ज़ब कलेक्टर ही करेंगी कमिश्नर के आदेशो का उल्लंघन, तो कौन पालन करवायेगा शासकीय नियम ज़ब कलेक्टर ही करेंगी कमिश्नर के आदेशो का उल्लंघन, तो कौन पालन करवायेगा शासकीय नियम *मैहर* रीवा कमिश्नर द्वारा विगत दिनों दिनांक 18/2/025 को एक पत्र जारी किया था। जिसमें जिला मुख्यालय के अधिकारी कर्मचारी सप्ताह में एक दिन प्रत्येक मंगलवार को पहल के तहत अपने कार्यालय आने हेतु साइकिल पैदल या इलेक्ट्रॉनिक वाहन का उपयोग करेंगे, प्रत्येक मंगलवार को कोई भी अधिकारी शासकीय कर्मचारी व्यक्तिगत पेट्रोल डीजल वाहन का उपयोग नहीं करेंगे। महिला अधिकारी कर्मचारी स्कूटी या सार्वजनिक वाहन का उपयोग कर सकेंगे, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर मैहर कलेक्टर शासकीय वाहन में बैठकर कार्यालय पहुंच रही है, जिनको देखने के बाद सभी छोटे अधिकारी कर्मचारी भी अपने शासकीय वाहन में बैठकर कमिश्नर के नियमों को ठेंगा दिखाते हुऐ कलेक्ट्रेट कार्यालय जनसुनवाई में पहुंच रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जब कलेक्टर ही अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करेंगी तो बाकी के अधिकारी कर्मचारी भी बेलाइन होना तय है।
ज़ब कलेक्टर ही करेंगी कमिश्नर के आदेशो का उल्लंघन, तो कौन पालन करवायेगा शासकीय नियम ज़ब कलेक्टर ही करेंगी कमिश्नर के आदेशो का उल्लंघन, तो कौन पालन करवायेगा शासकीय नियम *मैहर* रीवा कमिश्नर द्वारा विगत दिनों दिनांक 18/2/025 को एक पत्र जारी किया था। जिसमें जिला मुख्यालय के अधिकारी कर्मचारी सप्ताह में एक दिन प्रत्येक मंगलवार को पहल के तहत अपने कार्यालय आने हेतु साइकिल पैदल या इलेक्ट्रॉनिक वाहन का उपयोग करेंगे, प्रत्येक मंगलवार को कोई भी अधिकारी शासकीय कर्मचारी व्यक्तिगत पेट्रोल डीजल वाहन का उपयोग नहीं करेंगे। महिला अधिकारी कर्मचारी स्कूटी या सार्वजनिक वाहन का उपयोग कर सकेंगे, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर मैहर कलेक्टर शासकीय वाहन में बैठकर कार्यालय पहुंच रही है, जिनको देखने के बाद सभी छोटे अधिकारी कर्मचारी भी अपने शासकीय वाहन में बैठकर कमिश्नर के नियमों को ठेंगा दिखाते हुऐ कलेक्ट्रेट कार्यालय जनसुनवाई में पहुंच रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जब कलेक्टर ही अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करेंगी तो बाकी के अधिकारी कर्मचारी भी बेलाइन होना तय है।
- ज़ब कलेक्टर ही करेंगी कमिश्नर के आदेशो का उल्लंघन, तो कौन पालन करवायेगा शासकीय नियम *मैहर* रीवा कमिश्नर द्वारा विगत दिनों दिनांक 18/2/025 को एक पत्र जारी किया था। जिसमें जिला मुख्यालय के अधिकारी कर्मचारी सप्ताह में एक दिन प्रत्येक मंगलवार को पहल के तहत अपने कार्यालय आने हेतु साइकिल पैदल या इलेक्ट्रॉनिक वाहन का उपयोग करेंगे, प्रत्येक मंगलवार को कोई भी अधिकारी शासकीय कर्मचारी व्यक्तिगत पेट्रोल डीजल वाहन का उपयोग नहीं करेंगे। महिला अधिकारी कर्मचारी स्कूटी या सार्वजनिक वाहन का उपयोग कर सकेंगे, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर मैहर कलेक्टर शासकीय वाहन में बैठकर कार्यालय पहुंच रही है, जिनको देखने के बाद सभी छोटे अधिकारी कर्मचारी भी अपने शासकीय वाहन में बैठकर कमिश्नर के नियमों को ठेंगा दिखाते हुऐ कलेक्ट्रेट कार्यालय जनसुनवाई में पहुंच रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जब कलेक्टर ही अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करेंगी तो बाकी के अधिकारी कर्मचारी भी बेलाइन होना तय है।1
