परिसीमन के मुद्दे को लेकर 30 अगस्त को रांची में आदिवासी एकता महाजुटान रैली। शुरू ऐप्प न्यूज़ संवाददाता। खूंटी। परिसीमन के मुद्दे को लेकर 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता महाजुटान रैली आयोजित की जाएगी। ‘समस्त आदिवासी समाज, झारखंड’ के बैनर तले होने वाली इस रैली की तैयारियों को लेकर मंगलवार को पूर्व मंत्री बंधु तिर्की खूंटी पहुंचे। उन्होंने आदिवासी समन्वय समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर रैली की रणनीति पर चर्चा की। इसके बाद स्थानीय परिसदन में प्रेस कांफ्रेंस कर परिसीमन को आदिवासी समाज के लिए बड़ी चुनौती बताया। बंधु तिर्की ने कहा कि देशभर में आदिवासी समाज गंभीर संकट से गुजर रहा है। कई राज्यों में आदिवासियों को उनकी जमीन और अधिकारों से बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश के सिंगरौली और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि आदिवासियों के विस्थापन के बाद बड़े उद्योगपतियों को बसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में भी परिसीमन का खतरा मंडरा रहा है। वर्ष 2006-07 में परिसीमन की चर्चा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर इसे रोका गया था। अब करीब दो दशक बाद फिर वही स्थिति सामने है। उन्होंने कहा कि परिसीमन जनगणना के आधार पर होता है, जिसका झारखंड के आदिवासी समाज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड का गठन आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए हुआ है। यहां जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और परंपरा की सुरक्षा के लिए पांचवीं अनुसूची लागू है। उन्होंने आशंका जताई कि परिसीमन में आदिवासी सीटों की संख्या कम होने से राज्य की राजनीति पर इसका असर पड़ेगा। पांच-छह सीटों की कमी भी भविष्य में आदिवासी नेतृत्व को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने परिसीमन को लेकर भाजपा पर षड्यंत्र का आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी समाज को समय रहते एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि परिसीमन होने की स्थिति में आदिवासी सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत वृद्धि की जानी चाहिए। बंधु तिर्की ने बताया कि परिसीमन के मुद्दे पर एक ड्राफ्टिंग कमिटी गठित की गई है। इसमें हाईकोर्ट के सुभाषिष सोरेन और नेशनल लॉ कॉलेज के रामचंद्र उरांव शामिल हैं। कमिटी की ओर से तैयार ड्राफ्ट को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के माध्यम से संसद तक पहुंचाने की तैयारी है। प्रेस कांफ्रेंस में रैली आयोजन समिति के शशि पन्ना ने भी संबोधित किया। मौके पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रवि मिश्रा, महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष सुनीता गोप, आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सह सांसद प्रतिनिधि विल्सन तोपनो, पीटर मुंडू, कांग्रेस जिला महासचिव प्रणीत तोपनो, आदिवासी समन्वय समिति के मार्शल बारला, बिनसाय मुंडा सहित कई आदिवासी नेता मौजूद थे।
परिसीमन के मुद्दे को लेकर 30 अगस्त को रांची में आदिवासी एकता महाजुटान रैली। शुरू ऐप्प न्यूज़ संवाददाता। खूंटी। परिसीमन के मुद्दे को लेकर 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता महाजुटान रैली आयोजित की जाएगी। ‘समस्त आदिवासी समाज, झारखंड’ के बैनर तले होने वाली इस रैली की तैयारियों को लेकर मंगलवार को पूर्व मंत्री बंधु तिर्की खूंटी पहुंचे। उन्होंने आदिवासी समन्वय समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर रैली की रणनीति पर चर्चा की। इसके बाद स्थानीय परिसदन में प्रेस कांफ्रेंस कर परिसीमन को आदिवासी समाज के लिए बड़ी चुनौती बताया। बंधु तिर्की ने कहा कि देशभर में आदिवासी समाज गंभीर संकट से गुजर रहा है। कई राज्यों में आदिवासियों को उनकी जमीन और अधिकारों से बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश के सिंगरौली और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि आदिवासियों के विस्थापन के बाद बड़े उद्योगपतियों को बसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में भी परिसीमन का खतरा मंडरा रहा है। वर्ष 2006-07 में परिसीमन की चर्चा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर इसे रोका गया था। अब करीब दो दशक बाद फिर वही स्थिति