PDA महापंचायत में महिला सम्मान पर बवाल! मंच से उतरी महिला दावेदार, बनाया लाइव वीडियो—सपा में मचा घमासान उरई, जालौन। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जालौन में समाजवादी पार्टी की PDA महापंचायत जहां शक्ति प्रदर्शन का मंच बनी, वहीं कार्यक्रम में महिला सम्मान को लेकर उठे सवालों ने पार्टी की सियासी तैयारियों पर ही सवालिया निशान लगा दिया। उरई के कोंच रोड स्थित मधुवन विला में आयोजित कार्यक्रम में जिले की तीनों विधानसभा सीटों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और टिकट के दावेदार पहुंचे। मंच पर नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी के बीच महिला दावेदारों को बैठने की उचित जगह नहीं मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। आरोप है कि कार्यक्रम में कई लोग अपने-अपने फोटो और वीडियो बनाने में इतने व्यस्त रहे कि महिला दावेदारों के सम्मान और बैठने की व्यवस्था तक को नजरअंदाज कर दिया गया। सबसे ज्यादा चर्चा उस समय शुरू हुई जब एक महिला मंच से नीचे उतर गई और उसने लाइव वीडियो बनाकर कार्यक्रम तथा पार्टी की व्यवस्था पर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि महिला द्वारा बनाया गया वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला ने पार्टी के भीतर महिलाओं के सम्मान को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने PDA महापंचायत के बीच एक नया राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। नारा PDA का, लेकिन महिला सम्मान कहां? समाजवादी पार्टी लगातार पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की भागीदारी और सम्मान की बात करती रही है। ऐसे में पार्टी के कार्यक्रम में ही यदि किसी महिला दावेदार को बैठने की जगह न मिलने जैसी स्थिति पैदा होती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि संगठन के मंच पर महिलाओं को वास्तविक बराबरी कितनी मिल रही है? सियासी गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि जब 2027 के लिए टिकट के दावेदारों की मौजूदगी में पार्टी अपना शक्ति प्रदर्शन कर रही थी, तब महिला दावेदार के साथ कथित तौर पर हुई इस घटना को आखिर किस तरह देखा जाए? क्या फोटो खिंचवाने और शक्ति प्रदर्शन की होड़ में महिला सम्मान पीछे छूट गया? या फिर यह महज कार्यक्रम की अव्यवस्था थी? पार्टी नेतृत्व से जवाब की मांग अब निगाहें सपा नेतृत्व पर हैं। पार्टी को स्पष्ट करना होगा कि कार्यक्रम में महिला दावेदारों के बैठने और सम्मान की उचित व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी। खासकर तब, जब मंच से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और सम्मान की बातें की जाती हैं। राजनीति में नारे बहुत लगाए जाते हैं, लेकिन असली परीक्षा मंच और जमीन पर व्यवहार से होती है। जालौन की PDA महापंचायत ने जहां सपा की ताकत दिखाई, वहीं महिला सम्मान से जुड़ा यह विवाद पार्टी के लिए असहज सवाल छोड़ गया है। अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व इस वायरल वीडियो और उठ रहे सवालों को सिर्फ कार्यक्रम की अव्यवस्था मानकर नजरअंदाज करता है या महिला दावेदार की नाराजगी पर गंभीर जवाब देता है। 2027 की लड़ाई अभी दूर है, लेकिन जालौन में सियासी संदेश साफ है—भीड़ जुटाना आसान हो सकता है, मगर संगठन के भीतर सम्मान और बराबरी का भरोसा कायम करना बड़ी चुनौती है।
