करौली में पांचना बांध से पानी की मांग और अपने हितों की रक्षा के लिए किसान लोकगीतों के माध्यम से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इस अनोखे प्रदर्शन में ग्रामीण पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर लोकगीत गाकर अपनी जमीन की प्यास, फसलों की चिंता और अपने हक की बात प्रशासन व सरकार तक शालीन तरीके से पहुंचा रहे हैं। तीखी बयानबाजी के बजाय गीतों के जरिए बात रखने से आपसी भाईचारा और मर्यादा बनी हुई है, जो इस बात को साबित करता है कि मांगों को रखने के लिए हिंसा या उग्रता की नहीं, बल्कि संस्कृति से जुड़ने की जरूरत है। इस आंदोलन के बहाने नई पीढ़ी को भी क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक गीतों की ताकत देखने को मिल रही है। गौरतलब है कि राजस्थान के करौली में स्थित पांचना बांध को लेकर गुर्जर और मीणा समाज के बीच जल बंटवारे और वर्चस्व को लेकर दशकों से विवाद चल रहा है। वर्ष 2006 में हुई हिंसक झड़पों के बाद प्रशासन ने बांध का पानी रोक दिया था, जिसके बाद से कई गांवों में पानी की समस्या बनी हुई है और दोनों समुदाय अपने-अपने हकों को लेकर आमने-सामने हैं।
करौली में पांचना बांध से पानी की मांग और अपने हितों की रक्षा के लिए किसान लोकगीतों के माध्यम से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इस अनोखे प्रदर्शन में ग्रामीण पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर लोकगीत गाकर अपनी जमीन की प्यास, फसलों की चिंता और अपने हक की बात प्रशासन व सरकार तक शालीन तरीके से पहुंचा रहे हैं। तीखी बयानबाजी के बजाय गीतों के जरिए बात रखने से आपसी भाईचारा और मर्यादा बनी हुई है, जो इस बात को साबित करता है कि मांगों को रखने के लिए हिंसा या उग्रता की नहीं, बल्कि संस्कृति से जुड़ने की जरूरत है। इस आंदोलन के बहाने नई पीढ़ी को भी क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक गीतों की ताकत देखने को मिल रही है। गौरतलब है कि राजस्थान के करौली में स्थित पांचना बांध को लेकर गुर्जर और मीणा समाज के बीच जल बंटवारे और वर्चस्व को लेकर दशकों से विवाद चल रहा है। वर्ष 2006 में हुई हिंसक झड़पों के बाद प्रशासन ने बांध का पानी रोक दिया था, जिसके बाद से कई गांवों में पानी की समस्या बनी हुई है और दोनों समुदाय अपने-अपने हकों को लेकर आमने-सामने हैं।
- इन गीतों के माध्यम से किसान अपनी जमीन की प्यास, अपनी फसलों की चिंता और अपने हक की बात बेहद शालीन और पुरअसर तरीके से प्रशासन और सरकार तक पहुंचा रहे हैं। पाँचना बाँध क्षेत्र के उन हजारों किसानों की पीड़ा और संघर्ष को बयां करती है, जो अपने बुनियादी हक़ (पानी) के लिए धूप-छांव की परवाह किए बिना धरने पर बैठने को मजबूर हैं। गंगा को धरती पर लाने के लिए भागीरथ को घोर तपस्या करनी पड़ी थी, और आज अपने हक़ के पानी के लिए यह सामूहिक धरना भी किसी तपस्या से कम नहीं है। पानी सबका साझा जीवन है, और जब नीतियां न्याय और संवेदनशीलता के साथ बनाई जाएंगी, तभी असली 'भागीरथ' का जन्म होगा और पाँचना का पानी हर प्यासे खेत तक पहुंचेगा।" प्रशासन को केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तकतका सीमित रहने के बजाय, इस जल-विवाद के स्थायी तकनीकी समाधान पर काम करना पर काम करना होगा। सरकार द्वारा दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर एक लिखित, कानूनी और दीर्घकालिक समझौता (MoU) तैयार करना होगा, ताकि हर साल सीजन आने पर गतिरोध की स्थिति पैदा न हो। इस समस्या को सुलझाने के लिए किसी एक राजनेता या प्रशासनिक अधिकारी को नहीं, बल्कि एक निष्पक्ष और सर्वमान्य मध्यश्त दोनों पक्षों (कमांड और गैर-कमांड क्षेत्र के ग्रामीणों) को एक मेज पर बिठाकर आपसी भाईचारे के साथ संवाद स्थापित करना ही इस समस्या की पहली सीढ़ी है।1
- मंदसौर जिले की गरोठ तहसील के बोलिया गांव में वर्षा ऋतु का आगमन हो गया है। फिलहाल क्षेत्र में हल्की बारिश हो रही है।1
