आदिनाथ जयंती पर निकलेगी प्रभातफेरी संयम का जीवन ही आत्मकल्याण का मार्ग, दिखावे से नहीं जागृत ज्ञान से होती है कर्मों की निर्जरा - मुनिश्री विश्वसूर्य सागर सम्यकदृष्टि जीव वह होता है जो अपने भीतर जागृत ज्ञान के माध्यम से अशुभ कर्मों की निर्जरा करता है। संसार में भटकाने वाली क्रियाओं से दूर रहकर यदि मनुष्य अपने ज्ञान को सदैव जागृत रखे तो आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। उक्त बातें नेमीनगर सांई कालोनी स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मैं विराजित मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने आशीर्वचन देते हुए कही। उन्होंने कहा जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएं नहीं बल्कि संयम, साधना और आत्म शुद्धि होना चाहिए। गुरु को ऐसे शिष्य बनाना चाहिए जो उनकी साधना और मर्यादा को धूमिल न करें। आचार्यों ने बहुत पहले ही ग्रंथों में लिख दिया था पंचम काल में शिष्य किस प्रकार के होंगे। वर्तमान समय में कई साधु-संत अपनी मूल साधु मुद्रा को भूलकर प्रशंसा और मान-सम्मान में डूबते दिखाई देते हैं, जो साधना के मार्ग में बाधा बनता है। जो व्यक्ति योगी है उसे अपने योग की कीमत समझनी चाहिए और भोग-विलास से दूर रहना चाहिए। सम्यकदृष्टि जीव ही तीर्थंकर प्रवृत्ति का बंध करता है। अज्ञानी जीव को कर्मों की निर्जरा करने में लाखों-करोड़ों वर्ष लग जाते हैं, जबकि ज्ञानी जीव सही ज्ञान और जागरूकता के साथ पलभर में ही कर्मों की निर्जरा कर सकता है। आजकल कई स्थानों पर ध्यान केंद्रों के नाम पर दुरुपयोग भी देखने को मिल रहा है। इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता कि कोई तीर्थंकर ध्यान केंद्र के माध्यम से मोक्ष गए हो। यदि उतना ही समय और प्रयास मंदिर निर्माण और धर्म प्रसार में लगाया जाए तो अधिक लोगों का आत्मकल्याण संभव हो सकता है। केवल पिच्छिका और कमंडल धारण करने से आत्मकल्याण नहीं होता, ये केवल निमित्त मात्र हैं। वास्तविक और बाहर का भोजन करने से भी बचना चाहिए। अपने जीवन अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा उन्होंने स्वयं 15 वर्षों तक एकासन का पालन किया, उसके बाद दीक्षा ग्रहण की। यह जीवन केवल खाने-पीने के लिए नहीं बल्कि संयम धारण करने के लिए मिला है। संयम लेने के बाद उसकी रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है। जो प्रतिमाएं धारण की हैं, उनके अनुरूप जीवन जीना चाहिए। केवल दूसरों को देखकर या दिखावे के लिए प्रतिमा धारण नहीं करनी चाहिए।मनुष्य को आंखें इसलिए मिली हैं कि वह सावधानी से चले और जीवों की हिंसा से बचे। यदि आंखें होते हुए भी पैरों तले जीवों की हिंसा हो रही है तो ऐसी आंखों का क्या औचित्य है। मनुष्य को अपना जीवन असंयमित नहीं बल्कि संयमित बनाना चाहिए। संयम, साधना और जागृत ज्ञान ही आत्मकल्याण का सच्चा मार्ग है। ऋषभदेव भगवान जन्म व तप कल्याणक जैन शासन के प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ ऋषभदेव भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव का आयोजन दिगंबर जैन समाज द्वारा दो दिवसीय कार्यक्रमों के साथ भव्यता से किया गया है। नगर के किला मंदिर में विराजमान पूज्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज व मुनि श्री साध्य सागर मुनिराज ससंघ के सानिध्य में आदिनाथ जयंती पर समस्त जिनालयों में श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा कर पूजा -अर्चना भक्तिभाव के साथ की जाएगी। 12 मार्च को प्रातः 6 बजे प्रभात फेरी किला मंदिर से प्रारम्भ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नगर के जिनालयों में ध्वजारोहण करने के बाद किला मंदिर में श्री आदिनाथ भगवान के मस्तकाभिषेक, पूजन एवं बालक आदिकुमार की पालना झुलाई का आयोजन किया जाएगा। सायंकाल 7 बजे 48 दीपकों से श्री भक्ताम्बर महाकाव्य की आराधना की जाएगी।
