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मध्य प्रदेश के गोहद में चंबल अंचल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नया आयाम देने के लिए चलाए जा रहे "गौ-हद धाम अभियान" को अब संत समाज का भी समर्थन मिल गया है। खनेता धाम स्थित प्राचीन श्री रघुनाथ जी मंदिर के महंत महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री रामभूषण दास जी महाराज ने गोहद की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे प्राचीन वैष्णव परंपराओं, संत संस्कृति और जनआस्था का केंद्र बताया। महंत श्री ने कहा कि स्थानीय परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, गोहद का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की गौ-चारण लीलाओं से है, जिसके कारण इस क्षेत्र को "गौ-हद" यानी गऊओं की अंतिम सीमा या गोचारण क्षेत्र की हद के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि गोहद के कई प्राचीन मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं का संबंध ब्रज एवं वृंदावन की वैष्णव परंपरा से रहा है, जिसमें राजगुरु की जग्गा, कालिया कंठ की जग्गा, रघुनाथ जी की जग्गा, मदनमोहन जी की जग्गा, नरसिंह जी की जग्गा और लक्ष्मण जी मंदिर सहित सैकड़ों प्राचीन मंदिर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत के साक्षी हैं। महंत श्री रामभूषण दास जी ने मध्य प्रदेश शासन से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित श्रीकृष्ण गमन पथ योजना में गोहद को शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि यदि मथुरा और वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के प्रमुख केंद्र हैं, तो चंबल अंचल की यह भूमि भी अपनी लोकपरंपराओं, संत परंपराओं और धार्मिक धरोहरों के कारण विशेष अध्ययन और संरक्षण की पात्र है। गौ-हद धाम अभियान से जुड़े प्रतिनिधि मंडल ने महंत श्री से मुलाकात कर अभियान की रूपरेखा साझा की। इस अवसर पर, कार्यकर्ताओं ने गोहद, मितावली, पढ़ावली, काकनमठ, शनिधाम, कुंतलपुर और कर्ण कुंड को जोड़कर एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।

3 hrs ago
user_मुकेश सिंह भदौरिया
मुकेश सिंह भदौरिया
Local News Reporter गोरमी, भिंड, मध्य प्रदेश•
3 hrs ago

मध्य प्रदेश के गोहद में चंबल अंचल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नया आयाम देने के लिए चलाए जा रहे "गौ-हद धाम अभियान" को अब संत समाज का भी समर्थन मिल गया है। खनेता धाम स्थित प्राचीन श्री रघुनाथ जी मंदिर के महंत महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री रामभूषण दास जी महाराज ने गोहद की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे प्राचीन वैष्णव परंपराओं, संत संस्कृति और जनआस्था का केंद्र बताया। महंत श्री ने कहा कि स्थानीय परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, गोहद का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की गौ-चारण लीलाओं से है, जिसके कारण इस क्षेत्र को "गौ-हद" यानी गऊओं की अंतिम सीमा या गोचारण क्षेत्र की हद के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि गोहद के कई प्राचीन मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं का संबंध ब्रज एवं वृंदावन की वैष्णव परंपरा से रहा है, जिसमें राजगुरु की जग्गा, कालिया कंठ की जग्गा, रघुनाथ जी की जग्गा, मदनमोहन जी की जग्गा, नरसिंह जी की जग्गा और लक्ष्मण जी मंदिर सहित सैकड़ों प्राचीन मंदिर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत के साक्षी हैं। महंत श्री रामभूषण दास जी ने मध्य प्रदेश शासन से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित श्रीकृष्ण गमन पथ योजना में गोहद को शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि यदि मथुरा और वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के प्रमुख केंद्र हैं, तो चंबल अंचल की यह भूमि भी अपनी लोकपरंपराओं, संत परंपराओं और धार्मिक धरोहरों के कारण विशेष अध्ययन और संरक्षण की पात्र है। गौ-हद धाम अभियान से जुड़े प्रतिनिधि मंडल ने महंत श्री से मुलाकात कर अभियान की