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नेशनल हाईवे-25 पर अतिक्रमण, आमजन हो रहे हैं परेशान नेशनल हाईवे-25 पर अतिक्रमण, आमजन हो रहे हैं परेशान बायतु क्षेत्र से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग -25 पर बढ़ते अतिक्रमण के कारण आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाईवे के किनारे और कई स्थानों पर सड़क तक ठेले, दुकानें व अन्य अस्थायी कब्जे होने से यातायात बाधित हो रहा है। राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में दिक्कतें आ रही हैं तथा दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से हाईवे पर हो रहे अतिक्रमण को हटाकर यातायात व्यवस्था सुचारू करने की मांग की है।

21 hrs ago
user_Ghamanda Ram
Ghamanda Ram
पत्रकार बायतू, बाड़मेर, राजस्थान•
21 hrs ago

नेशनल हाईवे-25 पर अतिक्रमण, आमजन हो रहे हैं परेशान नेशनल हाईवे-25 पर अतिक्रमण, आमजन हो रहे हैं परेशान बायतु क्षेत्र से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग -25 पर बढ़ते अतिक्रमण के कारण आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाईवे के किनारे और कई स्थानों पर सड़क तक ठेले, दुकानें व अन्य अस्थायी कब्जे होने से यातायात बाधित हो रहा है। राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में दिक्कतें आ रही हैं तथा दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से हाईवे पर हो रहे अतिक्रमण को हटाकर यातायात व्यवस्था सुचारू करने की मांग की है।

More news from राजस्थान and nearby areas
  • नेशनल हाईवे-25 पर अतिक्रमण, आमजन हो रहे हैं परेशान बायतु क्षेत्र से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग -25 पर बढ़ते अतिक्रमण के कारण आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाईवे के किनारे और कई स्थानों पर सड़क तक ठेले, दुकानें व अन्य अस्थायी कब्जे होने से यातायात बाधित हो रहा है। राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में दिक्कतें आ रही हैं तथा दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से हाईवे पर हो रहे अतिक्रमण को हटाकर यातायात व्यवस्था सुचारू करने की मांग की है।
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    नेशनल हाईवे-25  पर अतिक्रमण, आमजन हो रहे हैं परेशान 
बायतु 
क्षेत्र से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग -25 पर बढ़ते अतिक्रमण के कारण आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाईवे के किनारे और कई स्थानों पर सड़क तक ठेले, दुकानें व अन्य अस्थायी कब्जे होने से यातायात बाधित हो रहा है।
राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में दिक्कतें आ रही हैं तथा दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से हाईवे पर हो रहे अतिक्रमण को हटाकर यातायात व्यवस्था सुचारू करने की मांग की है।
    user_Ghamanda Ram
    Ghamanda Ram
    पत्रकार बायतू, बाड़मेर, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • बालोतरा। बालोतरा के विभिन्न गांव में होली के बाद 7 दिन तक गैर नृत्य का आयोजन किया जाता है।
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    बालोतरा।
बालोतरा के विभिन्न गांव में होली के बाद 7 दिन तक गैर नृत्य का आयोजन किया जाता है।
    user_Pukhraj soni
    Pukhraj soni
    पत्रकार पचपदरा, बाड़मेर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • सिवाना में श्रद्धा के साथ महिलाओं ने की शीतला माता की कथा, क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना सिवाना कस्बे में शीतला माता के प्रति आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कस्बे में बड़ी संख्या में महिलाओं ने एकत्रित होकर श्रद्धा भाव से शीतला माता की कथा का आयोजन किया। कथा के दौरान महिलाओं ने माता के भजन गाए और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर परिवार व क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।कथा आयोजन में महिलाओं ने शीतला माता के जीवन प्रसंगों और उनके महत्व को सुनते हुए भक्ति भाव से भाग लिया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और महिलाओं ने भजन-कीर्तन कथा के पश्चात महिलाओं ने माता को प्रसाद अर्पित कर उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित की। महिलाओं का कहना है कि शीतला माता की पूजा से क्षेत्र में रोग-व्याधियों से मुक्ति और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए हर वर्ष बड़ी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार महिलाएं शीतला माता की कथा व पूजा करती हैं।इस अवसर पर कस्बे की अनेक महिलाएं और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से माता की आराधना कर क्षेत्र में खुशहाली और शांति की कामना की।
