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विदिशा जिले के गोलबारी चक गांव में ग्रामीण कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनका आरोप है कि गांव के सरपंच जानबूझकर इन समस्याओं को अनदेखा कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक के बाद एक नई दिक्कतें सामने आ रही हैं और कोई भी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। स्थिति से हताश ग्रामीणों ने अधिकारियों से हाथ जोड़कर निवेदन किया है कि उनकी समस्याओं पर जल्द से जल्द ध्यान दिया जाए और त्वरित सुनवाई की जाए।
Malkhan Nayak
विदिशा जिले के गोलबारी चक गांव में ग्रामीण कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनका आरोप है कि गांव के सरपंच जानबूझकर इन समस्याओं को अनदेखा कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक के बाद एक नई दिक्कतें सामने आ रही हैं और कोई भी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। स्थिति से हताश ग्रामीणों ने अधिकारियों से हाथ जोड़कर निवेदन किया है कि उनकी समस्याओं पर जल्द से जल्द ध्यान दिया जाए और त्वरित सुनवाई की जाए।
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- एक सोशल मीडिया पोस्ट में पाठकों से यह सवाल पूछा गया है कि क्या सभी ग्राम पंचायतों में मौजूदा हालात समान हैं। पोस्ट के माध्यम से लोगों से इस विषय पर अपनी राय और अनुभव टिप्पणियों में साझा करने का आग्रह किया गया है।1
- शुरू ऐप डाउनलोड करने का आवाहन किया गया है, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता देशभर की खबरें सुन सकते हैं। इस ऐप को डाउनलोड करके लोग आसानी से राष्ट्रीय समाचारों तक पहुँच सकते हैं।1
- विदिशा जिले की गंज बासोदा तहसील के अंतर्गत आने वाले उदयपुर गाँव से छोटू मोगिया नामक व्यक्ति ने अपनी पहचान बताई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका नाम छोटू मोगिया है और वह इसी गाँव से संबंधित हैं।1
- सरकार बदलने के बाद से ही विभिन्न थानों में तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व पार्षदों और नेताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इसी कड़ी में अब पूर्व शिक्षा मंत्री, बेहला पश्चिम के पूर्व विधायक पार्थ चटर्जी और कोलकाता नगर निगम के १२५ नंबर वार्ड की पूर्व पार्षद घनश्री बाग का नाम भी जुड़ गया है। यह शिकायत ठाकुरपुकुर थाने में दर्ज कराई गई है। शिकायत करने वाली महिला १२५ नंबर वार्ड के बाछार पाड़ा इलाके की एक गृहिणी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वह और उनके परिवार के सदस्य लंबे समय से भाजपा समर्थक रहे हैं। उनके मुताबिक, २०२० में इलाके में हुई एक राजनीतिक हिंसा की घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस व्यक्ति को तृणमूल समर्थक बताकर उनके ७३ वर्षीय बीमार ससुर को उस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। महिला ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक अदालत में चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली और उनके बीमार ससुर को जेल हिरासत में रहना पड़ा। इसी दौरान, शिकायतकर्ता के अनुसार, १२५ नंबर वार्ड की तत्कालीन पार्षद घनश्री बाग ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के निर्देश पर मामला वापस लेने के बदले २५ लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने तीन किस्तों में कुल २५ लाख रुपये दिए। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ; इसके बाद उनसे कथित तौर पर १ करोड़ रुपये और मांगे गए। यह राशि न दे पाने पर उन पर विभिन्न तरीकों से दबाव डाला गया। शिकायतकर्ता के पति का दावा है कि उनका व्यवसाय भी बंद करवा दिया गया था। इसके अतिरिक्त, महिला ने आरोप लगाया कि पार्थ चटर्जी, घनश्री बाग और उनके दो सहयोगियों के उकसावे पर उनके परिवार पर लंबे समय तक अत्याचार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सड़क पर निकलने पर ताने मारे जाते थे, शीलभंग करने की कोशिश की जाती थी, और कई बार उनकी ओढ़नी खींचकर भी उन्हें परेशान किया गया।1