PDA महापंचायत में महिला सम्मान पर बवाल! मंच से उतरी महिला दावेदार, बनाया लाइव वीडियो—सपा में मचा घमासान उरई, जालौन। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जालौन में समाजवादी पार्टी की PDA महापंचायत जहां शक्ति प्रदर्शन का मंच बनी, वहीं कार्यक्रम में महिला सम्मान को लेकर उठे सवालों ने पार्टी की सियासी तैयारियों पर ही सवालिया निशान लगा दिया। उरई के कोंच रोड स्थित मधुवन विला में आयोजित कार्यक्रम में जिले की तीनों विधानसभा सीटों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और टिकट के दावेदार पहुंचे। मंच पर नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी के बीच महिला दावेदारों को बैठने की उचित जगह नहीं मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। आरोप है कि कार्यक्रम में कई लोग अपने-अपने फोटो और वीडियो बनाने में इतने व्यस्त रहे कि महिला दावेदारों के सम्मान और बैठने की व्यवस्था तक को नजरअंदाज कर दिया गया। सबसे ज्यादा चर्चा उस समय शुरू हुई जब एक महिला मंच से नीचे उतर गई और उसने लाइव वीडियो बनाकर कार्यक्रम तथा पार्टी की व्यवस्था पर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि महिला द्वारा बनाया गया वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला ने पार्टी के भीतर महिलाओं के सम्मान को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने PDA महापंचायत के बीच एक नया राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। नारा PDA का, लेकिन महिला सम्मान कहां? समाजवादी पार्टी लगातार पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की भागीदारी और सम्मान की बात करती रही है। ऐसे में पार्टी के कार्यक्रम में ही यदि किसी महिला दावेदार को बैठने की जगह न मिलने जैसी स्थिति पैदा होती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि संगठन के मंच पर महिलाओं को वास्तविक बराबरी कितनी मिल रही है? सियासी गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि जब 2027 के लिए टिकट के दावेदारों की मौजूदगी में पार्टी अपना शक्ति प्रदर्शन कर रही थी, तब महिला दावेदार के साथ कथित तौर पर हुई इस घटना को आखिर किस तरह देखा जाए? क्या फोटो खिंचवाने और शक्ति प्रदर्शन की होड़ में महिला सम्मान पीछे छूट गया? या फिर यह महज कार्यक्रम की अव्यवस्था थी? पार्टी नेतृत्व से जवाब की मांग अब निगाहें सपा नेतृत्व पर हैं। पार्टी को स्पष्ट करना होगा कि कार्यक्रम में महिला दावेदारों के बैठने और सम्मान की उचित व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी। खासकर तब, जब मंच से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और सम्मान की बातें की जाती हैं। राजनीति में नारे बहुत लगाए जाते हैं, लेकिन असली परीक्षा मंच और जमीन पर व्यवहार से होती है। जालौन की PDA महापंचायत ने जहां सपा की ताकत दिखाई, वहीं महिला सम्मान से जुड़ा यह विवाद पार्टी के लिए असहज सवाल छोड़ गया है। अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व इस वायरल वीडियो और उठ रहे सवालों को सिर्फ कार्यक्रम की अव्यवस्था मानकर नजरअंदाज करता है या महिला दावेदार की नाराजगी पर गंभीर जवाब देता है। 2027 की लड़ाई अभी दूर है, लेकिन जालौन में सियासी संदेश साफ है—भीड़ जुटाना आसान हो सकता है, मगर संगठन के भीतर सम्मान और बराबरी का भरोसा कायम करना बड़ी चुनौती है।
- PDA महापंचायत में महिला सम्मान पर बवाल! मंच से उतरी महिला दावेदार, बनाया लाइव वीडियो—सपा में मचा घमासान उरई, जालौन। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जालौन में समाजवादी पार्टी की PDA महापंचायत जहां शक्ति प्रदर्शन का मंच बनी, वहीं कार्यक्रम में महिला सम्मान को लेकर उठे सवालों ने पार्टी की सियासी तैयारियों पर ही सवालिया निशान लगा दिया। उरई के कोंच रोड स्थित मधुवन विला में आयोजित कार्यक्रम में जिले की तीनों विधानसभा सीटों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और टिकट के दावेदार पहुंचे। मंच पर नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी के बीच महिला दावेदारों को बैठने की उचित जगह नहीं मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। आरोप है कि कार्यक्रम में कई लोग अपने-अपने फोटो और वीडियो बनाने में इतने व्यस्त रहे कि महिला दावेदारों के सम्मान और बैठने की व्यवस्था