कोटमी बीट के डोक्या जंगल में अवैध कटाई का आरोप, ठूंठ बयां कर रहे वन संपदा की लूट की कहानी *कोटमी बीट के डोक्या जंगल में अवैध कटाई का आरोप, ठूंठ बयां कर रहे वन संपदा की लूट की कहानी* मुख्य मार्ग से महज 100 मीटर अंदर बेशकीमती सागौन के पेड़ काटे जाने का दावा, वन विभाग की गश्ती व्यवस्था पर उठे सवाल ताप्ती दर्शन की पड़ताल में सामने आया मामला, वनरक्षक बोले—जांच के बाद करेंगे कार्रवाई रिपोर्ट — श्याम आर्य बैतूल। दक्षिण वन मंडल के ताप्ती रेंज अंतर्गत कोटमी बीट के डोक्या जंगल में बेशकीमती सागौन सहित अन्य इमारती लकड़ियों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर पेड़ों की कटाई की गई है, वह मुख्य मार्ग से करीब 100 मीटर की दूरी पर ही स्थित है। ऐसे में जंगल की सुरक्षा और वन विभाग की नियमित गश्ती व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। *ताप्ती दर्शन की टीम ने मौके पर पहुंचकर की पड़ताल* अवैध कटाई की सूचना के बाद ताप्ती दर्शन की टीम ने ताप्ती रेंज के कोटमी और डोक्या बीट के जंगल क्षेत्र का दौरा किया। मौके पर कई स्थानों पर पेड़ों के कटे हुए ठूंठ दिखाई दिए। ठूंठ इस बात की गवाही देते नजर आए कि क्षेत्र में पेड़ों की कटाई हुई है। स्थानीय स्तर पर बेशकीमती सागौन के पेड़ों को निशाना बनाए जाने की बात भी सामने आई है। क्षेत्र में सागौन, हल्दू सहित विभिन्न प्रजातियों के इमारती लकड़ी वाले पेड़ पाए जाते हैं। यही कारण है कि जंगल की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्कता आवश्यक मानी जाती है। लेकिन मौके पर कटे पेड़ों के ठूंठ मिलने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। *मुख्य मार्ग के समीप कटाई, फिर भी गश्ती व्यवस्था पर सवाल* सबसे गंभीर बात यह है कि जिस क्षेत्र में कटाई की बात सामने आई है, वह मुख्य मार्ग से बहुत अधिक अंदर नहीं बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क से कुछ ही दूरी पर पेड़ों की कटाई हो रही है तो जंगल के अंदरूनी हिस्सों की सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। वन विभाग द्वारा जंगलों में नियमित गश्ती किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन मौके पर मिले कटे हुए पेड़ों के अवशेष इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार वनकर्मियों की गश्त जंगल के अंदर जाने के बजाय सड़क किनारे तक ही सीमित रह जाती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी। *कटे पेड़ों को ट्रैक्टर से ले जाने की कोशिश का भी दावा* मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा कटे हुए पेड़ों को ट्रैक्टर के माध्यम से वन चौकी की ओर ले जाने का काम किया जा रहा था। इस दौरान मीडिया द्वारा फोटो लेने को लेकर बीट गार्ड द्वारा आपत्ति किए जाने की बात भी सामने आई। इससे पूरे मामले को लेकर और अधिक सवाल खड़े हुए हैं। सवाल यह है कि यदि पेड़ों की कटाई अवैध रूप से हुई है तो वन विभाग ने अब तक कितने पेड़ों की कटाई दर्ज की है? कटे हुए पेड़ किसने काटे? लकड़ी कहां ले जाई जानी थी? क्या इस मामले में किसी व्यक्ति या वन माफिया की पहचान की गई है? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। *ठूंठ पर विभागीय निशान नहीं, जानकारी भी स्पष्ट नहीं* ताप्ती दर्शन की टीम को जांच के दौरान कुछ ऐसे ठूंठ भी दिखाई दिए, जिन पर प्रथम दृष्टया वन विभाग की ओर से कोई स्पष्ट निशान नजर नहीं आया। इन पेड़ों की कटाई कब हुई और किस परिस्थिति में हुई, इसकी जानकारी मौके पर स्पष्ट रूप से नहीं मिल सकी। यदि पेड़ वैध अनुमति अथवा विभागीय कार्रवाई के तहत काटे गए हैं तो उनकी पूरी जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में उपलब्ध होनी चाहिए। वहीं यदि कटाई अवैध है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना वन विभाग की जिम्मेदारी है। *वन संपदा की सुरक्षा पर उठ रहे बड़े सवाल* एक ओर सरकार हरियाली बढ़ाने और नए पौधे लगाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जंगलों में मौजूद पुराने और बेशकीमती पेड़ों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वन संपदा तैयार होने में वर्षों लगते हैं, लेकिन अवैध कटाई के जरिए कुछ ही घंटों में बड़े पेड़ों को धराशायी किया जा सकता है। कोटमी बीट के डोक्या क्षेत्र में सामने आया यह मामला केवल कुछ पेड़ों की कटाई तक सीमित है या जंगल के बड़े हिस्से में इस प्रकार की गतिविधियां चल रही हैं, यह जांच का विषय है। *क्या केवल कोटमी बीट तक सीमित है मामला?* कोटमी बीट में अवैध कटाई का मामला सामने आने के बाद अब सवाल यह भी उठ रहा है कि दक्षिण वन मंडल के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में वन सुरक्षा की स्थिति क्या है। यदि एक क्षेत्र में मुख्य मार्ग के समीप पेड़ों की कटाई हो सकती है तो जंगल के अंदरूनी हिस्सों में वन संपदा की सुरक्षा कितनी प्रभावी है, इसकी भी जांच आवश्यक है। वन विभाग को चाहिए कि पूरे कोटमी एवं डोक्या बीट क्षेत्र में सघन निरीक्षण कर कटे हुए पेड़ों की संख्या, प्रजाति और कटाई की अवधि का पता लगाए। साथ ही यदि अवैध कटाई की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। *वनरक्षक ने कार्रवाई की बात कही* मामले को लेकर वनरक्षक से चर्चा की गई तो उनके द्वारा जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई। अब देखना होगा कि विभागीय जांच कब तक होंगी
कोटमी बीट के डोक्या जंगल में अवैध कटाई का आरोप, ठूंठ बयां कर रहे वन संपदा की लूट की कहानी *कोटमी बीट के डोक्या जंगल में अवैध कटाई का आरोप, ठूंठ बयां कर रहे वन संपदा की लूट की कहानी* मुख्य मार्ग से महज 100 मीटर अंदर बेशकीमती सागौन के पेड़ काटे जाने का दावा, वन विभाग की गश्ती व्यवस्था पर उठे सवाल ताप्ती दर्शन की पड़ताल में सामने आया मामला, वनरक्षक बोले—जांच के बाद करेंगे कार्रवाई रिपोर्ट — श्याम आर्य बैतूल। दक्षिण वन मंडल के ताप्ती रेंज अंतर्गत कोटमी बीट के डोक्या जंगल में बेशकीमती सागौन सहित अन्य इमारती लकड़ियों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर पेड़ों की कटाई की गई है, वह मुख्य मार्ग से करीब 100 मीटर की दूरी पर ही स्थित है। ऐसे में जंगल की सुरक्षा और वन विभाग की नियमित गश्ती व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। *ताप्ती दर्शन की टीम ने मौके पर पहुंचकर की पड़ताल* अवैध कटाई की सूचना के बाद ताप्ती दर्शन की टीम ने ताप्ती रेंज के कोटमी और डोक्या बीट के जंगल क्षेत्र का दौरा किया। मौके पर कई स्थानों पर पेड़ों के कटे हुए ठूंठ दिखाई दिए। ठूंठ इस बात की गवाही देते नजर आए कि क्षेत्र में पेड़ों की कटाई हुई है। स्थानीय स्तर पर बेशकीमती सागौन के पेड़ों को निशाना बनाए जाने की बात
