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सरकार बदलने के बाद से ही विभिन्न थानों में तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व पार्षदों और नेताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इसी कड़ी में अब पूर्व शिक्षा मंत्री, बेहला पश्चिम के पूर्व विधायक पार्थ चटर्जी और कोलकाता नगर निगम के १२५ नंबर वार्ड की पूर्व पार्षद घनश्री बाग का नाम भी जुड़ गया है। यह शिकायत ठाकुरपुकुर थाने में दर्ज कराई गई है। शिकायत करने वाली महिला १२५ नंबर वार्ड के बाछार पाड़ा इलाके की एक गृहिणी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वह और उनके परिवार के सदस्य लंबे समय से भाजपा समर्थक रहे हैं। उनके मुताबिक, २०२० में इलाके में हुई एक राजनीतिक हिंसा की घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस व्यक्ति को तृणमूल समर्थक बताकर उनके ७३ वर्षीय बीमार ससुर को उस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। महिला ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक अदालत में चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली और उनके बीमार ससुर को जेल हिरासत में रहना पड़ा। इसी दौरान, शिकायतकर्ता के अनुसार, १२५ नंबर वार्ड की तत्कालीन पार्षद घनश्री बाग ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के निर्देश पर मामला वापस लेने के बदले २५ लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने तीन किस्तों में कुल २५ लाख रुपये दिए। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ; इसके बाद उनसे कथित तौर पर १ करोड़ रुपये और मांगे गए। यह राशि न दे पाने पर उन पर विभिन्न तरीकों से दबाव डाला गया। शिकायतकर्ता के पति का दावा है कि उनका व्यवसाय भी बंद करवा दिया गया था। इसके अतिरिक्त, महिला ने आरोप लगाया कि पार्थ चटर्जी, घनश्री बाग और उनके दो सहयोगियों के उकसावे पर उनके परिवार पर लंबे समय तक अत्याचार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सड़क पर निकलने पर ताने मारे जाते थे, शीलभंग करने की कोशिश की जाती थी, और कई बार उनकी ओढ़नी खींचकर भी उन्हें परेशान किया गया।

5 hrs ago
user_JONOMON KHOBOR
JONOMON KHOBOR
Guna, Madhya Pradesh•
5 hrs ago

सरकार बदलने के बाद से ही विभिन्न थानों में तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व पार्षदों और नेताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इसी कड़ी में अब पूर्व शिक्षा मंत्री, बेहला पश्चिम के पूर्व विधायक पार्थ चटर्जी और कोलकाता नगर निगम के १२५ नंबर वार्ड की पूर्व पार्षद घनश्री बाग का नाम भी जुड़ गया है। यह शिकायत ठाकुरपुकुर थाने में दर्ज कराई गई है। शिकायत करने वाली महिला १२५ नंबर वार्ड के बाछार पाड़ा इलाके की एक गृहिणी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वह और उनके परिवार के सदस्य लंबे समय से भाजपा समर्थक रहे हैं। उनके मुताबिक, २०२० में इलाके में हुई एक राजनीतिक हिंसा की घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस व्यक्ति को तृणमूल समर्थक बताकर उनके ७३ वर्षीय बीमार ससुर को उस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। महिला ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक अदालत में चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली और उनके बीमार ससुर को जेल हिरासत में रहना पड़ा। इसी दौरान, शिकायतकर्ता के अनुसार, १२५ नंबर वार्ड की तत्कालीन पार्षद घनश्री बाग ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के निर्देश पर मामला वापस लेने के बदले २५ लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने तीन किस्तों में कुल २५ लाख रुपये दिए। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ; इसके बाद उनसे कथित तौर पर १ करोड़ रुपये और मांगे गए। यह राशि न दे पाने पर उन पर विभिन्न तरीकों से दबाव डाला गया। शिकायतकर्ता के पति का दावा है कि उनका व्यवसाय भी बंद करवा दिया गया था। इसके अतिरिक्त, महिला ने आरोप लगाया कि पार्थ चटर्जी, घनश्री बाग और उनके दो सहयोगियों के उकसावे पर उनके परिवार पर लंबे समय तक अत्याचार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सड़क पर निकलने पर ताने मारे जाते थे, शीलभंग करने की कोशिश की जाती थी, और कई बार उनकी ओढ़नी खींचकर भी उन्हें परेशान किया गया।

