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स्कूल निर्माण में लापरवाही जांच की मांग तेज.😱 #shorts #shortvideo #school #sarkari #short #news #new #lohardaga

2 hrs ago
user_AAM JANATA
AAM JANATA
लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
2 hrs ago

स्कूल निर्माण में लापरवाही जांच की मांग तेज.😱 #shorts #shortvideo #school #sarkari #short #news #new #lohardaga

More news from झारखंड and nearby areas
  • Post by AAM JANATA
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    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    2 hrs ago
  • Post by Altamas Rja
    1
    Post by Altamas Rja
    user_Altamas Rja
    Altamas Rja
    Local News Reporter लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    11 hrs ago
  • *अगस्त माह से झारखंड आंदोलनकारी समन्वय समिति के बैनर तले शुरू किया जाएगा आर-पार की लड़ाई: राजू महतो* *आंदोलनकारियों के हित में कम से कम गुरूजी मॉडल को ही लागू करे सरकार: मो. कय्यूम खान* *आंदोलनकारियों के मांगों पर सहानुभूति पूर्वक वार्ता करें मुख्यमंत्री: अनिल कुमार भगत* *अलग राज्य के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संघर्ष तेज करने की आवश्यकता: प्रो. विनोद भगत* *आंदोलनकारी के पुत्र होने का हक अदा करें हेमंत सोरेन: अमर किन्डो* संवाददाता लोहरदगा: झारखंड आंदोलनकारी महासभा लोहरदगा जिला समिति की बैठक बुधवार को जिलाध्यक्ष अनिल कुमार भगत की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मुख्य रूप से केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष राजू महतो, प्रधान महासचिव मो. कय्यूम खान, संयोजिका विनीता खलखो, सीता उरांव, जिला संयोजक प्रो. विनोद भगत, आदि मौजूद थे। मौके पर केन्द्रीय अध्यक्ष राजू महतो ने अपने संबोधन में कहा कि वर्षों से अपने मांगों को लेकर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन उनकी मांगों पर सरकार अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठायी है। उन्होंने कहा कि अगस्त माह क्रांति का माह है। आने वाले अगस्त में हमलोग झारखंड आंदोलनकारी समन्वय समिति के बैनर तले विभिन्न संगठनों के साथ मिल कर अंतिम लड़ाई लड़ेंगे और अपने उद्देश्यों में सफल होंगे। केन्द्रीय प्रधान महासचिव मो. कय्यूम खान ने कहा कि सरकार सभी आंदोलनकारियों समान रूप से सम्मान, नियोजन पेंशन समेत व्यवस्थाओं का लाभ देने की दिशा में ठोस कार्य करें। उन्होंने कहा कि कम से कम कि आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन मोडल लागू करें। जिला संयोजक प्रो. विनोद भगत ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा आंदोलनकारियों को बरगला कर आर्थिक दोहन करने का प्रयास कर रहे हैं। उनसे सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि झारखंड के अमर पुरोधाओं के सपने को साकार करने, और अलग राज्य के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संघर्ष तेज करने की आवश्यकता है। जिला अध्यक्ष अनिल कुमार भगत ने संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों के मामले को सरकार को जल्द से जल्द वार्ता कर निष्पादित करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों से वार्ता करें और आंदोलनकारियों के लिए बनी नियमावली में संशोधन कर जेल जाने की बाध्यता समाप्त करें। जिला कार्यकारी अध्यक्ष अमर किन्डो ने संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार झारखंड आंदोलन की ही उपज है। सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द आंदोलनकारियों के हित में ठोस निर्णय लेकर वार्ता कर समस्याओं का समाधान