आदिनाथ जयंती पर निकलेगी प्रभातफेरी संयम का जीवन ही आत्मकल्याण का मार्ग, दिखावे से नहीं जागृत ज्ञान से होती है कर्मों की निर्जरा - मुनिश्री विश्वसूर्य सागर सम्यकदृष्टि जीव वह होता है जो अपने भीतर जागृत ज्ञान के माध्यम से अशुभ कर्मों की निर्जरा करता है। संसार में भटकाने वाली क्रियाओं से दूर रहकर यदि मनुष्य अपने ज्ञान को सदैव जागृत रखे तो आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। उक्त बातें नेमीनगर सांई कालोनी स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मैं विराजित मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने आशीर्वचन देते हुए कही। उन्होंने कहा जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएं नहीं बल्कि संयम, साधना और आत्म शुद्धि होना चाहिए। गुरु को ऐसे शिष्य बनाना चाहिए जो उनकी साधना और मर्यादा को धूमिल न करें। आचार्यों ने बहुत पहले ही ग्रंथों में लिख दिया था पंचम काल में शिष्य किस प्रकार के होंगे। वर्तमान समय में कई साधु-संत अपनी मूल साधु मुद्रा को भूलकर प्रशंसा और मान-सम्मान में डूबते दिखाई देते हैं, जो साधना के मार्ग में बाधा बनता है। जो व्यक्ति योगी है उसे अपने योग की कीमत समझनी चाहिए और भोग-विलास से दूर रहना चाहिए। सम्यकदृष्टि जीव ही तीर्थंकर प्रवृत्ति का बंध करता है। अज्ञानी जीव को कर्मों की निर्जरा करने में लाखों-करोड़ों वर्ष लग जाते हैं, जबकि ज्ञानी जीव सही ज्ञान और जागरूकता के साथ पलभर में ही कर्मों की निर्जरा कर सकता है। आजकल कई स्थानों पर ध्यान केंद्रों के नाम पर दुरुपयोग भी देखने को मिल रहा है। इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता कि कोई तीर्थंकर ध्यान केंद्र के माध्यम से मोक्ष गए हो। यदि उतना ही समय और प्रयास मंदिर निर्माण और धर्म प्रसार में लगाया जाए तो अधिक लोगों का आत्मकल्याण संभव हो सकता है। केवल पिच्छिका और कमंडल धारण करने से आत्मकल्याण नहीं होता, ये केवल निमित्त मात्र हैं। वास्तविक और बाहर का भोजन करने से भी बचना चाहिए। अपने जीवन अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा उन्होंने स्वयं 15 वर्षों तक एकासन का पालन किया, उसके बाद दीक्षा ग्रहण की। यह जीवन केवल खाने-पीने के लिए नहीं बल्कि संयम धारण करने के लिए मिला है। संयम लेने के बाद उसकी रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है। जो प्रतिमाएं धारण की हैं, उनके अनुरूप जीवन जीना चाहिए। केवल दूसरों को देखकर या दिखावे के लिए प्रतिमा धारण नहीं करनी चाहिए।मनुष्य को आंखें इसलिए मिली हैं कि वह सावधानी से चले और जीवों की हिंसा से बचे। यदि आंखें होते हुए भी पैरों तले जीवों की हिंसा हो रही है तो ऐसी आंखों का क्या औचित्य है। मनुष्य को अपना जीवन असंयमित नहीं बल्कि संयमित बनाना चाहिए। संयम, साधना और जागृत ज्ञान ही आत्मकल्याण का सच्चा मार्ग है। ऋषभदेव भगवान जन्म व तप कल्याणक जैन शासन के प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ ऋषभदेव भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव का आयोजन दिगंबर जैन समाज द्वारा दो दिवसीय कार्यक्रमों के साथ भव्यता से किया गया है। नगर के किला मंदिर में विराजमान पूज्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज व मुनि श्री साध्य सागर मुनिराज ससंघ के सानिध्य में आदिनाथ जयंती पर समस्त जिनालयों में श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा कर पूजा -अर्चना भक्तिभाव के साथ की जाएगी। 12 मार्च को प्रातः 6 बजे प्रभात फेरी किला मंदिर से प्रारम्भ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नगर के जिनालयों में ध्वजारोहण करने के बाद किला मंदिर में श्री आदिनाथ भगवान के मस्तकाभिषेक, पूजन एवं बालक आदिकुमार की पालना झुलाई का आयोजन किया जाएगा। सायंकाल 7 बजे 48 दीपकों से श्री भक्ताम्बर महाकाव्य की आराधना की जाएगी।
- नगर पालिका अध्यक्ष हेमकुंवर रायसिंह मेवाडा एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी महोदय श्री विनोद कुमार प्रजापति की निगरानी में नगर पालिका की सहयोगी संस्था यूनिक वेस्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड उज्जैन के द्वारा 8 मार्च से 14 मार्च तक मनाए जा रहे विश्व महिला दिवस सप्ताह के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 15 में महिला स्व. सहायता समूहों के साथ स्वच्छता संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वार्ड क्रमांक 15 के पार्षद श्री तेजसिंह राठौर उपस्थित रहे। इस अवसर पर एनयूएलएम अधिकारी श्री महेंद्र सिंह पोसवाल, पार्वती शर्मा, जन-जागरूकता गतिविधि टीम लीडर राजकुमार अकेला, कचरा वाहन संचालक विनय सिंह, अनीश सोलंकी तथा महिला स्व सहायता समूह की प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में समूह की सदस्याएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्यों तथा आगामी स्वच्छता अभियानों के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। संवाद के दौरान पॉलिथीन प्रतिबंध को