रूपरेखा साझा की। इस अवसर पर, कार्यकर्ताओं ने गोहद, मितावली, पढ़ावली, काकनमठ, शनिधाम, कुंतलपुर और कर्ण कुंड को जोड़कर एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • मध्य प्रदेश के गोहद में चंबल अंचल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नया आयाम देने के लिए चलाए जा रहे "गौ-हद धाम अभियान" को अब संत समाज का भी समर्थन मिल गया है। खनेता धाम स्थित प्राचीन श्री रघुनाथ जी मंदिर के महंत महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री रामभूषण दास जी महाराज ने गोहद की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे प्राचीन वैष्णव परंपराओं, संत संस्कृति और जनआस्था का केंद्र बताया। महंत श्री ने कहा कि स्थानीय परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, गोहद का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की गौ-चारण लीलाओं से है, जिसके कारण इस क्षेत्र को "गौ-हद" यानी गऊओं की अंतिम सीमा या गोचारण क्षेत्र की हद के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि गोहद के कई प्राचीन मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं का संबंध ब्रज एवं वृंदावन की वैष्णव परंपरा से रहा है, जिसमें राजगुरु की जग्गा, कालिया कंठ की जग्गा, रघुनाथ जी की जग्गा, मदनमोहन जी की जग्गा, नरसिंह जी की जग्गा और लक्ष्मण जी मंदिर सहित सैकड़ों प्राचीन मंदिर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत के साक्षी हैं। महंत श्री रामभूषण दास जी ने मध्य प्रदेश शासन से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित श्रीकृष्ण गमन पथ योजना में गोहद को शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि यदि मथुरा और वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के प्रमुख केंद्र हैं, तो चंबल अंचल की यह भूमि भी अपनी लोकपरंपराओं, संत परंपराओं और धार्मिक धरोहरों के कारण विशेष अध्ययन और संरक्षण की पात्र है। गौ-हद धाम अभियान से जुड़े प्रतिनिधि मंडल ने महंत श्री से मुलाकात कर अभियान की रूपरेखा साझा की। इस अवसर पर, कार्यकर्ताओं ने गोहद, मितावली, पढ़ावली, काकनमठ, शनिधाम, कुंतलपुर और कर्ण कुंड को जोड़कर एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
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    मध्य प्रदेश के गोहद में चंबल अंचल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नया आयाम देने के लिए चलाए जा रहे "गौ-हद धाम अभियान" को अब संत समाज का भी समर्थन मिल गया है। खनेता धाम स्थित प्राचीन श्री रघुनाथ जी मंदिर के महंत महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री रामभूषण दास जी महाराज ने गोहद की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे प्राचीन वैष्णव परंपराओं, संत संस्कृति और जनआस्था का केंद्र बताया।

महंत श्री ने कहा कि स्थानीय परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, गोहद का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की गौ-चारण लीलाओं से है, जिसके कारण इस क्षेत्र को "गौ-हद" यानी गऊओं की अंतिम सीमा या गोचारण क्षेत्र की हद के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि गोहद के कई प्राचीन मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं का संबंध ब्रज एवं वृंदावन की वैष्णव परंपरा से रहा है, जिसमें राजगुरु की जग्गा, कालिया कंठ की जग्गा, रघुनाथ जी की जग्गा, मदनमोहन जी की जग्गा, नरसिंह जी की जग्गा और लक्ष्मण जी मंदिर सहित सैकड़ों प्राचीन मंदिर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत के साक्षी हैं।

महंत श्री रामभूषण दास जी ने मध्य प्रदेश शासन से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित श्रीकृष्ण गमन पथ योजना में गोहद को शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि यदि मथुरा और वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के प्रमुख केंद्र हैं, तो चंबल अंचल की यह भूमि भी अपनी लोकपरंपराओं, संत परंपराओं और धार्मिक धरोहरों के कारण विशेष अध्ययन और संरक्षण की पात्र है। गौ-हद धाम अभियान से जुड़े प्रतिनिधि मंडल ने महंत श्री से मुलाकात कर अभियान की रूपरेखा साझा की। इस अवसर पर, कार्यकर्ताओं ने गोहद, मितावली, पढ़ावली, काकनमठ, शनिधाम, कुंतलपुर और कर्ण कुंड को जोड़कर एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
