तेलिखाखेडी में श्मशान घाट पर जाने का नहीं , रास्ता श्मशान घाट में भरा पानी, खुलें आसमान में दिवंगत आत्मा का हुआं अंतिम संस्कार मोड़क क्षेत्र के तेलियाखेडी गांव में श्मशान घाट तक रास्ता न होना एक गंभीर और संवेदनशील समस्या है, जिससे ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के समय ग्रामीणों को किचड़ पानी या खेतों से होकर गुजरना पड़ता है, आपको बता दें कि तेलियाखेडी गांव में आज रक्षाबंधन के दिन रामस्वरूप अहीर का निधन हो गया, जिसके बाद परिजन और गामीण रिश्तेदार सभी अंतिम संस्कार के लिए उन्हें श्मशान घाट लें जाने लगें लेकिन श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं होना और श्मशान घाट के भीतर पानी भरा हुआ, कड़ी मशक्कत के बाद परिजन गांव कि कच्ची किचड़ भरे पानी और खेतों के रास्तों से होकर श्मशान घाट पहुंचें , लेकिन श्मशान घाट में पानी भरा होने से खुले आसमान में अंतिम संस्कार किया गया,यह केवल आज कि समस्या नहीं बल्कि गांव कि बरसों पुरानी समस्या है और यह एक गांव का उदाहरण नहीं बल्कि ऐसे कहीं गांव आज भी जहां श्मशान घाट में जाने तक के रास्ते नहीं बनें हुए , ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी गांव के लोगों कों बारिश में होती है जब किसी कि मृत्यु हों जाएं तो श्मशान घाटों कि बदहाली सरकार पर सवाल खड़े कर रहीं कि बदलते समय में जहां सरकारें अपने विकास कार्य करवाने कि बड़ी बड़ी बाते करतीं हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में तो आज भी कहीं जगह श्मशान घाट पेयजल टिनशेट और रास्ते तक नहीं, लेकिन इन पर ना तों पंचायत ध्यान दें रही ना प्रशासन , ग्रामीणों ने श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता बनवाने श्मशान घाट में जलभराव कि समस्या का भी स्थायी समाधान करवाने कि मांग कि, ग्रामीणों का कहना है कि यह एक इंसान कि मृत्यु कि बात नहीं बल्कि पूरे गांव कि परेशानी हैं जब भी किसी ग्रामीण कि मौत होती है तो उसके परिजनों के साथ साथ गांव और बाहर से आने वालें लोगों सभी कों इस प्रकार के कच्चे किचड़ से लथपत खेतों कि दिवारो कों लादकर शमशान घाट तक पहुंचना बहुत बड़ी चुनौती होती है ग्रामीणों ने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान करवाने कि मांग कि।
तेलिखाखेडी में श्मशान घाट पर जाने का नहीं , रास्ता श्मशान घाट में भरा पानी, खुलें आसमान में दिवंगत आत्मा का हुआं अंतिम संस्कार मोड़क क्षेत्र के तेलियाखेडी गांव में श्मशान घाट तक रास्ता न होना एक गंभीर और संवेदनशील समस्या है, जिससे ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के समय ग्रामीणों को किचड़ पानी या खेतों से होकर गुजरना पड़ता है, आपको बता दें कि तेलियाखेडी गांव में आज रक्षाबंधन के दिन रामस्वरूप अहीर का निधन हो गया, जिसके बाद परिजन और गामीण रिश्तेदार सभी अंतिम संस्कार के लिए उन्हें श्मशान घाट
लें जाने लगें लेकिन श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं होना और श्मशान घाट के भीतर पानी भरा हुआ, कड़ी मशक्कत के बाद परिजन गांव कि कच्ची किचड़ भरे पानी और खेतों के रास्तों से होकर श्मशान घाट पहुंचें , लेकिन श्मशान घाट में पानी भरा होने से खुले आसमान में अंतिम संस्कार किया गया,यह केवल आज कि समस्या नहीं बल्कि गांव कि बरसों पुरानी समस्या है और यह एक गांव का उदाहरण नहीं बल्कि ऐसे कहीं गांव आज भी जहां श्मशान घाट में जाने तक के रास्ते नहीं
बनें हुए , ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी गांव के लोगों कों बारिश में होती है जब किसी कि मृत्यु हों जाएं तो श्मशान घाटों कि बदहाली सरकार पर सवाल खड़े कर रहीं कि बदलते समय में जहां सरकारें अपने विकास कार्य करवाने कि बड़ी बड़ी बाते करतीं हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में तो आज भी कहीं जगह श्मशान घाट पेयजल टिनशेट और रास्ते तक नहीं, लेकिन इन पर ना तों पंचायत ध्यान दें रही ना प्रशासन , ग्रामीणों ने श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता बनवाने श्मशान घाट