- विदिशा जिले की नटेरन तहसील के ग्राम रायपुर निवासी कमलसिंह कुशवाहा और उनके परिजनों ने कलेक्ट्रेट में प्रशासन के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए अपने खेत की गलत नपती की शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी द्वारा की गई माप में उनकी खेती को न केवल दूसरे हल्का बल्कि पूरे गांव को बदलकर दूसरे गांव में दर्शाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उनके खेत को मुंदरी गांव में दिखाया जा रहा है, जबकि वे स्वयं रायपुर गांव के निवासी हैं। इस गंभीर त्रुटि को सुधारने के लिए उन्होंने कलेक्टर से गुहार लगाई है और मांग की है कि उनके खेत की नपती दोबारा जरीब से कराई जाए।4
- मध्य प्रदेश के कुरवाई में श्री रामचन्द्र जी के नाम के साथ एक कीर्तन यात्रा निकाली जा रही है। इस प्रभात यात्रा में वृद्ध और युवा दोनों उत्साहपूर्वक शामिल होकर इसे सफल बनाते हैं। यह प्रभात फेरी यात्रा कुरवाई के मंदिर में सीता राम का जाप और राम नाम कीर्तन के साथ समाप्त होती है। यह राम नाम कीर्तन के साथ प्रभात यात्रा कई वर्षों से निरंतर निकाली जा रही है, जो आस्था और परंपरा को दर्शाती है।3
- आज की नवीनतम और ट्रेंडिंग खबरों के बीच, मध्य प्रदेश से एक महत्वपूर्ण खबर की ओर ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। सोशल मीडिया पोस्ट में प्रदेश की आज की सबसे बड़ी खबर का उल्लेख करते हुए सीधे सवाल किया गया है कि आखिर यह क्या खबर है, जिससे लोगों में उत्सुकता बढ़ रही है।1
- मध्य प्रदेश के गुना जिले की राघौगढ़ तहसील में नाथू का पूरा से भूमलाखेड़ी तक बनी सड़क पर विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगा है। ग्राम पंचायत भदोड़ी के अंतर्गत आने वाली यह सड़क, जिसका हाल ही में डामरीकरण किया गया था, कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी है, जिससे इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आई तस्वीरों से पता चलता है कि सड़क जगह-जगह से खराब हो गई है, जो निर्माण की घटिया गुणवत्ता की पोल खोलती है। इस स्थिति ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या जनता के करदाताओं का पैसा केवल कागजों पर सड़कें बनाने में खर्च किया जा रहा है? पोस्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि यह गंभीर लापरवाही और गुणवत्ता से समझौते का परिणाम है, खासकर जब आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर अक्सर सवाल उठते हैं। आज़ादी के 78 से अधिक वर्षों बाद भी, जब सरकारें 'आदिवासी विकास', 'अमृतकाल' और 'अंतिम व्यक्ति तक विकास' की बात करती हैं, तब भी आदिवासी गांवों में बनी सड़कें कुछ ही दिनों में अपनी बदहाली की कहानी कहने लगती हैं। इसी कड़ी में, जयस संभाग सचिव ग्वालियर संभाग, हेमराज सहरिया ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों से इस सड़क निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, डामरीकरण की मोटाई और पूरी भुगतान प्रक्रिया की जांच की बात कही है, साथ ही यह भी कहा है कि यदि किसी ठेकेदार, इंजीनियर या अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है तो उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। यह जोर देकर कहा गया है कि आदिवासी क्षेत्र कोई प्रयोगशाला नहीं हैं जहाँ घटिया निर्माण कर जनता के अधिकारों से खिलवाड़ किया जाए। इस पूरे मामले को लेकर 'विकास के नाम पर भ्रष्टाचार बंद होना चाहिए' और दोषियों को जवाब देना होगा। पोस्ट में इस स्थिति को लेकर एक मार्मिक टिप्पणी भी की गई है: "सड़क नई बनी है, लेकिन सच्चाई पुरानी है — आदिवासी क्षेत्रों में आज भी विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की कहानी दोहराई जा रही है।"4