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मझौलिया केवीके ने किसानों को प्राकृतिक खेती सिखाई ,कीट नियंत्रण और मिट्टी उर्वरता बढ़ाने पर दिया जोर ।। खेती की एक ऐसी प्राचीन विधि के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो न सिर्फ आपकी खेती की लागत को आधा कर सकती है बल्कि आपकी पैदावार को बढ़ा सकती है। वर्तमान समय में किसान यूरिया, डीएपी, पोटाश और महंगे कीट एवं रोगनाशकों पर निर्भर हो चुके हैं, जिससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है, उत्पादन धीरे-धीरे घट रहा है और लागत लगातार बढ़ती जा रही है। डॉ अभिषेक प्रताप सिंह वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर ने बताया कि प्रकृति में एक ऐसा खजाना है, जो पूरी तरह से सस्ता है और अत्यंत प्रभावी भी देसी गाय का गोबर और गौमूत्र। अगर इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह न सिर्फ खाद का काम करता है, बल्कि कीटनाशक और फफूंदनाशक के रूप में भी उतना ही असरदार है। गौमूत्र को अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत है। इसमें प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश यानी एनपीके मौजूद भी होते हैं, जो पौधों की बढ़वार के लिए सबसे जरूरी मुख्य पोषक तत्व माने जाते हैं। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो पौधों की सेहत को मजबूत बनाते हैं। गौमूत्र में इंडोल एसिटिक एसिड जैसे प्राकृतिक ग्रोथ हार्मोन होते हैं, जो जड़ों की वृद्धि को तेज करते हैं और पौधे को तेजी से विकसित होने में मदद करते हैं। साथ ही इसमें कार्बोलिक एसिड भी पाया जाता है, जो फंगस और हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता रखता है। गौमूत्र का उपयोग तीन मुख्य तरीकों से किया जाता है-खाद, कीटनाशक और फफूंदनाशक के रूप में। जब इसे खाद के रूप में उपयोग किया जाता है तो यह पौधों को जरूरी पोषक तत्व देता है, जिससे उनकी वृद्धि तेज होती है। कीटनाशक के रूप में इसका उपयोग करने पर इसकी तेज गंध रस चूसने वाले कीटों जैसे माहू, सफेद मक्खी और जेसिड को दूर भगाती है। वहीं फफूंदनाशक के रूप में यह जड़ गलन और उकठा जैसी बीमारियों को रोकने में मदद करता है। गौमूत्र बहुत ही शक्तिशाली होता है, इसलिए इसे कभी भी सीधे पौधों पर नहीं डालना चाहिए। खड़ी फसल में स्प्रे के लिए 15 लीटर पानी में 500 से 700 मिलीलीटर गौमूत्र मिलाकर छिड़काव करें। छोटी फसल या नर्सरी के लिए इसकी मात्रा 250 से 300 मिलीलीटर ही रखें। अगर इसे सिंचाई के साथ देना है तो एक एकड़ खेत के लिए 10 से 15 लीटर गौमूत्र पर्याप्त होता है। इसे पानी के साथ धीरे-धीरे खेत में छोड़ना चाहिए ताकि यह पूरे खेत में समान रूप से फैल सके। बीज उपचार के लिए भी गौमूत्र बेहद उपयोगी है। 1 लीटर पानी में 100 मिलीलीटर गौमूत्र मिलाकर बीजों को 30 मिनट से 1 घंटे तक भिगोकर रखें और फिर छाया में सुखाकर बो दें। इससे बीजों में रोग नहीं लगते और अंकुरण प्रतिशत काफी बढ़ जाता है। अगर हम गौमूत्र और गोबर को मिलाकर इस्तेमाल करें तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इसी से तैयार होता है जीवामृत, जो प्राकृतिक खेती का सबसे शक्तिशाली खाद माना जाता है। इसे बनाने के लिए 10 किलो देसी गाय का गोबर, 10 लीटर गौमूत्र, 1 किलो गुड़, 1 किलो बेसन और एक मुट्ठी उपजाऊ मिट्टी को 200 लीटर पानी में मिलाकर 2 से 3 दिन तक सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस दौरान इसमें करोड़ों लाभकारी जीवाणु विकसित हो जाते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाते हैं। जब इस जीवामृत को खेत में डाला जाता है तो यह मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को घोलकर पौधों की जड़ों तक पहुंचाता है। इससे मिट्टी भुरभुरी बनती है, पानी सोखने की क्षमता बढ़ती है और केंचुए भी बढ़ने लगते हैं। हर 15 से 20 दिन में एक बार इसका उपयोग करने से खेत की उत्पादकता में जबरदस्त सुधार देखा जा सकता है। कीट नियंत्रण के लिए भी गौमूत्र से कई शक्तिशाली जैविक घोल तैयार किए जा सकते हैं। नीमास्त्र बनाने के लिए 5 लीटर गौमूत्र में 5 किलो नीम की पत्तियों का पेस्ट मिलाकर 3 दिन तक रखा जाता है। इसके बाद इसे छानकर 15 लीटर पानी में 1 लीटर मिलाकर स्प्रे किया जाता है। यह रस चूसने वाले कीटों को नियंत्रित करने में बेहद प्रभावी है। अगर फसल में इल्ली या तना छेदक की समस्या हो तो अग्न्यास्त्र का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए 10 लीटर गौमूत्र में 1 किलो हरी मिर्च, आधा किलो लहसुन और आधा किलो तंबाकू मिलाकर उबालकर तैयार किया जाता है। यह घोल बहुत ही प्रभावी कीटनाशक का काम करता है और कठिन से कठिन कीटों को भी खत्म कर देता है। कुछ जरूरी सावधानियां भी ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। हमेशा देसी गाय का ही गोबर और गौमूत्र इस्तेमाल करें क्योंकि विदेशी नस्ल की गाय में यह गुण कम होते हैं। गौमूत्र को कभी भी बिना छाने स्प्रे मशीन में न डालें, वरना नोजल चोक हो सकता है। इसे लोहे या तांबे के बर्तन में न रखें, हमेशा प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें। और सबसे महत्वपूर्ण बात-इसे कभी भी रासायनिक खाद या कीटनाशकों के साथ मिलाकर उपयोग न करें, क्योंकि