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    सिवाना में श्रद्धा के साथ महिलाओं ने की शीतला माता की कथा, क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना
सिवाना कस्बे में शीतला माता के प्रति आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कस्बे में बड़ी संख्या में महिलाओं ने एकत्रित होकर श्रद्धा भाव से शीतला माता की कथा का आयोजन किया। कथा के दौरान महिलाओं ने माता के भजन गाए और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर परिवार व क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।कथा आयोजन में महिलाओं ने शीतला माता के जीवन प्रसंगों और उनके महत्व को सुनते हुए भक्ति भाव से भाग लिया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और महिलाओं ने भजन-कीर्तन कथा के पश्चात महिलाओं ने माता को प्रसाद अर्पित कर उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित की। महिलाओं का कहना है कि शीतला माता की पूजा से क्षेत्र में रोग-व्याधियों से मुक्ति और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए हर वर्ष बड़ी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार महिलाएं शीतला माता की कथा व पूजा करती हैं।इस अवसर पर कस्बे की अनेक महिलाएं और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से माता की आराधना कर क्षेत्र में खुशहाली और शांति की कामना की।
    user_सुरेश कुमार
    सुरेश कुमार
    सिवाना, बाड़मेर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • सोमवार शाम को जिला कलेक्टर डॉक्टर प्रदीप के ने सिरे मंदिर रोड स्थित शीतला माता मंदिर मेले का विधिवत शुभारंभ किया, इस दौरान मंदिर में जिला कलेक्टर सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने शीतला माता की पूजा अर्चना कर मंगल कामना की बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे
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    सोमवार शाम को जिला कलेक्टर डॉक्टर प्रदीप के ने सिरे मंदिर रोड स्थित शीतला माता मंदिर मेले का विधिवत शुभारंभ किया, इस दौरान मंदिर में जिला कलेक्टर सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने शीतला माता की पूजा अर्चना कर मंगल कामना की बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे
    user_कमलेश शर्मा
    कमलेश शर्मा
    Voice of people जालोर, जालोर, राजस्थान•
    19 hrs ago
  • राजनीति में शिक्षित युवाओं को मौका मिले, इसलिए जनप्रतिनिधियों के लिए शिक्षा जरूरी – रविन्द्र सिंह भाटी
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    राजनीति में शिक्षित युवाओं को मौका मिले, इसलिए जनप्रतिनिधियों के लिए शिक्षा जरूरी – रविन्द्र सिंह भाटी
    user_V Rathi
    V Rathi
    Insurance Agent भीनमाल, जालोर, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • आहोर माता शीतला को ठंडे पकवानों का लगा भोग: रोडला में बासोड़ा पर्व भक्ति भाव से मनाया गया, आंखरिया चौक पर गैर नृत्य का हुआ आयोजन:- आहोर उपखंड क्षेत्र के ग्राम रोडला में सोमवार को बासोड़ा पर्व भक्ति से मनाया गया। इस दौरान माता शीतला को ठंडे पकवानों का भोग लगाया गया। मान्यता है कि शीतला माता की आराधना से परिवार में सुख-शांति आती है और चेचक व खसरा जैसी बीमारियों से बचाव होता हैं।पर्व के अवसर पर सुबह से ग्रामीणों महिलाओं में उत्साह दिखा। महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पारंपरिक वेशभूषा में शीतला माता मंदिर स्थल गांव पेंचका पर पूजा अर्चना के लिए पहुंची। महिलाओं ने श्रद्घापुर्वक माता को ठंडे जल से स्नान कराया। जिसे शीतलता और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है। पूजा के लिए एक दिन पहले (सप्तमी को) विशेष पकवान रविवार को तैयार किए गए थे। इनमें मीठे चावल (गुड़ वाले), कड़ी- चावल, पूड़ी, हलवा और सहित विभिन्न प्रकार के व्यंजन शामिल थे। जिनका भोग माता को अर्पित किया गया। धार्मिक परम्परा के अनुसार बासौदा पर्व के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। पूरा परिवार माताओं को अर्पित किया गया" बासी" प्रसाद ही ग्रहण करता है। मंदिरों के आसपास का माहौल भक्तिमय बना रहा। महिलाओं ने समूह में बैठकर शीतला माता के भजन गाए और लोकगीतों के माध्यम से बच्चों की दीर्घायु की कामना की । स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार यह पर्व ऋतु परिवर्तन का भी प्रतीक है। इसके बाद ग्रीष्म ऋतु का पुर्ण प्रभाव शुरू हो जाता हैं ।इस कारण ठंडे भोजन और जल के सेवन के माध्यम से शरीर को बढ़ती गर्मी के प्रति अनुकूलित करने का संदेश दिया जाता हैं। रोडला में सोमवार को आंखरिया चौक पर गैर नृत्य का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
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    आहोर 
माता शीतला को ठंडे पकवानों का लगा भोग: रोडला में बासोड़ा पर्व भक्ति भाव से मनाया गया, आंखरिया चौक पर गैर नृत्य का हुआ आयोजन:-