भी सामने आई है। क्षेत्र में सागौन, हल्दू सहित विभिन्न प्रजातियों के इमारती लकड़ी वाले पेड़ पाए जाते हैं। यही कारण है कि जंगल की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्कता आवश्यक मानी जाती है। लेकिन मौके पर कटे पेड़ों के ठूंठ मिलने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। *मुख्य मार्ग के समीप कटाई, फिर भी गश्ती व्यवस्था पर सवाल* सबसे गंभीर बात यह है कि जिस क्षेत्र में कटाई की बात सामने आई है, वह मुख्य मार्ग से बहुत अधिक अंदर नहीं बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क से कुछ ही दूरी पर पेड़ों की कटाई हो रही है तो जंगल के अंदरूनी हिस्सों की सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। वन विभाग द्वारा जंगलों में नियमित गश्ती किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन मौके पर मिले कटे हुए पेड़ों के अवशेष इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार वनकर्मियों की गश्त जंगल के अंदर जाने के बजाय सड़क किनारे तक ही सीमित रह जाती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी। *कटे पेड़ों को ट्रैक्टर से ले जाने की कोशिश का भी दावा* मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा कटे हुए पेड़ों को ट्रैक्टर के माध्यम से वन चौकी की ओर ले जाने
का काम किया जा रहा था। इस दौरान मीडिया द्वारा फोटो लेने को लेकर बीट गार्ड द्वारा आपत्ति किए जाने की बात भी सामने आई। इससे पूरे मामले को लेकर और अधिक सवाल खड़े हुए हैं। सवाल यह है कि यदि पेड़ों की कटाई अवैध रूप से हुई है तो वन विभाग ने अब तक कितने पेड़ों की कटाई दर्ज की है? कटे हुए पेड़ किसने काटे? लकड़ी कहां ले जाई जानी थी? क्या इस मामले में किसी व्यक्ति या वन माफिया की पहचान की गई है? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। *ठूंठ पर विभागीय निशान नहीं, जानकारी भी स्पष्ट नहीं* ताप्ती दर्शन की टीम को जांच के दौरान कुछ ऐसे ठूंठ भी दिखाई दिए, जिन पर प्रथम दृष्टया वन विभाग की ओर से कोई स्पष्ट निशान नजर नहीं आया। इन पेड़ों की कटाई कब हुई और किस परिस्थिति में हुई, इसकी जानकारी मौके पर स्पष्ट रूप से नहीं मिल सकी। यदि पेड़ वैध अनुमति अथवा विभागीय कार्रवाई के तहत काटे गए हैं तो उनकी पूरी जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में उपलब्ध होनी चाहिए। वहीं यदि कटाई अवैध है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना वन विभाग की जिम्मेदारी है। *वन संपदा की सुरक्षा पर उठ रहे बड़े सवाल* एक ओर सरकार हरियाली बढ़ाने और नए पौधे लगाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जंगलों में मौजूद पुराने और
बेशकीमती पेड़ों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वन संपदा तैयार होने में वर्षों लगते हैं, लेकिन अवैध कटाई के जरिए कुछ ही घंटों में बड़े पेड़ों को धराशायी किया जा सकता है। कोटमी बीट के डोक्या क्षेत्र में सामने आया यह मामला केवल कुछ पेड़ों की कटाई तक सीमित है या जंगल के बड़े हिस्से में इस प्रकार की गतिविधियां चल रही हैं, यह जांच का विषय है। *क्या केवल कोटमी बीट तक सीमित है मामला?* कोटमी बीट में अवैध कटाई का मामला सामने आने के बाद अब सवाल यह भी उठ रहा है कि दक्षिण वन मंडल के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में वन सुरक्षा की स्थिति क्या है। यदि एक क्षेत्र में मुख्य मार्ग के समीप पेड़ों की कटाई हो सकती है तो जंगल के अंदरूनी हिस्सों में वन संपदा की सुरक्षा कितनी प्रभावी है, इसकी भी जांच आवश्यक है। वन विभाग को चाहिए कि पूरे कोटमी एवं डोक्या बीट क्षेत्र में सघन निरीक्षण कर कटे हुए पेड़ों की संख्या, प्रजाति और कटाई की अवधि का पता लगाए। साथ ही यदि अवैध कटाई की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। *वनरक्षक ने कार्रवाई की बात कही* मामले को लेकर वनरक्षक से चर्चा की गई तो उनके द्वारा जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई। अब देखना होगा कि विभागीय जांच कब तक होंगी
