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मांदर को जीआई टैग मिलने से जरजट्टा गांव के कारीगरों में उत्साह, आर्थिक स्थिति सुधरने की जगी उम्मीद मांदर को जीआई टैग मिलने से जरजट्टा गांव के कारीगरों में उत्साह, आर्थिक स्थिति सुधरने की जगी उम्मीद गुमला:-झारखंड की पारंपरिक संस्कृति और लोक संगीत की पहचान माने जाने वाले मांदर को जीआई (Geographical Indication) टैग मिलने की खबर से गुमला जिले के रायडीह प्रखंड स्थित जरजट्टा गांव के मांदर बनाने वाले कारीगरों में खुशी और उत्साह का माहौल है। 24 अक्टूबर 2021 को जरजट्टा गांव से ही मांदर को जी आई टैग दिलाने के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया गया था। पीढ़ियों से मांदर बनाने के पारंपरिक हुनर को संजोकर रखने वाले कारीगरों को उम्मीद है कि जीआई टैग मिलने के बाद उनके उत्पाद को देशभर में नई पहचान मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। जीआई टैग मिलने के बाद महारंग राम और गुलाब घासी जैसे कारीगरों को उम्मीद है कि मांदर की पहचान और मांग बढ़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर मांदर निर्माण का काम बढ़ सकता है और नई पीढ़ी भी इस पारंपरिक कला से जुड़ने के लिए प्रेरित हो सकती है। कारीगरों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन की ओर से बाजार उपलब्ध कराने, प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और बिक्री के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराया जाए तो मांदर निर्माण को बड़े स्तर पर रोजगार का साधन बनाया जा सकता है। कारीगरों ने कहा कि वर्षों से वे सीमित संसाधनों के बावजूद मांदर बनाने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कई परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस पारंपरिक काम से जुड़ी हुई है। जीआई टैग मिलने से उन्हें उम्मीद है कि अब उनके हुनर को व्यापक बाजार मिलेगा और मांदर की बिक्री में बढ़ोतरी होगी। इससे कारीगरों की आय बढ़ने के साथ-साथ गांव की आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आ सकता है। मांदर कारीगर चुन्नू नायक और मंगरी देवी ने बताया कि जरजट्टा गांव में बड़ी संख्या में कारीगर पारंपरिक तरीके से मांदर तैयार करते हैं। इनके लिए मांदर केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि उनकी कला, संस्कृति और आजीविका से जुड़ा हुआ है। कारीगर लकड़ी, चमड़े, मिट्टी और अन्य सामग्री का इस्तेमाल कर मेहनत और कुशलता के साथ मांदर तैयार करते हैं। मांदर की निर्माण प्रक्रिया में काफी समय और मेहनत लगती है। इसके बावजूद कई बार कारीगरों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। गुमला के उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने भी मांदर को जीआई टैग मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय कारीगरों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहचान से मांदर निर्माण से जुड़े कारीगरों को लाभ मिलेगा और पारंपरिक कला को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। जीआई टैग मिलने के बाद अब जरजट्टा गांव के कारीगरों की निगाहें आने वाले समय पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासनिक सहयोग और बेहतर बाजार व्यवस्था के माध्यम से मांदर की मांग बढ़ेगी। इससे न केवल कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि जरजट्टा गांव की पहचान भी मांदर निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत हो सकती है। मांदर की धुन झारखंड के पर्व-त्योहारों, सामाजिक आयोजनों और पारंपरिक नृत्य-संगीत का अभिन्न हिस्सा रही है। ऐसे में जीआई टैग से जुड़ी नई पहचान को कारीगर अपनी मेहनत और विरासत के सम्मान के रूप में देख रहे हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी पीढ़ियों पुरानी कला आने वाले समय में देश-दुनिया तक पहुंचेगी और इससे जुड़े परिवारों को बेहतर आजीविका का अवसर मिलेगा।

7 hrs ago
user_AMIT
AMIT
गुमला, गुमला, झारखंड•
7 hrs ago

मांदर को जीआई टैग मिलने से जरजट्टा गांव के कारीगरों में उत्साह, आर्थिक स्थिति सुधरने की जगी उम्मीद मांदर को जीआई टैग मिलने से जरजट्टा गांव के कारीगरों में उत्साह, आर्थिक स्थिति सुधरने की जगी उम्मीद गुमला:-झारखंड की पारंपरिक संस्कृति और लोक संगीत की पहचान माने जाने वाले मांदर को जीआई (Geographical Indication) टैग मिलने की खबर से गुमला जिले के रायडीह प्रखंड स्थित जरजट्टा गांव के मांदर बनाने वाले कारीगरों में खुशी और उत्साह का माहौल है। 24 अक्टूबर 2021 को जरजट्टा गांव से ही मांदर को जी आई टैग दिलाने के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया गया था। पीढ़ियों से मांदर बनाने के पारंपरिक हुनर को संजोकर रखने वाले कारीगरों को उम्मीद है कि जीआई टैग मिलने के बाद उनके उत्पाद को देशभर में नई पहचान मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। जीआई टैग मिलने के बाद महारंग राम और गुलाब घासी जैसे कारीगरों को उम्मीद है कि मांदर की पहचान और मांग बढ़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर मांदर निर्माण का काम बढ़ सकता है और नई पीढ़ी भी इस पारंपरिक कला से जुड़ने के लिए प्रेरित हो सकती है। कारीगरों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन की ओर से बाजार उपलब्ध कराने, प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और बिक्री के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराया जाए तो मांदर निर्माण को बड़े स्तर पर रोजगार का साधन बनाया जा सकता है। कारीगरों ने कहा कि वर्षों से वे सीमित संसाधनों के बावजूद मांदर बनाने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कई परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस पारंपरिक काम से जुड़ी हुई है। जीआई टैग मिलने से उन्हें उम्मीद है कि अब उनके हुनर को व्यापक बाजार मिलेगा और मांदर की बिक्री में बढ़ोतरी होगी। इससे कारीगरों की आय बढ़ने के साथ-साथ गांव की आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आ सकता है। मांदर कारीगर चुन्नू नायक और मंगरी देवी ने बताया कि जरजट्टा गांव में बड़ी संख्या में कारीगर पारंपरिक तरीके से मांदर तैयार करते हैं। इनके लिए मांदर केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि उनकी कला, संस्कृति और आजीविका से जुड़ा हुआ है। कारीगर लकड़ी, चमड़े, मिट्टी और अन्य सामग्री का इस्तेमाल कर मेहनत और कुशलता के साथ मांदर तैयार करते हैं। मांदर की निर्माण प्रक्रिया में काफी समय और मेहनत लगती है। इसके बावजूद कई बार कारीगरों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। गुमला के उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने भी मांदर को जीआई टैग मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय कारीगरों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहचान से मांदर निर्माण से जुड़े कारीगरों को लाभ मिलेगा और पारंपरिक कला को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। जीआई टैग मिलने के बाद अब जरजट्टा गांव के कारीगरों की निगाहें आने वाले समय पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासनिक सहयोग और बेहतर बाजार व्यवस्था के माध्यम से मांदर की मांग बढ़ेगी। इससे न केवल कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि जरजट्टा गांव की पहचान भी मांदर निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत हो सकती है। मांदर की धुन झारखंड के पर्व-त्योहारों, सामाजिक आयोजनों और पारंपरिक नृत्य-संगीत का अभिन्न हिस्सा रही है। ऐसे में जीआई टैग से जुड़ी नई पहचान को कारीगर अपनी मेहनत और विरासत के सम्मान के रूप में देख रहे हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी पीढ़ियों पुरानी कला आने वाले समय में देश-दुनिया तक पहुंचेगी और इससे जुड़े परिवारों को बेहतर आजीविका का अवसर मिलेगा।

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  • गुमला में अग्रवाल समाज के युवाओं ने भरी नई हुंकार ।
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    गुमला  में  अग्रवाल  समाज के युवाओं ने भरी नई हुंकार ।
    user_Shivam Singh
    Shivam Singh
    Local News Reporter गुमला, गुमला, झारखंड•
    4 hrs ago
  • मांदर को जीआई टैग मिलने से जरजट्टा गांव के कारीगरों में उत्साह, आर्थिक स्थिति सुधरने की जगी उम्मीद मांदर को जीआई टैग मिलने से जरजट्टा गांव के कारीगरों में उत्साह, आर्थिक स्थिति सुधरने की जगी उम्मीद गुमला:-झारखंड की पारंपरिक संस्कृति और लोक संगीत की पहचान माने जाने वाले मांदर को जीआई (Geographical Indication) टैग मिलने की खबर से गुमला जिले के रायडीह प्रखंड स्थित जरजट्टा गांव के मांदर बनाने वाले कारीगरों में खुशी और उत्साह का माहौल है। 24 अक्टूबर 2021 को जरजट्टा गांव से ही मांदर को जी आई टैग दिलाने के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया गया था। पीढ़ियों से मांदर बनाने के पारंपरिक हुनर को संजोकर रखने वाले कारीगरों को उम्मीद है कि जीआई टैग मिलने के बाद उनके उत्पाद को देशभर में नई पहचान मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। जीआई टैग मिलने के बाद महारंग राम और गुलाब घासी जैसे कारीगरों को उम्मीद है कि मांदर की पहचान और मांग बढ़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर मांदर निर्माण का काम बढ़ सकता है और नई पीढ़ी भी इस पारंपरिक कला से जुड़ने के लिए प्रेरित हो सकती है। कारीगरों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन की ओर से बाजार उपलब्ध कराने, प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और बिक्री के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराया जाए तो मांदर निर्माण को बड़े स्तर पर रोजगार का साधन बनाया जा सकता है। कारीगरों ने कहा कि वर्षों से वे सीमित संसाधनों के बावजूद मांदर बनाने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कई परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस पारंपरिक काम से जुड़ी हुई है। जीआई टैग मिलने से उन्हें उम्मीद है कि अब उनके हुनर को व्यापक बाजार मिलेगा और मांदर की बिक्री में बढ़ोतरी होगी। इससे कारीगरों की आय बढ़ने के साथ-साथ गांव की आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आ सकता है। मांदर कारीगर चुन्नू नायक और मंगरी देवी ने बताया कि जरजट्टा गांव में बड़ी संख्या में कारीगर पारंपरिक तरीके से मांदर तैयार करते हैं। इनके लिए मांदर केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि उनकी कला, संस्कृति और आजीविका से जुड़ा हुआ है। कारीगर लकड़ी, चमड़े, मिट्टी और अन्य सामग्री का इस्तेमाल कर मेहनत और कुशलता के साथ मांदर तैयार करते हैं। मांदर की निर्माण प्रक्रिया में काफी समय और मेहनत लगती है। इसके बावजूद कई बार कारीगरों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। गुमला के उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने भी मांदर को जीआई टैग मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय कारीगरों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहचान से मांदर निर्माण से जुड़े कारीगरों को लाभ मिलेगा और पारंपरिक कला को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। जीआई टैग मिलने के बाद अब जरजट्टा गांव के कारीगरों की निगाहें आने वाले समय पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासनिक सहयोग और बेहतर बाजार व्यवस्था के माध्यम से मांदर की मांग बढ़ेगी। इससे न केवल कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि जरजट्टा गांव की पहचान भी मांदर निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत हो सकती है। मांदर की धुन झारखंड के पर्व-त्योहारों, सामाजिक आयोजनों और पारंपरिक नृत्य-संगीत का अभिन्न हिस्सा रही है। ऐसे में जीआई टैग से जुड़ी नई पहचान को कारीगर अपनी मेहनत और विरासत के सम्मान के रूप में देख रहे हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी पीढ़ियों पुरानी कला आने वाले समय में देश-दुनिया तक पहुंचेगी और इससे जुड़े परिवारों को बेहतर आजीविका का अवसर मिलेगा।