तक को नजरअंदाज कर दिया गया। सबसे ज्यादा चर्चा उस समय शुरू हुई जब एक महिला मंच से नीचे उतर गई और उसने लाइव वीडियो बनाकर कार्यक्रम तथा पार्टी की व्यवस्था पर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि महिला द्वारा बनाया गया वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला ने पार्टी के भीतर महिलाओं के सम्मान को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने PDA महापंचायत के बीच एक नया राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। नारा PDA का, लेकिन महिला सम्मान कहां? समाजवादी पार्टी लगातार पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की भागीदारी और सम्मान की बात करती रही है। ऐसे में पार्टी के कार्यक्रम में ही यदि किसी महिला दावेदार को बैठने की जगह न मिलने जैसी स्थिति पैदा होती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि संगठन के मंच पर महिलाओं को वास्तविक बराबरी कितनी मिल रही है? सियासी गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि जब 2027 के लिए टिकट के दावेदारों की मौजूदगी में पार्टी अपना शक्ति प्रदर्शन कर रही थी, तब महिला दावेदार के साथ कथित तौर पर हुई इस घटना को आखिर किस तरह देखा जाए? क्या फोटो खिंचवाने और शक्ति प्रदर्शन की होड़ में महिला सम्मान पीछे छूट गया? या फिर यह महज कार्यक्रम की अव्यवस्था थी? पार्टी नेतृत्व से जवाब की मांग अब निगाहें सपा नेतृत्व पर हैं। पार्टी को स्पष्ट करना होगा कि कार्यक्रम में महिला दावेदारों के बैठने और सम्मान की उचित व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी। खासकर तब, जब मंच से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और सम्मान की बातें की जाती हैं। राजनीति में नारे बहुत लगाए जाते हैं, लेकिन असली परीक्षा मंच और जमीन पर व्यवहार से होती है। जालौन की PDA महापंचायत ने जहां सपा की ताकत दिखाई, वहीं महिला सम्मान से जुड़ा यह विवाद पार्टी के लिए असहज सवाल छोड़ गया है। अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व इस वायरल वीडियो और उठ रहे सवालों को सिर्फ कार्यक्रम की अव्यवस्था मानकर नजरअंदाज करता है या महिला दावेदार की नाराजगी पर गंभीर जवाब देता है। 2027 की लड़ाई अभी दूर है, लेकिन जालौन में सियासी संदेश साफ है—भीड़ जुटाना आसान हो सकता है, मगर संगठन के भीतर सम्मान और बराबरी का भरोसा कायम करना बड़ी चुनौती है।1
- पांच दिन से लापता अधेड़ का मलंगा नाले में झाड़ियों में फंसा मिला शव जालौन में पांच दिन से लापता 49 वर्षीय अधेड़ का शव मलंगा नाले की झाड़ियों में फंसा मिला। शव दिखाई देने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने एसडीआरएफ टीम को बुलाया, जिसके बाद टीम व स्थानीय व्यक्ति,नगर पालिका कर्मचारी ने कड़ी मशक्कत कर शव को नाले से बाहर निकाला। अधेड़ के शव की बरामदगी के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। मामला कोंच कोतवाली क्षेत्र के सिंहवाहिनी मंदिर के पास स्थित मलंगा नाले का है। बताया जा रहा है कि 49 वर्षीय मंगल सिंह पिछले पांच दिनों से लापता था। परिजनों ने उसके लापता होने के बाद कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसी बीच नाले की झाड़ियों में शव फंसा दिखाई देने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर एसडीआरएफ टीम को बुलाया। एसडीआरएफ की टीम ने नाले में उतरकर झाड़ियों में फंसे शव को बाहर निकाला। शव मिलने के बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। बाइट-ब्रजेश कुमार, BC, एसडीआरएफ टीम4