इससे इसके लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। किसान साथियों, अगर आप अपनी खेती को सस्ता, टिकाऊ और ज्यादा मुनाफेदार हैं। गौमूत्र, गोबर और जीवामृत जैसी तकनीकों को अपनाकर आप न सिर्फ अपनी मिट्टी को स्वस्थ बना सकते हैं बल्कि अपनी आय को भी कई गुना तक बढ़ा सकते हैं। जो भविष्य की खेती है-कम लागत, ज्यादा उत्पादन और पूरी तरह सुरक्षित खेती। डॉ सिंह ने बताया कि जिले के 40 चयनित कृषि सखियों का आवासीय प्रशिक्षण प्राकृतिक खेती के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र के परिसर में दिया गया था और सभी प्रशिक्षित कृषि सखियां जिले में अपने-अपने प्रखंड के चयनित गांव में प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण के साथ-साथ लोगों को जागरूक करने एवं प्रत्यक्षण कराने का भी कार्य कर रही है जो काफी सराहनी है।

9 hrs ago
user_RAVI PANDEY
RAVI PANDEY
Farmer मझौलिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
9 hrs ago
5613b1ff-4a35-4c87-8255-51806d567fe5

मझौलिया केवीके ने किसानों को प्राकृतिक खेती सिखाई ,कीट नियंत्रण और मिट्टी उर्वरता बढ़ाने पर दिया जोर ।। खेती की एक ऐसी प्राचीन विधि के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो न सिर्फ आपकी खेती की लागत को आधा कर सकती है बल्कि आपकी पैदावार को बढ़ा सकती है। वर्तमान समय में किसान यूरिया, डीएपी, पोटाश और महंगे कीट एवं रोगनाशकों पर निर्भर हो चुके हैं, जिससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है, उत्पादन धीरे-धीरे घट रहा है और लागत लगातार बढ़ती जा रही है। डॉ अभिषेक प्रताप सिंह वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर ने बताया कि प्रकृति में एक ऐसा खजाना है, जो पूरी तरह से सस्ता है और अत्यंत प्रभावी भी देसी गाय का गोबर और गौमूत्र। अगर इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह न सिर्फ खाद का काम करता है, बल्कि कीटनाशक और फफूंदनाशक के रूप में भी उतना ही असरदार है। गौमूत्र को अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत है। इसमें प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश यानी एनपीके मौजूद भी होते हैं, जो पौधों की बढ़वार के लिए सबसे जरूरी मुख्य पोषक तत्व माने जाते हैं। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो पौधों की सेहत को मजबूत बनाते हैं। गौमूत्र में इंडोल एसिटिक एसिड जैसे प्राकृतिक ग्रोथ हार्मोन होते हैं, जो जड़ों की वृद्धि को तेज करते हैं और पौधे को तेजी से विकसित होने में मदद करते हैं। साथ ही इसमें कार्बोलिक एसिड भी पाया जाता है, जो फंगस और हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता रखता है। गौमूत्र का उपयोग तीन मुख्य तरीकों से किया जाता है-खाद, कीटनाशक और फफूंदनाशक के रूप में। जब इसे खाद के रूप में उपयोग किया जाता है तो यह पौधों को जरूरी पोषक तत्व देता है, जिससे उनकी वृद्धि तेज होती है। कीटनाशक के रूप में इसका उपयोग करने पर इसकी तेज गंध रस चूसने वाले कीटों जैसे माहू, सफेद मक्खी और जेसिड को दूर भगाती है। वहीं फफूंदनाशक के रूप में यह जड़ गलन और उकठा जैसी बीमारियों को रोकने में मदद करता है। गौमूत्र बहुत ही शक्तिशाली होता है, इसलिए इसे कभी भी सीधे पौधों पर नहीं डालना चाहिए। खड़ी फसल में स्प्रे के लिए 15 लीटर पानी में 500 से 700 मिलीलीटर गौमूत्र मिलाकर छिड़काव करें। छोटी फसल या नर्सरी के लिए इसकी मात्रा 250 से 300 मिलीलीटर ही रखें। अगर इसे सिंचाई के साथ देना है तो एक एकड़ खेत के लिए 10 से 15 लीटर गौमूत्र पर्याप्त होता है। इसे पानी के साथ धीरे-धीरे खेत में छोड़ना चाहिए ताकि यह पूरे खेत में समान रूप से फैल सके। बीज उपचार के लिए भी गौमूत्र बेहद उपयोगी है। 1 लीटर पानी में 100 मिलीलीटर गौमूत्र मिलाकर बीजों को 30 मिनट से 1 घंटे तक भिगोकर रखें और फिर छाया में सुखाकर बो दें। इससे बीजों में रोग नहीं लगते और अंकुरण प्रतिशत काफी बढ़

जाता है। अगर हम गौमूत्र और गोबर को मिलाकर इस्तेमाल करें तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इसी से तैयार होता है जीवामृत, जो प्राकृतिक खेती का सबसे शक्तिशाली खाद माना जाता है। इसे बनाने के लिए 10 किलो देसी गाय का गोबर, 10 लीटर गौमूत्र, 1 किलो गुड़, 1 किलो बेसन और एक मुट्ठी उपजाऊ मिट्टी को 200 लीटर पानी में मिलाकर 2 से 3 दिन तक सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस दौरान इसमें करोड़ों लाभकारी जीवाणु विकसित हो जाते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाते हैं। जब इस जीवामृत को खेत में डाला जाता है तो यह मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को घोलकर पौधों की जड़ों तक पहुंचाता है। इससे मिट्टी भुरभुरी बनती है, पानी सोखने की क्षमता बढ़ती है और केंचुए भी बढ़ने लगते हैं। हर 15 से 20 दिन में एक बार इसका उपयोग करने से खेत की उत्पादकता में जबरदस्त सुधार देखा जा सकता है। कीट नियंत्रण के लिए भी गौमूत्र से कई शक्तिशाली जैविक घोल तैयार किए जा सकते हैं। नीमास्त्र बनाने के लिए 5 लीटर गौमूत्र में 5 किलो नीम की पत्तियों का पेस्ट मिलाकर 3 दिन तक रखा जाता है। इसके बाद इसे छानकर 15 लीटर पानी में 1 लीटर मिलाकर स्प्रे किया जाता