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  • सरकार बदलने के बाद से ही विभिन्न थानों में तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व पार्षदों और नेताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इसी कड़ी में अब पूर्व शिक्षा मंत्री, बेहला पश्चिम के पूर्व विधायक पार्थ चटर्जी और कोलकाता नगर निगम के १२५ नंबर वार्ड की पूर्व पार्षद घनश्री बाग का नाम भी जुड़ गया है। यह शिकायत ठाकुरपुकुर थाने में दर्ज कराई गई है। शिकायत करने वाली महिला १२५ नंबर वार्ड के बाछार पाड़ा इलाके की एक गृहिणी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वह और उनके परिवार के सदस्य लंबे समय से भाजपा समर्थक रहे हैं। उनके मुताबिक, २०२० में इलाके में हुई एक राजनीतिक हिंसा की घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस व्यक्ति को तृणमूल समर्थक बताकर उनके ७३ वर्षीय बीमार ससुर को उस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। महिला ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक अदालत में चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली और उनके बीमार ससुर को जेल हिरासत में रहना पड़ा। इसी दौरान, शिकायतकर्ता के अनुसार, १२५ नंबर वार्ड की तत्कालीन पार्षद घनश्री बाग ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के निर्देश पर मामला वापस लेने के बदले २५ लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने तीन किस्तों में कुल २५ लाख रुपये दिए। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ; इसके बाद उनसे कथित तौर पर १ करोड़ रुपये और मांगे गए। यह राशि न दे पाने पर उन पर विभिन्न तरीकों से दबाव डाला गया। शिकायतकर्ता के पति का दावा है कि उनका व्यवसाय भी बंद करवा दिया गया था। इसके अतिरिक्त, महिला ने आरोप लगाया कि पार्थ चटर्जी, घनश्री बाग और उनके दो सहयोगियों के उकसावे पर उनके परिवार पर लंबे समय तक अत्याचार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सड़क पर निकलने पर ताने मारे जाते थे, शीलभंग करने की कोशिश की जाती थी, और कई बार उनकी ओढ़नी खींचकर भी उन्हें परेशान किया गया।
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    सरकार बदलने के बाद से ही विभिन्न थानों में तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व पार्षदों और नेताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इसी कड़ी में अब पूर्व शिक्षा मंत्री, बेहला पश्चिम के पूर्व विधायक पार्थ चटर्जी और कोलकाता नगर निगम के १२५ नंबर वार्ड की पूर्व पार्षद घनश्री बाग का नाम भी जुड़ गया है। यह शिकायत ठाकुरपुकुर थाने में दर्ज कराई गई है।

शिकायत करने वाली महिला १२५ नंबर वार्ड के बाछार पाड़ा इलाके की एक गृहिणी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वह और उनके परिवार के सदस्य लंबे समय से भाजपा समर्थक रहे हैं। उनके मुताबिक, २०२० में इलाके में हुई एक राजनीतिक हिंसा की घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस व्यक्ति को तृणमूल समर्थक बताकर उनके ७३ वर्षीय बीमार ससुर को उस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। महिला ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक अदालत में चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली और उनके बीमार ससुर को जेल हिरासत में रहना पड़ा।

इसी दौरान, शिकायतकर्ता के अनुसार, १२५ नंबर वार्ड की तत्कालीन पार्षद घनश्री बाग ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के निर्देश पर मामला वापस लेने के बदले २५ लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने तीन किस्तों में कुल २५ लाख रुपये दिए। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ; इसके बाद उनसे कथित तौर पर १ करोड़ रुपये और मांगे गए। यह राशि न दे पाने पर उन पर विभिन्न तरीकों से दबाव डाला गया। शिकायतकर्ता के पति का दावा है कि उनका व्यवसाय भी बंद करवा दिया गया था। इसके अतिरिक्त, महिला ने आरोप लगाया कि पार्थ चटर्जी, घनश्री बाग और उनके दो सहयोगियों के उकसावे पर उनके परिवार पर लंबे समय तक अत्याचार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सड़क पर निकलने पर ताने मारे जाते थे, शीलभंग करने की कोशिश की जाती थी, और कई बार उनकी ओढ़नी खींचकर भी उन्हें परेशान किया गया।
    user_JONOMON KHOBOR
    JONOMON KHOBOR
    Guna, Madhya Pradesh•
    5 hrs ago
  • गुना जिले के कुंभराज नगर की भामावद रोड वर्षों से अपनी जर्जर हालत के कारण नगर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन गई है। यह सड़क लंबे समय से खराब पड़ी है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में इस सड़क की स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जहाँ कीचड़, गहरे गड्ढे और जलभराव आम बात है। इससे आम नागरिकों, स्थानीय किसानों, व्यापारियों और प्रतिदिन यात्रा करने वाले राहगीरों को रोज़ाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर चांचौड़ा विधानसभा क्षेत्र के कुछ अधिकारियों द्वारा निजी सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण के कार्य को देखते हुए, उनसे विनम्र निवेदन किया गया है कि वे कुंभराज नगर की इस गंभीर समस्या पर भी ध्यान दें। वहीं, इस सड़क के निर्माण को लेकर जब भी नगर परिषद अध्यक्ष से बात की जाती है, तो या तो बजट की कमी का बहाना बनाया जाता है, या फिर यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है कि यह सड़क नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आती है।
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    गुना जिले के कुंभराज नगर की भामावद रोड वर्षों से अपनी जर्जर हालत के कारण नगर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन गई है। यह सड़क लंबे समय से खराब पड़ी है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बरसात के मौसम में इस सड़क की स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जहाँ कीचड़, गहरे गड्ढे और जलभराव आम बात है। इससे आम नागरिकों, स्थानीय किसानों, व्यापारियों और प्रतिदिन यात्रा करने वाले राहगीरों को रोज़ाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

