लिव इन रिलेशनशिप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम रुख: बालिगों को साथ रहने का अधिकार, धर्म से परे सुरक्षा का संरक्षण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अपने कई फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि दो बालिग व्यक्तियों का आपसी सहमति से साथ रहना किसी भी तरह से गैरकानूनी नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार हर नागरिक को प्राप्त है, जिसमें अपनी पसंद से जीवन साथी चुनने और साथ रहने का अधिकार भी शामिल है। हाईकोर्ट ने अपने निर्णयों में कहा है कि यदि दो बालिग व्यक्ति आपसी सहमति से साथ रह रहे हैं तो यह अपराध नहीं है। ऐसे जोड़ों को खतरे की स्थिति में पुलिस सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। राज्य का कर्तव्य है कि वह हर नागरिक के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करे। धर्म, जाति और समुदाय से परे सुरक्षा कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और कानूनी अधिकार किसी धर्म या जाति पर निर्भर नहीं हैं।चाहे कोई जोड़ा एक ही धर्म का हो या अलग-अलग धर्मों का, यदि दोनों बालिग हैं और स्वेच्छा से साथ रह रहे हैं, तो उन्हें समान रूप से कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा। अदालत ने कई मामलों में यह भी माना है कि अंतर-धार्मिक (Interfaith) और अंतर-जातीय (Inter-caste) लिव-इन संबंधों में भी पुलिस सुरक्षा दी जा सकती है, यदि उन्हें खतरा हो। *घरेलू हिंसा कानून का संरक्षण* कोर्ट ने यह भी कहा है कि लंबे समय तक चले लिव-इन संबंध “विवाह जैसी प्रकृति” में आ सकते हैं, और ऐसे मामलों में महिला को घरेलू हिंसा से संरक्षण के तहत सुरक्षा मिल सकती है। Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 बच्चों के अधिकार अदालत के अनुसार ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को भी कानूनी अधिकार मिल सकते हैं और उन्हें सामाजिक या कानूनी रूप से उपेक्षित नहीं किया जा सकता। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि लिव-इन रिलेशनशिप का मामला पूरी तरह व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आधारित है। इसमें धर्म, जाति या समुदाय का कोई प्रभाव नहीं है और कानून हर बालिग व्यक्ति को समान सुरक्षा प्रदान करता है।
लिव इन रिलेशनशिप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम रुख: बालिगों को साथ रहने का अधिकार, धर्म से परे सुरक्षा का संरक्षण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अपने कई फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि दो बालिग व्यक्तियों का आपसी सहमति से साथ रहना किसी भी तरह से गैरकानूनी नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार हर नागरिक को प्राप्त है, जिसमें अपनी पसंद से जीवन साथी चुनने और साथ रहने का अधिकार भी शामिल है। हाईकोर्ट ने अपने निर्णयों में कहा है कि यदि दो बालिग व्यक्ति आपसी सहमति से साथ रह रहे हैं तो यह अपराध नहीं है। ऐसे जोड़ों को खतरे की स्थिति में पुलिस सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। राज्य का कर्तव्य है कि वह हर नागरिक के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करे। धर्म, जाति और समुदाय से परे सुरक्षा कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और कानूनी अधिकार किसी धर्म या जाति पर निर्भर नहीं हैं।चाहे कोई जोड़ा एक ही धर्म का हो या अलग-अलग धर्मों का, यदि दोनों बालिग हैं और स्वेच्छा से साथ रह रहे हैं, तो उन्हें समान रूप से कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा। अदालत ने कई मामलों में यह भी माना है कि अंतर-धार्मिक (Interfaith) और अंतर-जातीय (Inter-caste) लिव-इन संबंधों में भी पुलिस सुरक्षा दी जा सकती है, यदि उन्हें खतरा हो। *घरेलू हिंसा कानून का संरक्षण* कोर्ट ने यह भी कहा है कि लंबे समय तक चले लिव-इन संबंध “विवाह जैसी प्रकृति” में आ सकते हैं, और ऐसे मामलों में महिला को घरेलू हिंसा से संरक्षण के तहत सुरक्षा मिल सकती है। Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 बच्चों के अधिकार अदालत के अनुसार ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को भी कानूनी अधिकार मिल सकते हैं और उन्हें सामाजिक या कानूनी रूप से उपेक्षित नहीं किया जा सकता। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि लिव-इन रिलेशनशिप का मामला पूरी तरह व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आधारित है। इसमें धर्म, जाति या समुदाय का कोई प्रभाव नहीं है और कानून हर बालिग व्यक्ति को समान सुरक्षा प्रदान करता है।
