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Salman sai
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- पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के तहत, राजस्थान के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (सिविल राइट्स एवं एएचटी) द्वारा नागौर जिले में बालश्रम, बंधुआ मजदूरी और मानव दुर्व्यापार (बाल तस्करी/मानव तस्करी) की रोकथाम के लिए एक विशेष अभियान 'ऑपरेशन उमंग-7' चलाया जा रहा है। यह अभियान 1 जून 2026 से 30 जून 2026 तक चलेगा, जिसका उद्देश्य बालश्रम, भिक्षावृत्ति और मानव दुर्व्यवहार जैसे अपराधों पर अंकुश लगाना है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए नागौर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशाराम चौधरी के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (महिला अपराध एवं अनुसंधान प्रकोष्ठ) नूर मोहम्मद द्वारा कार्यालय सभागार में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जिला कलेक्टर नागौर के प्रतिनिधि राधिका चौधरी आर.टी.एस., बाल कल्याण समिति नागौर के सदस्य नथूराम मेघवाल, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य जगदीश जांगू, श्रम निरीक्षक मुकेशकुमार, एएचटीयू प्रभारी पुरखाराम स.उ.नि., समस्त जिला नागौर के बाल कल्याण अधिकारीगण, उपनिदेशक (महिला एवं बाल अधिकारिता विभाग), उपनिदेशक (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग), थाना प्रभारी जी.आर.पी. पुलिस चौकी, अधीक्षक राजकीय संप्रेक्षण एवं किशोर गृह, चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 के समन्वयक और राजस्थान महिला कल्याण मंडल एन.जी.ओ. के प्रतिनिधियों सहित अन्य प्रशासनिक विभागों, एन.जी.ओ. और थानास्तरीय बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। बाल अपराध रोकथाम से संबंधित इस गोष्ठी के दौरान बाल अधिकारों के संबंध में आमजन को जानकारी देने और बाल अपराध करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने पर विचार-विमर्श किया गया। संबंधित हितधारकों को निर्देश दिए गए कि वे बालश्रम, भिक्षावृत्ति और मानव दुर्व्यवहार की रोकथाम के लिए संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसके साथ ही, अपराधियों को कठोर सजा दिलाने के लिए ठोस साक्ष्य जुटाने और मजबूत गवाह संकलित करने पर जोर दिया गया। व्यवसायिक संचालकों और आमजन को बाल अपराध न करने की समझाइश देने तथा बाल नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करके बालश्रम के प्रति आमजन में जागरूकता पैदा करने के निर्देश भी दिए गए। अभियान की पूर्ण सफलता के लिए समाज कल्याण विभाग, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षा अधिकारियों, सी.एल.जी. सदस्यों और मुखबिरों का सहयोग लेकर बालश्रम उन्मूलन की कार्यवाही को अधिक से अधिक करने का आह्वान किया गया। मुक्त कराए गए बाल श्रमिकों के पुनर्वास और सर्वोत्तम हित के लिए उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करने, शिक्षा से जोड़ने तथा उनके परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने हेतु श्रम विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए गए। बालश्रम, बंधुआ मजदूरी और मानव दुर्व्यवपार में पाए गए बच्चों/भिक्षावृत्ति से मुक्त कराए गए बच्चों के प्रकरणों में मानव तस्करी के दृष्टिकोण से विस्तृत अनुसंधान कर सभी दोषियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने पर भी सहमति बनी। आमजन से अपील की गई है कि बालश्रम, भिक्षावृत्ति या मानव दुर्व्यवहार अपराधों की जानकारी मिलने पर संबंधित पुलिस थाने, मानव तस्करी विरोधी यूनिट (मोबाइल नं. 9079991738), चाइल्ड हेल्प लाइन 1098, आपातकालीन पुलिस हेल्प लाइन 112 या महिला हेल्प लाइन नं. 181 पर सूचना दें।3
- Post by Salman sai1
- स्वतंत्र भारत की आठवीं और देश की पहली डिजिटल जनगणना के तहत चल रहे मकान सूचीकरण तथा सर्वे कार्य की प्रगति का अधिकारियों ने मूंडवा में शुक्रवार को भौतिक सत्यापन किया। जनगणना के प्रथम चरण में मकानों के मानक सूचीकरण का कार्य जारी है, जिसके तहत प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्रित कर रहे हैं। आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग जनगणना से जुड़े आंकड़ों के संकलन और कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगातार इसकी निगरानी कर रहा है। इसी क्रम में उप जिला जनगणना अधिकारी एवं आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के उपनिदेशक रामकुमार राव तथा सांख्यिकी अधिकारी संजय कुमार सोनी ने मूंडवा नगर पालिका क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में अब तक किए गए सर्वे एवं सूचीकरण कार्य का भौतिक सत्यापन किया। इस निरीक्षण के दौरान नगर पालिका के कनिष्ठ अभियंता नरपतराम और जनगणना सहायक रूपेश पाराशर सहित अन्य कार्मिक भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर लगाए गए भवन नंबरों और संकलित आंकड़ों का सत्यापन किया, साथ ही स्थानीय नागरिकों से भी जानकारी प्राप्त कर कार्य की गुणवत्ता का आकलन किया। उपनिदेशक रामकुमार राव ने बताया कि जनगणना कार्य को निर्धारित योजना के अनुरूप और त्रुटिरहित ढंग से संपन्न करने के लिए नियमित निरीक्षण किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रगणकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और सूचीकरण कार्य को अधिक दक्षता तथा सटीकता के साथ पूरा करने को कहा। विभागीय अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि डिजिटल जनगणना के माध्यम से देश की जनसंख्या, आवासीय स्थिति एवं सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों का अधिक सटीक एवं आधुनिक तरीके से संकलन किया जा रहा है, जिससे भविष्य की विकास योजनाओं को एक बेहतर आधार मिलेगा।2