करें। कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आंदोलनकारी के पुत्र होने का हक अदा करें। केन्द्रीय संयोजित विनिता खलखो ने कहा कि बिना किसी दबाव के जेल जाने की बाध्यता समाप्त करते हुए सभी झारखंड आंदोलनकारियों को समान रूप से मान-सम्मान, पहचान, नियोजन, पेंशन आदि के मामले को अविलंब निष्पादित करें। संबोधित करने वालों में सीता उरांव, जिला सचिव विशेषण भगत, बालोमुनी बखला, सुखदेव उरांव, उषा रानी लकड़ा, विजय विद्यार्थी, संचालन कृष्णा कुमार ठाकुर, शाहिद अहमद आदि शामिल थे। बैठक में चैतू मुंडा, गंगा उरांव, तारामनी मिंज, सुशीला लकड़ा, नगर रवि उरांव, ललिता भगत, विफई पाहन, सूरज मोहन लकड़ा, जगदीश उरांव आदि सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मौजूद थे। सर्व सहमति से अगली बैठक 20 मई बुधवार को
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    *अगस्त माह से झारखंड आंदोलनकारी समन्वय समिति के बैनर तले शुरू किया जाएगा आर-पार की लड़ाई: राजू महतो* 
*आंदोलनकारियों के हित में कम से कम  गुरूजी मॉडल को ही लागू करे सरकार: मो. कय्यूम खान* 
*आंदोलनकारियों के मांगों पर सहानुभूति पूर्वक वार्ता करें मुख्यमंत्री: अनिल कुमार भगत*
*अलग राज्य के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संघर्ष तेज करने की आवश्यकता: प्रो. विनोद भगत*
*आंदोलनकारी के पुत्र होने का हक अदा करें हेमंत सोरेन: अमर किन्डो*
संवाददाता 
लोहरदगा: झारखंड आंदोलनकारी महासभा लोहरदगा जिला समिति की बैठक बुधवार को जिलाध्यक्ष अनिल कुमार भगत की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मुख्य रूप से केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष राजू महतो, प्रधान महासचिव मो. कय्यूम खान, संयोजिका विनीता खलखो, सीता उरांव, जिला संयोजक प्रो. विनोद भगत, आदि मौजूद थे। मौके पर केन्द्रीय अध्यक्ष राजू महतो ने अपने संबोधन में कहा कि वर्षों से अपने मांगों को लेकर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन उनकी मांगों पर सरकार अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठायी है। उन्होंने कहा कि अगस्त माह क्रांति का माह है। आने वाले अगस्त में हमलोग झारखंड आंदोलनकारी समन्वय समिति के बैनर तले विभिन्न संगठनों के साथ मिल कर अंतिम लड़ाई लड़ेंगे और अपने उद्देश्यों में सफल होंगे। केन्द्रीय प्रधान महासचिव मो. कय्यूम खान ने कहा कि सरकार सभी आंदोलनकारियों  समान रूप से सम्मान, नियोजन पेंशन समेत व्यवस्थाओं का लाभ देने की दिशा में ठोस कार्य करें। उन्होंने कहा कि कम से कम कि आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन मोडल लागू करें। जिला संयोजक प्रो. विनोद भगत ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा आंदोलनकारियों को बरगला कर आर्थिक दोहन करने का प्रयास कर रहे हैं। उनसे सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि झारखंड के अमर पुरोधाओं के सपने को साकार करने, और अलग राज्य के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संघर्ष तेज करने की आवश्यकता है। जिला अध्यक्ष अनिल कुमार भगत ने संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों के मामले को सरकार को जल्द से जल्द वार्ता कर निष्पादित करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों से वार्ता करें और आंदोलनकारियों के लिए बनी नियमावली में संशोधन कर जेल जाने की बाध्यता समाप्त करें। जिला कार्यकारी अध्यक्ष अमर किन्डो ने संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार झारखंड आंदोलन की ही उपज है। सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द आंदोलनकारियों के हित में ठोस निर्णय लेकर वार्ता कर समस्याओं का समाधान करें।  कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आंदोलनकारी के पुत्र होने का हक अदा करें। केन्द्रीय संयोजित विनिता खलखो ने कहा कि बिना किसी दबाव के जेल जाने की बाध्यता समाप्त करते हुए सभी झारखंड आंदोलनकारियों को समान रूप से मान-सम्मान, पहचान, नियोजन, पेंशन आदि के मामले को अविलंब निष्पादित करें। संबोधित करने वालों में सीता उरांव, जिला सचिव विशेषण भगत, बालोमुनी बखला, सुखदेव उरांव, उषा रानी लकड़ा, विजय विद्यार्थी, संचालन कृष्णा कुमार ठाकुर, शाहिद अहमद आदि शामिल थे। बैठक में चैतू मुंडा, गंगा उरांव, तारामनी मिंज, सुशीला लकड़ा, नगर रवि उरांव, ललिता भगत, विफई पाहन, सूरज मोहन लकड़ा, जगदीश उरांव आदि सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मौजूद थे। सर्व सहमति से अगली बैठक 20 मई बुधवार को
    user_Vijay kumar. vidhyarthi
    Vijay kumar. vidhyarthi
    Local News Reporter लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    11 hrs ago
  • विद्यालय में प्रयोगशाला कक्ष का दरवाजा तोड़ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का अज्ञात चोरों ने किया चोरी
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    विद्यालय में प्रयोगशाला कक्ष का दरवाजा तोड़ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का अज्ञात चोरों ने किया चोरी
    user_आलोक कुमार
    आलोक कुमार
    पत्रकार सेन्हा, लोहरदगा, झारखंड•
    23 hrs ago
  • *लातेहार शहर में एक अज्ञात बालिका मिली है, जो अपना नाम प्रीति कुमारी, माता का नाम लक्ष्मी देवी एवं पिता का नाम आसान भुइयां बता रही है। बालिका फिलहाल थाना में सुरक्षित है। परिजन थाना से संपर्क करें।*
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    *लातेहार शहर में एक अज्ञात बालिका मिली है, जो अपना नाम प्रीति कुमारी, माता का नाम लक्ष्मी देवी एवं पिता का नाम आसान भुइयां बता रही है। बालिका फिलहाल थाना में सुरक्षित है। परिजन थाना से संपर्क करें।*
    user_Manoj dutt dev
    Manoj dutt dev
    Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    7 min ago
  • 23 अप्रैल को विश्वभर में *विश्व पुस्तक दिवस* मनाया जाता है। यह दिन पुस्तकों की महिमा और उनके महत्व को रेखांकित करने का अवसर है। इस लेख की शुरुआत Malala Yousafzai के उस प्रसिद्ध कथन से करना उपयुक्त होगा, जो उन्होंने अपने संबोधन में कहा था— **“One child, one teacher, one book and one pen can change the world.”** यह कथन एक पुस्तक की शक्ति और उसके प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। विश्व पुस्तक दिवस की तिथि को लेकर एक रोचक तथ्य यह है कि कुछ देशों, विशेषकर ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड में इसे मार्च महीने के पहले गुरुवार को मनाया जाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 23 अप्रैल को इसे मनाने की परंपरा है। इसकी शुरुआत UNESCO ने वर्ष 1995 में की थी। इस तिथि का चयन इसलिए भी किया गया क्योंकि यह महान साहित्यकार William Shakespeare और Miguel de Cervantes की पुण्यतिथि से जुड़ी है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना है। विशेषकर विद्यार्थियों के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वे केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहें, बल्कि साहित्य, विज्ञान, इतिहास और समसामयिक विषयों की पुस्तकों से भी जुड़ें। पुस्तकें न केवल ज्ञान देती हैं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व और सोच को भी विकसित करती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी पुस्तकालयों की भूमिका को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। *सर्व शिक्षा अभियान* और *समग्र शिक्षा