logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

बारां जिले के अटरू में एक बिजली का तार पोल से टूटकर नीचे लटक रहा है, जिससे गंभीर जनहानि का खतरा बना हुआ है। यह 11000 W का तार है और इसमें अभी भी बिजली प्रवाहित हो रही है, जिससे स्थिति अत्यंत खतरनाक बनी हुई है। इस संबंध में दोपहर 2:00 बजे शिकायत दर्ज करवा दी गई थी, लेकिन शाम 6:20 बजे तक भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। प्रशासन से जल्द से जल्द इस खतरनाक तार को ठीक करवाने का अनुरोध किया गया है।

19 hrs ago
user_Pavan kumar
Pavan kumar
अटरू, बारां, राजस्थान•
19 hrs ago

बारां जिले के अटरू में एक बिजली का तार पोल से टूटकर नीचे लटक रहा है, जिससे गंभीर जनहानि का खतरा बना हुआ है। यह 11000 W का तार है और इसमें अभी भी बिजली प्रवाहित हो रही है, जिससे स्थिति अत्यंत खतरनाक बनी हुई है। इस संबंध में दोपहर 2:00 बजे शिकायत दर्ज करवा दी गई थी, लेकिन शाम 6:20 बजे तक भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। प्रशासन से जल्द से जल्द इस खतरनाक तार को ठीक करवाने का अनुरोध किया गया है।

More news from Madhya Pradesh and nearby areas
  • सरकार बदलने के बाद से ही विभिन्न थानों में तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व पार्षदों और नेताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इसी कड़ी में अब पूर्व शिक्षा मंत्री, बेहला पश्चिम के पूर्व विधायक पार्थ चटर्जी और कोलकाता नगर निगम के १२५ नंबर वार्ड की पूर्व पार्षद घनश्री बाग का नाम भी जुड़ गया है। यह शिकायत ठाकुरपुकुर थाने में दर्ज कराई गई है। शिकायत करने वाली महिला १२५ नंबर वार्ड के बाछार पाड़ा इलाके की एक गृहिणी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वह और उनके परिवार के सदस्य लंबे समय से भाजपा समर्थक रहे हैं। उनके मुताबिक, २०२० में इलाके में हुई एक राजनीतिक हिंसा की घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस व्यक्ति को तृणमूल समर्थक बताकर उनके ७३ वर्षीय बीमार ससुर को उस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। महिला ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक अदालत में चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली और उनके बीमार ससुर को जेल हिरासत में रहना पड़ा। इसी दौरान, शिकायतकर्ता के अनुसार, १२५ नंबर वार्ड की तत्कालीन पार्षद घनश्री बाग ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के निर्देश पर मामला वापस लेने के बदले २५ लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने तीन किस्तों में कुल २५ लाख रुपये दिए। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ; इसके बाद उनसे कथित तौर पर १ करोड़ रुपये और मांगे गए। यह राशि न दे पाने पर उन पर विभिन्न तरीकों से दबाव डाला गया। शिकायतकर्ता के पति का दावा है कि उनका व्यवसाय भी बंद करवा दिया गया था। इसके अतिरिक्त, महिला ने आरोप लगाया कि पार्थ चटर्जी, घनश्री बाग और उनके दो सहयोगियों के उकसावे पर उनके परिवार पर लंबे समय तक अत्याचार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सड़क पर निकलने पर ताने मारे जाते थे, शीलभंग करने की कोशिश की जाती थी, और कई बार उनकी ओढ़नी खींचकर भी उन्हें परेशान किया गया।
    1
    सरकार बदलने के बाद से ही विभिन्न थानों में तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व पार्षदों और नेताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इसी कड़ी में अब पूर्व शिक्षा मंत्री, बेहला पश्चिम के पूर्व विधायक पार्थ चटर्जी और कोलकाता नगर निगम के १२५ नंबर वार्ड की पूर्व पार्षद घनश्री बाग का नाम भी जुड़ गया है। यह शिकायत ठाकुरपुकुर थाने में दर्ज कराई गई है।