में जलभराव कि समस्या का भी स्थायी समाधान करवाने कि मांग कि, ग्रामीणों का कहना है कि यह एक इंसान कि मृत्यु कि बात नहीं बल्कि पूरे गांव कि परेशानी हैं जब भी किसी ग्रामीण कि मौत होती है तो उसके परिजनों के साथ साथ गांव और बाहर से आने वालें लोगों सभी कों इस प्रकार के कच्चे किचड़ से लथपत खेतों कि दिवारो कों लादकर शमशान घाट तक पहुंचना बहुत बड़ी चुनौती होती है ग्रामीणों ने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान करवाने कि मांग कि।
- तेलिखाखेडी में श्मशान घाट पर जाने का नहीं , रास्ता श्मशान घाट में भरा पानी, खुलें आसमान में दिवंगत आत्मा का हुआं अंतिम संस्कार मोड़क क्षेत्र के तेलियाखेडी गांव में श्मशान घाट तक रास्ता न होना एक गंभीर और संवेदनशील समस्या है, जिससे ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के समय ग्रामीणों को किचड़ पानी या खेतों से होकर गुजरना पड़ता है, आपको बता दें कि तेलियाखेडी गांव में आज रक्षाबंधन के दिन रामस्वरूप अहीर का निधन हो गया, जिसके बाद परिजन और गामीण रिश्तेदार सभी अंतिम संस्कार के लिए उन्हें श्मशान घाट लें जाने लगें लेकिन श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं होना और श्मशान घाट के भीतर पानी भरा हुआ, कड़ी मशक्कत के बाद परिजन गांव कि कच्ची किचड़ भरे पानी और खेतों के रास्तों से होकर श्मशान घाट पहुंचें , लेकिन श्मशान घाट में पानी भरा होने से खुले आसमान में अंतिम संस्कार किया गया,यह केवल आज कि समस्या नहीं बल्कि गांव कि बरसों पुरानी समस्या है और यह एक गांव का उदाहरण नहीं बल्कि ऐसे कहीं गांव आज भी जहां श्मशान घाट में जाने तक के रास्ते नहीं बनें हुए , ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी गांव के लोगों कों बारिश में होती है जब किसी कि मृत्यु हों जाएं तो श्मशान घाटों कि बदहाली सरकार पर सवाल खड़े कर रहीं कि बदलते समय में जहां सरकारें अपने विकास कार्य करवाने कि बड़ी बड़ी बाते करतीं हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में तो आज भी कहीं जगह श्मशान घाट पेयजल टिनशेट और रास्ते तक नहीं, लेकिन इन पर ना तों पंचायत ध्यान दें रही ना प्रशासन , ग्रामीणों ने श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता बनवाने श्मशान घाट में जलभराव कि समस्या का भी स्थायी समाधान करवाने कि मांग कि, ग्रामीणों का कहना है कि यह एक इंसान कि मृत्यु कि बात नहीं बल्कि पूरे गांव कि परेशानी हैं जब भी किसी ग्रामीण कि मौत होती है तो उसके परिजनों के साथ साथ गांव और बाहर से आने वालें लोगों सभी कों इस प्रकार के कच्चे किचड़ से लथपत खेतों कि दिवारो कों लादकर शमशान घाट तक पहुंचना बहुत बड़ी चुनौती होती है ग्रामीणों ने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान करवाने कि मांग कि।4
- नेपाल में आई ऐसी बाढ़ लोगो को संभलने का समय तक नही मिला1
- पिता की पुण्य स्मृति में विद्यार्थियों को बैग व स्टेशनरी वितरित खानपुर। क्षेत्र के शिवनगर ढाणी स्थित राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय में स्व. राधाकिशनजी रेबारी की पुण्य स्मृति में विद्यार्थियों को बैग एवं स्टेशनरी वितरित की गई। विद्यालय प्रशासक शम्भूलाल रेबारी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सीबीईओ सियाराम नागर ने विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री वितरित की। इस अवसर पर सीबीईओ सियाराम नागर ने विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति जागरूक, निडर रहने और नियमित अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज के विकास और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सबसे सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं ग्रामवासियों ने आयोजन की सराहना की। विद्यार्थियों में बैग एवं स्टेशनरी मिलने को लेकर खासा उत्साह नजर आया। आयोजन के अंत में विद्यालय प्रशासक शम्भूलाल रेबारी ने सभी अतिथियों एवं ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया।1
