रविवार शाम करीब 6 बजे चिकारड़ा कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आए तेज अंधड़ और तूफानी हवाओं ने जमकर कहर बरपाया। लगभग एक घंटे तक चली इन हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ धराशायी हो गए और टहनियां टूट गईं। मकानों तथा बाड़ों पर लगे टीनशेड, एंगल, खिड़कियां और दरवाजे तक उड़ गए, जिससे व्यापक संपत्ति को नुकसान पहुँचा। हालांकि, राहत की बात यह रही कि कहीं से भी किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली। सबसे अधिक नुकसान भाटोली बागरियांन क्षेत्र में दर्ज किया गया, जहाँ एक दर्जन से अधिक मकानों और बाड़ों को क्षति पहुँची। स्थानीय निवासी उदयनाथ ने बताया कि अंधड़ ने पूरे क्षेत्र में तबाही मचा दी, लेकिन ईश्वर की कृपा से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस तूफान की चपेट में हीरालाल गाडरी, भेरूलाल गाडरी, नारायणलाल गाडरी, लक्ष्मण जाट, देवीलाल गाडरी, कालू गाडरी और कालू गुर्जर सहित कई लोगों के मकानों के टीनशेड उड़ गए या टूटकर अंदर गिर पड़े। सौभाग्य से, उस समय बाड़ों में बंधे मवेशियों में से किसी को भी कोई चोट नहीं आई। उदयनाथ के खेत पर भी एक बड़ा पेड़ जड़ सहित धराशायी हो गया। तूफानी हवाओं ने विद्युत व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया। नंगाखेड़ा की नई आबादी, सारंगपुरा और भाटोली बागरियांन की एलटी लाइनों पर पेड़ गिरने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इसके अतिरिक्त, नीमगांव, झाड़सादड़ी और नंगाखेड़ा में विद्युत पोल गिरने से लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। जेतपुरा में माधु लाल गायरी तथा नौगांव में कालू लाल गायरी के कुओं पर लगे डीपी स्ट्रक्चर भी धराशायी हो गए, जिससे पूरे क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय बाद आए इस भीषण अंधड़ से क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। संपत्ति को व्यापक क्षति होने के बावजूद, किसी भी व्यक्ति, पशु अथवा पक्षी के हताहत न होने से लोगों ने राहत की साँस ली। तूफान शांत होने के बाद, विद्युत विभाग की टीमें क्षतिग्रस्त लाइनों और पोलों की मरम्मत कर बिजली व्यवस्था को बहाल करने के कार्य में तत्काल जुट गईं।
रविवार शाम करीब 6 बजे चिकारड़ा कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आए तेज अंधड़ और तूफानी हवाओं ने जमकर कहर बरपाया। लगभग एक घंटे तक चली इन हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ धराशायी हो गए और टहनियां टूट गईं। मकानों तथा बाड़ों पर लगे टीनशेड, एंगल, खिड़कियां और दरवाजे तक उड़ गए, जिससे व्यापक संपत्ति को नुकसान पहुँचा। हालांकि, राहत की बात यह रही कि कहीं से भी किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली। सबसे अधिक नुकसान भाटोली
बागरियांन क्षेत्र में दर्ज किया गया, जहाँ एक दर्जन से अधिक मकानों और बाड़ों को क्षति पहुँची। स्थानीय निवासी उदयनाथ ने बताया कि अंधड़ ने पूरे क्षेत्र में तबाही मचा दी, लेकिन ईश्वर की कृपा से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस तूफान की चपेट में हीरालाल गाडरी, भेरूलाल गाडरी, नारायणलाल गाडरी, लक्ष्मण जाट, देवीलाल गाडरी, कालू गाडरी और कालू गुर्जर सहित कई लोगों के मकानों के टीनशेड उड़ गए या टूटकर अंदर गिर पड़े। सौभाग्य से, उस समय बाड़ों में बंधे मवेशियों
में से किसी को भी कोई चोट नहीं आई। उदयनाथ के खेत पर भी एक बड़ा पेड़ जड़ सहित धराशायी हो गया। तूफानी हवाओं ने विद्युत व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया। नंगाखेड़ा की नई आबादी, सारंगपुरा और भाटोली बागरियांन की एलटी लाइनों पर पेड़ गिरने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इसके अतिरिक्त, नीमगांव, झाड़सादड़ी और नंगाखेड़ा में विद्युत पोल गिरने से लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। जेतपुरा में माधु लाल गायरी तथा नौगांव में कालू लाल गायरी के कुओं पर लगे डीपी