है। यह रस चूसने वाले कीटों को नियंत्रित करने में बेहद प्रभावी है। अगर फसल में इल्ली या तना छेदक की समस्या हो तो अग्न्यास्त्र का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए 10 लीटर गौमूत्र में 1 किलो हरी मिर्च, आधा किलो लहसुन और आधा किलो तंबाकू मिलाकर उबालकर तैयार किया जाता है। यह घोल बहुत ही प्रभावी कीटनाशक का काम करता है और कठिन से कठिन कीटों को भी खत्म कर देता है। कुछ जरूरी सावधानियां भी ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। हमेशा देसी गाय का ही गोबर और गौमूत्र इस्तेमाल करें क्योंकि विदेशी नस्ल की गाय में यह गुण कम होते हैं। गौमूत्र को कभी भी बिना छाने स्प्रे मशीन में न डालें, वरना नोजल चोक हो सकता है। इसे लोहे या तांबे के बर्तन में न रखें, हमेशा प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें। और सबसे महत्वपूर्ण बात-इसे कभी भी रासायनिक खाद या कीटनाशकों के साथ मिलाकर उपयोग न करें, क्योंकि इससे इसके लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। किसान साथियों, अगर आप अपनी खेती को सस्ता, टिकाऊ और ज्यादा मुनाफेदार हैं। गौमूत्र, गोबर और जीवामृत जैसी तकनीकों को अपनाकर आप न सिर्फ अपनी मिट्टी को स्वस्थ बना सकते हैं बल्कि अपनी आय को भी कई गुना तक बढ़ा सकते हैं। जो भविष्य की खेती है-कम लागत, ज्यादा उत्पादन और पूरी तरह सुरक्षित खेती। डॉ सिंह ने बताया कि जिले के 40 चयनित कृषि सखियों का आवासीय प्रशिक्षण प्राकृतिक खेती के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र के परिसर में दिया गया था और सभी प्रशिक्षित कृषि सखियां जिले में अपने-अपने प्रखंड के चयनित गांव में प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण के साथ-साथ लोगों को जागरूक करने एवं प्रत्यक्षण कराने का भी कार्य कर रही है जो काफी सराहनी है।

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  • बेतिया में एफबीबी ग्लोबल इंडिया का स्टेट लेवल ब्यूटी पेजेंट संपन्न, बेटियों ने लहराया परचम रनवे फैशन वीक में दिखा ग्लैमर का जलवा, दर्शकों की उमड़ी भीड़ बेतिया से सत्यम श्रीवास्तव की रिपोर्ट बेतिया। शहर के मनुआपुल स्थित द मैरिज गार्डन एंड रिज़ॉर्ट में एफबीबी ग्लोबल इंडिया द्वारा आयोजित स्टेट लेवल ब्यूटी पेजेंट एवं रनवे फैशन वीक का भव्य आयोजन रविवार की रात संपन्न हुआ। कार्यक्रम की संस्थापक नम्या श्रीवास्तव रहीं। इस आयोजन में बिहार समेत अन्य राज्यों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का मन मोह लिया। प्रतियोगिता के विजेताओं में मिस्टर बिहार 2026 का खिताब किर्ति आज़ाद यादव, मिस बिहार 2026 अंशिका किरण, मिस्टर टीन बिहार 2026 आमिर खान, मिस टीन बिहार 2026 आरुषि शर्मा, मिसेज बिहार 2026 काजल सोनी और मिस टीन किड्स बिहार 2026 स्वाधा वर्मा को मिला। वहीं अन्य राज्यों के प्रतिभागियों में मिस्टर यूपी विनर समर्थ और मिस्टर यूपी के प्रथम रनर-अप अलकाश भी शामिल रहे। कार्यक्रम में मिस्टर इंडिया और मिस्टर यूपी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई। इस दौरान आकर्षक रनवे फैशन वीक का आयोजन भी किया गया, जिसमें विभिन्न थीम्स पर आधारित रैंप वॉक ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रतिभागियों ने अपने स्टाइल, आत्मविश्वास और प्रतिभा से जजों और दर्शकों को प्रभावित किया। कार्यक्रम का उद्घाटन जनसुराज के जिलाध्यक्ष कुंदन पांडेय, सक्सेस पॉइंट के निदेशक हेमंत राज, समाजसेवी अजय श्रीवास्तव, सीएम मीडिया ग्रुप के एमडी रिपु मिश्रा, फ्यूचर मेकर के निदेशक मो. शहाबुद्दीन और अधिवक्ता अभिजीत द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। मुख्य अतिथि कुंदन पांडेय ने बेतिया जैसे शहर में इस तरह के आयोजन के लिए एफबीबी ग्लोबल इंडिया और इसकी संस्थापक नम्या श्रीवास्तव की सराहना की। मझौलिया के सचिन मिश्रा को भी प्रतियोगिता में मिस्टर बिहार का खिताब मिला। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रांजल ने किया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच दर्शकों ने आयोजन का भरपूर आनंद लिया। यह कार्यक्रम फैशन और प्रतिभा का बेहतरीन मंच साबित हुआ, जिसने दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी।
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    बेतिया में एफबीबी ग्लोबल इंडिया का स्टेट लेवल ब्यूटी पेजेंट संपन्न, बेटियों ने लहराया परचम
रनवे फैशन वीक में दिखा ग्लैमर का जलवा, दर्शकों की उमड़ी भीड़
बेतिया से सत्यम श्रीवास्तव की रिपोर्ट
बेतिया। शहर के मनुआपुल स्थित द मैरिज गार्डन एंड रिज़ॉर्ट में एफबीबी ग्लोबल इंडिया द्वारा आयोजित स्टेट लेवल ब्यूटी पेजेंट एवं रनवे फैशन वीक का भव्य आयोजन रविवार की रात संपन्न हुआ। कार्यक्रम की संस्थापक नम्या श्रीवास्तव रहीं।
इस आयोजन में बिहार समेत अन्य राज्यों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का मन मोह लिया। प्रतियोगिता के विजेताओं में मिस्टर बिहार 2026 का खिताब किर्ति आज़ाद यादव, मिस बिहार 2026 अंशिका किरण, मिस्टर टीन बिहार 2026 आमिर खान, मिस टीन बिहार 2026 आरुषि शर्मा, मिसेज बिहार 2026 काजल सोनी और मिस टीन किड्स बिहार 2026 स्वाधा वर्मा को मिला।