- जालौन। इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए इंसानियत ग्रुप के सदस्यों ने गंभीर रूप से घायल और बेहोश पड़े एक बंदर की जान बचाई। बताया गया कि सुबह करीब 7 बजे से एक बंदर घायल अवस्था में सड़क किनारे पड़ा था और उसके शरीर से काफी खून निकल रहा था। शाम करीब 6 बजे प्रत्यक्ष नाम के युवक ने इंसानियत ग्रुप से संपर्क कर घटना की जानकारी दी। युवक ने बताया कि बंदर की हालत बेहद गंभीर है और यदि समय रहते उसकी मदद नहीं की गई तो उसकी जान जा सकती है। सूचना मिलते ही इंसानियत ग्रुप के सदस्य ध्रुव शिवहरे ने तत्काल टीम को जानकारी दी। टीम डॉक्टर के साथ करीब 10 मिनट के अंदर मौके पर पहुंच गई। घायल बंदर का उपचार किया गया और उसे भोजन-पानी भी दिया गया, जिससे उसकी हालत में सुधार हुआ। इसके बाद वन विभाग की टीम को सूचना देकर मौके पर बुलाया गया और बंदर को सुरक्षित रूप से वन विभाग की टीम के सुपुर्द कर दिया गया। इंसानियत ग्रुप के सदस्यों ने कहा कि इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बेजुबान जीवों की मदद करना भी हमारा कर्तव्य है। लोगों ने टीम के इस कार्य की सराहना की। लोगों का कहना है कि ईश्वर की कृपा और हनुमान जी के स्वरूप माने जाने वाले इस बेजुबान जीव की जान बचाकर टीम ने सराहनीय और पुण्य कार्य किया है।1
- कोंच,पांच दिन से लापता अधेड़ का शव मलंगा नाले में मिला परिजनों ने जताई थी नाले में बहने की आशंका, एनडीआरएफ की टीम ने झाड़ियों में फंसा शव निकाला जालौन के कोंच में दिन गुरुवार को शाम 6 बजे पांच दिन से लापता कस्बे के गांधी नगर निवासी अधेड़ का शव गुरुवार शाम मलंगा नाले में झाड़ियों में फंसा मिलने से हड़कंप मच गया। परिजनों ने उसके नाले में बहने की आशंका जताई थी, जिसके बाद प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को बुलाकर तलाश शुरू कराई थी। कई घंटे की तलाश के बाद टीम को एसआरपी इंटर कॉलेज के पीछे नर्सरी के पास नाले की झाड़ियों में शव फंसा दिखाई दिया। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला। मौके पर पहुंचे परिजनों ने शव की शिनाख्त मंगल सिंह के रूप में की। जानकारी के अनुसार गांधी नगर निवासी मंगल सिंह (49) बीती 5 सितंबर की दोपहर से लापता थे। काफी तलाश के बाद भी उनका कोई पता नहीं चलने पर उनके पुत्र अरुण रजक ने कोतवाली पुलिस को गुमशुदगी की तहरीर दी थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज की जांच करते हुए पुलिस मलंगा नाले तक पहुंची, लेकिन इसके आगे मंगल सिंह की कोई लोकेशन नहीं मिल सकी। परिजनों ने आशंका जताई थी कि वह मलंगा नाले में बह गए होंगे। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को बुलाया। गुरुवार दोपहर टीम ने नाले में तलाश अभियान शुरू किया। टीम ने नाले के विभिन्न हिस्सों में खोजबीन की। शाम के समय एसआरपी इंटर कॉलेज के पीछे नर्सरी के पास झाड़ियों में मंगल सिंह का शव फंसा मिला। शव बाहर निकलते ही मौके पर मौजूद परिजनों में कोहराम मच गया। बताया गया कि मंगल सिंह के परिवार में एक पुत्र और चार पुत्रियां हैं। वह सागर चौकी के पास कपड़ों पर प्रेस करने का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।1
- जालौन में 11 साल पुराने मामले में न्यायालय का बड़ा फैसला आया 11 साल पुराने जमीनी विवाद में किसान के पक्ष में कोर्ट ने सुनाया फैसला, प्रतिवादी पक्ष का बैनामा निरस्त* कोर्ट ने किसान को उसकी भूमि पर कब्जा दिलाने का दिया आदेश उरई। डकोर कोतवाली क्षेत्र के डकोर गांव निवासी किसान रघुवीर यादव के करीब 11 साल पुराने जमीन विवाद में सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रत्यूष प्रकाश की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवादित भूमि से संबंधित किए गए बैनामे को निरस्त करने तथा किसान को उसकी भूमि पर कब्जा दिलाने का आदेश दिया है। मामले के अनुसार डकोर गांव निवासी रघुवीर यादव ने 7 जुलाई 2015 को न्यायालय में वाद दायर कर बताया था कि आराजी संख्या 1935 की भूमि पर दूसरे पक्ष द्वारा उसके अधिकार वाली जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। वादी का आरोप था कि लालाराम ने अपने हिस्से से अधिक रकबा बैनामा कर दिया, जिसके चलते उसकी