- राज्य सरकार द्वारा 25 मई से 5 जून तक चलाए गए “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” का गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर समापन हो गया। रियांबड़ी के ग्राम जडाऊ कलां में आयोजित एक ब्लॉक स्तरीय कार्यक्रम के साथ यह अभियान संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वर्षाजल संग्रहण और स्वच्छता को बढ़ावा देना था। इस अभियान के तहत ग्रामीणों को जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहायक विकास अधिकारी जगदीश प्रसाद ने इस बात पर जोर दिया कि मानवीय हस्तक्षेप के कारण पर्यावरण का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे वैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और लगाए गए पौधों का संरक्षण सुनिश्चित करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने घरों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों की नियमित साफ-सफाई के लिए भी जागरूक रहने पर बल दिया। सहायक अभियंता राकेश महरिया ने वर्षाजल संग्रहण के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि तालाब, नाड़ी, ट्यूबवेल, ओपनवेल और हैंडपंप जैसे जल स्रोतों की नियमित सफाई और रखरखाव अत्यंत आवश्यक है। महरिया ने घरों की छतों से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से वर्षाजल को टांकों में संग्रहित कर पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में संभावित जल संकट से बचने के उपाय सुझाए। इस अवसर पर एक ग्राम सभा का भी आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें इन योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया और आने वाली समस्याओं के समाधान के बारे में भी अवगत कराया गया। स्वच्छता अभियान के अंतर्गत “स्वच्छ गांव-सुरक्षित जलवायु” थीम पर जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित कर ग्रामीणों को जन सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के अंत में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम में ब्लॉक समन्वयक रामकिशोर, ग्राम विकास अधिकारी कैलाश चंद मिरोठा, प्रशासक प्रतिनिधि रामस्वरूप, कनिष्ठ सहायक मोहनराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों और महिलाओं ने भाग लिया।1
- राज्यसभा सदस्य बनने के बाद डॉ. सतीश पूनिया पहली बार नागौर जिले के पादूकलां गाँव पहुँचे। इस अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया।3
- बीकानेर की सीएडी कॉलोनी में पिछले दो दिनों से एक बिजली का तार ज़मीन पर पड़ा हुआ है। इस गंभीर स्थिति के कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए खतरा बना हुआ है।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेड़ता की अध्यक्ष तारा अग्रवाल, जो जिला एवं सेशन न्यायाधीश भी हैं, के मार्गदर्शन में मेड़ता सिटी में पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों के तहत, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेड़ता के सचिव संजय कुमार मालवीय द्वारा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से तैयार किए गए जागरूकता पोस्टर का विमोचन माननीय अध्यक्ष तारा अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर माननीय अध्यक्ष महोदया ने पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताते हुए इसके संवर्धन हेतु सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। साथ ही, जिला एवं सेशन न्यायाधीश तारा अग्रवाल द्वारा न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायालय कर्मचारियों को आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर यथासंभव बिना ईंधन चालित वाहनों का उपयोग कर कार्यक्रम स्थल पर आने तथा प्रत्येक माह कम से कम एक दिन स्वेच्छा से ईंधन चालित वाहनों का प्रयोग न करने की प्रतिज्ञा दिलाई गई। उन्होंने कहा कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके पश्चात, मेड़ता शहर स्थित देरानी सरोवर पर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन हेतु पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पर्यावरण प्रेमी ताराचंद मारोठिया, उपाधीक्षक डॉ. यशपाल लटियाल, मनोहर गहलोत, महावीर सिंह, रमेशचंद्र सोनी, चंद्रप्रकाश मांडा सहित अन्य गणमान्य नागरिकों एवं कार्मिकों के सहयोग से पौधारोपण किया गया। साथ ही, पक्षियों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु परिंडे भी लगाए गए, जिससे हरित भविष्य का संदेश और अधिक मुखर हुआ।2
- नागौर जिले के ओसियां के गोपासरिया गांव में बिजली के ट्रांसफर (डीपी) को लेकर ग्रामीणों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया है। इस मामले में ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे बिजली के इस ट्रांसफर को किसी भी सूरत में दूसरी जगह नहीं जाने देंगे।1