अभियान* के अंतर्गत विद्यालयों में पुस्तकालय स्थापित करने तथा विद्यार्थियों को अधिकाधिक पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। नई शिक्षा नीति में भी इस दिशा में सार्थक प्रयास किए गए हैं। अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए कहना चाहूँगा कि 4 सितम्बर 2024 को झारखंड विधानसभा के प्रथम स्पीकर Inder Singh Namdhari से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने सप्रेम अपनी आत्मकथा *“एक सिख नेता की दास्तान”* मुझे भेंट की। उस समय मैं मानसिक रूप से थोड़ा विचलित था, लेकिन उस पुस्तक ने मुझे नई ऊर्जा, दिशा और आत्मविश्वास प्रदान किया। यह अनुभव बताता है कि एक अच्छी पुस्तक जीवन बदल सकती है। इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि पुस्तकों ने समाज में क्रांति लाने का काम किया है। फ्रांस की क्रांति के पीछे Jean-Jacques Rousseau, Voltaire, Montesquieu और Denis Diderot जैसे विचारकों की पुस्तकों का महत्वपूर्ण योगदान था। इसी प्रकार भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी अनेक साहित्यकारों और विचारकों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जनजागरण किया। Mahatma Gandhi, Rabindranath Tagore, Bankim Chandra Chatterjee, Makhanlal Chaturvedi, Maithili Sharan Gupt और Ramdhari Singh Dinkar जैसे महान साहित्यकारों की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। अंत में, विशेषकर छात्रों से अपील है कि वे अधिक से अधिक पुस्तकें पढ़ें। केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। अन्य विषयों की पुस्तकें पढ़ने से आपका ज्ञान-विस्तार होगा, आपकी सोच विकसित होगी और आप भीड़ से अलग पहचान बना सकेंगे। आज के प्रतिस्पर्धी युग में पुस्तकें ही आपको सफलता की राह दिखाने में सच्ची साथी बन सकती हैं।
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    23 अप्रैल को विश्वभर में *विश्व पुस्तक दिवस* मनाया जाता है। यह दिन पुस्तकों की महिमा और उनके महत्व को रेखांकित करने का अवसर है। इस लेख की शुरुआत Malala Yousafzai के उस प्रसिद्ध कथन से करना उपयुक्त होगा, जो उन्होंने अपने संबोधन में कहा था—
**“One child, one teacher, one book and one pen can change the world.”**
यह कथन एक पुस्तक की शक्ति और उसके प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
विश्व पुस्तक दिवस की तिथि को लेकर एक रोचक तथ्य यह है कि कुछ देशों, विशेषकर ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड में इसे मार्च महीने के पहले गुरुवार को मनाया जाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 23 अप्रैल को इसे मनाने की परंपरा है। इसकी शुरुआत UNESCO ने वर्ष 1995 में की थी। इस तिथि का चयन इसलिए भी किया गया क्योंकि यह महान साहित्यकार William Shakespeare और Miguel de Cervantes की पुण्यतिथि से जुड़ी है।
इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना है। विशेषकर विद्यार्थियों के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वे केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहें, बल्कि साहित्य, विज्ञान, इतिहास और समसामयिक विषयों की पुस्तकों से भी जुड़ें। पुस्तकें न केवल ज्ञान देती हैं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व और सोच को भी विकसित करती हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी पुस्तकालयों की भूमिका को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। *सर्व शिक्षा अभियान* और *समग्र शिक्षा अभियान* के अंतर्गत विद्यालयों में पुस्तकालय स्थापित करने तथा विद्यार्थियों को अधिकाधिक पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। नई शिक्षा नीति में भी इस दिशा में सार्थक प्रयास किए गए हैं।
अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए कहना चाहूँगा कि 4 सितम्बर 2024 को झारखंड विधानसभा के प्रथम स्पीकर Inder Singh Namdhari से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने सप्रेम अपनी आत्मकथा *“एक सिख नेता की दास्तान”* मुझे भेंट की। उस समय मैं मानसिक रूप से थोड़ा विचलित था, लेकिन उस पुस्तक ने मुझे नई ऊर्जा, दिशा और आत्मविश्वास प्रदान किया। यह अनुभव बताता है कि एक अच्छी पुस्तक जीवन बदल सकती है।
इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि पुस्तकों ने समाज में क्रांति लाने का काम किया है। फ्रांस की क्रांति के पीछे Jean-Jacques Rousseau, Voltaire, Montesquieu और Denis Diderot जैसे विचारकों की पुस्तकों का महत्वपूर्ण योगदान था।
इसी प्रकार भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी अनेक साहित्यकारों और विचारकों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जनजागरण किया। Mahatma Gandhi, Rabindranath Tagore, Bankim Chandra Chatterjee, Makhanlal Chaturvedi, Maithili Sharan Gupt और Ramdhari Singh Dinkar जैसे महान साहित्यकारों की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता।
अंत में, विशेषकर छात्रों से अपील है कि वे अधिक से अधिक पुस्तकें पढ़ें। केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। अन्य विषयों की पुस्तकें पढ़ने से आपका ज्ञान-विस्तार होगा, आपकी सोच विकसित होगी और आप भीड़ से अलग पहचान बना सकेंगे। आज के प्रतिस्पर्धी युग में पुस्तकें ही आपको सफलता की राह दिखाने में सच्ची साथी बन सकती हैं।
    user_Rajesh Kumar Prasad
    Rajesh Kumar Prasad
    Photographer लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    1 hr ago
  • सिसई(गुमला)। सिसई प्रखण्ड अंतर्गत,ग्राम पंचायत भदौली में मण्डा पूजा के शुभावसर पर "छऊ नृत्य" व "नागपुरी सांस्कृतिक" कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। राधेश्याम सिंह,अर्ख़ितानंद देवघरिया,अरुण किशोर सिंह,अजय कुमार सिंह ,राहुल सिंह के द्वारा संयुक्त रूप से फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। भदौली निवासी राधेश्याम सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम भदौली में मण्डा पूजा सन् 1957 से पूर्वजों द्वारा किया जा रहा है। जिसे आज की पीढ़ी पूर्वजों के विरासत को आगे लेकर चल रही है और प्रत्येक वर्ष काफी धूमधाम से मनाया जाता है। श्रद्धालुओं एवं भक्तों की काफी भीड़ रहती है। लोग दूर दूर से मण्डा पूजा देखने आते हैं। पुरी आस्था और भक्ति के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान को पाहान पूजारों द्वारा संपन्न कराया जाता है वहीं इस आयोजन में लोटनसेवा, धुंवासी के साथ रात्रि में फुलखुन्दी आग में चलने का रस्म किया जाता है, जिसमें भोक्ता और सोक्ताईन अपनी मनोकामनाओं को लेकर नंगे पांव आग के अंगारों में चलते हुए रस्म को पुरा करते हैं। इसबार फुलखुंदी के पश्चात रात्रि में छऊ नृत्य का आयोजन किया गया। जिसमें बंगाल से आये हुए छऊ नृत्य मंडली द्वारा छऊ नृत्य के माध्यम से रामायण के प्रसंग को अपने मनमोहक अंदाज में प्रस्तुत किया गया जिसे देखकर दर्शकगण भावविभोर हो उठे। वहीं अगले दिन मंगलवार की संध्या में आयोजित नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम में सत्या म्युजिकल ग्रुप के कलाकार कवि किशन,सूरज कुमार,बसीर अंसारी,दिव्या कुमारी,प्रीति बारला,रेशमा कुमारी एवं सपना कुमारी द्वारा एक से बढ़कर एक आधुनिक नागपुरी व भोजपुरी गीत और नृत्य की प्रस्तुति दी गई जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर झूमने पर विवश कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत धार्मिक भजनों से हुई। इसके बाद भोजपुरी व नागपुरी गीत संगीत और नृत्य का दौर देर रात तक चलता रहा जिसका दर्शकों ने खूब आनंद उठाया। कार्यक्रम में महिलाओं एवं पुरुषों की काफी भीड़ जुटि हुई थी। इसी के साथ तीन दिनों तक चलने वाले भक्ति और आस्था से जुड़ी धार्मिक आयोजन "मंडा पूजा" का समापन किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में भदौली मंडा पूजा समिति के अध्यक्ष राहुल सिंह,सचिव विक्रम ताम्रकर, उपाध्यक्ष शुभम सिंह,अरुण सिंह,नंदकिशोर सिंह,अजय सिंह,रामानंद सिंह,विकास पंडा,राजेश उराँव,सुरेन्द्र जायसवाल, करण सिंह,राजन गोप,गोपाल सिंह,गौतम ताम्रकर,सहित सभी कार्यकर्ताओं का भरपूर योगदान रहा।
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    सिसई(गुमला)। सिसई प्रखण्ड अंतर्गत,ग्राम पंचायत भदौली में मण्डा पूजा के शुभावसर पर "छऊ नृत्य" व "नागपुरी सांस्कृतिक" कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।
राधेश्याम सिंह,अर्ख़ितानंद देवघरिया,अरुण किशोर सिंह,अजय कुमार सिंह ,राहुल सिंह के द्वारा संयुक्त रूप से फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
भदौली निवासी राधेश्याम सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम भदौली में मण्डा पूजा सन् 1957 से पूर्वजों द्वारा किया जा रहा है। जिसे आज की पीढ़ी पूर्वजों के विरासत को आगे लेकर चल रही है और प्रत्येक वर्ष काफी धूमधाम से मनाया जाता है।
श्रद्धालुओं एवं भक्तों की काफी भीड़ रहती है। लोग दूर दूर से मण्डा पूजा देखने आते हैं। पुरी आस्था और भक्ति के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान को पाहान पूजारों द्वारा संपन्न कराया जाता है वहीं इस आयोजन में लोटनसेवा, धुंवासी के साथ रात्रि में फुलखुन्दी आग में चलने का रस्म किया जाता है, जिसमें भोक्ता और सोक्ताईन अपनी मनोकामनाओं को लेकर नंगे पांव आग के अंगारों में चलते हुए रस्म को पुरा करते हैं।
इसबार फुलखुंदी के पश्चात रात्रि में छऊ नृत्य का आयोजन किया गया। जिसमें बंगाल से आये हुए छऊ नृत्य मंडली द्वारा छऊ नृत्य के माध्यम से रामायण के प्रसंग को अपने मनमोहक अंदाज में प्रस्तुत किया गया जिसे देखकर दर्शकगण भावविभोर हो उठे। 
वहीं अगले दिन मंगलवार की संध्या में आयोजित नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम में सत्या म्युजिकल ग्रुप के कलाकार कवि किशन,सूरज कुमार,बसीर अंसारी,दिव्या कुमारी,प्रीति बारला,रेशमा कुमारी एवं सपना कुमारी द्वारा एक से बढ़कर एक आधुनिक नागपुरी व भोजपुरी गीत और नृत्य की प्रस्तुति दी गई जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर झूमने पर विवश कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत धार्मिक भजनों से हुई। इसके बाद भोजपुरी व नागपुरी गीत संगीत और नृत्य का दौर देर रात तक चलता रहा जिसका दर्शकों ने खूब आनंद उठाया। कार्यक्रम में महिलाओं एवं पुरुषों की काफी भीड़ जुटि हुई थी।
इसी के साथ तीन दिनों तक चलने वाले भक्ति और आस्था से जुड़ी धार्मिक आयोजन "मंडा पूजा" का समापन किया गया। 
इस आयोजन को सफल बनाने में भदौली मंडा पूजा समिति के अध्यक्ष राहुल सिंह,सचिव विक्रम ताम्रकर, उपाध्यक्ष शुभम सिंह,अरुण सिंह,नंदकिशोर सिंह,अजय सिंह,रामानंद सिंह,विकास पंडा,राजेश उराँव,सुरेन्द्र जायसवाल, करण सिंह,राजन गोप,गोपाल सिंह,गौतम ताम्रकर,सहित सभी कार्यकर्ताओं का भरपूर योगदान रहा।
    user_SHAMBHU. S. CHAUHAN
    SHAMBHU. S. CHAUHAN
    Business Networking Company सिसई, गुमला, झारखंड•
    22 hrs ago