शिकायत करने वाली महिला १२५ नंबर वार्ड के बाछार पाड़ा इलाके की एक गृहिणी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वह और उनके परिवार के सदस्य लंबे समय से भाजपा समर्थक रहे हैं। उनके मुताबिक, २०२० में इलाके में हुई एक राजनीतिक हिंसा की घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस व्यक्ति को तृणमूल समर्थक बताकर उनके ७३ वर्षीय बीमार ससुर को उस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। महिला ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक अदालत में चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली और उनके बीमार ससुर को जेल हिरासत में रहना पड़ा।

इसी दौरान, शिकायतकर्ता के अनुसार, १२५ नंबर वार्ड की तत्कालीन पार्षद घनश्री बाग ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के निर्देश पर मामला वापस लेने के बदले २५ लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने तीन किस्तों में कुल २५ लाख रुपये दिए। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ; इसके बाद उनसे कथित तौर पर १ करोड़ रुपये और मांगे गए। यह राशि न दे पाने पर उन पर विभिन्न तरीकों से दबाव डाला गया। शिकायतकर्ता के पति का दावा है कि उनका व्यवसाय भी बंद करवा दिया गया था। इसके अतिरिक्त, महिला ने आरोप लगाया कि पार्थ चटर्जी, घनश्री बाग और उनके दो सहयोगियों के उकसावे पर उनके परिवार पर लंबे समय तक अत्याचार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सड़क पर निकलने पर ताने मारे जाते थे, शीलभंग करने की कोशिश की जाती थी, और कई बार उनकी ओढ़नी खींचकर भी उन्हें परेशान किया गया।
    user_JONOMON KHOBOR
    JONOMON KHOBOR
    Guna, Madhya Pradesh•
    5 hrs ago
  • गुना जिले के कुंभराज नगर की भामावद रोड वर्षों से अपनी जर्जर हालत के कारण नगर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन गई है। यह सड़क लंबे समय से खराब पड़ी है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में इस सड़क की स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जहाँ कीचड़, गहरे गड्ढे और जलभराव आम बात है। इससे आम नागरिकों, स्थानीय किसानों, व्यापारियों और प्रतिदिन यात्रा करने वाले राहगीरों को रोज़ाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर चांचौड़ा विधानसभा क्षेत्र के कुछ अधिकारियों द्वारा निजी सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण के कार्य को देखते हुए, उनसे विनम्र निवेदन किया गया है कि वे कुंभराज नगर की इस गंभीर समस्या पर भी ध्यान दें। वहीं, इस सड़क के निर्माण को लेकर जब भी नगर परिषद अध्यक्ष से बात की जाती है, तो या तो बजट की कमी का बहाना बनाया जाता है, या फिर यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है कि यह सड़क नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आती है।
    1
    गुना जिले के कुंभराज नगर की भामावद रोड वर्षों से अपनी जर्जर हालत के कारण नगर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन गई है। यह सड़क लंबे समय से खराब पड़ी है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बरसात के मौसम में इस सड़क की स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जहाँ कीचड़, गहरे गड्ढे और जलभराव आम बात है। इससे आम नागरिकों, स्थानीय किसानों, व्यापारियों और प्रतिदिन यात्रा करने वाले राहगीरों को रोज़ाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

हाल ही में सोशल मीडिया पर चांचौड़ा विधानसभा क्षेत्र के कुछ अधिकारियों द्वारा निजी सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण के कार्य को देखते हुए, उनसे विनम्र निवेदन किया गया है कि वे कुंभराज नगर की इस गंभीर समस्या पर भी ध्यान दें। वहीं, इस सड़क के निर्माण को लेकर जब भी नगर परिषद अध्यक्ष से बात की जाती है, तो या तो बजट की कमी का बहाना बनाया जाता है, या फिर यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है कि यह सड़क नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आती है।
    user_रणधीर चदेल
    रणधीर चदेल
    पत्रकार (फोटोग्राफर) Guna, Madhya Pradesh•
    23 hrs ago
  • श्योपुर में कौशलपुर निवासी ओमप्रकाश आकोदिया की मौत के मामले में उनके परिजनों और समर्थकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया है। परिजनों का आरोप है कि ओमप्रकाश आकोदिया की मृत्यु श्री श्याम मेडिकल पर गलत इंजेक्शन और बोतल लगाए जाने के कारण हुई है। इस घटना के बाद, मृतक के परिजन और समर्थकों ने मेडिकल संचालक पुरुषोत्तम शर्मा के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की पुरजोर मांग की है। अपनी इस मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग कोतवाली थाना पहुंचे और अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई करने की अपील की है।
    4
    श्योपुर में कौशलपुर निवासी ओमप्रकाश आकोदिया की मौत के मामले में उनके परिजनों और समर्थकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया है। परिजनों का आरोप है कि ओमप्रकाश आकोदिया की मृत्यु श्री श्याम मेडिकल पर गलत इंजेक्शन और बोतल लगाए जाने के कारण हुई है।