स्ट्रक्चर भी धराशायी हो गए, जिससे पूरे क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय बाद आए इस भीषण अंधड़ से क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। संपत्ति को व्यापक क्षति होने के बावजूद, किसी भी व्यक्ति, पशु अथवा पक्षी के हताहत न होने से लोगों ने राहत की साँस ली। तूफान शांत होने के बाद, विद्युत विभाग की टीमें क्षतिग्रस्त लाइनों और पोलों की मरम्मत कर बिजली व्यवस्था को बहाल करने के कार्य में तत्काल जुट गईं।
- श्री महावीर गोपाल गौशाला, चिकारड़ा में रविवार शाम को गौसेवा का एक प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला। गोभक्त धुलचंद पितलिया, जो उदयपुर से लगभग 70 किलोमीटर की यात्रा तय कर शाम करीब 5 बजे गौशाला पहुँचे थे, उन्होंने अपने हाथों से गौमाता को एक ट्रिप हरी घास खिलाकर गौसेवा का पुण्य लाभ प्राप्त किया। यह सेवा निकुंभ के सहलोत परिवार की प्रेरणा से की गई थी, जिसके चलते धुलचंद पितलिया ने गौमाता की सेवा का संकल्प लिया और चिकारड़ा आकर इसे पूरा किया। गौसेवा से पहले, पितलिया ने गौशाला परिसर का भ्रमण किया और वहाँ की व्यवस्थाओं तथा संचालन के बारे में जानकारी ली। उन्होंने गौशाला की स्वच्छता, रखरखाव और व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इस गौशाला के बारे में काफी कुछ सुना था, लेकिन यहाँ आकर उन्होंने जो व्यवस्थाएँ देखीं, वे उनकी अपेक्षाओं से भी बेहतर थीं। उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि यदि गौमाता का आशीर्वाद मिलता रहा, तो वे भविष्य में भी गौशालाओं में नियमित रूप से पहुँचकर गौसेवा करते रहेंगे। इस अवसर पर उनके साथ चिराग जारोली (मंगलवाड़) भी मौजूद थे। गौशाला के ग्वालों ने दोनों गोभक्तों का स्वागत किया और उनके सेवा भाव की सराहना की। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान गौभक्ति, सेवा और संस्कार का एक अनूठा संगम देखने को मिला।2
- राजस्थान पंचायत शिक्षक विद्यालय सहायक संघ की संभाग स्तरीय बैठक आज उदयपुर के टाउन हॉल में आयोजित की गई, जिसमें राजस्थान पंचायत शिक्षक विद्यालय सहायकों के नियमितीकरण का मुद्दा प्रमुख रहा। संघ के उदयपुर जिला अध्यक्ष दिनेश सिंह बूटडेचा ने इस बैठक की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि के रूप में चित्तौड़गढ़ जिलाध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री सम्पत जाट मौजूद थे, जबकि जोधपुर जिला अध्यक्ष तरुण चीतारा विशिष्ट अतिथि रहे। बैठक में उदयपुर संभाग के सभी सातों जिला अध्यक्षों के साथ-साथ समस्त ब्लॉकों के ब्लॉक अध्यक्षों ने भी भाग लिया।1
- धरियावद-मूंगाणा क्षेत्र के पसली टांडा स्थित प्राचीन वीर हनुमानजी मंदिर में अज्ञात चोरों ने दानपात्र (गल्ला) तोड़कर नकदी चोरी कर ली है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में गहरा रोष व्याप्त है। शनिवार को अज्ञात बदमाश मंदिर परिसर में घुस आए और वहां रखा लोहे का दानपात्र उखाड़कर अपने साथ ले गए। चोरों ने दानपात्र को मंदिर से करीब 200 मीटर दूर झाड़ियों में ले जाकर उसका ताला और ऊपरी ढक्कन तोड़ दिया और उसमें रखी सारी नकदी निकाल ली। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी खाली गल्ला वहीं फेंककर फरार हो गए। रविवार सुबह जब पुजारी और ग्रामीण मंदिर पहुंचे तो उन्हें इस चोरी की जानकारी हुई। मंदिर में चोरी की खबर फैलते ही ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में आक्रोश छा गया। उन्होंने इस घटना को धार्मिक आस्था पर चोट बताते हुए आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। ग्रामीणों और हनुमान भक्तों ने मूंगाणा पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें मामले की निष्पक्ष जांच, आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।1
