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देश की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ खड़ी हुई है। एक तरफ जहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एक ट्वीट सोशल मीडिया पर अपनी स्पेलिंग की गलतियों को लेकर चर्चा में है और वायरल हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ नीट (NEET) समेत कई अन्य परीक्षाओं के विवादों और पेपर लीक के मामलों ने देश के लाखों छात्रों की चिंता को बढ़ा दिया है। इस गंभीर स्थिति के बीच, सीजेपी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और आंदोलन लगातार जारी हैं, जिसमें प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार आखिर मौन क्यों है? इसके साथ ही, लंबे समय से भूख हड़ताल और आंदोलन से जुड़े रहे महान समाजसेवी सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद सोशल मीडिया पर बहस बेहद तेज हो गई है। उनके समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बताया है, जबकि प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया है। इन लगातार होते आंदोलनों और विवादों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर छात्रों का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा, ये पेपर लीक कब रुकेंगे और शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा कैसे बहाल होगा।

15 hrs ago
user_राजकुमार कुशवाह पत्रकार
राजकुमार कुशवाह पत्रकार
पत्रकार इंदरगढ़, दतिया, मध्य प्रदेश•
15 hrs ago

देश की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ खड़ी हुई है। एक तरफ जहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एक ट्वीट सोशल मीडिया पर अपनी स्पेलिंग की गलतियों को लेकर चर्चा में है और वायरल हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ नीट (NEET) समेत कई अन्य परीक्षाओं के विवादों और पेपर लीक के मामलों ने देश के लाखों छात्रों की चिंता को बढ़ा दिया है। इस गंभीर स्थिति के बीच, सीजेपी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और आंदोलन लगातार जारी हैं, जिसमें प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार आखिर मौन क्यों है? इसके साथ ही, लंबे समय से भूख हड़ताल और आंदोलन से जुड़े रहे महान समाजसेवी सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद सोशल मीडिया पर बहस बेहद तेज हो गई है। उनके समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बताया है, जबकि प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया है। इन लगातार होते आंदोलनों और विवादों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर छात्रों का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा, ये पेपर लीक कब रुकेंगे और शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा कैसे बहाल होगा।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस की आम सभा के दौरान भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी खुद वहां वोट मांगने पहुंच गए। कांग्रेस की सभा में पहुंचे भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने वहां मौजूद लोगों से वोट की अपील की और कहा, 'आप सभी का आशीर्वाद हमें मिले।'
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    मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस की आम सभा के दौरान भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी खुद वहां वोट मांगने पहुंच गए। कांग्रेस की सभा में पहुंचे भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने वहां मौजूद लोगों से वोट की अपील की और कहा, 'आप सभी का आशीर्वाद हमें मिले।'
    user_Sanjeev Richhariya
    Sanjeev Richhariya
    Court reporter इंदरगढ़, दतिया, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • मध्य प्रदेश में 1,76,000 नौकरियों के लिए पिछड़ा वर्ग के समर्थन में भीम आर्मी और जयस आदिवासी संगठन मैदान में उतर आए हैं और भोपाल में विधानसभा घेराव का ऐलान कर दिया गया है। "भोपाल चलो भोपाल चलो" के पुरजोर आह्वान के साथ 20 जुलाई 2026 को विधानसभा का घेराव किया जाएगा, जिसे लेकर ओबीसी महासभा जिंदाबाद के नारे बुलंद किए जा रहे हैं। इस आंदोलन के जरिए मुख्य रूप से तीन मांगें उठाई गई हैं, जिसमें सबसे पहले 13% का होल्ड हटाने, 27% आरक्षण लागू करने और पिछड़ा वर्ग की जातिगत जनगणना कराकर उसके आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग शामिल है। यह ऐलान राष्ट्रीय कर कमेटी, कार्यकारी जिला अध्यक्ष और जिला मीडिया ओबीसी महासभा पिछड़ावर्ग एससी एसटी मध्य प्रदेश द्वारा किया गया है।
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    मध्य प्रदेश में 1,76,000 नौकरियों के लिए पिछड़ा वर्ग के समर्थन में भीम आर्मी और जयस आदिवासी संगठन मैदान में उतर आए हैं और भोपाल में विधानसभा घेराव का ऐलान कर दिया गया है। "भोपाल चलो भोपाल चलो" के पुरजोर आह्वान के साथ 20 जुलाई 2026 को विधानसभा का घेराव किया जाएगा, जिसे लेकर ओबीसी महासभा जिंदाबाद के नारे बुलंद किए जा रहे हैं।