सामने है। उन्होंने कहा कि परिसीमन जनगणना के आधार पर होता है, जिसका झारखंड के आदिवासी समाज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड का गठन आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए हुआ है। यहां जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और परंपरा की सुरक्षा के लिए पांचवीं अनुसूची लागू है। उन्होंने आशंका जताई कि परिसीमन में आदिवासी सीटों की संख्या कम होने से राज्य की राजनीति पर इसका असर पड़ेगा। पांच-छह सीटों की कमी भी भविष्य में आदिवासी नेतृत्व को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने परिसीमन को लेकर भाजपा पर षड्यंत्र का आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी समाज को समय रहते एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि परिसीमन होने की स्थिति में आदिवासी सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत वृद्धि की जानी चाहिए। बंधु तिर्की ने बताया कि परिसीमन के मुद्दे पर एक ड्राफ्टिंग कमिटी गठित की गई है। इसमें हाईकोर्ट के सुभाषिष सोरेन और नेशनल लॉ कॉलेज के रामचंद्र उरांव शामिल हैं। कमिटी की ओर से तैयार ड्राफ्ट को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के माध्यम से संसद तक पहुंचाने की तैयारी है। प्रेस कांफ्रेंस में रैली आयोजन समिति के शशि पन्ना ने भी संबोधित किया। मौके पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रवि मिश्रा, महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष सुनीता गोप, आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सह सांसद प्रतिनिधि विल्सन तोपनो, पीटर मुंडू, कांग्रेस जिला महासचिव प्रणीत तोपनो, आदिवासी समन्वय समिति के मार्शल बारला, बिनसाय मुंडा सहित कई आदिवासी नेता मौजूद थे।
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- समावेशी नेत्र जांच शिविर में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़, जरूरतमंदों को मिला निःशुल्क चश्मा सिसई प्रखंड के पुराने प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में मंगलवार को जेएसएलपीएस एवं साइटसेवर्स इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में तथा निराला आई हॉस्पिटल, कुम्हार टोली, लोहरदगा रोड, गुमला के सहयोग से एक दिवसीय समावेशी नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में प्रखंड के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण पहुंचकर अपनी आंखों की जांच कराई। जांच टीम ने बताया कि शिविर में 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की नेत्र जांच को प्राथमिकता दी जा रही है। जांच के बाद मरीजों की आवश्यकता के अनुसार निःशुल्क दवा एवं चश्मा उपलब्ध कराया गया। वहीं, जिन मरीजों को ऑपरेशन की आवश्यकता होगी, उनका निःशुल्क ऑपरेशन भी कराया जाएगा। शिविर में आंखों से संबंधित गंभीर समस्याओं वाले मरीजों की भी जांच की गई। आयोजकों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बेहतर नेत्र स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस तरह के शिविर का आयोजन किया जा रहा है। मौके पर बीडीओ रमेश कुमार यादव, बीपीएम रिजवाना, जन विकास ट्रस्ट के सचिव अशोक कुमार निराला, सीईओ आर.एन. मोहंती, प्रोग्राम ऑफिसर देवाशीष पाल, स्टेट प्रोजेक्ट लीड सपना सुरीन, डीएम मंसूर वक्त, विजय कुमार एवं बिपिन बिहारी झा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।1
- एक कहानी ....... फैसले की तारीख ........A story of a poor farmer and indian court.1
- कॉमरेड आर.एन. सिंह, आप कहाँ चले गए?आपके जैसे राजनीतिक समझ, संघर्ष, त्याग और प्रतिबद्धता की मिसाल हमारे बीच से इतनी जल्दी कैसे चली गई? कॉमरेड आर.एन. सिंह, आप कहाँ चले गए?