- कोटमी बीट के डोक्या जंगल में अवैध कटाई का आरोप, ठूंठ बयां कर रहे वन संपदा की लूट की कहानी *कोटमी बीट के डोक्या जंगल में अवैध कटाई का आरोप, ठूंठ बयां कर रहे वन संपदा की लूट की कहानी* मुख्य मार्ग से महज 100 मीटर अंदर बेशकीमती सागौन के पेड़ काटे जाने का दावा, वन विभाग की गश्ती व्यवस्था पर उठे सवाल ताप्ती दर्शन की पड़ताल में सामने आया मामला, वनरक्षक बोले—जांच के बाद करेंगे कार्रवाई रिपोर्ट — श्याम आर्य बैतूल। दक्षिण वन मंडल के ताप्ती रेंज अंतर्गत कोटमी बीट के डोक्या जंगल में बेशकीमती सागौन सहित अन्य इमारती लकड़ियों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर पेड़ों की कटाई की गई है, वह मुख्य मार्ग से करीब 100 मीटर की दूरी पर ही स्थित है। ऐसे में जंगल की सुरक्षा और वन विभाग की नियमित गश्ती व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। *ताप्ती दर्शन की टीम ने मौके पर पहुंचकर की पड़ताल* अवैध कटाई की सूचना के बाद ताप्ती दर्शन की टीम ने ताप्ती रेंज के कोटमी और डोक्या बीट के जंगल क्षेत्र का दौरा किया। मौके पर कई स्थानों पर पेड़ों के कटे हुए ठूंठ दिखाई दिए। ठूंठ इस बात की गवाही देते नजर आए कि क्षेत्र में पेड़ों की कटाई हुई है। स्थानीय स्तर पर बेशकीमती सागौन के पेड़ों को निशाना बनाए जाने की बात भी सामने आई है। क्षेत्र में सागौन, हल्दू सहित विभिन्न प्रजातियों के इमारती लकड़ी वाले पेड़ पाए जाते हैं। यही कारण है कि जंगल की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्कता आवश्यक मानी जाती है। लेकिन मौके पर कटे पेड़ों के ठूंठ मिलने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। *मुख्य मार्ग के समीप कटाई, फिर भी गश्ती व्यवस्था पर सवाल* सबसे गंभीर बात यह है कि जिस क्षेत्र में कटाई की बात सामने आई है, वह मुख्य मार्ग से बहुत अधिक अंदर नहीं बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क से कुछ ही दूरी पर पेड़ों की कटाई हो रही है तो जंगल के अंदरूनी हिस्सों की सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। वन विभाग द्वारा जंगलों में नियमित गश्ती किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन मौके पर मिले कटे हुए पेड़ों के अवशेष इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार वनकर्मियों की गश्त जंगल के अंदर जाने के बजाय सड़क किनारे तक ही सीमित रह जाती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी। *कटे पेड़ों को ट्रैक्टर से ले जाने की कोशिश का भी दावा* मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा कटे हुए पेड़ों को ट्रैक्टर के माध्यम से वन चौकी की ओर ले जाने का काम किया जा रहा था। इस दौरान मीडिया द्वारा फोटो लेने को लेकर बीट गार्ड द्वारा आपत्ति किए जाने की बात भी सामने आई। इससे पूरे मामले को लेकर और अधिक सवाल खड़े हुए हैं। सवाल यह है कि यदि पेड़ों की कटाई अवैध रूप से हुई है तो वन विभाग ने अब तक कितने पेड़ों की कटाई दर्ज की है? कटे हुए पेड़ किसने काटे? लकड़ी कहां ले जाई जानी थी? क्या इस मामले में किसी व्यक्ति या वन माफिया की पहचान की गई है? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। *ठूंठ पर विभागीय निशान नहीं, जानकारी भी स्पष्ट नहीं* ताप्ती दर्शन की टीम को जांच के दौरान कुछ ऐसे ठूंठ भी दिखाई दिए, जिन पर प्रथम दृष्टया वन विभाग की ओर से कोई स्पष्ट निशान नजर नहीं आया। इन पेड़ों की कटाई कब हुई और किस परिस्थिति में हुई, इसकी जानकारी मौके पर स्पष्ट रूप से नहीं मिल सकी। यदि पेड़ वैध अनुमति अथवा विभागीय कार्रवाई के तहत काटे गए हैं तो उनकी पूरी जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में उपलब्ध होनी चाहिए। वहीं यदि कटाई अवैध है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना वन विभाग की जिम्मेदारी है। *वन संपदा की सुरक्षा पर उठ रहे बड़े सवाल* एक ओर सरकार हरियाली बढ़ाने और नए पौधे लगाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जंगलों में मौजूद पुराने और बेशकीमती पेड़ों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वन संपदा तैयार होने में वर्षों लगते हैं, लेकिन अवैध कटाई के जरिए कुछ ही घंटों में बड़े पेड़ों को धराशायी किया जा सकता है। कोटमी बीट के डोक्या क्षेत्र में सामने आया यह मामला केवल कुछ पेड़ों की कटाई तक सीमित है या जंगल के बड़े हिस्से में इस प्रकार की गतिविधियां चल रही हैं, यह जांच का विषय है। *क्या केवल कोटमी बीट तक सीमित है मामला?* कोटमी बीट में अवैध कटाई का मामला सामने आने के बाद अब सवाल यह भी उठ रहा है कि दक्षिण वन मंडल के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में वन सुरक्षा की स्थिति क्या है। यदि एक क्षेत्र में मुख्य मार्ग के समीप पेड़ों की कटाई हो सकती है तो जंगल के अंदरूनी हिस्सों में वन संपदा की सुरक्षा कितनी प्रभावी है, इसकी भी जांच आवश्यक है। वन विभाग को चाहिए कि पूरे कोटमी एवं डोक्या बीट क्षेत्र में सघन निरीक्षण कर कटे हुए पेड़ों की संख्या, प्रजाति और कटाई की अवधि का पता लगाए। साथ ही यदि अवैध कटाई की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। *वनरक्षक ने कार्रवाई की बात कही* मामले को लेकर वनरक्षक से चर्चा की गई तो उनके द्वारा जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई। अब देखना होगा कि विभागीय जांच कब तक होंगी4
- रामनगर वार्ड में सड़क पर अतिक्रमण का वायरल वीडियो ! रामनगर वार्ड का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में सड़क पर ही सामान और वाहन खड़े कर रास्ते पर अतिक्रमण किए जाने का आरोप सामने आ रहा है ? स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सड़क से वाहन हटाने के लिए कहा जाता है, तो कथित तौर पर गाली-गलौज और धमकी देने की बात सामने आती है। सवाल यह है कि सार्वजनिक सड़क पर इस तरह अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ जिम्मेदार विभाग कब कार्रवाई करेगा? सड़क आम जनता के आवागमन के लिए है, किसी के निजी कब्जे के लिए नहीं। देखिए वायरल वीडियो और खुद तय कीजिए—क्या सड़क पर इस तरह अतिक्रमण जायज है? #रामनगर #बैतूल #अतिक्रमण #वायरलवीडियो #जनता_की_आवाज #प्रशासन रामनगर वार्ड में सड़क पर अतिक्रमण का वायरल वीडियो !1
- ग्रामीणों ने,कलेक्टर महोदय,जिला शिक्षा अधिकारी और ग्राम पंचायत पंचायत को सौंपा आवेदन प्राथमिक विद्यालय और रसोई घर जर्जर बढ़ी दुर्घटना की आशंका भैंसदेही सावलमेंढाग्राम पंचायत सावलमेंढा के वार्ड क्रमांक 01 में प्राथमिक स्कूल के जर्जर रसोईघर को लेकर ग्रामीणों ने पंचायत में लिखित आवेदन सौंपा। आवेदन में बताया गया कि स्कूल परिसर में स्थित रसोईघर की स्थिति लंबे समय से खराब है तथा इसकी ऊपरी-ऊपरी मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि रसोईघर की छत क्षतिग्रस्त होने के कारण बारिश के