    user_मुकेश सिंह भदौरिया
    मुकेश सिंह भदौरिया
    Local News Reporter गोरमी, भिंड, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • भिंड पुलिस ने अपने "ऑपरेशन विश्वास" के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है, जिसमें 325 गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को वापस सौंप दिए गए हैं। इन मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत 81 लाख 30 हजार रुपये बताई गई है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक भिंड सूरज कुमार वर्मा के निर्देशन में साइबर सेल और जिले के सभी थानों की टीम द्वारा CEIR पोर्टल का उपयोग करके की गई। बरामद किए गए मोबाइल मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, केरल, असम और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से खोजे गए। मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित एक कार्यक्रम में ये मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए गए। मोबाइल वापस मिलने पर लोगों ने भिंड पुलिस, साइबर सेल और संबंधित थाना पुलिस की सराहना की। भिंड पुलिस ने बताया कि 2025 में भी CEIR पोर्टल के माध्यम से कुल 628 गुम मोबाइल बरामद किए जा चुके हैं, और यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा।
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    भिंड पुलिस ने अपने "ऑपरेशन विश्वास" के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है, जिसमें 325 गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को वापस सौंप दिए गए हैं। इन मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत 81 लाख 30 हजार रुपये बताई गई है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक भिंड सूरज कुमार वर्मा के निर्देशन में साइबर सेल और जिले के सभी थानों की टीम द्वारा CEIR पोर्टल का उपयोग करके की गई।

बरामद किए गए मोबाइल मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, केरल, असम और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से खोजे गए। मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित एक कार्यक्रम में ये मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए गए। मोबाइल वापस मिलने पर लोगों ने भिंड पुलिस, साइबर सेल और संबंधित थाना पुलिस की सराहना की।

भिंड पुलिस ने बताया कि 2025 में भी CEIR पोर्टल के माध्यम से कुल 628 गुम मोबाइल बरामद किए जा चुके हैं, और यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा।
    user_नीरज धर्मवीर पचौरी पत्रकार
    नीरज धर्मवीर पचौरी पत्रकार
    Advertising agency पोरसा, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • राजस्थान के बारा जिले की एक 60 वर्षीय विधवा महिला ने मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के एक 60 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति के साथ विवाह कर अपने जीवन की एक नई शुरुआत की है। यह विवाह इस बात का संदेश देता है कि जीवन के किसी भी पड़ाव पर एक साथी का साथ, सम्मान और भावनात्मक सहारा बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह घटना समाज में बुजुर्गों के पुनर्विवाह को लेकर अक्सर देखे जाने वाले संकोच को दूर करती है और यह साबित करती है कि खुशहाल जीवन जीने का अधिकार हर उम्र में सभी को है।
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    राजस्थान के बारा जिले की एक 60 वर्षीय विधवा महिला ने मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के एक 60 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति के साथ विवाह कर अपने जीवन की एक नई शुरुआत की है।