वहीं अन्य राज्यों के प्रतिभागियों में मिस्टर यूपी विनर समर्थ और मिस्टर यूपी के प्रथम रनर-अप अलकाश भी शामिल रहे। कार्यक्रम में मिस्टर इंडिया और मिस्टर यूपी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई।
इस दौरान आकर्षक रनवे फैशन वीक का आयोजन भी किया गया, जिसमें विभिन्न थीम्स पर आधारित रैंप वॉक ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रतिभागियों ने अपने स्टाइल, आत्मविश्वास और प्रतिभा से जजों और दर्शकों को प्रभावित किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन जनसुराज के जिलाध्यक्ष कुंदन पांडेय, सक्सेस पॉइंट के निदेशक हेमंत राज, समाजसेवी अजय श्रीवास्तव, सीएम मीडिया ग्रुप के एमडी रिपु मिश्रा, फ्यूचर मेकर के निदेशक मो. शहाबुद्दीन और अधिवक्ता अभिजीत द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
मुख्य अतिथि कुंदन पांडेय ने बेतिया जैसे शहर में इस तरह के आयोजन के लिए एफबीबी ग्लोबल इंडिया और इसकी संस्थापक नम्या श्रीवास्तव की सराहना की। मझौलिया के सचिन मिश्रा को भी प्रतियोगिता में मिस्टर बिहार का खिताब मिला।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रांजल ने किया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच दर्शकों ने आयोजन का भरपूर आनंद लिया। यह कार्यक्रम फैशन और प्रतिभा का बेहतरीन मंच साबित हुआ, जिसने दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी।
    user_A9Bharat News
    A9Bharat News
    Local News Reporter बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    1 hr ago
  • बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा आज पश्चिम चम्पारण जिले के वाल्मीकि नगर में विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। साथ ही विकास कार्यों का निरीक्षण और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। 05.04.2026.
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    बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा आज पश्चिम चम्पारण जिले के वाल्मीकि नगर में विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। साथ ही विकास कार्यों का निरीक्षण और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।  05.04.2026.
    user_Vivek Shrivastava.
    Vivek Shrivastava.
    Teacher बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    4 hrs ago
  • बगही बघमंबरपुर पंचायत में मेधावी छात्रों को मिला सम्मान, मंत्री नारायण प्रसाद ने बढ़ाया हौसला बैरिया प्रखंड क्षेत्र के बगही बघम्बरपुर पंचायत स्थित बथानी चौक पर रविवार को दोपहर करीब 2 बजे मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं के सम्मान में समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री नारायण प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि नौतन-बैरिया विधानसभा क्षेत्र के मेधावी छात्रों ने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को मोबाइल से दूर रखें और पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी रुचि बढ़ाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन पढ़ने के इच्छुक छात्रों को सूचना मिलने पर हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष अमर यादव ने भी छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि बगही बघम्बरपुर पंचायत की छात्रा सुनीता कुमारी ने न केवल पंचायत बल्कि पूरे प्रखंड का मान बढ़ाया है। समारोह के दौरान बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में राज्य स्तर पर सातवां स्थान प्राप्त करने वाली सुनीता कुमारी एवं दसवां स्थान हासिल करने वाले आशीष कुमार को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके अलावा साक्षी कुमारी, सजर खातून, छोटू कुमार, अंकुश कुमार, रफीक अंसारी, सोनू कुमार और अतुल कुमार सहित कई छात्र-छात्राओं को अंगवस्त्र, मेडल व कलम देकर सम्मानित किया गया। इंटरमीडिएट परीक्षा में सफल छात्रों—शिवम कुमार, अरुण कुमार, रविशंकर कुमार, सुनील कुमार और शहजाद अंसारी—को भी सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मुखिया मोहम्मद इस्लाम मियां ने की। मौके पर केदार प्रसाद, साहेब यादव, अवध किशोर सिंह, रणवीर सिंह, रामाकांत कुशवाहा, अमित कुमार पाल, संतोष साह, रंजीत कुमार सिंह, विपिन कुमार एवं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हाफिजुर रहमान सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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    बगही बघमंबरपुर पंचायत में मेधावी छात्रों को मिला सम्मान, मंत्री नारायण प्रसाद ने बढ़ाया हौसला
