गंगा की तीरे झूला झूलें त्रिपुरारी, बनके आज वो कुंजबिहारी... जन्माष्टमी पर काशी में अद्भुत लीला मोरपंख धारण कर जब हर बने हरी मिट गया कैलाश और क्षीरसागर का फासला डॉ उदय शंकर भगत वाराणसी। यहां महादेव जब मुस्कुराते हैं तो कृष्ण दिखाई देते हैं और कृष्ण की बांसुरी में भी शिव का अनहद नाद सुनाई देता है जन्माष्टमी की पावन रात्रि में जब गंगा की लहरों के पास त्रिपुरारी कुंजबिहारी बनकर झूले पर विराजे तब काशी ने केवल एक उत्सव नहीं देखा काशी ने देखा हर और हरि का मिलन काशी ने देखा शिव में कृष्ण और काशी ने एक बार फिर कह दिया रूप अनेक हैं, लेकिन सत्य एक है जन्माष्टमी की यह अनूठी परंपरा काशी के उस शाश्वत दर्शन को जीवंत करती रही जिसमें शिव और विष्णु के बीच कोई भेद नहीं है। नाम अलग हो सकते हैं रूप अलग हो सकते हैं लीलाएं अलग हो सकती हैं लेकिन परम सत्ता एक ही है और इसी सत्य को काशी ने झूले पर विराजमान अपने बाबा के माध्यम से फिर देखा हर बने हरि... और हरि में स्वयं हर मुस्कुराते रहे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास में काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा का श्रीकृष्ण के हरि स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया मोरपंख मुकुट आकर्षक वस्त्रों और बांसुरी की छवि से सजे बाबा विश्वनाथ जब झूले पर विराजे तो श्रद्धालुओं की आंखें उस दिव्य स्वरूप पर ठहर गईं मानो कैलाश की विराटता वृंदावन की मधुरता में उतर आई हो त्रिशूलधारी महादेव आज मोरपंखधारी थे जगत के स्वामी त्रिपुरारी आज कुंजबिहारी बनकर झूला झूल रहे थे शिव की गंभीरता और कृष्ण की चंचलता एक ही स्वरूप में समाई हुई थी और तभी भक्ति की तरंगों पर एक स्वर उठा “गंगा की तीरे झूला झूलें त्रिपुरारी बनके आज वो कुंजबिहारी हाथ त्रिशूल डमरू चमके सोहे मुकुट मोरपंख धारी भजन के इन शब्दों ने उस अलौकिक दृश्य को जैसे स्वर दे दिया महादेव के हाथों में त्रिशूल और डमरू की दिव्यता थी तो सिर पर मोरपंख की माधुरी कैलाश का वैराग्य और वृंदावन का प्रेम उस एक स्वरूप में एकाकार हो गया था बाल-गोपाल के प्रिय माखन-मिश्री का भोग झूले पर विराजमान बाबा विश्वनाथ को बाल-गोपाल के प्रिय माखन और मिश्री का पारंपरिक भोग अर्पित किया गया महंत आवास में भक्ति और वात्सल्य का ऐसा संगम हुआ कि पूरा वातावरण हरे कृष्णा और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। उस क्षण ऐसा लगा मानो दोनों जयकारे अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही परम सत्ता की दो मधुर अभिव्यक्तियां हों ब्रह्ममुहूर्त में विशेष पूजन महंत वाचस्पति तिवारी ने बताया कि जन्माष्टमी पर परंपरा के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त में बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा का विशेष पूजन किया गया पंडित सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन-अर्चन संपन्न कराया सायंकाल संजीव रत्न मिश्र ने बाबा विश्वनाथ का मनोहारी हरी स्वरूप में श्रृंगार किया इसके बाद पारंपरिक लोकगीतों और भजनों के माध्यम से बाबा के चरणों में भावपूर्ण शिवांजलि अर्पित की गई भजनों ने बांधा भक्तिरस का समां इस दौरान पागल बाबा और जयपुर से आये मोहन स्वामी प्रस्तुति चमके काशी में अजब नजारा हर बने हरि रूप हमारा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया वहीं झूला झूल रहे जग के स्वामी जय हो बाबा विश्वनाथ त्रिपुरारी की स्वर-लहरियों पर पूरा परिसर भक्तिरस में डूब गया