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    मांदर को जीआई टैग मिलने से जरजट्टा गांव के कारीगरों में उत्साह, आर्थिक स्थिति सुधरने की जगी उम्मीद
मांदर को जीआई टैग मिलने से जरजट्टा गांव के कारीगरों में उत्साह, आर्थिक स्थिति सुधरने की जगी उम्मीद
गुमला:-झारखंड की पारंपरिक संस्कृति और लोक संगीत की पहचान माने जाने वाले मांदर को जीआई (Geographical Indication) टैग मिलने की खबर से गुमला जिले के रायडीह प्रखंड स्थित जरजट्टा गांव के मांदर बनाने वाले कारीगरों में खुशी और उत्साह का माहौल है। 24 अक्टूबर 2021 को जरजट्टा गांव से ही मांदर को जी आई टैग दिलाने के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया गया था। पीढ़ियों से मांदर बनाने के पारंपरिक हुनर को संजोकर रखने वाले कारीगरों को उम्मीद है कि जीआई टैग मिलने के बाद उनके उत्पाद को देशभर में नई पहचान मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
जीआई टैग मिलने के बाद महारंग राम और गुलाब घासी जैसे कारीगरों को उम्मीद है कि मांदर की पहचान और मांग बढ़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर मांदर निर्माण का काम बढ़ सकता है और नई पीढ़ी भी इस पारंपरिक कला से जुड़ने के लिए प्रेरित हो सकती है। कारीगरों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन की ओर से बाजार उपलब्ध कराने, प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और बिक्री के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराया जाए तो मांदर निर्माण को बड़े स्तर पर रोजगार का साधन बनाया जा सकता है।
कारीगरों ने कहा कि वर्षों से वे सीमित संसाधनों के बावजूद मांदर बनाने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कई परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस पारंपरिक काम से जुड़ी हुई है। जीआई टैग मिलने से उन्हें उम्मीद है कि अब उनके हुनर को व्यापक बाजार मिलेगा और मांदर की बिक्री में बढ़ोतरी होगी। इससे कारीगरों की आय बढ़ने के साथ-साथ गांव की आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
मांदर कारीगर चुन्नू नायक और मंगरी देवी ने बताया कि जरजट्टा गांव में बड़ी संख्या में कारीगर पारंपरिक तरीके से मांदर तैयार करते हैं। इनके लिए मांदर केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि उनकी कला, संस्कृति और आजीविका से जुड़ा हुआ है। कारीगर लकड़ी, चमड़े, मिट्टी और अन्य सामग्री का इस्तेमाल कर मेहनत और कुशलता के साथ मांदर तैयार करते हैं। मांदर की निर्माण प्रक्रिया में काफी समय और मेहनत लगती है। इसके बावजूद कई बार कारीगरों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है।
गुमला के उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने भी मांदर को जीआई टैग मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय कारीगरों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहचान से मांदर निर्माण से जुड़े कारीगरों को लाभ मिलेगा और पारंपरिक कला को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
जीआई टैग मिलने के बाद अब जरजट्टा गांव के कारीगरों की निगाहें आने वाले समय पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासनिक सहयोग और बेहतर बाजार व्यवस्था के माध्यम से मांदर की मांग बढ़ेगी। इससे न केवल कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि जरजट्टा गांव की पहचान भी मांदर निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत हो सकती है।
मांदर की धुन झारखंड के पर्व-त्योहारों, सामाजिक आयोजनों और पारंपरिक नृत्य-संगीत का अभिन्न हिस्सा रही है। ऐसे में जीआई टैग से जुड़ी नई पहचान को कारीगर अपनी मेहनत और विरासत के सम्मान के रूप में देख रहे हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी पीढ़ियों पुरानी कला आने वाले समय में देश-दुनिया तक पहुंचेगी और इससे जुड़े परिवारों को बेहतर आजीविका का अवसर मिलेगा।
    user_AMIT
    AMIT
    गुमला, गुमला, झारखंड•
    7 hrs ago
  • कब्रिस्तान विवाद में तीन प्राथमिकी, 29 नामजद, चंदे की राशि को लेकर भिड़े दो गुट, अधिवक्ता ने 8500 रुपये छीनने लगाया आरोप* गुमला। शहर के घाटो बगीचा स्थित मुस्लिम कब्रिस्तान में चंदे की राशि को लेकर हुए विवाद में तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गयी है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट का आरोप लगाया है। वहीं, अधिवक्ता मो. तौफिक आलम ने छह नामजद समेत 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट, गला दबाकर जान से मारने की कोशिश, 8500 रुपये छीनने और धमकी देने का आरोप लगाया है। तीनों प्राथमिकी में कुल 29 नामजद आरोपित हैं। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि बीच-बचाव के दौरान छह लोगों ने उन्हें घेरकर मारपीट की। दो आरोपितों ने गला दबाने का प्रयास किया और उनकी जेब से 8500 रुपये छीन लिये। पुलिस ने तीनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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    कब्रिस्तान विवाद में तीन प्राथमिकी, 29 नामजद, चंदे की राशि को लेकर भिड़े दो गुट, अधिवक्ता ने 8500 रुपये छीनने लगाया आरोप*