इस घटना के बाद, मृतक के परिजन और समर्थकों ने मेडिकल संचालक पुरुषोत्तम शर्मा के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की पुरजोर मांग की है। अपनी इस मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग कोतवाली थाना पहुंचे और अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई करने की अपील की है।
    user_Meera gadriya
    Meera gadriya
    श्योपुर, श्योपुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • गुरुवार को ग्राम पंचायत कस्बाथाना में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) का शुभारंभ किया गया, जिसे वीबीजी राम जी योजना के नाम से भी जाना जाता है। इस महत्वपूर्ण पहल के तहत ग्रामीण श्रमिकों को 125 दिनों का सुनिश्चित रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। ग्राम विकास अधिकारी रेखम जाटव ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रदान कर ग्रामीण श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य कराए जाएंगे, जिनमें पात्र श्रमिकों को निर्धारित नियमानुसार रोजगार मिलेगा। योजना के शुभारंभ अवसर पर जनप्रतिनिधि, पंचायत कार्मिक और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस दौरान श्रमिकों ने इस नई योजना का लाभ मिलने पर अपनी खुशी व्यक्त की।
    1
    गुरुवार को ग्राम पंचायत कस्बाथाना में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) का शुभारंभ किया गया, जिसे वीबीजी राम जी योजना के नाम से भी जाना जाता है। इस महत्वपूर्ण पहल के तहत ग्रामीण श्रमिकों को 125 दिनों का सुनिश्चित रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

ग्राम विकास अधिकारी रेखम जाटव ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रदान कर ग्रामीण श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य कराए जाएंगे, जिनमें पात्र श्रमिकों को निर्धारित नियमानुसार रोजगार मिलेगा।

