भिंड-लहार-काँच रेल लाइन परियोजना में 10 साल की देरी को लेकर जनता में गहरा असंतोष है, जिस पर चंबल बुंदेलखंड अंचल समग्र विकास जन मंच ने लहार में बड़े जन आंदोलन की चेतावनी दी है। वर्ष 2015-16 के रेल बजट में मंजूरी मिलने के बावजूद यह महत्वाकांक्षी परियोजना एक दशक से अधर में लटकी हुई है, जिससे क्षेत्र का औद्योगिक, व्यापारिक और सामाजिक विकास पूरी तरह ठप पड़ा है और लाखों लोग आधुनिक रेल कनेक्टिविटी से वंचित हैं। लहार के रेस्ट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए, समिति के मुख्य वक्ता श्री गुलाब सिंह राजावत ने सरकार और रेल मंत्रालय के रवैये पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और सरकार की वादाखिलाफी पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने इसे जनता के साथ छलावा बताया, क्योंकि इस घोषणा से पूरे अंचल में विकास की नई उम्मीदें जगी थीं। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस रेल परियोजना पर तुरंत काम शुरू नहीं किया, तो पूरे लहार क्षेत्र सहित चंबल-बुंदेलखंड अंचल में एक ऐतिहासिक और विशाल जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। इसके लिए क्रमिक अनशन, चक्का जाम और रेल रोको प्रदर्शन सहित उग्र आंदोलन की रणनीति तैयार की गई है। जन मंच समिति ने केंद्रीय रेल मंत्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को सौंपे जाने वाले एक ज्ञापन का प्रारूप भी मीडिया के सामने रखा, जिसमें सरकार से अविलंब बजट आवंटित करने और धरातल पर काम शुरू करने की अंतिम समय-सीमा घोषित करने की मांग की गई है। समिति ने लहार क्षेत्र के समस्त नागरिकों, किसानों, व्यापारियों और युवाओं से इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया है, इसे पूरे क्षेत्र के भविष्य की लड़ाई बताया है। श्री गुलाब सिंह राजावत ने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि आज डिजिटल क्रांति का दौर है और उनकी एक रील सरकार के सिंहासन को हिला सकती है। उन्होंने युवाओं से इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर रील्स और शॉर्ट्स बनाकर इस महा-उत्थान कार्य को जन-आंदोलन बनाने का आग्रह किया।
भिंड-लहार-काँच रेल लाइन परियोजना में 10 साल की देरी को लेकर जनता में गहरा असंतोष है, जिस पर चंबल बुंदेलखंड अंचल समग्र विकास जन मंच ने लहार में बड़े जन आंदोलन की चेतावनी दी है। वर्ष 2015-16 के रेल बजट में मंजूरी मिलने के बावजूद यह महत्वाकांक्षी परियोजना एक दशक से अधर में लटकी हुई है, जिससे क्षेत्र का औद्योगिक, व्यापारिक और सामाजिक विकास पूरी तरह ठप पड़ा है और लाखों लोग आधुनिक रेल कनेक्टिविटी से वंचित हैं। लहार के रेस्ट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए, समिति के मुख्य वक्ता श्री गुलाब सिंह राजावत ने सरकार और रेल मंत्रालय के रवैये पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और सरकार की वादाखिलाफी पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने इसे जनता के साथ छलावा बताया, क्योंकि इस घोषणा से पूरे अंचल में विकास की नई उम्मीदें जगी थीं। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस रेल परियोजना पर तुरंत काम शुरू नहीं किया, तो पूरे लहार क्षेत्र सहित चंबल-बुंदेलखंड अंचल में एक ऐतिहासिक और विशाल जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। इसके लिए क्रमिक अनशन, चक्का जाम और रेल रोको प्रदर्शन सहित उग्र आंदोलन की रणनीति तैयार की गई है। जन मंच समिति ने केंद्रीय रेल मंत्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को सौंपे जाने वाले एक ज्ञापन का प्रारूप भी मीडिया के सामने रखा, जिसमें सरकार से अविलंब बजट आवंटित करने और धरातल पर काम शुरू करने की अंतिम समय-सीमा घोषित करने की मांग की गई है। समिति ने लहार क्षेत्र के समस्त नागरिकों, किसानों, व्यापारियों और युवाओं से इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया है, इसे पूरे क्षेत्र के भविष्य की लड़ाई बताया है। श्री गुलाब सिंह राजावत ने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि आज डिजिटल क्रांति का दौर है और उनकी एक रील सरकार के सिंहासन को हिला सकती है। उन्होंने युवाओं से इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर रील्स और शॉर्ट्स बनाकर इस महा-उत्थान कार्य को जन-आंदोलन बनाने का आग्रह किया।
- आज बकरा ईद के अवसर पर एक मुस्लिम युवक ने 'जियो और जीने दो' का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने इस दौरान ज़ोर देकर कहा कि सभी को जीवन जीने का अधिकार है। युवक ने अपनी बात रखते हुए यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग कुर्बानी देते हैं, वे 'हमारे नहीं हो सकते'।1