गुमला। शहर के घाटो बगीचा स्थित मुस्लिम कब्रिस्तान में चंदे की राशि को लेकर हुए विवाद में तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गयी है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट का आरोप लगाया है। वहीं, अधिवक्ता मो. तौफिक आलम ने छह नामजद समेत 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट, गला दबाकर जान से मारने की कोशिश, 8500 रुपये छीनने और धमकी देने का आरोप लगाया है। तीनों प्राथमिकी में कुल 29 नामजद आरोपित हैं।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि बीच-बचाव के दौरान छह लोगों ने उन्हें घेरकर मारपीट की। दो आरोपितों ने गला दबाने का प्रयास किया और उनकी जेब से 8500 रुपये छीन लिये। पुलिस ने तीनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    user_Dipak gupta
    Dipak gupta
    पत्रकार गुमला, गुमला, झारखंड•
    16 hrs ago
  • 98 वर्षीय वरिष्ठ कांग्रेसी दिगंबर सिंह पंच तत्व में हुए विलीन , क्षेत्र में शोक की लहर सिसई प्रखंड के भदौली गांव निवासी राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता सह पूर्व सरपंच 98 वर्षीय दिगंबर सिंह का शनिवार की सुबह निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही भदौली पंचायत सहित पूरे प्रखंड क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि एवं शुभचिंतक उनके आवास पहुंचे।
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    98 वर्षीय वरिष्ठ कांग्रेसी दिगंबर सिंह पंच तत्व में हुए विलीन , क्षेत्र में शोक की लहर

सिसई प्रखंड के भदौली गांव निवासी  राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता सह पूर्व सरपंच 98 वर्षीय दिगंबर सिंह का शनिवार की सुबह निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही भदौली पंचायत सहित पूरे प्रखंड क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि एवं शुभचिंतक उनके आवास पहुंचे।
    user_कृष्णा कुमार साहु
    कृष्णा कुमार साहु
    रिपोर्टर सिसई, गुमला, झारखंड•
    4 hrs ago
  • सिसई : 98 वर्षीय पूर्व सरपंच व राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता दिगम्बर सिंह का निधन, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई बड़े पुत्र रामानंद सिंह ने दी मुखाग्नि सिसई (गुमला)। भदौली निवासी, कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं पूर्व सरपंच दिगम्बर सिंह का शनिवार तड़के करीब तीन बजे 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार को सिसई बसिया रोड स्थित मुक्तिधाम में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बड़े पुत्र रामानंद सिंह ने मुखाग्नि दी। परिजनों के अनुसार स्व. दिगम्बर सिंह के दो पुत्र और चार पुत्रियां हैं। वे कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता के साथ प्रखंड अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1952 से लगातार तीन बार सरपंच चुने गए थे। उस समय सकरौली पंचायत के नाम से क्षेत्र जाना जाता था, जो वर्तमान में भदौली पंचायत है। उनकी बड़ी बहू अल्बिना देवी वर्तमान में भदौली पंचायत की मुखिया हैं। अंतिम संस्कार में हिन्दू जागरण मंच के पूर्व परावर्तन प्रमुख सह समाजसेवी संजय वर्मा, पूर्व सांसद प्रतिनिधि निरंजन सिंह, अरुण नारायण सिंह, नंदू सिंह, अरुण सिंह, अनिल साहू, छोटेलाल ताम्रकार, कृष्णा कुमार साहू, मदन साहू, मिथिलेश कुमार सिंह समेत सिसई प्रखंड के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सभी ने स्व. दिगम्बर सिंह को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
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    सिसई : 98 वर्षीय पूर्व सरपंच व राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता दिगम्बर सिंह का निधन, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई 

बड़े पुत्र रामानंद सिंह ने दी मुखाग्नि 
सिसई (गुमला)। भदौली निवासी, कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं पूर्व सरपंच दिगम्बर सिंह का शनिवार तड़के करीब तीन बजे 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार को सिसई बसिया रोड स्थित मुक्तिधाम में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बड़े पुत्र रामानंद सिंह ने मुखाग्नि दी।
परिजनों के अनुसार स्व. दिगम्बर सिंह के दो पुत्र और चार पुत्रियां हैं। वे कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता के साथ प्रखंड अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1952 से लगातार तीन बार सरपंच चुने गए थे। उस समय सकरौली पंचायत के नाम से क्षेत्र जाना जाता था, जो वर्तमान में भदौली पंचायत है। उनकी बड़ी बहू अल्बिना देवी वर्तमान में भदौली पंचायत की मुखिया हैं।
अंतिम संस्कार में हिन्दू जागरण मंच के पूर्व परावर्तन प्रमुख सह समाजसेवी संजय वर्मा, पूर्व सांसद प्रतिनिधि निरंजन सिंह, अरुण नारायण सिंह, नंदू सिंह, अरुण सिंह, अनिल साहू, छोटेलाल ताम्रकार, कृष्णा कुमार साहू, मदन साहू, मिथिलेश कुमार सिंह समेत सिसई प्रखंड के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सभी ने स्व. दिगम्बर सिंह को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
    user_SHAMBHU. S. CHAUHAN
    SHAMBHU. S. CHAUHAN
    Business Networking Company सिसई, गुमला, झारखंड•
    9 hrs ago
  • झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति ने गुमला में की विभिन्न विभागों के कार्यों एवं योजनाओं की समीक्षा उपक्रमों के कार्यों, योजनाओं की प्रगति, व्यय एवं राजस्व सृजन से जुड़े विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा गुमला: झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का दिनांक 03 से 04 अक्टूबर 2026 तक गुमला जिला परिभ्रमण कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसी क्रम में आज शनिवार को गुमला परिसदन सभागार में समिति की विशेष समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति के सभापति निरल पूर्ति ने की। बैठक में उपायुक्त दिलेश्वर महतो, उप विकास आयुक्त अनिमेश रंजन सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं संबंधित कर्मी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों एवं सरकारी उपक्रमों द्वारा संचालित योजनाओं, कार्यों की प्रगति, आवंटन के विरुद्ध किए गए व्यय, राजस्व सृजन, रख-रखाव तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। समिति के सभापति ने विभागीय पदाधिकारियों को योजनाओं एवं कार्यों से संबंधित आवश्यक अभिलेख और विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यों की समीक्षा के क्रम में विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई। विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य एवं उसके विरुद्ध अब तक पूर्ण किए गए कार्यों की स्थिति से समिति को अवगत कराया गया। ग्रामीण कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित सड़क निर्माण एवं अन्य कार्यों की भी समीक्षा की गई तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति की जानकारी ली गई। झारखंड पर्यटन विकास निगम एवं संबंधित उपक्रमों के कार्यों की समीक्षा के दौरान पर्यटन भवन सहित उपलब्ध परिसंपत्तियों के रख-रखाव, व्यय एवं उनसे प्राप्त होने वाले राजस्व की जानकारी ली गई। समिति ने संबंधित अधिकारियों को परिसंपत्तियों से जुड़े आय-व्यय का समुचित लेखा-जोखा एवं विस्तृत विवरण तैयार कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही उपलब्ध पर्यटन परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग एवं राजस्व सृजन की संभावनाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा। पर्यटन विभाग की समीक्षा के दौरान गोबरसिल्ली, अंजन धाम एवं टांगीनाथ धाम सहित जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास एवं पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा हुई। समिति ने पर्यटन स्थलों के समग्र विकास के साथ-साथ पर्यटन भवनों एवं आवश्यक आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। वन विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यों, विशेषकर कैंपा मद से किए जा रहे कार्यों की जानकारी समिति द्वारा ली गई। विभाग द्वारा पौधरोपण के अतिरिक्त संचालित अन्य कार्यों, उनके लिए प्राप्त आवंटन तथा किए गए व्यय की भी जानकारी ली गई। समिति ने वन विभाग के कार्यों एवं व्यय से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान विगत एक वर्ष में संचालित योजनाओं, प्राप्त आवंटन तथा उसके विरुद्ध किए गए व्यय की जानकारी ली गई। समिति ने जिले में उपलब्ध कराए जाने वाले बीज एवं अन्य कृषि सामग्री के वितरण की स्थिति से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। बीज के निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री किए जाने संबंधी प्राप्त सूचनाओं के संदर्भ में भी आवश्यक जानकारी मांगी गई। कृषि विभाग एवं आत्मा द्वारा संचालित योजनाओं की भी समीक्षा की गई तथा योजनावार विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा गया। नगर क्षेत्र में संचालित शहरी जलापूर्ति योजना एवं जुडको के माध्यम से संचालित परियोजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। जल शोधन संयंत्रों से संबंधित कार्यों के दौरान आम नागरिकों को होने वाली असुविधा को न्यूनतम करने तथा कार्यों के बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई। समिति ने जुडको द्वारा संचालित कार्यों की प्रगति एवं स्थिति से संबंधित विस्तृत जानकारी विधानसभा को उपलब्ध कराने तथा संबंधित कार्यों की जांच के लिए आवश्यक स्तर पर जांच दल गठित करने की बात कही। भवन निर्माण विभाग एवं नगर निकाय से संबंधित निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। विद्युत विभाग के अंतर्गत संचालित योजनाओं, आवंटन के विरुद्ध किए गए कार्यों, कार्यों की गुणवत्ता एवं गुणवत्ता परीक्षण से संबंधित जानकारी ली गई। समिति ने विभिन्न योजनाओं का विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। आपूर्ति विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान जिले में विभागीय गतिविधियों एवं जनहित से जुड़े कार्यों की स्थिति पर चर्चा की गई। समिति ने अधिकारियों को अपने-अपने विभागीय दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने तथा क्षेत्र में योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करने पर जोर दिया। बैठक में खनन विभाग के कार्यों की भी समीक्षा की गई। जिला खनन पदाधिकारी से जिले में अब तक किए गए खनन संबंधी कार्यों, राजस्व एवं अन्य संबंधित गतिविधियों की जानकारी ली गई। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं एवं आवश्यक संसाधनों की स्थिति पर चर्चा हुई। जिले में वर्तमान में उपलब्ध रक्त की स्थिति, सिकल सेल एनीमिया की जांच एवं उपचार, दवा की उपलब्धता तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी ली गई। समिति ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने एवं आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त पुलिस हाउसिंग सहित अन्य संबंधित विभागों एवं सरकारी उपक्रमों के कार्यों की भी समीक्षा की गई। समिति द्वारा विभिन्न विभागों से संबंधित आवश्यक अभिलेख, कार्य प्रगति प्रतिवेदन, आय-व्यय विवरण एवं ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। बैठक के दौरान समिति के सभापति निरल पूर्ति ने कहा कि समिति का उद्देश्य सरकारी उपक्रमों एवं विभागों द्वारा संचालित कार्यों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करना, योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही के साथ कार्य करने एवं जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। इस अवसर पर संबंधित विभागों के पदाधिकारियों द्वारा अपने-अपने विभाग से संबंधित योजनाओं, कार्यों की प्रगति एवं उपलब्धियों की जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की गई।