आपके जैसे राजनीतिक समझ, संघर्ष, त्याग और प्रतिबद्धता की मिसाल हमारे बीच से इतनी जल्दी कैसे चली गई? आपने जो रास्ता दिखाया, वह हम सभी के लिए हमेशा प्रेरणा का रास्ता रहेगा। आपके मार्गदर्शन और सुझावों के साथ मैंने हर कदम आगे बढ़ना सीखा। आप कभी सिखाते थे, कभी डाँटते थे, लेकिन हर परिस्थिति में अपने साहस और संघर्ष की शक्ति के साथ कठिन से कठिन परिस्थितियों का मुकाबला करना भी आपने ही सिखाया। आपसे मेरी पहली मुलाकात 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुई थी। उस मुलाकात से लेकर आज तक आपने हर पल, हर मोड़ पर आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। आज मैं जिस संघर्ष के रास्ते पर खड़ा हूँ, उस रास्ते तक पहुँचने में आपकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आपने मुझे सिखाया कि राजनीति सिर्फ सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के लिए संघर्ष, त्याग और बदलाव का रास्ता है। आपने अपने से ऊपर संगठन को और संगठन से ऊपर जनता के हित को रखा। यही आपकी राजनीति थी और यही आपकी सबसे बड़ी विरासत है। मैंने आपको पांकी चौक पर हर मुद्दे पर बेबाकी से बोलते देखा। आंदोलन करते देखा, जेल जाते देखा, लाठियाँ खाते देखा। पुलिस और जेल की यातनाओं के बावजूद आपके चेहरे पर संघर्ष का साहस कभी कम नहीं हुआ। और जब लोग अपने शरीर का एक बूंद खून देने से भी पीछे हट जाते हैं, तब आपने संघर्ष और साथी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की ऐसी मिसाल कायम की, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। आपने अपनी एक किडनी तक अपने दोस्त को दान कर दी, ताकि जिंदगी बचे और संघर्ष की ज्वाला भी जलती रहे। यह सिर्फ त्याग नहीं था, यह आपकी राजनीतिक प्रतिबद्धता की पराकाष्ठा थी। आपने अपना पूरा जीवन सामंती ताकतों के वर्चस्व को चुनौती देने में लगा दिया। जंगल-पहाड़ों से लेकर खेत-खलिहानों तक, गरीबों, मजदूरों और मेहनतकश जनता को संगठित करने के लिए लगातार संघर्ष किया। पांकी चौक, जहाँ कभी सामंती ताकतों का वर्चस्व हुआ करता था, वहाँ जनता की आवाज को बुलंद करना और उस वर्चस्व को चुनौती देना आपके लंबे संघर्ष की पहचान बन गया। आपने कभी आराम का रास्ता नहीं चुना।आपने कभी समझौते का रास्ता नहीं चुना।आपने हमेशा संघर्ष का रास्ता चुना।कॉमरेड, आपने हमें सिखाया कि संगठन व्यक्ति से बड़ा है,जनता संगठन से भी बड़ी है और जनता की मुक्ति का संघर्ष सबसे बड़ा है। आज आप हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आपके विचार, आपका संघर्ष, आपका साहस और आपका त्याग हमारे बीच हमेशा जिंदा रहेगा।लेकिन कॉमरेड, एक सवाल बार-बार मन में उठ रहा है—आखिर इतनी जल्दी क्या थी?थोड़ा और रुक जाते...हमसे थोड़ा और लड़ना सिखा जाते...थोड़ा और डाँट लेते...थोड़ा और रास्ता दिखा देते... आप चले गए, लेकिन जिस रास्ते पर आपने हमें चलना सिखाया है, उस रास्ते से हम पीछे नहीं हटेंगे।आपके अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।सामंती वर्चस्व के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।गरीब-मजदूर-किसान की एकता के लिए संघर्ष जारी रहेगा।जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा। कॉमरेड आर.एन. सिंह,आपका संघर्ष हमारी प्रेरणा है,आपका त्याग हमारी ताकत है,और आपकी विरासत हमारी जिम्मेदारी है। #कॉमरेड_RN_सिंह #RNसिंह #लालसलाम #लालसलामकॉमरेड #संघर्ष_जारी_रहेगा #संघर्ष_ही_विरासत_है #जनसंघर्ष #जनआंदोलन #जनता_के_लिए_संघर्ष #गरीब_मजदूर_किसान #मजदूर_किसान_एकता #सामंती_वर्चस्व_के_खिलाफ #जनता_की_आवाज #जनता_का_संघर्ष #भाकपा_माले #CPIML #CPI_ML #AISA #RYA #पांकी #पलामू #झारखंड #संघर्ष_की_मिसाल #त्याग_और_प्रतिबद्धता #क्रांतिकारी_श्रद्धांजलि #आपकी_विरासत_हमारी_जिम्मेदारी #आपका_संघर्ष_हमारी_प्रेरणा #लड़ेंगे_जीतेंगे #इंकलाब_जिंदाबाद #लालसलाम_कॉमरेड_RN_सिंह1
- छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में खूंटी बंद, सड़क पर उतरे पूर्व मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा। शुरू ऐप्प न्यूज़ संवाददाता। खूंटी। झारखंड के छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा के आह्वान पर मंगलवार को खूंटी बंद कराया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने बाजार क्षेत्र में घूम-घूमकर प्रतिष्ठानों को बंद कराया और हेमंत सरकार के खिलाफ विरोध जताया। बंद के दौरान भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा खुद कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरे और बंद को सफल बनाने में जुटे रहे। हालांकि बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला । वहीं कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्रों पर कार्रवाई का विरोध किया। मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष आनंद कुमार, भाजपा नेता रूपेश जायसवाल, कंचन सिंह समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।2
- BJP के बंद में कहां क्या-क्या हुआ। रांची झारखंड से पूरी खबर।1