- अररिया थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह ठेला लगाने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते दोहरी हत्या में बदल गया। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। जानकारी के अनुसार, कृषि उत्पादन बाजार समिति (विघटित) के गेट नंबर 2 के पास ठेला लगाने को लेकर ठेला दुकानदार राहुल चौहान और एक पिकअप वाहन चालक नबी हुसैन के बीच कहासुनी हुई। यह विवाद इतना बढ़ गया कि ठेला लगाने वाले युवक ने चालक पर चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी।वारदात के बाद आरोपी मौके से भागकर पास की झाड़ियों में छिप गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को बाहर निकालकर अपने कब्जे में ले लिया। लेकिन इसी दौरान गुस्साई भीड़ बेकाबू हो गई और पुलिस से आरोपी को छीन लिया। भीड़ ने उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे उसकी भी मौके पर ही मौत हो गई। *मृतकों की पहचान* इस घटना में मृतकों की पहचान स्थानीय निवासी राहुल चौहान (ठेला दुकानदार) और नबी हुसैन (पिकअप चालक) के रूप में हुई है। दोनों ही क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं। *इलाके में तनाव और विरोध* घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी मच गई। आक्रोशित लोगों ने सुभाष चौक सहित कई स्थानों पर सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे रहे। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।1
- एक आरोपी भंवरलाल गिरफ्तार आरोपी को ग्राम पांचलासिद्धा में विश्नोइयों की ढाणी स्थित रहवासी मकान से दस्तयाब कर उक्त अवैध मादक पदार्थ अफीम जब्त किया गया। नागौर पुलिस द्वारा नशे के सौदागरों के विरूद्ध आगे भी कार्यवाही जारी रहेगी । थाना खींवसर पुलिस एवं डीएसटी टीम की रही संयुक्त कार्यवाही । नागौर/ खींवसर,,रोशन मीना (आई.पी.एस.) जिला पुलिस अधीक्षक जिला नागौर के द्वारा ऑपरेशन संकल्प नशा मुक्त नागौर के तहत अवैध मादक पदार्थों की रोकथाम हेतु दिये गये निर्देशों की पालना में आशाराम चौधरी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नागौर एवं जतिन जैन सहायक पुलिस अधीक्षक, वृत्त नागौर के निकटतम सुपरविजन में अदिति उपाध्याय (प्रोबसर)थानाधिकारी पुलिस थाना खींवसर मय एवं डीएसटी टीम नागौर की इत्तला पर मौजा विश्नोईयों की ढाणी पांचलासिद्वा स्थित आरोपी भवरलाल के रहवासी मकान पर पहुंचे, आरोपी भवरलाल के पास एक सफेद गमछा में छिपाया हुआ, एक सफेद रंग का डिब्बा जिसमें अवैध मादक तरल पदार्थ अफीम का दूध कुल 220.53 ग्राम भरा हुआ मिला जिसे जब्त कर आरोपी भंवरलाल को गिरफ्तार किया गया। नागौर पुलिस द्वारा नशे के सौदागरों के विरूद्ध आगे भी कार्यवाही जारी रहेगी।1
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- रात्रि चौपाल : जिला कलक्टर ने ग्राम पंचायत रड़का बेरा में सुनी आमजन की परिवेदनाएं चौपाल में ग्रामीणों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की दी गई जानकारी अधिकारी कर्मचारी प्रतिदिन समय पर कार्यालय में उपस्थित हो - जिला कलक्टर फलौदी, 10 अप्रैल। जिला कलक्टर अंकित कुमार सिंह ने शुकवार को घंटियाली पंचायत समिति की ग्राम पंचायत रड़का बेरा में रात्रि चौपाल लगाते हुए ग्रामीणों की समस्याएं सुनी। चौपाल में ग्रामीणों ने पेयजल,विद्युत पोल,फसल खराब मुआवजा,सड़क निर्माण सहित विभिन्न परिवाद प्रस्तुत किए। सभी प्रकरणों की सुनवाई करते हुए जिला कलक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निस्तारण के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। रात्रि चौपाल में विभागीय अधिकारियों द्वारा अपने विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को दी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने तारबंदी, फार्मपोंड, कृषि संयंत्र, सुक्ष्म सिंचाई योजना सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। इसी प्रकार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लाडो प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना,जन औषधि