बैरिया प्रखंड क्षेत्र के बगही बघम्बरपुर पंचायत स्थित बथानी चौक पर रविवार को दोपहर करीब 2 बजे मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं के सम्मान में समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री नारायण प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि नौतन-बैरिया विधानसभा क्षेत्र के मेधावी छात्रों ने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को मोबाइल से दूर रखें और पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी रुचि बढ़ाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन पढ़ने के इच्छुक छात्रों को सूचना मिलने पर हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष अमर यादव ने भी छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि बगही बघम्बरपुर पंचायत की छात्रा सुनीता कुमारी ने न केवल पंचायत बल्कि पूरे प्रखंड का मान बढ़ाया है। समारोह के दौरान बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में राज्य स्तर पर सातवां स्थान प्राप्त करने वाली सुनीता कुमारी एवं दसवां स्थान हासिल करने वाले आशीष कुमार को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके अलावा साक्षी कुमारी, सजर खातून, छोटू कुमार, अंकुश कुमार, रफीक अंसारी, सोनू कुमार और अतुल कुमार सहित कई छात्र-छात्राओं को अंगवस्त्र, मेडल व कलम देकर सम्मानित किया गया। इंटरमीडिएट परीक्षा में सफल छात्रों—शिवम कुमार, अरुण कुमार, रविशंकर कुमार, सुनील कुमार और शहजाद अंसारी—को भी सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मुखिया मोहम्मद इस्लाम मियां ने की। मौके पर केदार प्रसाद, साहेब यादव, अवध किशोर सिंह, रणवीर सिंह, रामाकांत कुशवाहा, अमित कुमार पाल, संतोष साह, रंजीत कुमार सिंह, विपिन कुमार एवं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हाफिजुर रहमान सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
    user_Makhan Kumar
    Makhan Kumar
    पत्रकार Bettiah, Pashchim Champaran•
    4 hrs ago
  • खेती की एक ऐसी प्राचीन विधि के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो न सिर्फ आपकी खेती की लागत को आधा कर सकती है बल्कि आपकी पैदावार को बढ़ा सकती है। वर्तमान समय में किसान यूरिया, डीएपी, पोटाश और महंगे कीट एवं रोगनाशकों पर निर्भर हो चुके हैं, जिससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है, उत्पादन धीरे-धीरे घट रहा है और लागत लगातार बढ़ती जा रही है। डॉ अभिषेक प्रताप सिंह वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर ने बताया कि प्रकृति में एक ऐसा खजाना है, जो पूरी तरह से सस्ता है और अत्यंत प्रभावी भी देसी गाय का गोबर और गौमूत्र। अगर इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह न सिर्फ खाद का काम करता है, बल्कि कीटनाशक और फफूंदनाशक के रूप में भी उतना ही असरदार है। गौमूत्र को अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत है। इसमें प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश यानी एनपीके मौजूद भी होते हैं, जो पौधों की बढ़वार के लिए सबसे जरूरी मुख्य पोषक तत्व माने जाते हैं। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो पौधों की सेहत को मजबूत बनाते हैं। गौमूत्र में इंडोल एसिटिक एसिड जैसे प्राकृतिक ग्रोथ हार्मोन होते हैं, जो जड़ों की वृद्धि को तेज करते हैं और पौधे को तेजी से विकसित होने में मदद करते हैं। साथ ही इसमें कार्बोलिक एसिड भी पाया जाता है, जो फंगस और हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता रखता है। गौमूत्र का उपयोग तीन मुख्य तरीकों से किया जाता है-खाद, कीटनाशक और फफूंदनाशक के रूप में। जब इसे खाद के रूप में उपयोग किया जाता है तो यह पौधों को जरूरी पोषक तत्व देता है, जिससे उनकी वृद्धि तेज होती है। कीटनाशक के रूप में इसका उपयोग करने पर इसकी तेज गंध रस चूसने वाले कीटों जैसे माहू, सफेद मक्खी और जेसिड को दूर भगाती है। वहीं फफूंदनाशक के रूप में यह जड़ गलन और उकठा जैसी बीमारियों को रोकने में मदद करता है। गौमूत्र बहुत ही शक्तिशाली होता है, इसलिए इसे कभी भी सीधे पौधों पर नहीं डालना चाहिए। खड़ी फसल में स्प्रे के लिए 15 लीटर पानी में 500 से 700 मिलीलीटर गौमूत्र मिलाकर छिड़काव करें। छोटी फसल या नर्सरी के लिए इसकी मात्रा 250 से 300 मिलीलीटर ही रखें। अगर इसे सिंचाई के साथ देना है तो एक एकड़ खेत के लिए 10 से 15 लीटर गौमूत्र पर्याप्त होता है। इसे पानी के साथ धीरे-धीरे खेत में छोड़ना चाहिए ताकि यह पूरे खेत में समान रूप से फैल सके। बीज उपचार के लिए भी गौमूत्र बेहद उपयोगी है। 1 लीटर पानी में 100 मिलीलीटर गौमूत्र मिलाकर बीजों को 30 मिनट से 1 घंटे तक भिगोकर रखें और फिर छाया में सुखाकर बो दें। इससे बीजों में रोग नहीं लगते और अंकुरण प्रतिशत काफी बढ़ जाता है। अगर हम गौमूत्र और गोबर को मिलाकर इस्तेमाल करें तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इसी से तैयार होता है जीवामृत, जो प्राकृतिक खेती का सबसे शक्तिशाली खाद माना जाता है। इसे बनाने के लिए 10 किलो देसी गाय का गोबर, 10 लीटर गौमूत्र, 1 किलो गुड़, 1 किलो बेसन और एक मुट्ठी उपजाऊ मिट्टी को 200 लीटर पानी में मिलाकर 2 से 3 दिन तक सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस दौरान इसमें करोड़ों लाभकारी जीवाणु विकसित हो जाते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाते हैं। जब इस जीवामृत को खेत में डाला जाता है तो यह मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को घोलकर पौधों की जड़ों तक पहुंचाता है। इससे मिट्टी भुरभुरी बनती है, पानी सोखने की क्षमता बढ़ती है और केंचुए भी बढ़ने लगते हैं। हर 15 से 20 दिन में एक बार इसका उपयोग करने से खेत की उत्पादकता में जबरदस्त सुधार देखा जा सकता