हाल ही में सोशल मीडिया पर चांचौड़ा विधानसभा क्षेत्र के कुछ अधिकारियों द्वारा निजी सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण के कार्य को देखते हुए, उनसे विनम्र निवेदन किया गया है कि वे कुंभराज नगर की इस गंभीर समस्या पर भी ध्यान दें। वहीं, इस सड़क के निर्माण को लेकर जब भी नगर परिषद अध्यक्ष से बात की जाती है, तो या तो बजट की कमी का बहाना बनाया जाता है, या फिर यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है कि यह सड़क नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आती है।
    user_रणधीर चदेल
    रणधीर चदेल
    पत्रकार (फोटोग्राफर) Guna, Madhya Pradesh•
    23 hrs ago
  • आज की नवीनतम और ट्रेंडिंग खबरों के बीच, मध्य प्रदेश से एक महत्वपूर्ण खबर की ओर ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। सोशल मीडिया पोस्ट में प्रदेश की आज की सबसे बड़ी खबर का उल्लेख करते हुए सीधे सवाल किया गया है कि आखिर यह क्या खबर है, जिससे लोगों में उत्सुकता बढ़ रही है।
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    आज की नवीनतम और ट्रेंडिंग खबरों के बीच, मध्य प्रदेश से एक महत्वपूर्ण खबर की ओर ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। सोशल मीडिया पोस्ट में प्रदेश की आज की सबसे बड़ी खबर का उल्लेख करते हुए सीधे सवाल किया गया है कि आखिर यह क्या खबर है, जिससे लोगों में उत्सुकता बढ़ रही है।
    user_Ravindra
    Ravindra
    Singer अशोकनगर, अशोकनगर, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • कुंभाखेड़ी और अजनावर गांवों में ग्रामीण सेवा शिविर 2026 का आयोजन किया गया। इन शिविरों में ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई।
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    कुंभाखेड़ी और अजनावर गांवों में ग्रामीण सेवा शिविर 2026 का आयोजन किया गया। इन शिविरों में ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई।
    user_छीपाबड़ौद न्यूज 🗞️
    छीपाबड़ौद न्यूज 🗞️
    Computer service छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    20 hrs ago
  • राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से बारां जिले के छीपाबड़ौद क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुंभाखेड़ी एवं अजनावर में 'ग्रामीण सेवा शिविर 2026' का आयोजन किया गया। इन शिविरों में ग्रामीण बड़ी संख्या में उमड़े, जहाँ अधिकारियों ने आमजन को विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और मौके पर ही प्राप्त परिवेदनाओं का निस्तारण किया, जिससे लाभार्थियों को तुरंत योजनाओं का लाभ मिला। इन शिविरों में कुल 22 विभागों ने अपनी सेवाएँ दीं, जिनमें राजस्व विभाग के अतिरिक्त खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, पशुपालन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, श्रम, कृषि, आयुर्वेद, शिक्षा, ऊर्जा, सार्वजनिक निर्माण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, सहकारिता, सैनिक कल्याण, वन, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और परिवहन विभाग शामिल थे। अजनावर शिविर में तहसीलदार सुरेन्द्र सिंह गुर्जर मौजूद रहे, जबकि कुंभाखेड़ी में नायब तहसीलदार राधेश्याम लववंशी, भू-अभिलेख निरीक्षक देवेन्द्र सिंह हाड़ा, अतिरिक्त ऑफिस कानूनगो जगदीश नामदेव, पटवारी रिवर सिंह, शुभम क्षैत्रिय और ग्राम विकास अधिकारी केसरीलाल सहित कई अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। शिविरों की सफलता की बानगी के तौर पर, ग्राम पंचायत अजनावर के शिविर में काकड़दा निवासी ओमप्रकाश मीना पुत्र माणकचंद ने मकान के पट्टे के लिए आवेदन किया। उन्हें मौके पर ही पट्टा जारी कर दिया गया, जिससे उन्हें अपने घर का मालिकाना हक प्राप्त हुआ। ओमप्रकाश ने इस 'स्वामित्व योजना' के लाभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें बैंक से ऋण लेने में आसानी होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा चलाए जा रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर 2026' की विशेष सराहना की। इसी तरह, ग्राम पंचायत कुंभाखेड़ी में 01.07.2026 को आयोजित शिविर में कचनारिया खुई निवासी रत्तीराम पुत्र मानसिंह भील की 20-25 साल पुरानी समस्या का समाधान हुआ। उन्होंने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में उनका नाम 'रत्तीराम' के बजाय 'रत्या' दर्ज था, जिसके कारण उन्हें केसीसी, फार्मर आईडी और टोकन संबंधी कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। शिविर में प्रार्थना पत्र देने पर शिविर प्रभारी ने मौके पर मौजूद राजस्व टीम को तुरंत निर्देश दिए। दस्तावेजों की जाँच के उपरांत, उनके खाते में नाम संशोधन का कार्य तत्काल कर दिया गया, जिसके लिए लाभार्थी रत्तीराम ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार जताया।
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    राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से बारां जिले के छीपाबड़ौद क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुंभाखेड़ी एवं अजनावर में 'ग्रामीण सेवा शिविर 2026' का आयोजन किया गया। इन शिविरों में ग्रामीण बड़ी संख्या में उमड़े, जहाँ अधिकारियों ने आमजन को विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और मौके पर ही प्राप्त परिवेदनाओं का निस्तारण किया, जिससे लाभार्थियों को तुरंत योजनाओं का लाभ मिला।