यह विवाह इस बात का संदेश देता है कि जीवन के किसी भी पड़ाव पर एक साथी का साथ, सम्मान और भावनात्मक सहारा बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह घटना समाज में बुजुर्गों के पुनर्विवाह को लेकर अक्सर देखे जाने वाले संकोच को दूर करती है और यह साबित करती है कि खुशहाल जीवन जीने का अधिकार हर उम्र में सभी को है।
    user_Mahaveer Jain
    Mahaveer Jain
    Mechanic पोरसा, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • चंबल का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा : डॉ. मनोज जैन चंबल का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा : डॉ. मनोज जैन कनकपुरा (भिंड), 17 जून। विश्व मगरमच्छ दिवस एवं मरुस्थलीकरण और सूखे का मुकाबला करने के लिए विश्व दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था सुप्रयास द्वारा कनकपुरा स्थित चंबल नदी तट पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा चंबल नदी के संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुप्रयास के सचिव एवं पर्यावरणविद् डॉ. मनोज जैन ने कहा कि चंबल नदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों और असंख्य जीव-जंतुओं की जीवनरेखा है। चंबल में पाए जाने वाले मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुए एवं अन्य जलीय जीव इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता के प्रतीक हैं। इनके संरक्षण के बिना पर्यावरणीय संतुलन की कल्पना नहीं की जा सकती। डॉ. जैन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, घटते जल स्रोत और बढ़ता मरुस्थलीकरण मानव सभ्यता के सामने गंभीर चुनौती बनकर उभर रहे हैं। ऐसे समय में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण तथा नदियों की स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और भावी पीढ़ियों की सुरक्षा का प्रश्न है। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से जल के विवेकपूर्ण उपयोग, नदियों एवं जलाशयों के संरक्षण तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण का आह्वान किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने "जल बचेगा-जीवन बचेगा", "नदी बचेगी-मगरमच्छ बचेगा" तथा "धरती बचेगी-भविष्य बचेगा" के संकल्प के साथ पर्यावरण संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर गिरीश शर्मा, अनिल सिंह भदोरिया, रघुराज सिंह भदोरिया, रघुवीर सिंह भदोरिया, कप्तान सिंह भदोरिया, दशरथ सिंह भदोरिया, गुड्डू सिंह भदोरिया, लाखन सिंह भदोरिया, भीम शंकर सिंह भदोरिया, विश्राम सिंह भदोरिया, मंगल सिंह भदोरिया, कल्लू सिंह भदोरिया ने भाग लिया और चंबल नदी और उसके वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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    चंबल का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा : डॉ. मनोज जैन
चंबल का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा : डॉ. मनोज जैन
कनकपुरा (भिंड), 17 जून। विश्व मगरमच्छ दिवस एवं मरुस्थलीकरण और सूखे का मुकाबला करने के लिए विश्व दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था सुप्रयास द्वारा कनकपुरा स्थित चंबल नदी तट पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा चंबल नदी के संरक्षण का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुप्रयास के सचिव एवं पर्यावरणविद् डॉ. मनोज जैन ने कहा कि चंबल नदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों और असंख्य जीव-जंतुओं की जीवनरेखा है। चंबल में पाए जाने वाले मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुए एवं अन्य जलीय जीव इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता के प्रतीक हैं। इनके संरक्षण के बिना पर्यावरणीय संतुलन की कल्पना नहीं की जा सकती।
डॉ. जैन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, घटते जल स्रोत और बढ़ता मरुस्थलीकरण मानव सभ्यता के सामने गंभीर चुनौती बनकर उभर रहे हैं। ऐसे समय में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण तथा नदियों की स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और भावी पीढ़ियों की सुरक्षा का प्रश्न है।