है। कीट नियंत्रण के लिए भी गौमूत्र से कई शक्तिशाली जैविक घोल तैयार किए जा सकते हैं। नीमास्त्र बनाने के लिए 5 लीटर गौमूत्र में 5 किलो नीम की पत्तियों का पेस्ट मिलाकर 3 दिन तक रखा जाता है। इसके बाद इसे छानकर 15 लीटर पानी में 1 लीटर मिलाकर स्प्रे किया जाता है। यह रस चूसने वाले कीटों को नियंत्रित करने में बेहद प्रभावी है। अगर फसल में इल्ली या तना छेदक की समस्या हो तो अग्न्यास्त्र का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए 10 लीटर गौमूत्र में 1 किलो हरी मिर्च, आधा किलो लहसुन और आधा किलो तंबाकू मिलाकर उबालकर तैयार किया जाता है। यह घोल बहुत ही प्रभावी कीटनाशक का काम करता है और कठिन से कठिन कीटों को भी खत्म कर देता है। कुछ जरूरी सावधानियां भी ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। हमेशा देसी गाय का ही गोबर और गौमूत्र इस्तेमाल करें क्योंकि विदेशी नस्ल की गाय में यह गुण कम होते हैं। गौमूत्र को कभी भी बिना छाने स्प्रे मशीन में न डालें, वरना नोजल चोक हो सकता है। इसे लोहे या तांबे के बर्तन में न रखें, हमेशा प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें। और सबसे महत्वपूर्ण बात-इसे कभी भी रासायनिक खाद या कीटनाशकों के साथ मिलाकर उपयोग न करें, क्योंकि इससे इसके लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। किसान साथियों, अगर आप अपनी खेती को सस्ता, टिकाऊ और ज्यादा मुनाफेदार हैं। गौमूत्र, गोबर और जीवामृत जैसी तकनीकों को अपनाकर आप न सिर्फ अपनी मिट्टी को स्वस्थ बना सकते हैं बल्कि अपनी आय को भी कई गुना तक बढ़ा सकते हैं। जो भविष्य की खेती है-कम लागत, ज्यादा उत्पादन और पूरी तरह सुरक्षित खेती। डॉ सिंह ने बताया कि जिले के 40 चयनित कृषि सखियों का आवासीय प्रशिक्षण प्राकृतिक खेती के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र के परिसर में दिया गया था और सभी प्रशिक्षित कृषि सखियां जिले में अपने-अपने प्रखंड के चयनित गांव में प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण के साथ-साथ लोगों को जागरूक करने एवं प्रत्यक्षण कराने का भी कार्य कर रही है जो काफी सराहनी है।
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    खेती की एक ऐसी प्राचीन विधि के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो न सिर्फ आपकी खेती की लागत को आधा कर सकती है बल्कि आपकी पैदावार को बढ़ा सकती है। वर्तमान समय में किसान यूरिया, डीएपी, पोटाश और महंगे कीट एवं रोगनाशकों पर निर्भर हो चुके हैं, जिससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है, उत्पादन धीरे-धीरे घट रहा है और लागत लगातार बढ़ती जा रही है। डॉ अभिषेक प्रताप सिंह वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर ने बताया कि प्रकृति में एक ऐसा खजाना है, जो पूरी तरह से सस्ता है और अत्यंत प्रभावी भी देसी गाय का गोबर और गौमूत्र। अगर इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह न सिर्फ खाद का काम करता है, बल्कि कीटनाशक और फफूंदनाशक के रूप में भी उतना ही असरदार है।
गौमूत्र को अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत है। इसमें प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश यानी एनपीके मौजूद भी होते हैं, जो पौधों की बढ़वार के लिए सबसे जरूरी मुख्य पोषक तत्व माने जाते हैं। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो पौधों की सेहत को मजबूत बनाते हैं। गौमूत्र में इंडोल एसिटिक एसिड जैसे प्राकृतिक ग्रोथ हार्मोन होते हैं, जो जड़ों की वृद्धि को तेज करते हैं और पौधे को तेजी से विकसित होने में मदद करते हैं। साथ ही इसमें कार्बोलिक एसिड भी पाया जाता है, जो फंगस और हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता रखता है।
गौमूत्र का उपयोग तीन मुख्य तरीकों से किया जाता है-खाद, कीटनाशक और फफूंदनाशक के रूप में। जब इसे खाद के रूप में उपयोग किया जाता है तो यह पौधों को जरूरी पोषक तत्व देता है, जिससे उनकी वृद्धि तेज होती है। कीटनाशक के रूप में इसका उपयोग करने पर इसकी तेज गंध रस चूसने वाले कीटों जैसे माहू, सफेद मक्खी और जेसिड को दूर भगाती है। वहीं फफूंदनाशक के रूप में यह जड़ गलन और उकठा जैसी बीमारियों को रोकने में मदद करता है। गौमूत्र बहुत ही शक्तिशाली होता है, इसलिए इसे कभी भी सीधे पौधों पर नहीं डालना चाहिए।  खड़ी फसल में स्प्रे के लिए 15 लीटर पानी में 500 से 700 मिलीलीटर गौमूत्र मिलाकर छिड़काव करें। छोटी फसल या नर्सरी के लिए इसकी मात्रा 250 से 300 मिलीलीटर ही रखें। अगर इसे सिंचाई के साथ देना है तो एक एकड़ खेत के लिए 10 से 15 लीटर गौमूत्र पर्याप्त होता है। इसे पानी के साथ धीरे-धीरे खेत में छोड़ना चाहिए ताकि यह पूरे खेत में समान रूप से फैल सके। बीज उपचार के लिए भी गौमूत्र बेहद उपयोगी है। 1 लीटर पानी में 100 मिलीलीटर गौमूत्र मिलाकर बीजों को 30 मिनट से 1 घंटे तक भिगोकर रखें और फिर छाया में सुखाकर बो दें। इससे बीजों में रोग नहीं लगते और अंकुरण प्रतिशत काफी बढ़ जाता है।