जमीन भी बैनामे में शामिल हो गई और संबंधित लोगों ने उस पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय में दोनों पक्षों की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। करीब 11 वर्षों तक चले ट्रायल के दौरान वादी प्रतिवादी पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए गए। न्यायालय के आदेश पर वादी को स्थगन आदेश भी प्राप्त हुआ था। आरोप है कि इसके बावजूद प्रतिवादी पक्ष ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया और विवादित भूमि के अतिरिक्त हिस्से पर भी कब्जा कर लिया। बुधवार को सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रत्यूष प्रकाश की अदालत में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। न्यायालय के समक्ष साक्ष्यों और तथ्यों को रखा। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने वादी रघुवीर यादव के पक्ष में फैसला सुनाया। न्यायालय ने विवादित भूमि के संबंध में प्रतिवादी पक्ष द्वारा किए गए बैनामे को निरस्त करते हुए वादी को उसकी भूमि पर कब्जा दिलाए जाने का आदेश दिया। फैसले के बाद किसान पक्ष में खुशी का माहौल है। लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद में न्यायालय के निर्णय को किसान के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।1
- कदौरा-नाका-मरगया मार्ग बना मुसीबत का रास्ता! दैनिक भद्रावती टाइम्स यूपी हेड रानू मंसूरी रिपोर्ट विजय शर्मा सड़क जर्जर या हादसे का इंतजार? जिम्मेदारों की चुप्पी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल कदौरा। कदौरा से नाका होकर मरगया जाने वाले मार्ग की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क लंबे समय से खराब हालत में है और जगह-जगह गड्ढों व टूटे हिस्सों के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। किया विधायक महोदय संसद महोदय खाली वोट के लिए सड़क खराब हो या आदमी चले जायेंगे बच्चों की समस्या और कोई अधिकारी जाँच करने नहीं गया बच्चों के जान के साथ हो रहा खिलवाड़ कब तक यू ही चलता रहेगा लगभग 2 साल भी नहीं हुआ और रोड की हालत खराब खाली लीपापोती कर रहे अधिकारी मरीज को लेकर जाने में बहुत दिक्कत है इसमें किया कोई अधिकारी जाँच करने नहीं जाएगा सबसे गंभीर सवाल स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। रोजाना इसी मार्ग से बच्चे और ग्रामीण आवागमन करते हैं। ऐसे में खराब सड़क पर किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का सीधा सवाल—आखिर कब जागेगा प्रशासन? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बची हुई है? यदि सड़क वास्तव में इतनी खराब है तो स्थलीय निरीक्षण कराकर मरम्मत या निर्माण की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि कदौरा से नाका होकर मरगया मार्ग का मौके पर निरीक्षण कराया जाए, सड़क की तकनीकी स्थिति की जांच हो और आवश्यकतानुसार निर्माण/मरम्मत का कार्य जल्द शुरू कराया जाए। बच्चों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल ग्रामीणों का कहना है कि विकास की बात तब पूरी होगी जब गांवों को जोड़ने वाली सड़कें सुरक्षित और चलने लायक हों। सवाल यह भी है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद टूटेगी? ग्रामीणों ने चेतावनी नहीं बल्कि अपनी समस्या के समाधान की मांग करते हुए कहा कि सड़क की समस्या को गंभीरता से लिया जाए और जिम्मेदार विभाग तत्काल मौके पर पहुंचे। इन ग्रामीणों ने उठाई आवाज नाका निवासी कल्लू प्रधान, लतीफ खां, रज्जाक, बाबू, हनीफ, मेंबर मुताज अली, मुबीन तथा मरगया निवासी विकास कुमार, शैलेंद्र, बृजेश, सोनू, रज्जू, विवेक, धर्मेंद्र लम्बरदार, रामकरण कुशवाहा, पंकज ठाकुर और अमित समेत अन्य ग्रामीणों ने सड़क की हालत पर चिंता जताते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की। अब जवाबदेही का वक्त! क्या संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर सड़क की हकीकत देखेगा? क्या स्कूल के बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी? क्या जर्जर सड़क का स्थायी समाधान होगा? या फिर ग्रामीण इसी बदहाल रास्ते पर चलने को मजबूर रहेंगे?3