उन्होंने उपस्थित नागरिकों से जल के विवेकपूर्ण उपयोग, नदियों एवं जलाशयों के संरक्षण तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण का आह्वान किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने "जल बचेगा-जीवन बचेगा", "नदी बचेगी-मगरमच्छ बचेगा" तथा "धरती बचेगी-भविष्य बचेगा" के संकल्प के साथ पर्यावरण संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर गिरीश शर्मा, अनिल सिंह भदोरिया, रघुराज सिंह भदोरिया, रघुवीर सिंह भदोरिया, कप्तान सिंह भदोरिया, दशरथ सिंह भदोरिया, गुड्डू सिंह भदोरिया, लाखन सिंह भदोरिया, भीम शंकर सिंह भदोरिया, विश्राम सिंह भदोरिया, मंगल सिंह भदोरिया, कल्लू सिंह भदोरिया ने भाग लिया और चंबल नदी और उसके वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
    user_Dinesh soni
    Dinesh soni
    Television Channel भिंड, भिंड, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • एक आरक्षक पत्नी ने होटल में अपने पति को किसी अन्य लड़की के साथ देखकर जमकर बवाल मचा दिया। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
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    एक आरक्षक पत्नी ने होटल में अपने पति को किसी अन्य लड़की के साथ देखकर जमकर बवाल मचा दिया। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
    user_कृष्ण कांत शर्मा
    कृष्ण कांत शर्मा
    Media company भिंड, भिंड, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • आगरा के बाह-बटेश्वर में 17 जून 2026 को हिंदू पंचांग के अनुसार सिकरवार समाज कल्याण समिति के बैनर तले महाराणा प्रताप की जयंती पर एक विशाल रैली और मंच कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस भव्य आयोजन में कई राज्यों से महाराणा प्रताप के वंशज और समाज के गणमान्य लोग शामिल हुए। रैली के दौरान जगह-जगह समाज के लोगों द्वारा फूल-मालाओं से स्वागत और अभिनंदन किया गया, जिससे यह शोभायात्रा हर वर्ष की तरह इस बार भी आकर्षण का केंद्र रही। इस रैली में लगभग 50 चार पहिया वाहन और 250–300 बाइक शामिल थीं, जिसने पूरे आयोजन को और भी भव्य बना दिया। सिकरवार समाज के लोगों ने वाह, फतेहाबाद और अन्य राज्यों में रह रहे समाज के लोगों ने अपनी एकता और गौरव को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के दौरान समिति ने दूर-दराज से आए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए समाज के उज्जवल भविष्य की कामना की। पूरे आयोजन में पुलिस प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन अध्यक्ष धीरज सिंह करोरिया और उपाध्यक्ष संजय सिंह गहलौत के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर जितेंद्र सिसोदिया, श्रीकांत सिसोदिया, राजवीर खेतलीपुरा, बंटी सिंह गहलोत, अभिषेक डण्डोतिया, जसवंत जी, राहुल गहलोत, विक्रम किरार, गौरव ठाकुर फतेहाबाद, गौरव राजाखेड़ा, नितेश पातीपुरा, ओमप्रकाश सिंह चंदेल मीडिया प्रभारी, राजू चंदेल, जयप्रकाश शास्त्री, शैलेंद्र चंदेल, सोनू रावड़ी, सुमित दंडोतिया, करन सिंह सिकरवार, योगेंद्र सिंह राणा, रामदीन सिंह सिसोदिया, अशोक सिसोदिया, मनोज कुमार सिसोदिया, दिलीप सिसोदिया, सुरेश चंद्र सिकरवार, रविंद्र सिसोदिया सहित अन्य क्षेत्रों से आए समाज के सदस्य उपस्थित रहे। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सिकरवार समाज द्वारा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती बड़े ही धूमधाम और भव्य तरीके से मनाई गई।
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    आगरा के बाह-बटेश्वर में 17 जून 2026 को हिंदू पंचांग के अनुसार सिकरवार समाज कल्याण समिति के बैनर तले महाराणा प्रताप की जयंती पर एक विशाल रैली और मंच कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस भव्य आयोजन में कई राज्यों से महाराणा प्रताप के वंशज और समाज के गणमान्य लोग शामिल हुए। रैली के दौरान जगह-जगह समाज के लोगों द्वारा फूल-मालाओं से स्वागत और अभिनंदन किया गया, जिससे यह शोभायात्रा हर वर्ष की तरह इस बार भी आकर्षण का केंद्र रही।