- नाव पलटने से मजदूर बहे,कटाव कम करने की सामग्री ले जा रहे थे... *वीडिओ बिहार के भागलपुर की बताई जा रही है बुधवार की है. गंगा नदी है.21 मजदूरों से भरी नाव पलट गई। सभी मजदूर मंत्री बुलो मंडल के गांव में कटाव के काम में नाव पर बोरियों में रेत रखकर ले जा रहे थे.. बीच नदी में नाव अधिक वजन के चलते डगमगाई तो एक तरफ से रेत की बोरियों को गंगा में फेंकना शुरू कर दिया, नाव असंतुलित होकर पलट गई. 21 में से 19 की जान बच गई दो लापता हैं..1
- बकानी :- विश्वहिंदू परिषद एवं बजरंग दल साथ दुर्गावाहिनी की बहिनों ने मनाया रक्षाबंधन पर्व बकानी :- विश्वहिंदू परिषद एवं बजरंग दल साथ दुर्गावाहिनी की बहिनों ने मनाया रक्षाबंधन पर्व बकानी :- विश्वहिंदू परिषद एवं बजरंग दल साथ दुर्गावाहिनी की बहिनों ने रक्षाबंधन पर्व मनाया गया इस दौरान दुर्गावाहिनी की बहनों ने राष्ट एवं समाज की सेवा में दिन रात तैनात भाइयों के रक्षाबंधन पर्व मनाया कस्बे की राष्ट सेवा में दुर्गा वाहिनी बकानी प्रखंड की बहनों राष्ट में समाज के विभिन्न में कार्यरत भाइयों के रक्षाबंधन पर्व मनाया1
- रक्षाबंधन का पवन पर देश में बहुत धूमधाम से और शांतिपूर्वक मनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एनसीसी कैडेट छात्राओं नन्ही नन्ही बालिकाओं ने रक्षा सूत्र बंदे स्पीकर ओम बिरला को वीरांगना मधुबाला मीणा और सैकड़ो बहनों ने रक्षा सूत्र बंधे आज हमारे दोहते नक्षत्र को भी उसकी बहनों ने रक्षा सूत्र बंधे नेपाल में हुई भीषण त्रासदी को मध्य नजर रखते हुए राजस्थान ब्रेकिंग न्यूज़ चैनल हेड रमेश गांधी ने रक्षाबंधन नहीं मनाया मात्र हमारे प्राणों से प्रियारे पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर परमात्मा से उनके दीर्घायु होने की और उनकी रक्षा करने की कामना की।1
- नेपाल में आई ऐसी बाढ़ लोगो को संभलने का समय तक नही मिला1
- नेपाल में बर्फीला हिमस्खलन होने के ल्हेंदे नदी में बनी अस्थाई झील टूटने से आई थी आपदा नेपाल में लगातार भारी तबाही के वीडियो सामने आ रहे हैं: दैनिक भास्कर के अनुसार नेपाल में त्रासदी की वजह 3 मिनट के अंतराल पर एक के बाद एक हुई घटनाएं हैं: शुरुआती आकलन के अनुसार तिब्बती क्षेत्र में सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया: 3 मिनट बाद नेपाल सीमा पर 'आइस एवलॉन्च' यानी बर्फीला हिमस्खलन हुआ: सैटेलाइट तस्वीरों से साफ हुआ है कि ग्लेशियर से 2,000 फीट चौड़ा बर्फ का टुकड़ा टूटकर 17,000 फीट की ऊंचाई से गिरा: जहां यह गिरा वहां बम विस्फोट जैसा गड्डा हो गया और ल्हेंदे नदी में पानी जमा होकर अस्थायी झील बन गई: पानी का दबाव बढ़ते ही यह झील टूटी और पानी, बर्फ व मलबे का सैलाब तेजी से नीचे आया: यह जबर्दस्त ताकत के साथ उत्तर-पश्चिम दिशा में नेपाल और तिब्बत की सीमा पर स्थित भोटेकोशी नदी की ओर बढ़ा: सैटेलाइट तस्वीरों में एक दिन पहले बर्फ की परत तेजी से गायब होती दिखाई दी थी: यह तापमान बढ़ने से ग्लेशियर पिघलने या आइस एवलॉन्च के कारण हो सकता है: फ्रांस के भू-आकृति विशेषज्ञ को भूकंपीय उपकरणों के डेटा में सुबह 8:40 बजे अचानक बहुत बड़ा हिस्सा खिसकने के संकेत मिले हैं: इसके बाद एक 'फ्लो सिग्नल' दर्ज किया गया, जो बाढ़ आने का संकेत देता है: ल्हेंदे नदी में 14 महीने में दूसरी बड़ी बाढ़ है: 8 जुलाई 2025 की बाढ़ को उपग्रह तस्वीरों के आधार पर ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट से जोड़ा गया था: भारी बारिश इस बार वजह नहीं है, क्योंकि रसुवा में मंगलवार को बारिश नहीं हुई...1