अगर हम गौमूत्र और गोबर को मिलाकर इस्तेमाल करें तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इसी से तैयार होता है जीवामृत, जो प्राकृतिक खेती का सबसे शक्तिशाली खाद माना जाता है। इसे बनाने के लिए 10 किलो देसी गाय का गोबर, 10 लीटर गौमूत्र, 1 किलो गुड़, 1 किलो बेसन और एक मुट्ठी उपजाऊ मिट्टी को 200 लीटर पानी में मिलाकर 2 से 3 दिन तक सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस दौरान इसमें करोड़ों लाभकारी जीवाणु विकसित हो जाते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाते हैं।
जब इस जीवामृत को खेत में डाला जाता है तो यह मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को घोलकर पौधों की जड़ों तक पहुंचाता है। इससे मिट्टी भुरभुरी बनती है, पानी सोखने की क्षमता बढ़ती है और केंचुए भी बढ़ने लगते हैं। हर 15 से 20 दिन में एक बार इसका उपयोग करने से खेत की उत्पादकता में जबरदस्त सुधार देखा जा सकता है।
कीट नियंत्रण के लिए भी गौमूत्र से कई शक्तिशाली जैविक घोल तैयार किए जा सकते हैं। नीमास्त्र बनाने के लिए 5 लीटर गौमूत्र में 5 किलो नीम की पत्तियों का पेस्ट मिलाकर 3 दिन तक रखा जाता है। इसके बाद इसे छानकर 15 लीटर पानी में 1 लीटर मिलाकर स्प्रे किया जाता है। यह रस चूसने वाले कीटों को नियंत्रित करने में बेहद प्रभावी है।
अगर फसल में  इल्ली या तना छेदक की समस्या हो तो अग्न्यास्त्र का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए 10 लीटर गौमूत्र में 1 किलो हरी मिर्च, आधा किलो लहसुन और आधा किलो तंबाकू मिलाकर उबालकर तैयार किया जाता है। यह घोल बहुत ही प्रभावी कीटनाशक का काम करता है और कठिन से कठिन कीटों को भी खत्म कर देता है।
कुछ जरूरी सावधानियां भी ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। हमेशा देसी गाय का ही गोबर और गौमूत्र इस्तेमाल करें क्योंकि विदेशी नस्ल की गाय में यह गुण कम होते हैं। गौमूत्र को कभी भी बिना छाने स्प्रे मशीन में न डालें, वरना नोजल चोक हो सकता है। इसे लोहे या तांबे के बर्तन में न रखें, हमेशा प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें। और सबसे महत्वपूर्ण बात-इसे कभी भी रासायनिक खाद या कीटनाशकों के साथ मिलाकर उपयोग न करें, क्योंकि इससे इसके लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
किसान साथियों, अगर आप अपनी खेती को सस्ता, टिकाऊ और ज्यादा मुनाफेदार  हैं। गौमूत्र, गोबर और जीवामृत जैसी तकनीकों को अपनाकर आप न सिर्फ अपनी मिट्टी को स्वस्थ बना सकते हैं बल्कि अपनी आय को भी कई गुना तक बढ़ा सकते हैं। जो भविष्य की खेती है-कम लागत, ज्यादा उत्पादन और पूरी तरह सुरक्षित खेती। डॉ सिंह ने बताया कि जिले के 40 चयनित कृषि सखियों का आवासीय प्रशिक्षण प्राकृतिक खेती के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र के परिसर में दिया गया था और सभी प्रशिक्षित कृषि सखियां जिले में अपने-अपने प्रखंड के चयनित गांव में प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण के साथ-साथ लोगों को जागरूक करने एवं प्रत्यक्षण कराने का भी कार्य कर रही है जो काफी सराहनी है।
    user_RAVI PANDEY
    RAVI PANDEY
    Farmer मझौलिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    9 hrs ago
  • नरकटियागंज के शिकारपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पुलिस ने एक नाबालिग बच्चे को अवैध रूप से गिरफ्तार कर लिया। इतना ही नहीं, बच्चे को हिरासत में रखने के साथ-साथ उसे हथकड़ी भी पहनाई गई, जो कि कानूनन पूरी तरह गलत माना जाता है। मौके पर मौजूद अधिवक्ता रवीश कुमार गिरी ने इस कार्रवाई का खुलकर विरोध किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि वह पुलिसकर्मियों से तीखे सवाल करते हुए पूछ रहे हैं कि आखिर किस आधार पर एक नाबालिग को इस तरह हिरासत में लिया गया और उसे हथकड़ी क्यों लगाई गई। एडवोकेट गिरी बार-बार यह कहते नजर आते हैं कि यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि मानवाधिकारों का भी सीधा हनन है। उन्होंने पुलिस से तत्काल बच्चे को रिहा करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और आम लोगों के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएगा? क्या जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
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    नरकटियागंज के शिकारपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि पुलिस ने एक नाबालिग बच्चे को अवैध रूप से गिरफ्तार कर लिया। इतना ही नहीं, बच्चे को हिरासत में रखने के साथ-साथ उसे हथकड़ी भी पहनाई गई, जो कि कानूनन पूरी तरह गलत माना जाता है।
मौके पर मौजूद अधिवक्ता रवीश कुमार गिरी ने इस कार्रवाई का खुलकर विरोध किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि वह पुलिसकर्मियों से तीखे सवाल करते हुए पूछ रहे हैं कि आखिर किस आधार पर एक नाबालिग को इस तरह हिरासत में लिया गया और उसे हथकड़ी क्यों लगाई गई।
एडवोकेट गिरी बार-बार यह कहते नजर आते हैं कि यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि मानवाधिकारों का भी सीधा हनन है। उन्होंने पुलिस से तत्काल बच्चे को रिहा करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और आम लोगों के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएगा? क्या जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
    user_Neeraj kumar mishra
    Neeraj kumar mishra
    बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    11 hrs ago
  • सुगौली में विधायक को जन जागरण मंच के द्वारा किया गया सम्मानित। विधायक ने सुगौली को अनुमंडल और करमवा रघुनाथपुर को प्रखंड का दर्जा दिलाने की मांग सदन में रखी थी।
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    सुगौली में विधायक को जन जागरण मंच के द्वारा किया गया सम्मानित।  विधायक ने सुगौली को अनुमंडल और करमवा रघुनाथपुर को प्रखंड का दर्जा दिलाने की मांग सदन में रखी थी।
    user_Shambhu sharan
    Shambhu sharan
    सुगौली, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    4 hrs ago
  • Narendra Modi ji se bhi nivedan hai ki aap aise logon Ko Kadi se Kadi Saja de
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    Narendra Modi ji se bhi nivedan hai ki aap aise logon Ko Kadi se Kadi Saja de
    user_Suraj Sahni
    Suraj Sahni
    रामगढ़वा, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    16 hrs ago
  • वाल्मीकिनगर में सीएम नीतीश कुमार ने कई योजनाओं का किया उद्घाटन-शिलान्यासईको टूरिज्म, सिंचाई और पर्यटन विकास को मिला बढ़ावा, अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश बेतिया/पटना, 05 अप्रैल 2026। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर में विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले दोन नहर शाखा सेवा पथ के पुनर्स्थापन कार्य का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्य करीब 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने इसे जल्द पूर्ण करने का निर्देश देते हुए कहा कि यह नहर सिंचाई के लिए बेहद उपयोगी है और इससे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलेगा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने गंडक बांध जलाशय के सामने बन रहे लव-कुश ईको टूरिज्म पार्क के निर्माण कार्य का जायजा लिया और वहां विकसित की जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने जल संसाधन विभाग के अतिथि भवन और वाल्मीकिनगर ईको पार्क का भी भ्रमण किया, साथ ही गंडक बराज पहुंचकर वहां की स्थिति का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने वाल्मीकि सभागार परिसर से “ईको पर्यटन केन्द्र-वाल्मीकिनगर, प्रमंडल-2, वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष्य” का शिलान्यास किया। इसके अलावा गोनौली और चिउटाहां स्थित गिद्ध संरक्षण केंद्र का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जंगल सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि इससे पर्यटकों को जंगल भ्रमण में सुविधा होगी और वाल्मीकिनगर को एक प्रमुख ईको-पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, सांसद सुनील कुमार, विधायक नंदकिशोर राम, राम सिंह, विनय बिहारी, समृद्ध वर्मा, विधान पार्षद भीष्म सहनी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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    वाल्मीकिनगर में सीएम नीतीश कुमार ने कई योजनाओं का किया उद्घाटन-शिलान्यासईको टूरिज्म, सिंचाई और पर्यटन विकास को मिला बढ़ावा, अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश
बेतिया/पटना, 05 अप्रैल 2026। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर में विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने सबसे पहले दोन नहर शाखा सेवा पथ के पुनर्स्थापन कार्य का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्य करीब 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने इसे जल्द पूर्ण करने का निर्देश देते हुए कहा कि यह नहर सिंचाई के लिए बेहद उपयोगी है और इससे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलेगा।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने गंडक बांध जलाशय के सामने बन रहे लव-कुश ईको टूरिज्म पार्क के निर्माण कार्य का जायजा लिया और वहां विकसित की जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने जल संसाधन विभाग के अतिथि भवन और वाल्मीकिनगर ईको पार्क का भी भ्रमण किया, साथ ही गंडक बराज पहुंचकर वहां की स्थिति का निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री ने वाल्मीकि सभागार परिसर से “ईको पर्यटन केन्द्र-वाल्मीकिनगर, प्रमंडल-2, वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष्य” का शिलान्यास किया। इसके अलावा गोनौली और चिउटाहां स्थित गिद्ध संरक्षण केंद्र का उद्घाटन भी किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जंगल सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि इससे पर्यटकों को जंगल भ्रमण में सुविधा होगी और वाल्मीकिनगर को एक प्रमुख ईको-पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, सांसद सुनील कुमार, विधायक नंदकिशोर राम, राम सिंह, विनय बिहारी, समृद्ध वर्मा, विधान पार्षद भीष्म सहनी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
    user_A9Bharat News
    A9Bharat News
    Local News Reporter बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    2 hrs ago
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