इन शिविरों में कुल 22 विभागों ने अपनी सेवाएँ दीं, जिनमें राजस्व विभाग के अतिरिक्त खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, पशुपालन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, श्रम, कृषि, आयुर्वेद, शिक्षा, ऊर्जा, सार्वजनिक निर्माण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, सहकारिता, सैनिक कल्याण, वन, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और परिवहन विभाग शामिल थे। अजनावर शिविर में तहसीलदार सुरेन्द्र सिंह गुर्जर मौजूद रहे, जबकि कुंभाखेड़ी में नायब तहसीलदार राधेश्याम लववंशी, भू-अभिलेख निरीक्षक देवेन्द्र सिंह हाड़ा, अतिरिक्त ऑफिस कानूनगो जगदीश नामदेव, पटवारी रिवर सिंह, शुभम क्षैत्रिय और ग्राम विकास अधिकारी केसरीलाल सहित कई अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

शिविरों की सफलता की बानगी के तौर पर, ग्राम पंचायत अजनावर के शिविर में काकड़दा निवासी ओमप्रकाश मीना पुत्र माणकचंद ने मकान के पट्टे के लिए आवेदन किया। उन्हें मौके पर ही पट्टा जारी कर दिया गया, जिससे उन्हें अपने घर का मालिकाना हक प्राप्त हुआ। ओमप्रकाश ने इस 'स्वामित्व योजना' के लाभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें बैंक से ऋण लेने में आसानी होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा चलाए जा रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर 2026' की विशेष सराहना की।

