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*गूगल के पॉपुलर वीडियो प्लेटफॉर्म Youtube की सर्विस अचानक से बुधवार (18 फरवरी) सुबह घंटों तक ठप रहने के बाद फिर से बहाल हो गई है। बुधवार की सुबह अचानक से यूट्यूब सर्विस के ठप होने की वजह से लाखों-करोड़ों लोगों को वीडियो देखने में परेशानी का सामना करना पड़ा।*
रोहित कुमार पाठक
*गूगल के पॉपुलर वीडियो प्लेटफॉर्म Youtube की सर्विस अचानक से बुधवार (18 फरवरी) सुबह घंटों तक ठप रहने के बाद फिर से बहाल हो गई है। बुधवार की सुबह अचानक से यूट्यूब सर्विस के ठप होने की वजह से लाखों-करोड़ों लोगों को वीडियो देखने में परेशानी का सामना करना पड़ा।*
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- 💥 *बड़ी खबर*💥 *कूनो में फिर गूंजी किलकारी: 'गामिनी' ने दिया 3 शावकों को जन्म* श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में प्रोजेक्ट चीता को बड़ी सफलता मिली है। दक्षिण अफ्रीका से आई मादा चीता 'गामिनी' ने 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। प्रोजेक्ट के तीन वर्ष पूरे होने पर यह 9वां सफल प्रसव है। इसके साथ ही भारत में अब चीतों का कुनबा बढ़कर 38 हो गया है।1
- सतना-हवाई पट्टी मोड़ के सामने बोलेरो ने वैन को मारी टक्कर महिला सहित एक बच्चा घायल भेजा गया जिला अस्पताल #reels #reelsinstagram #vairal #news #vairalvideo1
- सतना। शहर के कोलगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत मैत्री पार्क के पास एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहाँ एक तेज रफ्तार बोलेरो ने सामने से आ रही ओमिनी वैन को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रमुख विवरण: स्थान: मैत्री पार्क के पास, कोलगवां थाना क्षेत्र, सतना। हादसा: बोलेरो और ओमिनी वैन की आमने-सामने की भिड़ंत। घायल: ओमिनी वैन में सवार एक महिला और उनका मासूम बच्चा। पहचान: घायल महिला कांग्रेस की स्थानीय नेत्री बताई जा रही हैं।1
- Post by Pushpendra Kumar Ravi1
- Post by Rudra Pratap Singh Parihar1
- ज़ब कलेक्टर ही करेंगी कमिश्नर के आदेशो का उल्लंघन, तो कौन पालन करवायेगा शासकीय नियम *मैहर* रीवा कमिश्नर द्वारा विगत दिनों दिनांक 18/2/025 को एक पत्र जारी किया था। जिसमें जिला मुख्यालय के अधिकारी कर्मचारी सप्ताह में एक दिन प्रत्येक मंगलवार को पहल के तहत अपने कार्यालय आने हेतु साइकिल पैदल या इलेक्ट्रॉनिक वाहन का उपयोग करेंगे, प्रत्येक मंगलवार को कोई भी अधिकारी शासकीय कर्मचारी व्यक्तिगत पेट्रोल डीजल वाहन का उपयोग नहीं करेंगे। महिला अधिकारी कर्मचारी स्कूटी या सार्वजनिक वाहन का उपयोग कर सकेंगे, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर मैहर कलेक्टर शासकीय वाहन में बैठकर कार्यालय पहुंच रही है, जिनको देखने के बाद सभी छोटे अधिकारी कर्मचारी भी अपने शासकीय वाहन में बैठकर कमिश्नर के नियमों को ठेंगा दिखाते हुऐ कलेक्ट्रेट कार्यालय जनसुनवाई में पहुंच रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जब कलेक्टर ही अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करेंगी तो बाकी के अधिकारी कर्मचारी भी बेलाइन होना तय है।1
- *प्रशासनिक लापरवाही की कीमत चुकाती आस्था देवी मंदिर प्रकरण पर गंभीर सवाल* मैहर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री जैन जी द्वारा पूर्व में दिए गए वक्तव्य आज एक बार फिर कसौटी पर खरे उतरते प्रतीत होते हैं। यह प्रकरण दर्शाता है कि किस प्रकार कुछ जिलों में कलेक्टरों के निरंकुश एवं गैर-जवाबदेह व्यवहार के कारण प्रशासन स्वयं सवालों के घेरे में आ जाता है। मैहर के समाजसेवी आनंद कुमार श्रीवास्तव ने पूर्व में माँ शारदा देवी मंदिर के गर्भगृह में अस्त्र-पूजा की घटना को लेकर स्पष्ट रूप से कहा था कि संपूर्ण घटना का ठीकरा केवल पुजारी पर फोड़ देना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने का प्रयास भी है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि— मंदिर के गर्भगृह में कौन पुजारी नियुक्त होगा, वह कौन-सी गतिविधियाँ करेगा, तथा मंदिर व्यवस्था का संचालन कैसे होगा, इन सभी का निर्धारण कलेक्टर स्तर पर किया जाना था। यदि प्रशासन ने अपनी मूल जिम्मेदारियों का विधिवत निर्वहन किया होता, तो यह घटना कतई घटित न होती। ऐसे में केवल पुजारी को दोषी ठहराना कैसे न्यायसंगत माना जा सकता है? इससे भी अधिक गंभीर पहलू यह है कि जब मंदिर परिसर में अस्त्र-शस्त्र पूर्णतः प्रतिबंधित थे, तो उन्हें प्रवेश द्वार अथवा रोपवे परिसर में ही जब्त किया जाना चाहिए था। किंतु ऐसा नहीं किया गया। इसका सीधा अर्थ है कि प्रथमतः जवाबदेही रोपवे व्यवस्था और उसके संचालन तंत्र की बनती है। यह अत्यंत चिंताजनक है कि आज दिनांक तक रोपवे संचालक को न तो कोई नोटिस जारी किया गया और न ही स्पष्टीकरण माँगा गया। यह स्थिति संकेत देती है कि प्रशासनिक तंत्र जवाबदेही की अपेक्षा रसूख और संरक्षण की मानसिकता पर संचालित हो रहा है। समाजसेवी श्रीवास्तव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह स्थिति मैहर के कलेक्टर के लिए कोई नई बात नहीं है— जब राज्य के कानून को व्यक्तिगत आदेशों से नीचे समझा जाने लगे, और प्रशासनिक निर्णय ही “कानून” मान लिए जाएँ, तब ऐसी घटनाएँ असामान्य नहीं रह जातीं। यह प्रकरण केवल एक धार्मिक स्थल की मर्यादा का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, कानून के समान अनुपालन और संभावित सत्ता-दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर विषय है। अब समय आ गया है कि निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जाँच सुनिश्चित की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध स्पष्ट एवं दृश्यमान कार्यवाही की जाए—ताकि आस्था और कानून दोनों की गरिमा अक्षुण्ण रह सके1
- कान्हा जी महाराज दिव्य दर्शन निवास जरमोहरा प्रातः कालीन दिव्य दर्शन एवं आरती राधे राधे गोविंद गोविंद राधे गोविंद राधे राधे गोपाल राधे राधे1