इस रैली में लगभग 50 चार पहिया वाहन और 250–300 बाइक शामिल थीं, जिसने पूरे आयोजन को और भी भव्य बना दिया। सिकरवार समाज के लोगों ने वाह, फतेहाबाद और अन्य राज्यों में रह रहे समाज के लोगों ने अपनी एकता और गौरव को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के दौरान समिति ने दूर-दराज से आए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए समाज के उज्जवल भविष्य की कामना की। पूरे आयोजन में पुलिस प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का संचालन अध्यक्ष धीरज सिंह करोरिया और उपाध्यक्ष संजय सिंह गहलौत के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर जितेंद्र सिसोदिया, श्रीकांत सिसोदिया, राजवीर खेतलीपुरा, बंटी सिंह गहलोत, अभिषेक डण्डोतिया, जसवंत जी, राहुल गहलोत, विक्रम किरार, गौरव ठाकुर फतेहाबाद, गौरव राजाखेड़ा, नितेश पातीपुरा, ओमप्रकाश सिंह चंदेल मीडिया प्रभारी, राजू चंदेल, जयप्रकाश शास्त्री, शैलेंद्र चंदेल, सोनू रावड़ी, सुमित दंडोतिया, करन सिंह सिकरवार, योगेंद्र सिंह राणा, रामदीन सिंह सिसोदिया, अशोक सिसोदिया, मनोज कुमार सिसोदिया, दिलीप सिसोदिया, सुरेश चंद्र सिकरवार, रविंद्र सिसोदिया सहित अन्य क्षेत्रों से आए समाज के सदस्य उपस्थित रहे। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सिकरवार समाज द्वारा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती बड़े ही धूमधाम और भव्य तरीके से मनाई गई।
    user_Omprakash Singh
    Omprakash Singh
    बाह, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • अंबाह अंचल के वीर सपूत नायक राहुल सिंह सिकरवार को मंगलवार रात हृदय गति रुकने से वीरगति प्राप्त हुई। भारतीय सेना की इंजीनियर कोर में सेवा दे रहे नायक सिकरवार अवकाश पर अपने घर आए हुए थे। मंगलवार रात खाना खाकर सोने के बाद, सुबह परिजनों द्वारा जगाने पर पता चला कि उनकी सांसें थम चुकी थीं। मेडिकल परीक्षण के उपरांत, लगभग रात 9:30 बजे पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर उनके 11 वर्षीय बेटे अभि सिकरवार ने उन्हें मुखाग्नि दी। राहुल सिंह सिकरवार अपने पीछे 11 वर्षीय बेटे अभि, चार वर्षीय बेटे कृशू सिकरवार, पत्नी, माता-पिता और भाई को छोड़ गए हैं। उनके पिता, श्री राम सुमरन सिंह तोमर (सेवानिवृत्त सेना तरैनी, हाल निवास पोरसा), भी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। नायक राहुल सिंह सिकरवार 2014 में भारतीय सेना की 416 इंजीनियर कोर में भर्ती हुए थे और 216 इंजीनियर कोर मथुरा में पदस्थ थे। मुक्तिधाम में उनके अंतिम संस्कार के दौरान अमर शहीद सम्मान सेवा संघ के सेवकों, जिनमें धर्मेंद्र सिंह तोमर (रिटायर्ड हवलदार भारतीय सेना), मनोज सिंह तोमर (सेवानिवृत्त भारतीय सेना पूठा), भीमसेन सिंह थरा, योगेन्द्र परमार, हरिमोहन शर्मा, रोहित शर्मा, शिवम शामिल थे, ने शव यात्रा के पथ पर पुष्प वर्षा कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान 'भारत माता की जय' और 'नायक राहुल सिंह सिकरवार अमर रहे' के जयघोष गूंजते रहे। पूर्व सैनिक लीग पोरसा के पूर्व सैनिकों और सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग भी इस मौके पर मौजूद रहे।
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    अंबाह अंचल के वीर सपूत नायक राहुल सिंह सिकरवार को मंगलवार रात हृदय गति रुकने से वीरगति प्राप्त हुई। भारतीय सेना की इंजीनियर कोर में सेवा दे रहे नायक सिकरवार अवकाश पर अपने घर आए हुए थे। मंगलवार रात खाना खाकर सोने के बाद, सुबह परिजनों द्वारा जगाने पर पता चला कि उनकी सांसें थम चुकी थीं।

मेडिकल परीक्षण के उपरांत, लगभग रात 9:30 बजे पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर उनके 11 वर्षीय बेटे अभि सिकरवार ने उन्हें मुखाग्नि दी। राहुल सिंह सिकरवार अपने पीछे 11 वर्षीय बेटे अभि, चार वर्षीय बेटे कृशू सिकरवार, पत्नी, माता-पिता और भाई को छोड़ गए हैं। उनके पिता, श्री राम सुमरन सिंह तोमर (सेवानिवृत्त सेना तरैनी, हाल निवास पोरसा), भी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं।

