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गोरखपुर में ज्वेलरी शोरूम के उद्घाटन में पहुँची, अभिनेत्री माधुरी दीक्षित,लोगो में दीवानगी । #follower गोरखपुर में ज्वेलरी शोरूम के उद्घाटन में पहुँची, अभिनेत्री माधुरी दीक्षित,लोगो में दीवानगी । #follower
Dabeer Alam
गोरखपुर में ज्वेलरी शोरूम के उद्घाटन में पहुँची, अभिनेत्री माधुरी दीक्षित,लोगो में दीवानगी । #follower गोरखपुर में ज्वेलरी शोरूम के उद्घाटन में पहुँची, अभिनेत्री माधुरी दीक्षित,लोगो में दीवानगी । #follower
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- Post by Abc Hindustan1
- 13 साल के सन्नाटे का अंत: कोमा में पड़े हरीश राणा को अंतिम विदाई गाजियाबाद के हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे। परिवार ने हर दिन उम्मीद के साथ उनकी सेवा की, इस विश्वास में कि शायद एक दिन वे फिर से आंखें खोलेंगे। लेकिन जब उम्मीद की हर किरण मंद पड़ गई, तब परिवार ने भारी मन से एक कठिन निर्णय लिया। हरीश को दिल्ली के एम्स ले जाया गया है, जहां उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाए जाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह निर्णय केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उन माता-पिता के लिए अत्यंत भावुक और पीड़ादायक पल है, जिन्होंने 13 वर्षों तक अपने बेटे की निस्वार्थ सेवा की। किसी भी माता-पिता के लिए अपने जिगर के टुकड़े को इस तरह विदा करना कितना कठिन होगा, इसकी कल्पना मात्र से मन विचलित हो उठता है। फिर भी उन्होंने अपने बेटे के कष्ट को देखकर यह निर्णय लिया, ताकि वह पीड़ा से मुक्त हो सके। यह घटना न केवल मानवीय संवेदना को झकझोरती है, बल्कि समाज और न्याय व्यवस्था के सामने कई गहरे प्रश्न भी खड़े करती है। सुप्रीम कोर्ट के ऐसे फैसलों का दूरगामी प्रभाव होगा—बस यह जरूरी है कि इसका दुरुपयोग न हो। कुछ लोग सचमुच मरकर भी अमर हो जाते हैं—क्योंकि वे हमें जीवन, करुणा और त्याग का सबसे बड़ा अर्थ सिखा जाते हैं।1