योजना की जानकारी दी गई। समाज कल्याण विभाग द्वारा पेंशन, पालनहार योजना तथा पशुपालन विभाग द्वारा मंगला पशु बीमा योजना के बारे में जागरूक किया गया। इस दौरान उपखंड अधिकारी ने ग्रामीणों को मुख्यमंत्री विकसित ग्राम अभियान के बारे में जानकारी देते हुए 20 अप्रैल को आयोजित होने वाले शिविर में ग्रामीण विकास के संबंध सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया। जिला कलक्टर ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि रात्रि चौपाल का उद्देश्य ग्रामीणों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनना तथा उनका न्यायोचित समाधान करना हैं। साथ ही ग्रामीणों की मांग को उच्च स्तर पर पहुंचाना हैं। इस दौरान उन्होंने सभी अधिकारियों व कार्मिकों के कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी को कार्यालय में समय पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए। चौपाल में उपखंड अधिकारी पूजा चौधरी,विकास अधिकारी डॉ सुनीता परिहार, तहसीलदार विशन सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहें।1
- शर्म, शर्म, शर्म! वायरल वीडियो ने बेशर्मी की हदें पार कर दीं सोशल मीडिया पर एक वीडियो आग की तरह फैल रहा है। वीडियो में एक बाइक पर दो लड़के और दूसरी बाइक पर दो लड़कियाँ जा रही हैं। रास्ते में चलते-चलते पीछे वाली बाइक पर बैठा युवक अचानक आगे चल रही लड़कियों की बाइक के पास आता है और एक लड़की का टॉप उठाकर भागने की कोशिश करता है। लड़की चीख पड़ती है, दोनों लड़कियाँ घबरा जाती हैं। यह नज़ारा देखकर राहगीरों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने दोनों लड़कों को पकड़ लिया और लाठी-डंडों से जमकर धुनाई कर दी, फिर पुलिस के हवाले किया। लोग इस हरकत को "नामर्दाना, घटिया और शर्मनाक" बताते हुए सख्त सज़ा की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने दोनों पर छेड़खानी और महिला उत्पीड़न की गंभीर धाराएँ लगाई हैं। यह घटना एक बार फिर सड़क पर महिलाओं की सुरक्षा और ऐसे बिगड़ैल युवाओं पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत को उजागर करती है।1
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अपने कई फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि दो बालिग व्यक्तियों का आपसी सहमति से साथ रहना किसी भी तरह से गैरकानूनी नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार हर नागरिक को प्राप्त है, जिसमें अपनी पसंद से जीवन साथी चुनने और साथ रहने का अधिकार भी शामिल है। हाईकोर्ट ने अपने निर्णयों में कहा है कि यदि दो बालिग व्यक्ति आपसी सहमति से साथ रह रहे हैं तो यह अपराध नहीं है। ऐसे जोड़ों को खतरे की स्थिति में पुलिस सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। राज्य का कर्तव्य है कि वह हर नागरिक के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करे। धर्म, जाति और समुदाय से परे सुरक्षा कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और कानूनी अधिकार किसी धर्म या जाति पर निर्भर नहीं हैं।चाहे कोई जोड़ा एक ही धर्म का हो या अलग-अलग धर्मों का, यदि दोनों बालिग हैं और स्वेच्छा से साथ रह रहे हैं, तो उन्हें समान रूप से कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा। अदालत ने कई मामलों में यह भी माना है कि अंतर-धार्मिक (Interfaith) और अंतर-जातीय (Inter-caste) लिव-इन संबंधों में भी पुलिस सुरक्षा दी जा सकती है, यदि उन्हें खतरा हो। *घरेलू हिंसा कानून का संरक्षण* कोर्ट ने यह भी कहा है कि लंबे समय तक चले लिव-इन संबंध “विवाह जैसी प्रकृति” में आ सकते हैं, और ऐसे मामलों में महिला को घरेलू हिंसा से संरक्षण के तहत सुरक्षा मिल सकती है। Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 बच्चों के अधिकार अदालत के अनुसार ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को भी कानूनी अधिकार मिल सकते हैं और उन्हें सामाजिक या कानूनी रूप से उपेक्षित नहीं किया जा सकता। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि लिव-इन रिलेशनशिप का मामला पूरी तरह व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आधारित है। इसमें धर्म, जाति या समुदाय का कोई प्रभाव नहीं है और कानून हर बालिग व्यक्ति को समान सुरक्षा प्रदान करता है।1
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