गंगा की तीरे झूला झूलें त्रिपुरारी, बनके आज वो कुंजबिहारी... जन्माष्टमी पर काशी में अद्भुत लीला मोरपंख धारण कर जब हर बने हरी मिट गया कैलाश और क्षीरसागर का फासला डॉ उदय शंकर भगत वाराणसी। यहां महादेव जब मुस्कुराते हैं तो कृष्ण दिखाई देते हैं और कृष्ण की बांसुरी में भी शिव का अनहद नाद सुनाई देता है जन्माष्टमी की पावन रात्रि में जब गंगा की लहरों के पास त्रिपुरारी कुंजबिहारी बनकर झूले पर विराजे तब काशी ने केवल एक उत्सव नहीं देखा काशी ने देखा हर और हरि का मिलन काशी ने देखा शिव में कृष्ण और काशी ने एक बार फिर कह दिया रूप अनेक हैं, लेकिन सत्य एक है जन्माष्टमी की यह अनूठी परंपरा काशी के उस शाश्वत दर्शन को जीवंत करती रही जिसमें शिव और विष्णु के बीच कोई भेद नहीं है। नाम अलग हो सकते हैं रूप अलग हो सकते हैं लीलाएं अलग हो सकती हैं लेकिन परम सत्ता एक ही है और इसी सत्य को काशी ने झूले पर विराजमान अपने बाबा के माध्यम से फिर देखा हर बने हरि... और हरि में स्वयं हर मुस्कुराते रहे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास में काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा का श्रीकृष्ण के हरि स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया मोरपंख मुकुट आकर्षक वस्त्रों और बांसुरी की छवि से सजे बाबा विश्वनाथ जब झूले पर विराजे तो श्रद्धालुओं की आंखें उस दिव्य स्वरूप पर ठहर गईं मानो कैलाश की विराटता वृंदावन की मधुरता में उतर आई हो त्रिशूलधारी महादेव आज मोरपंखधारी थे जगत के स्वामी त्रिपुरारी आज कुंजबिहारी बनकर झूला झूल रहे थे शिव की गंभीरता और कृष्ण की चंचलता एक ही स्वरूप में समाई हुई थी और तभी भक्ति की तरंगों पर एक स्वर उठा “गंगा की तीरे झूला झूलें त्रिपुरारी बनके आज वो कुंजबिहारी हाथ त्रिशूल डमरू चमके सोहे मुकुट मोरपंख धारी भजन के इन शब्दों ने उस अलौकिक दृश्य को जैसे स्वर दे दिया महादेव के हाथों में त्रिशूल और डमरू की दिव्यता थी तो सिर पर मोरपंख की माधुरी कैलाश का वैराग्य और वृंदावन का प्रेम उस एक स्वरूप में एकाकार हो गया था बाल-गोपाल के प्रिय माखन-मिश्री का भोग झूले पर विराजमान बाबा विश्वनाथ को बाल-गोपाल के प्रिय माखन और मिश्री का पारंपरिक भोग अर्पित किया गया महंत आवास में भक्ति और वात्सल्य का ऐसा संगम हुआ कि पूरा वातावरण हरे कृष्णा और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। उस क्षण ऐसा लगा मानो दोनों जयकारे अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही परम सत्ता की दो मधुर अभिव्यक्तियां हों ब्रह्ममुहूर्त में विशेष पूजन महंत वाचस्पति तिवारी ने बताया कि जन्माष्टमी पर परंपरा के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त में बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा का विशेष पूजन किया गया पंडित सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन-अर्चन संपन्न कराया सायंकाल संजीव रत्न मिश्र ने बाबा विश्वनाथ का मनोहारी हरी स्वरूप में श्रृंगार किया इसके बाद पारंपरिक लोकगीतों और भजनों के माध्यम से बाबा के चरणों में भावपूर्ण शिवांजलि अर्पित की गई भजनों ने बांधा भक्तिरस का समां इस दौरान पागल बाबा और जयपुर से आये मोहन स्वामी प्रस्तुति चमके काशी में अजब नजारा हर बने हरि रूप हमारा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया वहीं झूला झूल रहे जग के स्वामी जय हो बाबा विश्वनाथ त्रिपुरारी की स्वर-लहरियों पर पूरा परिसर भक्तिरस में डूब गया