  • *अगस्त माह से झारखंड आंदोलनकारी समन्वय समिति के बैनर तले शुरू किया जाएगा आर-पार की लड़ाई: राजू महतो* *आंदोलनकारियों के हित में कम से कम गुरूजी मॉडल को ही लागू करे सरकार: मो. कय्यूम खान* *आंदोलनकारियों के मांगों पर सहानुभूति पूर्वक वार्ता करें मुख्यमंत्री: अनिल कुमार भगत* *अलग राज्य के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संघर्ष तेज करने की आवश्यकता: प्रो. विनोद भगत* *आंदोलनकारी के पुत्र होने का हक अदा करें हेमंत सोरेन: अमर किन्डो* संवाददाता लोहरदगा: झारखंड आंदोलनकारी महासभा लोहरदगा जिला समिति की बैठक बुधवार को जिलाध्यक्ष अनिल कुमार भगत की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मुख्य रूप से केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष राजू महतो, प्रधान महासचिव मो. कय्यूम खान, संयोजिका विनीता खलखो, सीता उरांव, जिला संयोजक प्रो. विनोद भगत, आदि मौजूद थे। मौके पर केन्द्रीय अध्यक्ष राजू महतो ने अपने संबोधन में कहा कि वर्षों से अपने मांगों को लेकर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन उनकी मांगों पर सरकार अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठायी है। उन्होंने कहा कि अगस्त माह क्रांति का माह है। आने वाले अगस्त में हमलोग झारखंड आंदोलनकारी समन्वय समिति के बैनर तले विभिन्न संगठनों के साथ मिल कर अंतिम लड़ाई लड़ेंगे और अपने उद्देश्यों में सफल होंगे। केन्द्रीय प्रधान महासचिव मो. कय्यूम खान ने कहा कि सरकार सभी आंदोलनकारियों समान रूप से सम्मान, नियोजन पेंशन समेत व्यवस्थाओं का लाभ देने की दिशा में ठोस कार्य करें। उन्होंने कहा कि कम से कम कि आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन मोडल लागू करें। जिला संयोजक प्रो. विनोद भगत ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा आंदोलनकारियों को बरगला कर आर्थिक दोहन करने का प्रयास कर रहे हैं। उनसे सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि झारखंड के अमर पुरोधाओं के सपने को साकार करने, और अलग राज्य के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संघर्ष तेज करने की आवश्यकता है। जिला अध्यक्ष अनिल कुमार भगत ने संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों के मामले को सरकार को जल्द से जल्द वार्ता कर निष्पादित करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों से वार्ता करें और आंदोलनकारियों के लिए बनी नियमावली में संशोधन कर जेल जाने की बाध्यता समाप्त करें। जिला कार्यकारी अध्यक्ष अमर किन्डो ने संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार झारखंड आंदोलन की ही उपज है। सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द आंदोलनकारियों के हित में ठोस निर्णय लेकर वार्ता कर समस्याओं का समाधान करें। कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आंदोलनकारी के पुत्र होने का हक अदा करें। केन्द्रीय संयोजित विनिता खलखो ने कहा कि बिना किसी दबाव के जेल जाने की बाध्यता समाप्त करते हुए सभी झारखंड आंदोलनकारियों को समान रूप से मान-सम्मान, पहचान, नियोजन, पेंशन आदि के मामले को अविलंब निष्पादित करें। संबोधित करने वालों में सीता उरांव, जिला सचिव विशेषण भगत, बालोमुनी बखला, सुखदेव उरांव, उषा रानी लकड़ा, विजय विद्यार्थी, संचालन कृष्णा कुमार ठाकुर, शाहिद अहमद आदि शामिल थे। बैठक में चैतू मुंडा, गंगा उरांव, तारामनी मिंज, सुशीला लकड़ा, नगर रवि उरांव, ललिता भगत, विफई पाहन, सूरज मोहन लकड़ा, जगदीश उरांव आदि सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मौजूद थे। सर्व सहमति से अगली बैठक 20 मई बुधवार को रखी गई
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    *अगस्त माह से झारखंड आंदोलनकारी समन्वय समिति के बैनर तले शुरू किया जाएगा आर-पार की लड़ाई: राजू महतो* 