- *_तीन मासूमों को लेकर कई दिनों से जिला प्रशासन सहित क्षेत्रीय बिधायक के यहाँ तक भटक आई महिला, नहीं हुई कोई कार्यवाही अंत में लगाई मीडिया से लगाई न्याय की गुहार_ पीड़िता ने मीडिया से लगाई न्याय की गुहार, उच्चाधिकारीयों के ट्यूटर अकाउंट पर कार्यवाही करने के आदेश हुये बेअसर, 👉 पीड़िता महिला ने अपने पति सहित सास ससुर आदि पर आरोप लगाते हुये कहा हमारी व तीनों बच्चों की हत्या कर दूसरी दूसरी शादी रचाना है पीड़िता का पति, औरैया दिबियापुर थाना क्षेत्र ग्राम मैनपूठ की निवासी एक पीड़िता महिला जोकि कई दिनों से अपने मासूम बच्चों को लेकर जिला पुलिस पुलिस प्रशासन सहित क्षेत्रीय बिधायकों के दरबाजे खटका कर न्याय मांगती घूम रही है, परन्तु जब पीड़िता को जिला पुलिस प्रशासन सहित क्षेत्रीय बिधायकों के यहाँ से न्याय नहीं मिलता तो पीड़िता पीड़िता ने मीडिया से लगाई न्याय की गुहार, बताते चलें कि थाना दिबियापुर के ग्राम मैनपूठ की निवासी रेखा देवी पत्नी कन्हैया लाल ने बताया कि वह बेहद गरीब जोकि स्वयं मजदूरी करके अपने तीन छोटे छोटे बच्चे जिनमें सबसे बड़ा बेटा सूरज उम्र करीब 10 वर्ष, पुत्री आराधना उम्र करीब 07 वर्ष व सबसे छोटा बेटा अनमोल उम्र करीब डेढ वर्ष का लालन पालन करती है, इसके भी पीड़िता रेखा देवी ने अपने पति कन्हैया लाल सहित ससुर सोबरन सिंह सास रानीमुन्नी, जिठानी रजनी व जेठ जयसिंह पर आरोप लगाते हुये कहा बताया कि उपरोक्त सभी लोग पीड़िता को कई वर्षो से शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न करते बेरहमी से मारपीट करते है, पीड़िता ने मीडिया को बताते हुये कहा कि उसका पति कन्हैया लाल अपने घर वालों की सह पर पीड़िता व अपने बच्चों की जिम्मेदारी ना निभाते हुये पड़ोस की एक महिला के साथ अवैध संबंध रखते हुये दिनांक 28/08/2026 समय करीब प्रातः 08:00 से अपनी मोटर साईकिल से घर से निकल गये है जब से वापस नहीं आये है, पीड़िता ने बताया है कि उसका पति कन्हैया लाल घर से जेवरात जिसमें एक सोंने का मंगल सूत्र एक जोड़ी चांदी की पायल, एक चांदी मकर की करधनी, कीमत करीब 55.000 हजार रु. के साथ एक बीघा जमीन गिरवी रखकर फरार है, पीड़िता अपने मासूम बच्चों को लेकर कई दिनों से लगातार जिला पुलिस प्रशासन सहित क्षेत्रीय विधायक से अपने बच्चों का भरण, पोषण, पढ़ाई लिखाई एवं देखरेख करने की गुहार लगाती आ रही है, इसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है, पीड़िता ने हार थककर मीडिया से न्याय की गुहार लगाते हुये कहा कि यदि मीडिया हमारी आवाज़ को प्रदेश के न्याय प्रिय मुख्यमंत्री तक पहुंचाने में सहयोग कर देंगे तो उसे न्याय अवश्य मिलेगा, इतना ही नहीं पीड़िता ने दिये गये शिकायत पत्र में लिखा है कि यदि हमारे या बच्चों के साथ कोई घटना दुर्घटना होती है तो इसके जिम्मेदार कोई और नहीं उसका पति,सास,ससुर,जेठ जिठानी सहित क्षेत्रीय पुलिस प्रशासन होगा, उक्त पीड़िता की समस्या को मीडिया ने अपने ट्यूटर अकाउंत के माध्यम से जिला पुलिस प्रशासन आईजी रेंज कानपुर एडीजी जोन कानपुर सहित प्रदेश के अनेकों जिम्मेदारों ट्यूट कर पीड़िता व उसके मासूम बच्चों की मदत किये जाने का आग्रह किया गया, मीडिया के द्वारा जिम्मेदारों को ट्यूट करने पर आईजी रेंज कानपुर एडीजी जोन कानपुर सहित औरैया पुलिस द्वारा कार्यवाही करने का कोरा कोरा आश्वासन देते रहें, जबकि खबर लिखे जाने तक अभी तक पीड़िता या उसके मासूम बच्चों का दुःख दर्द सुनने वाला कोई नहीं पहुंचा है4
- कोंच, पांच दिन से लापता अधेड़ का शव मलंगा नाले में मिला परिजनों ने जताई थी नाले में बहने की आशंका, एनडीआरएफ की टीम ने झाड़ियों में फंसा शव निकाला1