इस आंदोलन के जरिए मुख्य रूप से तीन मांगें उठाई गई हैं, जिसमें सबसे पहले 13% का होल्ड हटाने, 27% आरक्षण लागू करने और पिछड़ा वर्ग की जातिगत जनगणना कराकर उसके आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग शामिल है। यह ऐलान राष्ट्रीय कर कमेटी, कार्यकारी जिला अध्यक्ष और जिला मीडिया ओबीसी महासभा पिछड़ावर्ग एससी एसटी मध्य प्रदेश द्वारा किया गया है।
    user_Jay Jawan Jay Kisan
    Jay Jawan Jay Kisan
    Lawyer Indergarh, Datia•
    19 hrs ago
  • दतिया के पठारी सलैया में उपचुनाव को लेकर चुनावी चर्चा का आयोजन किया गया। लक्ष्य न्यूज़ चैनल पर हुए इस लाइव प्रसारण के दौरान गांव के लोगों ने अपने मन की बात रखी और क्षेत्र की सच्चाई को सबके सामने लाया।
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    दतिया के पठारी सलैया में उपचुनाव को लेकर चुनावी चर्चा का आयोजन किया गया। लक्ष्य न्यूज़ चैनल पर हुए इस लाइव प्रसारण के दौरान गांव के लोगों ने अपने मन की बात रखी और क्षेत्र की सच्चाई को सबके सामने लाया।
    user_Lakshya News
    Lakshya News
    Datia, Madhya Pradesh•
    12 hrs ago
  • दतिया में यूपी चुनाव को लेकर की गई एक मीडिया ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान स्थानीय जनता ने अपनी बात खुलकर सामने रखी है। इस मीडिया ग्राउंड रिपोर्ट में बातचीत करते हुए लोगों ने साफ तौर पर कहा है कि नरोत्तम दादा नहीं तो फिर दामोदर।
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    दतिया में यूपी चुनाव को लेकर की गई एक मीडिया ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान स्थानीय जनता ने अपनी बात खुलकर सामने रखी है। इस मीडिया ग्राउंड रिपोर्ट में बातचीत करते हुए लोगों ने साफ तौर पर कहा है कि नरोत्तम दादा नहीं तो फिर दामोदर।
    user_Safik kazi Midia
    Safik kazi Midia
    Local News Reporter दतिया, दतिया, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान राजनीतिक सौहार्द की एक बेहद अनोखी तस्वीर सामने आई है। यहाँ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे, तभी वहाँ से भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का काफिला गुजरा। जीतू पटवारी ने उन्हें रुकने का आग्रह करते हुए मंच से कहा, "दूर से जाओगे तो कैसे चलेगा"। इसके बाद आशुतोष तिवारी मंच के पास पहुंचे, जहाँ दोनों नेताओं ने बेहद गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया और गले मिलकर संक्षिप्त बातचीत की। इस दौरान तिवारी ने पटवारी से कहा कि उन्हें "आपसे आशीर्वाद की अपेक्षा" है। नेताओं के बीच आपसी सम्मान का यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक जानकार इसे लोकतांत्रिक मर्यादा और व्यक्तिगत संबंधों का उदाहरण मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे चुनावी रणनीति के नजरिए से भी देख रहे हैं। इससे पहले भी जीतू पटवारी की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित अन्य नेताओं के साथ ट्रेन में चाय पर चर्चा की तस्वीर सुर्खियां बटोर चुकी है। हालांकि दोनों दल अपने-अपने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत से जुटे हैं, लेकिन दतिया की इस नई तस्वीर ने राजनीतिक मतभेदों के बीच आपसी सम्मान और संवाद की संस्कृति को रेखांकित किया है।
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    मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान राजनीतिक सौहार्द की एक बेहद अनोखी तस्वीर सामने आई है। यहाँ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे, तभी वहाँ से भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का काफिला गुजरा। जीतू पटवारी ने उन्हें रुकने का आग्रह करते हुए मंच से कहा, "दूर से जाओगे तो कैसे चलेगा"। इसके बाद आशुतोष तिवारी मंच के पास पहुंचे, जहाँ दोनों नेताओं ने बेहद गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया और गले मिलकर संक्षिप्त बातचीत की। इस दौरान तिवारी ने पटवारी से कहा कि उन्हें "आपसे आशीर्वाद की अपेक्षा" है।