योजना के शुभारंभ अवसर पर जनप्रतिनिधि, पंचायत कार्मिक और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस दौरान श्रमिकों ने इस नई योजना का लाभ मिलने पर अपनी खुशी व्यक्त की।
    user_हर्षित भार्गव
    हर्षित भार्गव
    पत्रकार शाहबाद, बारां, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • श्योपुर जिले में 'माँ संतोषी मोबाईल वाले' की ओर से गगन बिन्दल जी ने एक बयान जारी किया है। इस बयान में उन्होंने एक महिला द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर अपनी बात रखी। गगन बिन्दल जी का कहना है कि जिस मोबाइल के संबंध में महिला आरोप लगा रही है, उसे वह 14 महीने बाद पंकज की दुकान से रिपेयर कराकर लाई है।
    1
    श्योपुर जिले में 'माँ संतोषी मोबाईल वाले' की ओर से गगन बिन्दल जी ने एक बयान जारी किया है। इस बयान में उन्होंने एक महिला द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर अपनी बात रखी। गगन बिन्दल जी का कहना है कि जिस मोबाइल के संबंध में महिला आरोप लगा रही है, उसे वह 14 महीने बाद पंकज की दुकान से रिपेयर कराकर लाई है।
    user_Meera gadriya
    Meera gadriya
    श्योपुर, श्योपुर, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के गुना जिले की राघौगढ़ तहसील में नाथू का पूरा से भूमलाखेड़ी तक बनी सड़क पर विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगा है। ग्राम पंचायत भदोड़ी के अंतर्गत आने वाली यह सड़क, जिसका हाल ही में डामरीकरण किया गया था, कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी है, जिससे इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आई तस्वीरों से पता चलता है कि सड़क जगह-जगह से खराब हो गई है, जो निर्माण की घटिया गुणवत्ता की पोल खोलती है। इस स्थिति ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या जनता के करदाताओं का पैसा केवल कागजों पर सड़कें बनाने में खर्च किया जा रहा है? पोस्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि यह गंभीर लापरवाही और गुणवत्ता से समझौते का परिणाम है, खासकर जब आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर अक्सर सवाल उठते हैं। आज़ादी के 78 से अधिक वर्षों बाद भी, जब सरकारें 'आदिवासी विकास', 'अमृतकाल' और 'अंतिम व्यक्ति तक विकास' की बात करती हैं, तब भी आदिवासी गांवों में बनी सड़कें कुछ ही दिनों में अपनी बदहाली की कहानी कहने लगती हैं। इसी कड़ी में, जयस संभाग सचिव ग्वालियर संभाग, हेमराज सहरिया ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों से इस सड़क निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, डामरीकरण की मोटाई और पूरी भुगतान प्रक्रिया की जांच की बात कही है, साथ ही यह भी कहा है कि यदि किसी ठेकेदार, इंजीनियर या अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है तो उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। यह जोर देकर कहा गया है कि आदिवासी क्षेत्र कोई प्रयोगशाला नहीं हैं जहाँ घटिया निर्माण कर जनता के अधिकारों से खिलवाड़ किया जाए। इस पूरे मामले को लेकर 'विकास के नाम पर भ्रष्टाचार बंद होना चाहिए' और दोषियों को जवाब देना होगा। पोस्ट में इस स्थिति को लेकर एक मार्मिक टिप्पणी भी की गई है: "सड़क नई बनी है, लेकिन सच्चाई पुरानी है — आदिवासी क्षेत्रों में आज भी विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की कहानी दोहराई जा रही है।"
    4
    मध्य प्रदेश के गुना जिले की राघौगढ़ तहसील में नाथू का पूरा से भूमलाखेड़ी तक बनी सड़क पर विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगा है। ग्राम पंचायत भदोड़ी के अंतर्गत आने वाली यह सड़क, जिसका हाल ही में डामरीकरण किया गया था, कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी है, जिससे इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

सामने आई तस्वीरों से पता चलता है कि सड़क जगह-जगह से खराब हो गई है, जो निर्माण की घटिया गुणवत्ता की पोल खोलती है। इस स्थिति ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या जनता के करदाताओं का पैसा केवल कागजों पर सड़कें बनाने में खर्च किया जा रहा है? पोस्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि यह गंभीर लापरवाही और गुणवत्ता से समझौते का परिणाम है, खासकर जब आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर अक्सर सवाल उठते हैं।

आज़ादी के 78 से अधिक वर्षों बाद भी, जब सरकारें 'आदिवासी विकास', 'अमृतकाल' और 'अंतिम व्यक्ति तक विकास' की बात करती हैं, तब भी आदिवासी गांवों में बनी सड़कें कुछ ही दिनों में अपनी बदहाली की कहानी कहने लगती हैं। इसी कड़ी में, जयस संभाग सचिव ग्वालियर संभाग, हेमराज सहरिया ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों से इस सड़क निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, डामरीकरण की मोटाई और पूरी भुगतान प्रक्रिया की जांच की बात कही है, साथ ही यह भी कहा है कि यदि किसी ठेकेदार, इंजीनियर या अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है तो उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

यह जोर देकर कहा गया है कि आदिवासी क्षेत्र कोई प्रयोगशाला नहीं हैं जहाँ घटिया निर्माण कर जनता के अधिकारों से खिलवाड़ किया जाए। इस पूरे मामले को लेकर 'विकास के नाम पर भ्रष्टाचार बंद होना चाहिए' और दोषियों को जवाब देना होगा। पोस्ट में इस स्थिति को लेकर एक मार्मिक टिप्पणी भी की गई है: "सड़क नई बनी है, लेकिन सच्चाई पुरानी है — आदिवासी क्षेत्रों में आज भी विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की कहानी दोहराई जा रही है।"
    user_Hemraj Sahariya
    Hemraj Sahariya
    Taxi Driver राघोगढ़, गुना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.