- आप सभी को #_जगत_न्यूज़_24 परिवार की तरफ से राष्ट्रीय पुस्तक पठन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं, पढ़ें सीखे और आगे बढ़ें।1
- हर्ष शिव के युवासेना में प्रवेश से विदर्भ में युवा शक्ति को नई ताकत हर्ष शिव के युवासेना में प्रवेश से युवा वर्ग में उत्साह! विदर्भ के युवा नेता हर्ष शिव ने अपने सहयोगियों और समर्थकों के साथ शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट की युवासेना में प्रवेश किया है। यह प्रवेश युवासेना के कार्याध्यक्ष पूर्वेश सरनाईक की मौजूदगी में हुआ। हर्ष शिव के साथ बड़ी संख्या में युवाओं के युवासेना में शामिल होने से विदर्भ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उनके प्रवेश को युवाओं को संगठन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हर्ष शिव ने युवाओं के मुद्दों और संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम करने का संकल्प लिया है। अब सवाल है—युवा शक्ति विदर्भ की राजनीति में क्या नया बदलाव लाएगी?1
- WATCH दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "... हमारे अरुण जेटली जी भी यही से पढ़े थे। मैं कह सकता हूं कि शायद हमारी कोई मुलाकात ऐसी नहीं होती थी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "... हमारे अरुण जेटली जी भी यही से पढ़े थे। मैं कह सकता हूं कि शायद हमारी कोई मुलाकात ऐसी नहीं होती थी जब वे SRCC की कोई घटना न सुनाते हों... यहां से कई कलाकार, नेता और वकील निकले हैं। SRCC के लोगों ने हर क्षेत्र में धूम मचाई1
- जनता दर्शन में विधायक राजकुमार भाटिया ने सुनीं लोगों की समस्याएं, अधिकारियों को दिए त्वरित समाधान के निर्देश आदर्श नगर विधानसभा के विधायक राजकुमार भाटिया ने सेवक कार्यालय में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने जनहित से जुड़े प्रत्येक मामले के शीघ्र और प्रभावी समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर विधायक ने कहा कि जनता की समस्याओं को सुनना, उन्हें समझना और उनके समाधान को सुनिश्चित करना ही उनकी जनसेवा का संकल्प है।1
- जन्माष्टमी पर्व पर सभी भक्तगणों और दर्शकों को बहुत बहुत शुभ: कामनाएं। BC1
- नरेला प्रमोद हत्याकांड के बाद बवाल, परिजनों ने किया चक्का जाम | DCP ने मौके पर पहुंचकर दिया आश्वासन दिल्ली के नरेला इलाके में गुरुवार को हुए प्रमोद हत्याकांड के बाद परिवार में आक्रोश देखने को मिला। शुक्रवार को मृतक के परिजनों ने बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ पुलिस के खिलाफ अपना विरोध जताया और मुख्य सड़क पर चक्का जाम कर दिया। परिजनों के प्रदर्शन के चलते मुख्य सड़क पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए वज्र वाहन और दंगा नियंत्रण वाहन भी मौके पर लगाए। हालात को देखते हुए जिले के डीसीपी शशांक जायसवाल समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। डीसीपी ने खुद प्रदर्शन कर रहे परिजनों से बातचीत की और उन्हें मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि प्रमोद हत्याकांड की जांच गंभीरता से की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के आश्वासन के बाद स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई।1