नेताओं के बीच आपसी सम्मान का यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक जानकार इसे लोकतांत्रिक मर्यादा और व्यक्तिगत संबंधों का उदाहरण मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे चुनावी रणनीति के नजरिए से भी देख रहे हैं। इससे पहले भी जीतू पटवारी की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित अन्य नेताओं के साथ ट्रेन में चाय पर चर्चा की तस्वीर सुर्खियां बटोर चुकी है। हालांकि दोनों दल अपने-अपने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत से जुटे हैं, लेकिन दतिया की इस नई तस्वीर ने राजनीतिक मतभेदों के बीच आपसी सम्मान और संवाद की संस्कृति को रेखांकित किया है।
    user_Shahid Qureshi
    Shahid Qureshi
    दतिया, दतिया, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • दतिया के भांडेर नगर में पोद्दार की बगिया स्थित भोलेनाथ मंदिर प्रांगण में भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष राजेंद्र सिंह यादव द्वारा रविवार को अखंड रामायण पाठ के समापन पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर परिसर में भक्तों द्वारा 24 घंटे तक अखंड रामायण पाठ किया गया, जिसके बाद पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से हवन-पूजन संपन्न कराया और क्षेत्र में सुख-शांति की कामना की। हवन के उपरांत आयोजित हुए इस भंडारे में भांडेर भाजपा मंडल अध्यक्ष रूपेश पंसारी भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे और प्रसाद ग्रहण कर आयोजन समिति की सराहना की। इस मौके पर आयोजकों ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से क्षेत्र में आस्था और भाईचारे का संदेश जाता है।
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    दतिया के भांडेर नगर में पोद्दार की बगिया स्थित भोलेनाथ मंदिर प्रांगण में भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष राजेंद्र सिंह यादव द्वारा रविवार को अखंड रामायण पाठ के समापन पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर परिसर में भक्तों द्वारा 24 घंटे तक अखंड रामायण पाठ किया गया, जिसके बाद पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से हवन-पूजन संपन्न कराया और क्षेत्र में सुख-शांति की कामना की।

हवन के उपरांत आयोजित हुए इस भंडारे में भांडेर भाजपा मंडल अध्यक्ष रूपेश पंसारी भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे और प्रसाद ग्रहण कर आयोजन समिति की सराहना की। इस मौके पर आयोजकों ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से क्षेत्र में आस्था और भाईचारे का संदेश जाता है।
    user_पत्रकार जितेंद्र सिंह कौरव
    पत्रकार जितेंद्र सिंह कौरव
    Voice of people भांडेर, दतिया, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • एक समय था जब महंगाई को लेकर तत्कालीन सरकार पर लगातार सवाल उठाए जाते थे और पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर व रसोई का बढ़ता खर्च चुनावी भाषणों का मुख्य मुद्दा हुआ करता था। लेकिन आज 2026 में महंगाई को लेकर जनता एक बार फिर सवाल पूछ रही है। सोशल मीडिया पर वर्ष 2013 और 2026 की कीमतों की तुलना करने वाले पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को दिखाया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग वर्षों की कीमतों की तुलना करते समय वैश्विक कच्चे तेल के दाम, टैक्स, आर्थिक परिस्थितियां और मुद्रास्फीति जैसे कई कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है। इसके बावजूद, आम लोगों का साफ कहना है कि रसोई का खर्च बढ़ा है, जिससे घर चलाना मुश्किल हो गया है और आमदनी के मुकाबले उनके खर्च बहुत तेजी से बढ़े हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि क्या महंगाई से जूझ रही जनता को वाकई कोई राहत मिलेगी या फिर किए गए वादे केवल चुनावी भाषणों तक ही सीमित रह जाएंगे? पहले जहां महंगाई को देश का सबसे बड़ा मुद्दा बताया जाता था, वहीं आज 2026 के आंकड़े जनता के सामने हैं और लोग पूछ रहे हैं कि वादे पूरे हुए या सिर्फ भाषण बदल गए हैं।
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    एक समय था जब महंगाई को लेकर तत्कालीन सरकार पर लगातार सवाल उठाए जाते थे और पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर व रसोई का बढ़ता खर्च चुनावी भाषणों का मुख्य मुद्दा हुआ करता था। लेकिन आज 2026 में महंगाई को लेकर जनता एक बार फिर सवाल पूछ रही है। सोशल मीडिया पर वर्ष 2013 और 2026 की कीमतों की तुलना करने वाले पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को दिखाया जा रहा है।