आहोर उपखंड क्षेत्र के ग्राम रोडला में सोमवार को बासोड़ा पर्व भक्ति से मनाया गया। इस दौरान माता शीतला को ठंडे पकवानों का भोग लगाया गया। मान्यता है कि शीतला माता की आराधना से परिवार में सुख-शांति आती है और चेचक व खसरा जैसी बीमारियों से बचाव होता हैं।पर्व के अवसर पर सुबह से ग्रामीणों महिलाओं में उत्साह दिखा। महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पारंपरिक वेशभूषा में शीतला माता मंदिर स्थल गांव पेंचका  पर पूजा अर्चना के लिए पहुंची। महिलाओं ने श्रद्घापुर्वक माता को ठंडे जल से स्नान कराया। जिसे शीतलता और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है। पूजा के लिए एक दिन पहले (सप्तमी को) विशेष पकवान रविवार को तैयार किए गए थे। इनमें मीठे चावल (गुड़ वाले), कड़ी- चावल, पूड़ी, हलवा और सहित विभिन्न प्रकार के व्यंजन शामिल थे। जिनका भोग  माता को अर्पित किया गया। धार्मिक परम्परा के अनुसार बासौदा पर्व के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। पूरा परिवार माताओं को अर्पित किया गया" बासी" प्रसाद ही ग्रहण करता है। मंदिरों के आसपास का माहौल भक्तिमय बना रहा। महिलाओं ने समूह में बैठकर शीतला माता के भजन गाए और लोकगीतों के माध्यम से बच्चों की दीर्घायु की कामना की । स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार यह पर्व ऋतु परिवर्तन का भी प्रतीक है। इसके बाद ग्रीष्म ऋतु का पुर्ण प्रभाव शुरू हो जाता हैं ।इस कारण ठंडे भोजन और जल के  सेवन के माध्यम से शरीर को बढ़ती गर्मी के प्रति अनुकूलित करने का संदेश दिया जाता हैं। रोडला में सोमवार को आंखरिया चौक पर गैर नृत्य का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
    user_सुरेश गर्ग
    सुरेश गर्ग
    Voice of people आहोर, जालोर, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • दुखियारों का सहारा गोगा महाराज बड़सम वाला
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    दुखियारों का सहारा गोगा महाराज बड़सम वाला
    user_Bhuvaji Bhana Ram Dewasi
    Bhuvaji Bhana Ram Dewasi
    Social worker Sanchore, Jalore•
    18 hrs ago
  • कविता और थीम मेहंदी से नारी-शक्ति का संदेश राजबाग, सूरसागर (जोधपुर) निवासी थीम मेहंदी कलाकार रेणु भदरार हर विशेष दिवस व त्योहार पर जागरूकता का संदेश देने वाली मेहंदी लगाती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने युवा कवयित्री सुरभि खीची के साथ साहित्य और कला को जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की। साहित्य लेखन का कई वर्षों से शौक रखने वाली सुरभि खीची ने अपनी ही लिखी कविता के भावों के अनुसार अपने हाथों में थीम मेहंदी रचवाई। उनकी कविता में एक स्त्री की बचपन से लेकर विवाह के बाद तक की जीवन-यात्रा, उसके सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास का संदेश व्यक्त किया गया है। इस विशेष मेहंदी को रेणु भदरार ने तैयार किया, जिसमें किताब, उड़ती चिड़िया और फूलों के माध्यम से नारी शिक्षा, स्वतंत्रता और सृजनशीलता का संदेश दर्शाया गया है। सुरभि खीची ने बताया कि मेहंदी में अंकित भाव उनकी अपनी कविता से लिए गए हैं और उसी के अनुसार रेणु भदरार ने उनके हाथों में यह थीम मेहंदी प्रदर्शित की। यह प्रयास नारी-शक्ति, शिक्षा और आत्मसम्मान का प्रेरणादायक संदेश देता है।
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    कविता और थीम मेहंदी से नारी-शक्ति का संदेश
राजबाग, सूरसागर (जोधपुर) निवासी थीम मेहंदी कलाकार रेणु भदरार हर विशेष दिवस व त्योहार पर जागरूकता का संदेश देने वाली मेहंदी लगाती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने युवा कवयित्री सुरभि खीची के साथ साहित्य और कला को जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की। साहित्य लेखन का कई वर्षों से शौक रखने वाली सुरभि खीची ने अपनी ही लिखी कविता के भावों के अनुसार अपने हाथों में थीम मेहंदी रचवाई। उनकी कविता में एक स्त्री की बचपन से लेकर विवाह के बाद तक की जीवन-यात्रा, उसके सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास का संदेश व्यक्त किया गया है। इस विशेष मेहंदी को रेणु भदरार ने तैयार किया, जिसमें किताब, उड़ती चिड़िया और फूलों के माध्यम से नारी शिक्षा, स्वतंत्रता और सृजनशीलता का संदेश दर्शाया गया है। सुरभि खीची ने बताया कि मेहंदी में अंकित भाव उनकी अपनी कविता से लिए गए हैं और उसी के अनुसार रेणु भदरार ने उनके हाथों में यह थीम मेहंदी प्रदर्शित की। यह प्रयास नारी-शक्ति, शिक्षा और आत्मसम्मान का प्रेरणादायक संदेश देता है।
    user_Pradeep soni
    Pradeep soni
    Local News Reporter जोधपुर, जोधपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
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