दौरान पानी टपकने की समस्या बनी रहती है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि रसोईघर काफी समय से जर्जर स्थिति में है और इससे बच्चों के लिए सुरक्षा संबंधी खतरा बना हुआ है। ऐसी स्थिति में केवल औपचारिक या अस्थायी मरम्मत के बजाय भवन की सुरक्षित एवं आवश्यक मरम्मत कराने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से मौके पर निरीक्षण कर रसोईघर की स्थिति का तकनीकी परीक्षण कराने तथा आवश्यकतानुसार मरम्मत या पुनर्निर्माण की कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शीघ्र उचित कदम उठाने का आग्रह किया गया है।3
- कांग्रेस का महंगाई कों लेकर1
- आमला में 21 अगस्त को होगा ‘युवा संवाद’, कलेक्टर ने युवाओं से शामिल होने की अपील आमला। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान-2026 के अंतर्गत 21 अगस्त को आमला विकासखंड के ससुन्द्रा क्लस्टर में तीसरा विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा। इसी क्रम में युवाओं के लिए ‘युवा संवाद—सपने, संवाद और सफलता’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम 21 अगस्त को सुबह 11:30 बजे सिटी मैरिज लॉन, आमला में होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे करेंगे। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने बताया कि युवा संवाद का उद्देश्य युवाओं को करियर निर्माण, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञ विद्यार्थियों और युवाओं को उनकी रुचि एवं क्षमता के अनुसार भविष्य की बेहतर योजना बनाने के लिए मार्गदर्शन देंगे। 10वीं-12वीं और ग्रेजुएशन के बाद क्या करें, इस पर भी विशेष जानकारी दी जाएगी। विद्यार्थियों को शिक्षा एवं करियर विकल्पों, जबकि स्नातक युवाओं को रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य अवसरों के संबंध में मार्गदर्शन मिलेगा। कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान भी किया जाएगा। कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने जिले के युवाओं एवं विद्यार्थियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है।1
- सचखंड एक्सप्रेस में महिला यात्री की तबियत बिगड़ी,इलाज के दौरान हुई मौत सचखंड एक्सप्रेस में महिला यात्री की तबियत बिगड़ी,इलाज के दौरान हुई मौत हरदा-हरदा रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म क्रमांक 3 पर उस वक्त अफरा तफरी का माहौल बन गया जब सचखंड नांदेड़ एक्सप्रेस प्लेटफार्म क्रमांक 3 पर रुकी, गाड़ी के S-7 कोच से एक महिला की तबीयत बिगड़ने की सूचना पीएफ और जीआरपी को प्राप्त हुई थी, तत्काल मेडिकल टीम के साथ जीआरपी प्लेटफॉर्म पर पहुंची जहां एक महिला यात्री की तबीयत ज्यादा खराब होना पाया गया इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया । महिला के साथ यात्रा कर रहे परिजनों ने महिला का शव जीआरपी की मदद से हरदा जिला अस्पताल भिजवाया । मृतक महिला का नाम सायरा बी उम्र 50 साल , निवासी परभणी महाराष्ट्र का होना पाया गया । दिल्ली से परभणी कर रहे थे यात्रा , जमात में गए हुए थे दिल्ली , तबियत ख़राब होने के कारण घर वापस जा रहे थे रास्ते मे तबियत खराब होने पर GRP को सूचना दी गयी ।4