हालांकि, अलग-अलग वर्षों की कीमतों की तुलना करते समय वैश्विक कच्चे तेल के दाम, टैक्स, आर्थिक परिस्थितियां और मुद्रास्फीति जैसे कई कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है। इसके बावजूद, आम लोगों का साफ कहना है कि रसोई का खर्च बढ़ा है, जिससे घर चलाना मुश्किल हो गया है और आमदनी के मुकाबले उनके खर्च बहुत तेजी से बढ़े हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि क्या महंगाई से जूझ रही जनता को वाकई कोई राहत मिलेगी या फिर किए गए वादे केवल चुनावी भाषणों तक ही सीमित रह जाएंगे? पहले जहां महंगाई को देश का सबसे बड़ा मुद्दा बताया जाता था, वहीं आज 2026 के आंकड़े जनता के सामने हैं और लोग पूछ रहे हैं कि वादे पूरे हुए या सिर्फ भाषण बदल गए हैं।
    user_राजकुमार कुशवाह पत्रकार
    राजकुमार कुशवाह पत्रकार
    पत्रकार इंदरगढ़, दतिया, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के दतिया जिले के अंतर्गत आने वाले जिगना गाँव में आयोजित चुनावी चौपाल के दौरान सरकारी सिस्टम की असल सच्चाई उजागर हुई है। इस चौपाल में साफ तौर पर यह बात सामने आई है कि इस सरकार के राज में बिना पैसे दिए कोई भी काम नहीं होता है। यहाँ इकट्ठा हुए लोगों के बीच सरकारी तंत्र की इस बदहाली और बिना पैसे के काम न होने की कड़वी सच्चाई खुलकर सामने आई है।
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    मध्य प्रदेश के दतिया जिले के अंतर्गत आने वाले जिगना गाँव में आयोजित चुनावी चौपाल के दौरान सरकारी सिस्टम की असल सच्चाई उजागर हुई है। इस चौपाल में साफ तौर पर यह बात सामने आई है कि इस सरकार के राज में बिना पैसे दिए कोई भी काम नहीं होता है। यहाँ इकट्ठा हुए लोगों के बीच सरकारी तंत्र की इस बदहाली और बिना पैसे के काम न होने की कड़वी सच्चाई खुलकर सामने आई है।
    user_Lakshya News
    Lakshya News
    Datia, Madhya Pradesh•
    12 hrs ago
  • दतिया के भांडेर नगर परिषद में कर्मचारियों का वेतन, सातवें वेतनमान की अंतिम किश्त, जीपीएफ राशि जमा कराने और अन्य लंबित मांगों को लेकर असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। छह जुलाई से आउटसोर्स सफाईकर्मी, फायर ब्रिगेड और अन्य शाखाओं के कर्मचारी पहले से ही हड़ताल पर थे, लेकिन अब शनिवार से स्थाई सफाई कर्मचारी भी इस अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इसके कारण नगर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है और शहर की सड़कों तथा सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर लग गए हैं। स्थाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 15 जुलाई को एसडीएम के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगें पूरी न होने पर 18 जुलाई से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद नगर परिषद ने 16 जुलाई को जून माह का वेतन तो जारी कर दिया, लेकिन सातवें वेतनमान की अंतिम किश्त और जीपीएफ राशि जमा कराने समेत अन्य मांगें लंबित रहने के कारण कर्मचारियों ने हड़ताल वापस नहीं ली। सफाई मैट वीरेंद्र वाल्मीकि का कहना है कि वे पिछले तीन वर्षों से इन मांगों के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। इस आंदोलन को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुड्डू संजय वाल्मीकि का भी समर्थन मिला है। उन्होंने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए संसाधन, स्वास्थ्य परीक्षण और लंबित वेतन के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। कर्मचारियों के अनुसार, फायर ब्रिगेड और अन्य शाखाओं के कर्मचारियों का तीन महीने का और जल शाखा का चार से पांच महीने का वेतन बकाया है, जिससे उनके सामने परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
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    दतिया के भांडेर नगर परिषद में कर्मचारियों का वेतन, सातवें वेतनमान की अंतिम किश्त, जीपीएफ राशि जमा कराने और अन्य लंबित मांगों को लेकर असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। छह जुलाई से आउटसोर्स सफाईकर्मी, फायर ब्रिगेड और अन्य शाखाओं के कर्मचारी पहले से ही हड़ताल पर थे, लेकिन अब शनिवार से स्थाई सफाई कर्मचारी भी इस अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इसके कारण नगर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है और शहर की सड़कों तथा सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर लग गए हैं।

स्थाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 15 जुलाई को एसडीएम के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगें पूरी न होने पर 18 जुलाई से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद नगर परिषद ने 16 जुलाई को जून माह का वेतन तो जारी कर दिया, लेकिन सातवें वेतनमान की अंतिम किश्त और जीपीएफ राशि जमा कराने समेत अन्य मांगें लंबित रहने के कारण कर्मचारियों ने हड़ताल वापस नहीं ली। सफाई मैट वीरेंद्र वाल्मीकि का कहना है कि वे पिछले तीन वर्षों से इन मांगों के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।

इस आंदोलन को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुड्डू संजय वाल्मीकि का भी समर्थन मिला है। उन्होंने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए संसाधन, स्वास्थ्य परीक्षण और लंबित वेतन के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। कर्मचारियों के अनुसार, फायर ब्रिगेड और अन्य शाखाओं के कर्मचारियों का तीन महीने का और जल शाखा का चार से पांच महीने का वेतन बकाया है, जिससे उनके सामने परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
    user_Shahid Qureshi
    Shahid Qureshi
    दतिया, दतिया, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
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