- ओडिशा के गोपालपुर में विगत बुधवार को हृदयगति रुक जाने के कारण चंबल के वीर सपूत अमर शहीद हवलदार महावीर सिंह तोमर वीरगति को प्राप्त हुए थे। चंबलांचल को वीर सपूतों की भूमि कहा जाता है, जहाँ प्रथम विश्व युद्ध से लेकर 1962, 1965, 1971 और 1999 के युद्धों तक यहाँ के योद्धाओं ने अपना पराक्रम दिखाया है और अपनी विशिष्ट सेवाओं के लिए जाने जाते हैं। दिमनी थाना क्षेत्र के तुत का पुरा निवासी 42 वर्षीय हवलदार महावीर सिंह तोमर भारतीय सेना की एयर डिफेंस में सेवारत थे। उनके पार्थिव शरीर को हवाई सेवा से दिल्ली लाया गया, और फिर एंबुलेंस के माध्यम से मुरैना के सर्किट हाउस पहुँचाया गया। वहाँ से पूरे सैनिक सम्मान के साथ काफ़िला और अंतिम पराक्रम यात्रा उनके पैतृक गांव तक निकाली गई। इस दुखद घटना में वे अपने पीछे माता-पिता, पत्नी, दो बेटियों और एक 12 वर्षीय पुत्र को छोड़ गए हैं, जो उन्हें याद कर विलाप कर रहे हैं। उनके 12 वर्षीय पुत्र ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा और सशस्त्र सलामी के दौरान मुरैना के जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, दिमनी थाना प्रभारी जितेंद्र दोहरे, अमर शहीद सम्मान सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह तोमर सहित मनोज सिंह तोमर, अवधेश सिंह तोमर, भीमसेन सिंह तोमर, रोहित शर्मा, शिवम, अन्य सेवक, भूतपूर्व सैनिक संगठन और सैकड़ों ग्रामीणजन मौजूद थे। शहादत और सशस्त्र सलामी के दौरान "भारत माता की जय हो" और "हवलदार महावीर सिंह तोमर साहब अमर रहे" के जयघोष गूँजते रहे, जिससे पूरा माहौल गमगीन हो गया। अंचल का यह लाल वीर सपूत पंचतत्व में विलीन हो गया, जिनका अंतिम संस्कार सशस्त्र सम्मान के साथ संपन्न हुआ।4
- भिंड पुलिस ने हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो महिलाओं सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अश्लील वीडियो बनाकर लोगों को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर ब्लैकमेल करता था, जिसका मुख्य निशाना बुजुर्ग व्यक्ति होते थे जिनसे वे रुपए वसूलते थे। इस मामले में 27 मई 2026 को एक किसान ने शिकायत दर्ज कराई थी। किसान ने बताया कि 23 मई को भिंड बाजार से अपने गांव लौटते समय उसे एक महिला मिली, जिसने पैर दर्द का बहाना बनाकर उसे घर छोड़ने में मदद मांगी। जब फरियादी उस महिला को उसके घर छोड़ने गया, तो महिला ने चाय पिलाने के बहाने उसे घर के अंदर बुला लिया। वहाँ पहले से रची गई साजिश के तहत गिरोह के अन्य सदस्य मौजूद थे, जिन्होंने किसान का वीडियो बना लिया। इसके बाद आरोपियों ने वीडियो वायरल करने, झूठे बलात्कार केस में फंसाने और जान से मारने की धमकी देकर किसान से 7 लाख रुपए की मांग की। आरोपियों ने तत्काल 5 हजार रुपए वसूल भी कर लिए थे और बाकी रकम के लिए किसान पर अपना खेत बेचने का दबाव बना रहे थे। मामले में पुलिस ने अपराध क्रमांक 331/26 के तहत धारा 308(5), 308(6), 351(2), 3(5) बीएनएस के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक भिंड श्री सूरज कुमार वर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री संजीव पाठक और नगर पुलिस अधीक्षक श्री निरंजन सिंह राजपूत के निर्देशन में थाना प्रभारी देहात निरीक्षक शिवप्रताप सिंह राजावत के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। इस टीम ने मुखबिर की सूचना और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए हजीरा रोड से गिरोह के दो महिलाओं सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह ने अन्य लोगों को भी इसी तरह फंसाया होगा। पुलिस अन्य पीड़ितों की पहचान भी कर रही है और सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा रहा है।3
- अम्बाह मिल्हेडा रोड पर स्थित आवासों में बिजली, पानी और नल कनेक्शन जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण वहां के रहवासी पिछले करीब 2-3 सालों से गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। इन आवासों में निवास कर रहे लोग इन बुनियादी आवश्यकताओं की कमी से त्रस्त हैं और इस समस्या से निजात पाने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा। निवासियों का आरोप है कि नगर पालिका इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई ध्यान नहीं दे रही है।1
- आगरा के शमसाबाद रोड स्थित राजपुर में राजेश्वर पेट्रोल पंप के सामने, गोविंद पराशर के साथ स्थानीय निवासियों ने गंदे नाले के पानी में उतरकर धरना प्रदर्शन किया। यह विरोध क्षेत्र में व्याप्त गंभीर समस्या को उजागर करने के लिए किया गया। स्थानीय दुकानदारों ने जानकारी दी कि यह गंदे नाले की समस्या कई वर्षों से चली आ रही है, जिसके कारण वहां दुकानदारी करने वाले लोगों के साथ-साथ महिलाओं और अन्य राहगीरों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन स्थल के पास ही एक देवी मंदिर भी मौजूद है, जिससे लोगों की आस्था और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश के भिंड ज़िले के मिहोनी क्षेत्र के बीहड़ों में अचानक भीषण आग लगने से आसपास के इलाकों में ज़बरदस्त दहशत फैल गई। देखते ही देखते आग ने बीहड़ का एक बड़ा हिस्सा अपनी चपेट में ले लिया, जिसकी लपटें गाँव के बिल्कुल करीब पहुँच गईं। इससे ग्रामीणों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया और वे अपने घरों से बाहर निकलकर देर रात तक आग बुझाने का प्रयास करते रहे। ग्रामीणों ने बताया कि इस घटना की सूचना दिए जाने के बावजूद, रात 9 बजे तक भी कोई भी ज़िम्मेदार अधिकारी या दमकल की टीम मौके पर नहीं पहुँची। प्रशासनिक व्यवस्थाओं की इस कथित लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में गहरी नाराज़गी देखने को मिली, क्योंकि कई घंटे बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली।2