- *प्रशासनिक लापरवाही की कीमत चुकाती आस्था देवी मंदिर प्रकरण पर गंभीर सवाल* मैहर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री जैन जी द्वारा पूर्व में दिए गए वक्तव्य आज एक बार फिर कसौटी पर खरे उतरते प्रतीत होते हैं। यह प्रकरण दर्शाता है कि किस प्रकार कुछ जिलों में कलेक्टरों के निरंकुश एवं गैर-जवाबदेह व्यवहार के कारण प्रशासन स्वयं सवालों के घेरे में आ जाता है। मैहर के समाजसेवी आनंद कुमार श्रीवास्तव ने पूर्व में माँ शारदा देवी मंदिर के गर्भगृह में अस्त्र-पूजा की घटना को लेकर स्पष्ट रूप से कहा था कि संपूर्ण घटना का ठीकरा केवल पुजारी पर फोड़ देना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने का प्रयास भी है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि— मंदिर के गर्भगृह में कौन पुजारी नियुक्त होगा, वह कौन-सी गतिविधियाँ करेगा, तथा मंदिर व्यवस्था का संचालन कैसे होगा, इन सभी का निर्धारण कलेक्टर स्तर पर किया जाना था। यदि प्रशासन ने अपनी मूल जिम्मेदारियों का विधिवत निर्वहन किया होता, तो यह घटना कतई घटित न होती। ऐसे में केवल पुजारी को दोषी ठहराना कैसे न्यायसंगत माना जा सकता है? इससे भी अधिक गंभीर पहलू यह है कि जब मंदिर परिसर में अस्त्र-शस्त्र पूर्णतः प्रतिबंधित थे, तो उन्हें प्रवेश द्वार अथवा रोपवे परिसर में ही जब्त किया जाना चाहिए था। किंतु ऐसा नहीं किया गया। इसका सीधा अर्थ है कि प्रथमतः जवाबदेही रोपवे व्यवस्था और उसके संचालन तंत्र की बनती है। यह अत्यंत चिंताजनक है कि आज दिनांक तक रोपवे संचालक को न तो कोई नोटिस जारी किया गया और न ही स्पष्टीकरण माँगा गया। यह स्थिति संकेत देती है कि प्रशासनिक तंत्र जवाबदेही की अपेक्षा रसूख और संरक्षण की मानसिकता पर संचालित हो रहा है। समाजसेवी श्रीवास्तव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह स्थिति मैहर के कलेक्टर के लिए कोई नई बात नहीं है— जब राज्य के कानून को व्यक्तिगत आदेशों से नीचे समझा जाने लगे, और प्रशासनिक निर्णय ही “कानून” मान लिए जाएँ, तब ऐसी घटनाएँ असामान्य नहीं रह जातीं। यह प्रकरण केवल एक धार्मिक स्थल की मर्यादा का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, कानून के समान अनुपालन और संभावित सत्ता-दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर विषय है। अब समय आ गया है कि निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जाँच सुनिश्चित की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध स्पष्ट एवं दृश्यमान कार्यवाही की जाए—ताकि आस्था और कानून दोनों की गरिमा अक्षुण्ण रह सके1
- जिला सतना धवारी स्थित शराब दुकान के पास मारपीट, शराब दुकान का मैनेजर नीरज सिंह घायल।1
- Post by Jagtapal Yadav g1
- भारत के राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को गाने में आपको दिक्कत होती है, ये चीजें नहीं चल सकती हैं... ये 'भारत रत्न' बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी का अपमान है...1
- सतना (मध्य प्रदेश): धवारी थाना क्षेत्र में बीती रात बदमाशों के हौसले बुलंद नज़र आए। शहर के धवारी स्थित शराब दुकान के मैनेजर नीरज सिंह पर कुछ अज्ञात बदमाशों और एक नामी अपराधी दादू सिंह ने मिलकर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में मैनेजर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना का विवरण: पीड़ित नीरज सिंह के अनुसार, जब वह दुकान से करीब 100 मीटर की दूरी पर थे, तभी पहले से घात लगाकर बैठे बदमाशों ने उन पर पत्थरों से हमला कर दिया। हमलावरों ने उनके सिर, चेहरे और आँखों पर गंभीर वार किए, जिससे वे लहूलुहान हो गए।1
- सतना-हवाई पट्टी मोड़ के सामने बोलेरो ने वैन को मारी टक्कर महिला सहित एक बच्चा घायल भेजा गया जिला अस्पताल #reels #reelsinstagram #vairal #news #vairalvideo1
- जिला सतना मझगवां वन परिक्षेत्र के खोडरी डेग़रहट में फिर दिखा बाघ, ग्रामीणों में दहशत, आराम करता नजर आ रहा है बाघ। लेकिन इस इलाके के जंगलों को वन्य प्राणियों के लिए रिजर्व नहीं होने देंगे खनिज कारोबारी।1