*आंदोलनकारियों के हित में कम से कम  गुरूजी मॉडल को ही लागू करे सरकार: मो. कय्यूम खान* 
*आंदोलनकारियों के मांगों पर सहानुभूति पूर्वक वार्ता करें मुख्यमंत्री: अनिल कुमार भगत*
*अलग राज्य के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संघर्ष तेज करने की आवश्यकता: प्रो. विनोद भगत*
*आंदोलनकारी के पुत्र होने का हक अदा करें हेमंत सोरेन: अमर किन्डो*
संवाददाता 
लोहरदगा: झारखंड आंदोलनकारी महासभा लोहरदगा जिला समिति की बैठक बुधवार को जिलाध्यक्ष अनिल कुमार भगत की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मुख्य रूप से केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष राजू महतो, प्रधान महासचिव मो. कय्यूम खान, संयोजिका विनीता खलखो, सीता उरांव, जिला संयोजक प्रो. विनोद भगत, आदि मौजूद थे। मौके पर केन्द्रीय अध्यक्ष राजू महतो ने अपने संबोधन में कहा कि वर्षों से अपने मांगों को लेकर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन उनकी मांगों पर सरकार अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठायी है। उन्होंने कहा कि अगस्त माह क्रांति का माह है। आने वाले अगस्त में हमलोग झारखंड आंदोलनकारी समन्वय समिति के बैनर तले विभिन्न संगठनों के साथ मिल कर अंतिम लड़ाई लड़ेंगे और अपने उद्देश्यों में सफल होंगे। केन्द्रीय प्रधान महासचिव मो. कय्यूम खान ने कहा कि सरकार सभी आंदोलनकारियों  समान रूप से सम्मान, नियोजन पेंशन समेत व्यवस्थाओं का लाभ देने की दिशा में ठोस कार्य करें। उन्होंने कहा कि कम से कम कि आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन मोडल लागू करें। जिला संयोजक प्रो. विनोद भगत ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा आंदोलनकारियों को बरगला कर आर्थिक दोहन करने का प्रयास कर रहे हैं। उनसे सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि झारखंड के अमर पुरोधाओं के सपने को साकार करने, और अलग राज्य के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संघर्ष तेज करने की आवश्यकता है। जिला अध्यक्ष अनिल कुमार भगत ने संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों के मामले को सरकार को जल्द से जल्द वार्ता कर निष्पादित करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों से वार्ता करें और आंदोलनकारियों के लिए बनी नियमावली में संशोधन कर जेल जाने की बाध्यता समाप्त करें। जिला कार्यकारी अध्यक्ष अमर किन्डो ने संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार झारखंड आंदोलन की ही उपज है। सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द आंदोलनकारियों के हित में ठोस निर्णय लेकर वार्ता कर समस्याओं का समाधान करें।  कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आंदोलनकारी के पुत्र होने का हक अदा करें। केन्द्रीय संयोजित विनिता खलखो ने कहा कि बिना किसी दबाव के जेल जाने की बाध्यता समाप्त करते हुए सभी झारखंड आंदोलनकारियों को समान रूप से मान-सम्मान, पहचान, नियोजन, पेंशन आदि के मामले को अविलंब निष्पादित करें। संबोधित करने वालों में सीता उरांव, जिला सचिव विशेषण भगत, बालोमुनी बखला, सुखदेव उरांव, उषा रानी लकड़ा, विजय विद्यार्थी, संचालन कृष्णा कुमार ठाकुर, शाहिद अहमद आदि शामिल थे। बैठक में चैतू मुंडा, गंगा उरांव, तारामनी मिंज, सुशीला लकड़ा, नगर रवि उरांव, ललिता भगत, विफई पाहन, सूरज मोहन लकड़ा, जगदीश उरांव आदि सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मौजूद थे। सर्व सहमति से अगली बैठक 20 मई बुधवार को रखी गई
    user_Vijay kumar. vidhyarthi
    Vijay kumar. vidhyarthi
    Local News Reporter लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    12 hrs ago
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