवाकर जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करने की कोशिश में जुटा है। खितौरा विद्युत उपकेंद्र पर तैनात जेई अंबर सिंह ने बताया कि चोरों के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी जा रही है, ताकि उनकी पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जा सके और जल्द ही बिजली आपूर्ति सामान्य करा दी जाए।4
- कल महाराज योगी आदित्यनाथ जी रामपुर के शाहबाद पहुँच रहे हैं। वे वहाँ एक सभा का शुभारंभ सुबह 09:30 बजे से करेंगे, जहाँ वे जनता को कोई अहम सौगात देने वाले हैं।1
- सम्भल में आयोजित एक जनसभा के दौरान AIMIM नेता और चेयरमैन प्रतिनिधि मुशीर खां ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके यादव नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने मुस्लिम नेताओं का केवल राजनीतिक उपयोग किया और कठिन समय में उनका समर्थन नहीं किया। मुशीर खां ने उदाहरण देते हुए कहा कि आज़म खान ने मुसलमानों का समर्थन सपा को दिलाया, लेकिन जब आज़म खान जेल में हैं, तो पार्टी उनके साथ खड़ी नजर नहीं आती। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कार्रवाई केवल मुस्लिम नेताओं पर की जाती है, जबकि यादव नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं होती। मंच से उन्होंने दावा किया कि आज़म खान, मुशीर और असद अब्दुल्ला जैसे नेता जेल जाएंगे, लेकिन वीरेश यादव, पिंकी यादव और अन्य यादव नेता बंद नहीं होंगे। खां ने केंद्र और राज्य सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश में गाय, दाढ़ी और टोपी के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, और पीड़ितों की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। सभा में उन्होंने मुस्लिम समाज से एकजुट होने की भावुक अपील करते हुए कहा कि यदि समुदाय एकजुट होकर AIMIM का साथ देता है, तो प्रदेश की 25 से 50 विधानसभा सीटों पर जीत-हार का फैसला बदला जा सकता है और AIMIM के 50 विधायक विधानसभा तक पहुंच सकते हैं। मुशीर खां के इस सीधे और दो टूक बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ने की संभावना है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के यादव नेतृत्व और मुस्लिम राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।1