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आठ बार विधानसभा चुनाव जीतने का दावा करने वाले एक नेता ने चुनावी राजनीति में गहरी जड़ें जमा चुकी जातीय समीकरणों पर बयान दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी हर जीत के पीछे विभिन्न जाति समूह अपना दावा प्रस्तुत करते रहे हैं। नेता के अनुसार, जब उन्होंने फतेहपुर और मखदुमपुर से चुनाव जीते, तो भूमिहार राजपूत समुदाय के लोगों ने उन्हें जिताने का दावा किया। बोधगया से जीत मिलने पर यादव समुदाय ने यही बात कही। वहीं, इमामगंज से जीतने पर कोइरी-कुर्मी समुदाय के लोगों ने कहा कि वे उन्हें जिताते हैं, और 'हरिजन गया भाड़ में'। इस पूरे अनुभव को साझा करते हुए नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि इन लोगों के वोट का कोई महत्व नहीं समझा जाता।
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आठ बार विधानसभा चुनाव जीतने का दावा करने वाले एक नेता ने चुनावी राजनीति में गहरी जड़ें जमा चुकी जातीय समीकरणों पर बयान दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी हर जीत के पीछे विभिन्न जाति समूह अपना दावा प्रस्तुत करते रहे हैं। नेता के अनुसार, जब उन्होंने फतेहपुर और मखदुमपुर से चुनाव जीते, तो भूमिहार राजपूत समुदाय के लोगों ने उन्हें जिताने का दावा किया। बोधगया से जीत मिलने पर यादव समुदाय ने यही बात कही। वहीं, इमामगंज से जीतने पर कोइरी-कुर्मी समुदाय के लोगों ने कहा कि वे उन्हें जिताते हैं, और 'हरिजन गया भाड़ में'। इस पूरे अनुभव को साझा करते हुए नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि इन लोगों के वोट का कोई महत्व नहीं समझा जाता।
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