इसी तरह, ग्राम पंचायत कुंभाखेड़ी में 01.07.2026 को आयोजित शिविर में कचनारिया खुई निवासी रत्तीराम पुत्र मानसिंह भील की 20-25 साल पुरानी समस्या का समाधान हुआ। उन्होंने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में उनका नाम 'रत्तीराम' के बजाय 'रत्या' दर्ज था, जिसके कारण उन्हें केसीसी, फार्मर आईडी और टोकन संबंधी कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। शिविर में प्रार्थना पत्र देने पर शिविर प्रभारी ने मौके पर मौजूद राजस्व टीम को तुरंत निर्देश दिए। दस्तावेजों की जाँच के उपरांत, उनके खाते में नाम संशोधन का कार्य तत्काल कर दिया गया, जिसके लिए लाभार्थी रत्तीराम ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार जताया।
    user_User10561
    User10561
    छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    20 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के गुना जिले की राघौगढ़ तहसील में नाथू का पूरा से भूमलाखेड़ी तक बनी सड़क पर विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगा है। ग्राम पंचायत भदोड़ी के अंतर्गत आने वाली यह सड़क, जिसका हाल ही में डामरीकरण किया गया था, कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी है, जिससे इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आई तस्वीरों से पता चलता है कि सड़क जगह-जगह से खराब हो गई है, जो निर्माण की घटिया गुणवत्ता की पोल खोलती है। इस स्थिति ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या जनता के करदाताओं का पैसा केवल कागजों पर सड़कें बनाने में खर्च किया जा रहा है? पोस्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि यह गंभीर लापरवाही और गुणवत्ता से समझौते का परिणाम है, खासकर जब आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर अक्सर सवाल उठते हैं। आज़ादी के 78 से अधिक वर्षों बाद भी, जब सरकारें 'आदिवासी विकास', 'अमृतकाल' और 'अंतिम व्यक्ति तक विकास' की बात करती हैं, तब भी आदिवासी गांवों में बनी सड़कें कुछ ही दिनों में अपनी बदहाली की कहानी कहने लगती हैं। इसी कड़ी में, जयस संभाग सचिव ग्वालियर संभाग, हेमराज सहरिया ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों से इस सड़क निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, डामरीकरण की मोटाई और पूरी भुगतान प्रक्रिया की जांच की बात कही है, साथ ही यह भी कहा है कि यदि किसी ठेकेदार, इंजीनियर या अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है तो उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। यह जोर देकर कहा गया है कि आदिवासी क्षेत्र कोई प्रयोगशाला नहीं हैं जहाँ घटिया निर्माण कर जनता के अधिकारों से खिलवाड़ किया जाए। इस पूरे मामले को लेकर 'विकास के नाम पर भ्रष्टाचार बंद होना चाहिए' और दोषियों को जवाब देना होगा। पोस्ट में इस स्थिति को लेकर एक मार्मिक टिप्पणी भी की गई है: "सड़क नई बनी है, लेकिन सच्चाई पुरानी है — आदिवासी क्षेत्रों में आज भी विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की कहानी दोहराई जा रही है।"
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    मध्य प्रदेश के गुना जिले की राघौगढ़ तहसील में नाथू का पूरा से भूमलाखेड़ी तक बनी सड़क पर विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगा है। ग्राम पंचायत भदोड़ी के अंतर्गत आने वाली यह सड़क, जिसका हाल ही में डामरीकरण किया गया था, कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी है, जिससे इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

सामने आई तस्वीरों से पता चलता है कि सड़क जगह-जगह से खराब हो गई है, जो निर्माण की घटिया गुणवत्ता की पोल खोलती है। इस स्थिति ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या जनता के करदाताओं का पैसा केवल कागजों पर सड़कें बनाने में खर्च किया जा रहा है? पोस्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि यह गंभीर लापरवाही और गुणवत्ता से समझौते का परिणाम है, खासकर जब आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर अक्सर सवाल उठते हैं।

आज़ादी के 78 से अधिक वर्षों बाद भी, जब सरकारें 'आदिवासी विकास', 'अमृतकाल' और 'अंतिम व्यक्ति तक विकास' की बात करती हैं, तब भी आदिवासी गांवों में बनी सड़कें कुछ ही दिनों में अपनी बदहाली की कहानी कहने लगती हैं। इसी कड़ी में, जयस संभाग सचिव ग्वालियर संभाग, हेमराज सहरिया ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों से इस सड़क निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, डामरीकरण की मोटाई और पूरी भुगतान प्रक्रिया की जांच की बात कही है, साथ ही यह भी कहा है कि यदि किसी ठेकेदार, इंजीनियर या अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है तो उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

यह जोर देकर कहा गया है कि आदिवासी क्षेत्र कोई प्रयोगशाला नहीं हैं जहाँ घटिया निर्माण कर जनता के अधिकारों से खिलवाड़ किया जाए। इस पूरे मामले को लेकर 'विकास के नाम पर भ्रष्टाचार बंद होना चाहिए' और दोषियों को जवाब देना होगा। पोस्ट में इस स्थिति को लेकर एक मार्मिक टिप्पणी भी की गई है: "सड़क नई बनी है, लेकिन सच्चाई पुरानी है — आदिवासी क्षेत्रों में आज भी विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की कहानी दोहराई जा रही है।"
    user_Hemraj Sahariya
    Hemraj Sahariya
    Taxi Driver राघोगढ़, गुना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
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