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    झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति ने गुमला में की विभिन्न विभागों के कार्यों एवं योजनाओं की समीक्षा

उपक्रमों के कार्यों, योजनाओं की प्रगति, व्यय एवं राजस्व सृजन से जुड़े विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा
गुमला:  झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का दिनांक 03 से 04 अक्टूबर 2026 तक गुमला जिला परिभ्रमण कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसी क्रम में आज शनिवार को  गुमला परिसदन सभागार में समिति की विशेष समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति के सभापति निरल पूर्ति ने की। बैठक में उपायुक्त दिलेश्वर महतो, उप विकास आयुक्त अनिमेश रंजन सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान विभिन्न विभागों एवं सरकारी उपक्रमों द्वारा संचालित योजनाओं, कार्यों की प्रगति, आवंटन के विरुद्ध किए गए व्यय, राजस्व सृजन, रख-रखाव तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। समिति के सभापति ने विभागीय पदाधिकारियों को योजनाओं एवं कार्यों से संबंधित आवश्यक अभिलेख और विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यों की समीक्षा के क्रम में विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई। विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य एवं उसके विरुद्ध अब तक पूर्ण किए गए कार्यों की स्थिति से समिति को अवगत कराया गया। ग्रामीण कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित सड़क निर्माण एवं अन्य कार्यों की भी समीक्षा की गई तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति की जानकारी ली गई।
झारखंड पर्यटन विकास निगम एवं संबंधित उपक्रमों के कार्यों की समीक्षा के दौरान पर्यटन भवन सहित उपलब्ध परिसंपत्तियों के रख-रखाव, व्यय एवं उनसे प्राप्त होने वाले राजस्व की जानकारी ली गई। समिति ने संबंधित अधिकारियों को परिसंपत्तियों से जुड़े आय-व्यय का समुचित लेखा-जोखा एवं विस्तृत विवरण तैयार कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही उपलब्ध पर्यटन परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग एवं राजस्व सृजन की संभावनाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा।
पर्यटन विभाग की समीक्षा के दौरान गोबरसिल्ली, अंजन धाम एवं टांगीनाथ धाम सहित जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास एवं पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा हुई। समिति ने पर्यटन स्थलों के समग्र विकास के साथ-साथ पर्यटन भवनों एवं आवश्यक आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही।
वन विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यों, विशेषकर कैंपा मद से किए जा रहे कार्यों की जानकारी समिति द्वारा ली गई। विभाग द्वारा पौधरोपण के अतिरिक्त संचालित अन्य कार्यों, उनके लिए प्राप्त आवंटन तथा किए गए व्यय की भी जानकारी ली गई। समिति ने वन विभाग के कार्यों एवं व्यय से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान विगत एक वर्ष में संचालित योजनाओं, प्राप्त आवंटन तथा उसके विरुद्ध किए गए व्यय की जानकारी ली गई। समिति ने जिले में उपलब्ध कराए जाने वाले बीज एवं अन्य कृषि सामग्री के वितरण की स्थिति से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। बीज के निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री किए जाने संबंधी प्राप्त सूचनाओं के संदर्भ में भी आवश्यक जानकारी मांगी गई। कृषि विभाग एवं आत्मा द्वारा संचालित योजनाओं की भी समीक्षा की गई तथा योजनावार विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा गया।
नगर क्षेत्र में संचालित शहरी जलापूर्ति योजना एवं जुडको के माध्यम से संचालित परियोजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। जल शोधन संयंत्रों से संबंधित कार्यों के दौरान आम नागरिकों को होने वाली असुविधा को न्यूनतम करने तथा कार्यों के बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई। समिति ने जुडको द्वारा संचालित कार्यों की प्रगति एवं स्थिति से संबंधित विस्तृत जानकारी विधानसभा को उपलब्ध कराने तथा संबंधित कार्यों की जांच के लिए आवश्यक स्तर पर जांच दल गठित करने की बात कही।
भवन निर्माण विभाग एवं नगर निकाय से संबंधित निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। विद्युत विभाग के अंतर्गत संचालित योजनाओं, आवंटन के विरुद्ध किए गए कार्यों, कार्यों की गुणवत्ता एवं गुणवत्ता परीक्षण से संबंधित जानकारी ली गई। समिति ने विभिन्न योजनाओं का विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
आपूर्ति विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान जिले में विभागीय गतिविधियों एवं जनहित से जुड़े कार्यों की स्थिति पर चर्चा की गई। समिति ने अधिकारियों को अपने-अपने विभागीय दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने तथा क्षेत्र में योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करने पर जोर दिया।