नायक राहुल सिंह सिकरवार 2014 में भारतीय सेना की 416 इंजीनियर कोर में भर्ती हुए थे और 216 इंजीनियर कोर मथुरा में पदस्थ थे। मुक्तिधाम में उनके अंतिम संस्कार के दौरान अमर शहीद सम्मान सेवा संघ के सेवकों, जिनमें धर्मेंद्र सिंह तोमर (रिटायर्ड हवलदार भारतीय सेना), मनोज सिंह तोमर (सेवानिवृत्त भारतीय सेना पूठा), भीमसेन सिंह थरा, योगेन्द्र परमार, हरिमोहन शर्मा, रोहित शर्मा, शिवम शामिल थे, ने शव यात्रा के पथ पर पुष्प वर्षा कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान 'भारत माता की जय' और 'नायक राहुल सिंह सिकरवार अमर रहे' के जयघोष गूंजते रहे। पूर्व सैनिक लीग पोरसा के पूर्व सैनिकों और सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग भी इस मौके पर मौजूद रहे।
    user_भीमसेन सिंह तोमर पत्रकार थरा
    भीमसेन सिंह तोमर पत्रकार थरा
    अंबाह, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • आज 16 जून 2026 को भिंड जिले के लहार विकासखंड के शिक्षकों ने वर्ष 2009 और 2017 के नियमों में संशोधन की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। शिक्षकों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) लहार के माध्यम से भारत सरकार के प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने मांग की है कि वर्ष 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। शिक्षकों का तर्क है कि उनके पास वर्षों का शैक्षणिक अनुभव है, इसलिए उन्हें इस परीक्षा के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। इस प्रदर्शन में जानकी नंदन समाधिया, रघुनन्दन सिंह, महेंद्र सिंह, शैलेन्द्र चौधरी, रामेन्द्र सिंह, देवेंद्र प्रजापति, उमाशंकर त्रिपाठी, नाहर सिंह, शिवमंगल दुवे, सौरव ओझा, योगेश श्रीवास्तव, कौशलेंद्र सिंह, चंद्रशेखर पाण्डेय, संजय वर्मा, हरेंद्र सिंह, सतीश श्रीवास्तव, रामजीलाल उपाध्याय, राजेश सिंह चौहान, उमाशंकर शर्मा, इक्षाशंकर शर्मा, अजय शर्मा, भानसिंह, श्रीमती अमिता गुप्ता, धर्मैन्द्र तिवारी, बलिराम दोहरे, सूर्यबली चौहान, हमीद खान, राकेश राठौर, संतोष शर्मा, अजय शर्मा, शशिकांत कुशवाहा, महेश चंद्र दिवाकर, संजय कांकोरिया, हरिद्वार दोहरे, भवानी प्रसाद, धर्मैन्द्र दौहरे और राजा सिंह सहित सैकड़ों शिक्षक शामिल रहे। उपस्थित सभी शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने और जल्द से जल्द इसका निराकरण करने की अपील की है।
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    आज 16 जून 2026 को भिंड जिले के लहार विकासखंड के शिक्षकों ने वर्ष 2009 और 2017 के नियमों में संशोधन की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। शिक्षकों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) लहार के माध्यम से भारत सरकार के प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है।

ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने मांग की है कि वर्ष 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। शिक्षकों का तर्क है कि उनके पास वर्षों का शैक्षणिक अनुभव है, इसलिए उन्हें इस परीक्षा के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।

इस प्रदर्शन में जानकी नंदन समाधिया, रघुनन्दन सिंह, महेंद्र सिंह, शैलेन्द्र चौधरी, रामेन्द्र सिंह, देवेंद्र प्रजापति, उमाशंकर त्रिपाठी, नाहर सिंह, शिवमंगल दुवे, सौरव ओझा, योगेश श्रीवास्तव, कौशलेंद्र सिंह, चंद्रशेखर पाण्डेय, संजय वर्मा, हरेंद्र सिंह, सतीश श्रीवास्तव, रामजीलाल उपाध्याय, राजेश सिंह चौहान, उमाशंकर शर्मा, इक्षाशंकर शर्मा, अजय शर्मा, भानसिंह, श्रीमती अमिता गुप्ता, धर्मैन्द्र तिवारी, बलिराम दोहरे, सूर्यबली चौहान, हमीद खान, राकेश राठौर, संतोष शर्मा, अजय शर्मा, शशिकांत कुशवाहा, महेश चंद्र दिवाकर, संजय कांकोरिया, हरिद्वार दोहरे, भवानी प्रसाद, धर्मैन्द्र दौहरे और राजा सिंह सहित सैकड़ों शिक्षक शामिल रहे। उपस्थित सभी शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने और जल्द से जल्द इसका निराकरण करने की अपील की है।
    user_मुकेश सिंह भदौरिया
    मुकेश सिंह भदौरिया
    Local News Reporter गोरमी, भिंड, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
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