- बस स्टैंड आमला मे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनाई स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती आमला। नगर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजीव गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में पार्षद खुशबु विजय अतुलकर सहित कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे। वक्ताओं ने राजीव गांधी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश में आधुनिक तकनीक, संचार और युवा शक्ति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके बताए मार्ग पर चलने और देशहित में कार्य करने का संकल्प लिया।1
- नाबालिग बालिकाओं को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म के मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार बैतूल बाजार पुलिस ने 24 घंटे में बरामद कीं बालिकाएं, आरोपियों को न्यायालय ने भेजा जेल बैतूल। नाबालिग बालिकाओं को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म के मामले में बैतूल बाजार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जिला जेल बैतूल भेज दिया गया। मामले में एक अन्य आरोपी फरार है, जिसकी तलाश पुलिस द्वारा की जा रही है। पुलिस के अनुसार 8 अगस्त 2026 को शासकीय हाईस्कूल बडोरा में अध्ययनरत नाबालिग बालिकाएं स्कूल जाने की बात कहकर घर से निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। परिजनों ने रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के क्षेत्रों में तलाश करने के बाद 15 अगस्त को थाना बैतूल बाजार में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तीन अलग-अलग मामलों में अपराध क्रमांक 263/26, 264/26 एवं 265/26 के तहत बीएनएस की धारा 137(2) में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने तत्काल बालिकाओं की तलाश शुरू की। हमलापुर, बाजपुर, किला खंडारा, सोनाघाटी, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित होटल-लॉज और अन्य संभावित स्थानों पर तलाश की गई। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर बालिकाओं को दस्तयाब कर लिया। बालिकाओं से पूछताछ और उनके कथनों के आधार पर पुलिस को आरोपियों द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने एवं दुष्कर्म किए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद प्रकरण में बीएनएस की धारा 64(1), 65(1), 75(2), 351(3) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 का इजाफा किया गया। तीन आरोपी गिरफ्तार, एक की तलाश जारी पुलिस ने मामले में मनीष पिता अमरलाल बरकड़े, उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम चारगांव थाना रानीपुर और विनोद पिता मिलन इवने, उम्र 19 वर्ष, निवासी धनियाजाम को 18 अगस्त को गिरफ्तार किया। वहीं मनीष पिता जगनू आहाके, उम्र 22 वर्ष, निवासी झाड़ेगांव थाना कोतवाली को 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जिला जेल बैतूल भेज दिया गया। प्रकरण में फरार आरोपी अरविन्द धुर्वे की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। पुलिस टीम की रही महत्वपूर्ण भूमिका कार्रवाई में थाना प्रभारी बैतूल बाजार निरीक्षक विजयसिंह ठाकुर सहित थाना पुलिस, साइबर सेल एवं अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक बैतूल श्री वीरेन्द्र जैन ने आमजन से अपील की है कि बच्चों और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें। यदि कोई बच्चा या बच्ची बिना बताए घर से चला जाए अथवा किसी व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने की आशंका हो तो तत्काल नजदीकी पुलिस थाना या पुलिस को सूचना दें। उन्होंने कहा कि महिला एवं बालिकाओं से जुड़े अपराधों को पुलिस गंभीरता से लेती है और ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।3