- गंगा की तीरे झूला झूलें त्रिपुरारी, बनके आज वो कुंजबिहारी... जन्माष्टमी पर काशी में अद्भुत लीला मोरपंख धारण कर जब हर बने हरी मिट गया कैलाश और क्षीरसागर का फासला डॉ उदय शंकर भगत वाराणसी। यहां महादेव जब मुस्कुराते हैं तो कृष्ण दिखाई देते हैं और कृष्ण की बांसुरी में भी शिव का अनहद नाद सुनाई देता है जन्माष्टमी की पावन रात्रि में जब गंगा की लहरों के पास त्रिपुरारी कुंजबिहारी बनकर झूले पर विराजे तब काशी ने केवल एक उत्सव नहीं देखा काशी ने देखा हर और हरि का मिलन काशी ने देखा शिव में कृष्ण और काशी ने एक बार फिर कह दिया रूप अनेक हैं, लेकिन सत्य एक है जन्माष्टमी की यह अनूठी परंपरा काशी के उस शाश्वत दर्शन को जीवंत करती रही जिसमें शिव और विष्णु के बीच कोई भेद नहीं है। नाम अलग हो सकते हैं रूप अलग हो सकते हैं लीलाएं अलग हो सकती हैं लेकिन परम सत्ता एक ही है और इसी सत्य को काशी ने झूले पर विराजमान अपने बाबा के माध्यम से फिर देखा हर बने हरि... और हरि में स्वयं हर मुस्कुराते रहे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास में काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा का श्रीकृष्ण के हरि स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया मोरपंख मुकुट आकर्षक वस्त्रों और बांसुरी की छवि से सजे बाबा विश्वनाथ जब झूले पर विराजे तो श्रद्धालुओं की आंखें उस दिव्य स्वरूप पर ठहर गईं मानो कैलाश की विराटता वृंदावन की मधुरता में उतर आई हो त्रिशूलधारी महादेव आज मोरपंखधारी थे जगत के स्वामी त्रिपुरारी आज कुंजबिहारी बनकर झूला झूल रहे थे शिव की गंभीरता और कृष्ण की चंचलता एक ही स्वरूप में समाई हुई थी और तभी भक्ति की तरंगों पर एक स्वर उठा “गंगा की तीरे झूला झूलें त्रिपुरारी बनके आज वो कुंजबिहारी हाथ त्रिशूल डमरू चमके सोहे मुकुट मोरपंख धारी भजन के इन शब्दों ने उस अलौकिक दृश्य को जैसे स्वर दे दिया महादेव के हाथों में त्रिशूल और डमरू की दिव्यता थी तो सिर पर मोरपंख की माधुरी कैलाश का वैराग्य और वृंदावन का प्रेम उस एक स्वरूप में एकाकार हो गया था बाल-गोपाल के प्रिय माखन-मिश्री का भोग झूले पर विराजमान बाबा विश्वनाथ को बाल-गोपाल के प्रिय माखन और मिश्री का पारंपरिक भोग अर्पित किया गया महंत आवास में भक्ति और वात्सल्य का ऐसा संगम हुआ कि पूरा वातावरण हरे कृष्णा और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। उस क्षण ऐसा लगा मानो दोनों जयकारे अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही परम सत्ता की दो मधुर अभिव्यक्तियां हों ब्रह्ममुहूर्त में विशेष पूजन महंत वाचस्पति तिवारी ने बताया कि जन्माष्टमी पर परंपरा के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त में बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा का विशेष पूजन किया गया पंडित सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन-अर्चन संपन्न कराया सायंकाल संजीव रत्न मिश्र ने बाबा विश्वनाथ का मनोहारी हरी स्वरूप में श्रृंगार किया इसके बाद पारंपरिक लोकगीतों और भजनों के माध्यम से बाबा के चरणों में भावपूर्ण शिवांजलि अर्पित की गई भजनों ने बांधा भक्तिरस का समां इस दौरान पागल बाबा और जयपुर से आये मोहन स्वामी प्रस्तुति चमके काशी में अजब नजारा हर बने हरि रूप हमारा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया वहीं झूला झूल रहे जग के स्वामी जय हो बाबा विश्वनाथ त्रिपुरारी की स्वर-लहरियों पर पूरा परिसर भक्तिरस में डूब गया1
- विधायक जी! निगम पार्षद जी! आखिर कब तक मां अपने बच्चे को हाथ पकड़कर सीवर के पानी के बीच से स्कूल भेजेगी? त्रिलोकपुरी 21 ब्लॉक में सड़क नहीं, मजबूरी बह रही है ईंटों पर संभलकर चल रहे बच्चे, गंदे पानी से गुजर रहे लोग और जिम्मेदारों से पूछ रही जनता: हादसा होने का इंतजार है क्या? विधायक हों, निगम पार्षद हों या फिर सीवर और जल निकासी की जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग त्रिलोकपुरी के 21 ब्लॉक की यह तस्वीर सबके सामने एक बड़ा सवाल बनकर खड़ी है। यहां सड़क पर सिर्फ पानी नहीं भरा दिखाई दे रहा, बल्कि स्थानीय लोगों के मुताबिक लंबे समय से सीवर का गंदा पानी रास्ते में फैल रहा है। जिस सड़क से रोज छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाते हैं, महिलाएं मंदिर जाती हैं और सैकड़ों लोग बाजार व अपने काम पर निकलते हैं, आज उसी रास्ते को पार करना किसी परीक्षा से कम नहीं रह गया है। सबसे दर्दनाक दृश्य उस मां का है, जो अपनी छोटी बच्ची का हाथ पकड़कर उसे एक-एक ईंट पर संभालकर आगे बढ़ा रही है। नीचे गंदा पानी, ऊपर गिरने का डर और सामने स्कूल पहुंचने की मजबूरी। सोचिए… अगर उस मासूम का पैर फिसल जाए तो जवाब कौन देगा? विधायक? निगम पार्षद? संबंधित विभाग? या फिर हमेशा की तरह हादसे के बाद जांच और कार्रवाई के बयान जारी होंगे? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या केवल बारिश के दौरान पैदा हुई परेशानी नहीं है। उनका आरोप है कि सीवर का पानी बैक होकर सड़क पर फैल रहा है और लंबे समय से हालात जस के तस बने हुए हैं। मजबूरी में लोगों ने सड़क पर ईंटें रख दी हैं, ताकि किसी तरह बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं रास्ता पार कर सकें। सेंटर पार्क के सामने वाले मेन रोड की हालत भी लोगों की परेशानी को और बढ़ा रही है। यहां सवाल केवल टूटी सड़क या जलभराव का नहीं है। सवाल उस बच्चे का है जिसे स्कूल पहुंचने से पहले अपनी जान संभालनी पड़ रही है। सवाल उस मां का है, जिसे हर कदम पर डर है कि उसकी बच्ची फिसल न जाए। सवाल उन श्रद्धालुओं का है, जिन्हें मंदिर जाने के लिए भी गंदे पानी से गुजरना पड़ रहा है। त्रिलोकपुरी की जनता अब जवाब चाहती है आखिर जिम्मेदार कौन है और कार्रवाई कब होगी? क्योंकि कागजों में विकास के दावे चाहे जितने बड़े हों, लेकिन अगर एक मां को अपने बच्चे को ईंटों के सहारे सीवर के पानी के बीच से स्कूल भेजना पड़े, तो यह तस्वीर सिर्फ एक सड़क की बदहाली नहीं… पूरे सिस्टम से जवाब मांगती हुई एक मजबूरी है।1