प्रभावी बनाने, घरों से निकलने वाले कचरे को दो अलग-अलग डिब्बों में पृथक करने, सूखा कचरा कचरा वाहन में देने तथा गीले कचरे से घर पर ही खाद बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उपस्थित महिलाओं को जागरूक किया गया। इस अवसर पर पार्षद श्री तेजसिंह राठौर ने बताया वार्ड के मुखमपुरा रोड पर वर्षों से लगे कचरे के ढेर को नगर पालिका की स्वच्छता आईईसी टीम और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से पूरी तरह हटाया गया है। पिछले चार सप्ताह से वहां कचरा शून्य स्थिति बनी हुई है और अब वह स्थान स्वच्छ एवं सुंदर दिखाई दे रहा है। इसी प्रकार वार्ड में बीआरसी कार्यालय के ग्राउंड में लगे कचरे के ढेर को भी शीघ्र हटाकर पूरे वार्ड को 100 प्रतिशत कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम के अंत में पार्षद श्री राठौर ने नागरिकों से स्वच्छता अभियान में पूर्व की तरह सहयोग करने की अपील की तथा स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही महिला स्व सहायता समूहों का पुष्प गुच्छ दे कर स्वागत और अभिनंदन किया।3
- Post by Dhansing karma Dhansing karma1
- Post by Jitendra Patidar1
- Post by Sajid Pathan1
- ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार उत्सव कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमशुल हसन बल्ली द्वारा इतवारे पर रोजा इफ्तार कराया गया जिसमें भोपाल शहर इसमें सभी धर्म के लोग शामिल थेशमसुल हसन बल्ली हमने कहा यह गंगा जमुना तहजीब है हमारे देश की जिसे हम बरकरार रखते हैं और हम सभी त्योहार बखूबी मानते हैं इसमें सभी शहर वासियों से मैं कहूंगा कि जैसे हमने होली मनाई वैसे ही रमजान और ईद भी मनाए कोई छोटी-मोटी गलती अगर किसी से होती है तो उसको माफ करके अपने त्योहारों को भारतीय सभ्यता के अनुसार मनाएं एक दूसरे की छोटी बड़ी गलतियों को नजरअंदाज करें1
- Post by शाहिद खान रिपोर्टर1
- Post by Naved khan1
- देश की प्रथम महिला शिक्षिका एवं महान समाज सुधारिका सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि नगर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। शास्त्री स्कूल स्थित परसराम कॉम्प्लेक्स में प्रांतीय कुशवाहा समाज सीहोर के जिला अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद नरेंद्र कुशवाहा के कार्यालय में समाजजनों की उपस्थिति में प्रांतीय कुशवाहा समाज के प्रदेश अध्यक्ष योगेश मानसिंह कुशवाहा के आह्वान पर पूरे प्रदेश में जिला एवं स्थानीय स्तर पर आयोजित किया गया। इसी क्रम में आष्टा में भी समाजजनों ने एकत्रित होकर सावित्रीबाई फुले के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया तथा उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष नरेंद्र कुशवाहा पूर्व पार्षद ने उपस्थित समाजजनों को संबोधित करते हुए कहा सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में महिलाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया, जब समाज में बेटियों को शिक्षा से दूर रखा जाता था। उन्होंने न केवल देश की पहली महिला शिक्षिका बनने का गौरव प्राप्त किया, बल्कि महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। सावित्रीबाई फुले का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके बताए मार्ग पर चलकर ही समाज में शिक्षा, समानता और जागरूकता का प्रसार संभव है। कार्यक्रम में उपस्थित समाजजनों ने भी सावित्रीबाई फुले के जीवन एवं उनके सामाजिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर प्रांतीय कुशवाहा समाज के जिला युवा संगठन उपाध्यक्ष गोपाल कुशवाहा (पतंग), मां पार्वती धाम गौशाला के कोषाध्यक्ष संजय सुराणा, शुभम कुशवाहा, सुशील कुशवाहा, राज कुशवाहा, भगवानदास शुक्ला, लखन सेन सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मातृशक्ति की भी झलक विशेष सहभागिता रही, जिनमें श्रीमती पार्वती परसराम कुशवाहा, श्रीमती गीता नरेंद्र कुशवाहा, श्रीमती अनीता बबनराव महाडीक, श्रीमती पूजा सुशील कुशवाहा, श्रीमती हेमलता मनोज कुशवाहा सहित अन्य मातृशक्तियाँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन प्रांतीय कुशवाहा समाज सीहोर के जिला अध्यक्ष नरेंद्र कुशवाहा पूर्व पार्षद ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने सावित्रीबाई फुले के आदर्शों को अपनाने और समाज में शिक्षा के महत्व को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।1