बैठक में खनन विभाग के कार्यों की भी समीक्षा की गई। जिला खनन पदाधिकारी से जिले में अब तक किए गए खनन संबंधी कार्यों, राजस्व एवं अन्य संबंधित गतिविधियों की जानकारी ली गई।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं एवं आवश्यक संसाधनों की स्थिति पर चर्चा हुई। जिले में वर्तमान में उपलब्ध रक्त की स्थिति, सिकल सेल एनीमिया की जांच एवं उपचार, दवा की उपलब्धता तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी ली गई। समिति ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने एवं आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
इसके अतिरिक्त पुलिस हाउसिंग सहित अन्य संबंधित विभागों एवं सरकारी उपक्रमों के कार्यों की भी समीक्षा की गई। समिति द्वारा विभिन्न विभागों से संबंधित आवश्यक अभिलेख, कार्य प्रगति प्रतिवेदन, आय-व्यय विवरण एवं ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
बैठक के दौरान समिति के सभापति निरल पूर्ति ने कहा कि समिति का उद्देश्य सरकारी उपक्रमों एवं विभागों द्वारा संचालित कार्यों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करना, योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही के साथ कार्य करने एवं जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
इस अवसर पर संबंधित विभागों के पदाधिकारियों द्वारा अपने-अपने विभाग से संबंधित योजनाओं, कार्यों की प्रगति एवं उपलब्धियों की जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की गई।
    user_राहुल कुमार
    राहुल कुमार
    Local News Reporter चैनपुर, गुमला, झारखंड•
    5 hrs ago
  • *जनगणना में OBC कॉलम की मांग को लेकर 6 अक्टूबर को चक्का जाम: गुमला समेत कई जिलों में गोलबंद हुआ समाज आगामी जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग को लेकर 'पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति झारखंड' के बैनर तले गुमला सहित कई जिलों में ओबीसी समाज व्यापक स्तर पर गोलबंद हो रहा है। केंद्रीय अध्यक्ष उदासन नाग की अध्यक्षता में बसिया सहित विभिन्न स्थानों पर लगातार बैठकें की जा रही हैं, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि मांगों के समर्थन में 5 अक्टूबर को राज्यभर में मशाल जुलूस व पुतला दहन किया जाएगा, जिसके बाद 6 को पूर्ण चक्का जाम एवं 7 अक्टूबर को विभिन्न जगहों पर धरना-प्रदर्शन होगा। इस आंदोलन के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, वहीं केंद्रीय अध्यक्ष उदासन नाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।
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    *जनगणना में OBC कॉलम की मांग को लेकर 6 अक्टूबर को चक्का जाम: गुमला समेत कई जिलों में गोलबंद हुआ समाज
आगामी जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग को लेकर 'पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति झारखंड' के बैनर तले गुमला सहित कई जिलों में ओबीसी समाज व्यापक स्तर पर गोलबंद हो रहा है। केंद्रीय अध्यक्ष उदासन नाग की अध्यक्षता में बसिया सहित विभिन्न स्थानों पर लगातार बैठकें की जा रही हैं, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि मांगों के समर्थन में 5 अक्टूबर को राज्यभर में मशाल जुलूस व पुतला दहन किया जाएगा, जिसके बाद 6 को पूर्ण चक्का जाम एवं 7 अक्टूबर को विभिन्न जगहों पर धरना-प्रदर्शन होगा। इस आंदोलन के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, वहीं केंद्रीय अध्यक्ष उदासन नाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।
    user_Niraj kumar Sahu
    Niraj kumar Sahu
    पत्रकार बसिया, गुमला, झारखंड•
    9 hrs ago
  • झारखंड और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली एनएच-43 पर बने गड्ढों से राहगीर परेशान, बारिश में तालाब बन जाती है सड़क झारखंड और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली एनएच-43 पर बने गड्ढों से राहगीर परेशान, बारिश में तालाब बन जाती है सड़क गुमला :- झारखंड को छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर गुमला के माझाटोली के पास सड़क की बदहाल स्थिति राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जो बारिश के दौरान पानी से भर जाने के बाद तालाब का रूप ले लेते हैं। ऐसे में इस मार्ग से होकर गुजरने वाले छोटे-बड़े वाहनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गड्ढों में पानी भरने के कारण सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। अमरेश झा और अब्दुल गफ्फार जैसे स्थानीय लोगों ने बताया कि एनएच-43 झारखंड और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। इस सड़क से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री वाहन, मालवाहक वाहन, बसें और अन्य छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद माझाटोली के पास सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब बनी हुई है। सड़क पर बने गड्ढे लगातार बढ़ते जा रहे हैं और बारिश के बाद स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। लोगों का कहना है कि सड़क की समस्या को लेकर कई बार आवाज उठाई गई है। जब सड़क के गड्ढों को लेकर मीडिया में खबर प्रकाशित होती है, तो संबंधित विभाग की ओर से गड्ढों में मिट्टी, गिट्टी या अन्य सामग्री डालकर उन्हें भरने की औपचारिकता पूरी कर दी जाती है। कुछ समय बाद बारिश या वाहनों के लगातार आवागमन के कारण गड्ढे फिर से उभर आते हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क की स्थायी और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत नहीं होने के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों और वाहन चालकों ने सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग और संबंधित ठेकेदारों द्वारा कई बार घटिया स्तर का काम किए जाने के कारण सड़क जल्द ही खराब हो जाती है। लोगों का कहना है कि यदि सड़क की मरम्मत निर्धारित मानकों के अनुसार और गुणवत्तापूर्ण तरीके से की जाए, तो बार-बार गड्ढे बनने की समस्या कम हो सकती है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, विधायक और सांसद की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग की ऐसी स्थिति के बावजूद समस्या के स्थायी समाधान को लेकर अपेक्षित पहल नहीं दिखाई दे रही है। इधर, गुमला उपायुक्त दिलीपेश्वर महतो ने सड़क की समस्या को लेकर कहा कि सड़क की मरम्मत के लिए प्राक्कलन तैयार कर लिया गया है और टेंडर की प्रक्रिया की जा रही है। उपायुक्त के इस बयान के बाद लोगों को उम्मीद है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सड़क की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा। झारखंड को छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण सड़क का ऐसे बदहाल होना अपने आप में सवाल पैदा करता है कि जब महाराष्ट्र,मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से गुजरने वाले लोग जब झारखंड प्रवेश करते होंगे घुसते ही झारखंड के बारे में उनके मन में झारखंड की छवि क्या बनती होगी यह सोचा जा सकता है। एन एच विभाग और संवेदक के लापरवाही के कारण ऐसी बदहाल स्थिति बनी हुई है। ऐसे में मरम्मत कार्य शुरू होने के बाद केवल गड्ढों की खानापूर्ति न की जाए, बल्कि सड़क की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि आने वाले समय में यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके और बारिश के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा कम हो।
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    झारखंड और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली एनएच-43 पर बने गड्ढों से राहगीर परेशान, बारिश में तालाब बन जाती है सड़क

झारखंड और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली एनएच-43 पर बने गड्ढों से राहगीर परेशान, बारिश में तालाब बन जाती है सड़क
गुमला :- झारखंड को छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर गुमला के माझाटोली के पास सड़क की बदहाल स्थिति राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जो बारिश के दौरान पानी से भर जाने के बाद तालाब का रूप ले लेते हैं। ऐसे में इस मार्ग से होकर गुजरने वाले छोटे-बड़े वाहनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गड्ढों में पानी भरने के कारण सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
अमरेश झा और अब्दुल गफ्फार जैसे स्थानीय लोगों ने बताया कि एनएच-43 झारखंड और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। इस सड़क से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री वाहन, मालवाहक वाहन, बसें और अन्य छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद माझाटोली के पास सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब बनी हुई है। सड़क पर बने गड्ढे लगातार बढ़ते जा रहे हैं और बारिश के बाद स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
लोगों का कहना है कि सड़क की समस्या को लेकर कई बार आवाज उठाई गई है। जब सड़क के गड्ढों को लेकर मीडिया में खबर प्रकाशित होती है, तो संबंधित विभाग की ओर से गड्ढों में मिट्टी, गिट्टी या अन्य सामग्री डालकर उन्हें भरने की औपचारिकता पूरी कर दी जाती है। कुछ समय बाद बारिश या वाहनों के लगातार आवागमन के कारण गड्ढे फिर से उभर आते हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क की स्थायी और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत नहीं होने के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों और वाहन चालकों ने सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग और संबंधित ठेकेदारों द्वारा कई बार घटिया स्तर का काम किए जाने के कारण सड़क जल्द ही खराब हो जाती है। लोगों का कहना है कि यदि सड़क की मरम्मत निर्धारित मानकों के अनुसार और गुणवत्तापूर्ण तरीके से की जाए, तो बार-बार गड्ढे बनने की समस्या कम हो सकती है।
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, विधायक और सांसद की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग की ऐसी स्थिति के बावजूद समस्या के स्थायी समाधान को लेकर अपेक्षित पहल नहीं दिखाई दे रही है।
इधर, गुमला उपायुक्त दिलीपेश्वर महतो ने सड़क की समस्या को लेकर कहा कि सड़क की मरम्मत के लिए प्राक्कलन तैयार कर लिया गया है और टेंडर की प्रक्रिया की जा रही है। उपायुक्त के इस बयान के बाद लोगों को उम्मीद है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सड़क की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा।
झारखंड को छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण सड़क का ऐसे बदहाल होना अपने आप में सवाल पैदा करता है कि जब महाराष्ट्र,मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से गुजरने वाले लोग जब झारखंड प्रवेश करते होंगे घुसते ही झारखंड के बारे में उनके मन में झारखंड की छवि क्या बनती होगी यह सोचा जा सकता है। एन एच विभाग और  संवेदक के लापरवाही के कारण ऐसी बदहाल स्थिति बनी हुई है। ऐसे में मरम्मत कार्य शुरू होने के बाद केवल गड्ढों की खानापूर्ति न की जाए, बल्कि सड़क की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि आने वाले समय में यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके और बारिश के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा कम हो।
    user_AMIT
    AMIT
    गुमला, गुमला, झारखंड•
    7 hrs ago
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