- मंदसौर जिले के चंदवासा से रामप्रसाद धनगर गुर्जर को लेकर एक खास खबर सामने आई है।1
- मौसम विभाग ने राजस्थान में प्री-मानसून के आगमन को लेकर आगामी दिनों के लिए कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सभी किसान भाइयों से सुरक्षित रहने का निवेदन किया गया है।1
- कोटा जिले के सातल्खेड़ी में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर के दौरान युवा शक्ति संगठन के कार्यकर्ताओं ने एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन मुख्य रूप से सातल्खेड़ी में अस्पताल में पेयजल की व्यवस्था, बिजली कटौती की समस्या और कब्रिस्तान के पास गोशाला पर अतिक्रमण को रोकने से संबंधित था। पेयजल की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि अस्पताल को पास से गुजरने वाली 24 घंटे जलापूर्ति लाइन से जोड़ा जाए। इस पर जलदाय विभाग ने जल्द से जल्द इस कार्य को पूरा करने का आश्वासन दिया। बिजली कटौती के मुद्दे पर, बिजली विभाग ने अनिश्चितकालीन कटौती पर सफाई देते हुए कहा कि सातल्खेड़ी में 4 से 5 ब्लॉक बनाए जाएंगे। इससे जिस ब्लॉक की बिजली जाएगी, कटौती केवल उसी ब्लॉक में होगी और बाकी के ब्लॉक में आपूर्ति जारी रहेगी। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए बिजली विभाग को 15 दिनों का समय दिया गया है। कब्रिस्तान के पास वाली गोशाला पर अतिक्रमण रोकने के संबंध में भी ज्ञापन दिया गया, जिस पर पटवारी ने सात दिनों के भीतर सातल्खेड़ी और लक्ष्मीपुरा की सीमा का रेखांकन करने का भरोसा दिलाया। एसडीएम और तहसीलदार मैडम ने इन सभी कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के आदेश दिए हैं।4
- झालावाड़ शहर के मंगलपुरा गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर सुबह 8 बजे से 9 बजे तक श्री सुखमनी साहिब का पाठ आयोजित किया गया, जिसके उपरांत शबद कीर्तन किए गए। कार्यक्रम के प्रयोजक डॉक्टर मनदीप सिंह और डॉक्टर ज्योतिका सरीन ने बताया कि एक निबंध लेखन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहे विजेताओं को प्रीतम सिंह, जगजीत सिंह बग्गा, नवीन भाटिया और रमेश हरपलानी द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए। गुरुद्वारा साहिब में उपस्थित साध संगत को छबील और प्रसादी का वितरण भी किया गया।2
- करौली में पांचना बांध से पानी की मांग और अपने हितों की रक्षा के लिए किसान लोकगीतों के माध्यम से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इस अनोखे प्रदर्शन में ग्रामीण पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर लोकगीत गाकर अपनी जमीन की प्यास, फसलों की चिंता और अपने हक की बात प्रशासन व सरकार तक शालीन तरीके से पहुंचा रहे हैं। तीखी बयानबाजी के बजाय गीतों के जरिए बात रखने से आपसी भाईचारा और मर्यादा बनी हुई है, जो इस बात को साबित करता है कि मांगों को रखने के लिए हिंसा या उग्रता की नहीं, बल्कि संस्कृति से जुड़ने की जरूरत है। इस आंदोलन के बहाने नई पीढ़ी को भी क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक गीतों की ताकत देखने को मिल रही है। गौरतलब है कि राजस्थान के करौली में स्थित पांचना बांध को लेकर गुर्जर और मीणा समाज के बीच जल बंटवारे और वर्चस्व को लेकर दशकों से विवाद चल रहा है। वर्ष 2006 में हुई हिंसक झड़पों के बाद प्रशासन ने बांध का पानी रोक दिया था, जिसके बाद से कई गांवों में पानी की समस्या बनी हुई है और दोनों समुदाय अपने-अपने हकों को लेकर आमने-सामने हैं।1
- झालावाड़ जिले में एक शराब के आदी बेटे ने अपनी ही जमीन हड़पने की नीयत से अपने पिता पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में 60 वर्षीय शंकर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उनका उपचार झालावाड़ के जिला अस्पताल में जारी है। पुलिस इस मामले में आरोपी बेटे की तलाश में जुटी हुई है।1