- उदयपुर के महाराणा प्रताप एयरपोर्ट को पश्चिमी भारत का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और एविएशन हब बनाने की व्यापक तैयारी शुरू हो गई है। हाल ही में चित्तौड़ सांसद की अध्यक्षता में हुई एयरपोर्ट सलाहकार समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि एयरपोर्ट को मेवाड़ की सांस्कृतिक पहचान और गौरव के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें परिसर को हेरिटेज थीम पर विकसित करना और इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रमुख होगा। इस योजना के तहत, एयरपोर्ट पर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को मेवाड़ की सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराने के लिए हेरिटेज गैलरी बनाई जाएगी। अराइवल और डिपार्चर एरिया में एक स्थायी मेवाड़ हेरिटेज गैलरी का निर्माण होगा, जिसमें महाराणा प्रताप, राणा पूंजा और चेतक की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी, साथ ही मेवाड़ के किलों के 3डी मॉडल और डिजिटल इतिहास को प्रदर्शित किया जाएगा। बैगेज बेल्ट और वेटिंग एरिया को मेवाड़ी स्थापत्य कला के अनुरूप रंगा जाएगा। यात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए टर्मिनल का विस्तार करने के साथ-साथ पार्किंग, वाई-फाई, डिजिटल सूचना प्रणाली, चार्जिंग स्टेशन और मेडिकल सुविधाओं को पूरी तरह से अपडेट किया जाएगा। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों के लिए अतिरिक्त इंतज़ाम किए जाएंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रमुख पर्यटन स्थलों से एयरपोर्ट तक इलेक्ट्रिक बसें चलाने और टैक्सी-ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार लाने का भी प्रस्ताव है। एयरपोर्ट को 'ग्रीन एयरपोर्ट मॉडल' के रूप में विकसित करने की भी योजना है, जिसमें सौर ऊर्जा और जल संचयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एयरपोर्ट के आसपास के गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा, नए स्कूल बनाए जाएंगे और पानी की कमी दूर करने के लिए नई योजनाएं लागू करते हुए पास की नहर को पक्का किया जाएगा। अगले दस वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रनवे विस्तार, कार्गो हब और एयरोसिटी के विकास के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी, मावली विधायक पुष्कर लाल डांगी के साथ-साथ पुलिस, प्रशासन और विभिन्न एयरलाइंस कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सभी सदस्यों ने इन प्रस्तावों पर अपनी सहमति व्यक्त की और संबंधित विभागों को जल्द से जल्द कार्य शुरू करने के निर्देश दिए।3
- नीमच के स्कीम नंबर-36 क्षेत्र में इन दिनों बागेश्वर धाम की तर्ज पर आयोजित भूमिया सरकार का दिव्य दरबार श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं के समाधान की उम्मीद लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इस दरबार में पहुँच रहे हैं। राज पैलेस के पास हुई एक प्रेस वार्ता में ग्वालियर के संत श्री श्री 1008 हरिओमदास जी महाराज ने आध्यात्म के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवाओं को सही दिशा देने और बढ़ती भौतिकता तथा तनावपूर्ण जीवन के बीच सकारात्मक सोच, आत्मबल एवं जीवन मूल्यों से जोड़ने के लिए आध्यात्म और संस्कारों से जोड़ना बेहद जरूरी है। संत हरिओमदास जी महाराज ने भूमिया सरकार के इस दिव्य दरबार को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता, सकारात्मकता और संस्कारों को बढ़ावा देने वाला माध्यम बताया। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन लोगों को मानसिक संबल प्रदान करने के साथ ही समाज में एकता और भाईचारे को भी मजबूत करते हैं। संत हरिओमदास जी ने बागेश्वर धाम के दरबारों का उल्लेख करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि आस्था और श्रद्धा लोगों को जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं, लेकिन इन्हें अंधविश्वास से अलग करके समझना आवश्यक है। क्षेत्र में इस दरबार को लेकर खासा उत्साह का माहौल है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी सहभागिता निभा रहे हैं।1
- चित्तौड़गढ़ के डगला का खेड़ा चौराहे पर स्थित 'खूनी मोड़' ने अब एक गंभीर खतरे का रूप ले लिया है, जहाँ आए दिन सड़क हादसों के कारण गौवंश और आम लोग लगातार अपनी जान से हाथ धो रहे हैं या घायल हो रहे हैं। इस जानलेवा स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों ने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर प्रशासन से इस खतरनाक मोड़ पर ध्यान देने और इसके समाधान के लिए तुरंत कदम उठाने की पुरज़ोर माँग की है।1
- पंचायत पारसोली से एक निवेदन किया गया है कि बारिश के मौसम में उनके घर के आगे भारी जलभराव हो जाता है। इस परेशानी को देखते हुए, उनसे गुहार लगाई गई है कि इस स्थान पर नाला निर्माण कार्य तुरंत शुरू करवाया जाए ताकि यह समस्या दूर हो सके।1
- रविवार शाम करीब 6 बजे चिकारड़ा कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आए तेज अंधड़ और तूफानी हवाओं ने जमकर कहर बरपाया। लगभग एक घंटे तक चली इन हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ धराशायी हो गए और टहनियां टूट गईं। मकानों तथा बाड़ों पर लगे टीनशेड, एंगल, खिड़कियां और दरवाजे तक उड़ गए, जिससे व्यापक संपत्ति को नुकसान पहुँचा। हालांकि, राहत की बात यह रही कि कहीं से भी किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली। सबसे अधिक नुकसान भाटोली बागरियांन क्षेत्र में दर्ज किया गया, जहाँ एक दर्जन से अधिक मकानों और बाड़ों को क्षति पहुँची। स्थानीय निवासी उदयनाथ ने बताया कि अंधड़ ने पूरे क्षेत्र में तबाही मचा दी, लेकिन ईश्वर की कृपा से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस तूफान की चपेट में हीरालाल गाडरी, भेरूलाल गाडरी, नारायणलाल गाडरी, लक्ष्मण जाट, देवीलाल गाडरी, कालू गाडरी और कालू गुर्जर सहित कई लोगों के मकानों के टीनशेड उड़ गए या टूटकर अंदर गिर पड़े। सौभाग्य से, उस समय बाड़ों में बंधे मवेशियों में से किसी को भी कोई चोट नहीं आई। उदयनाथ के खेत पर भी एक बड़ा पेड़ जड़ सहित धराशायी हो गया। तूफानी हवाओं ने विद्युत व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया। नंगाखेड़ा की नई आबादी, सारंगपुरा और भाटोली बागरियांन की एलटी लाइनों पर पेड़ गिरने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इसके अतिरिक्त, नीमगांव, झाड़सादड़ी और नंगाखेड़ा में विद्युत पोल गिरने से लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। जेतपुरा में माधु लाल गायरी तथा नौगांव में कालू लाल गायरी के कुओं पर लगे डीपी स्ट्रक्चर भी धराशायी हो गए, जिससे पूरे क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय बाद आए इस भीषण अंधड़ से क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। संपत्ति को व्यापक क्षति होने के बावजूद, किसी भी व्यक्ति, पशु अथवा पक्षी के हताहत न होने से लोगों ने राहत की साँस ली। तूफान शांत होने के बाद, विद्युत विभाग की टीमें क्षतिग्रस्त लाइनों और पोलों की मरम्मत कर बिजली व्यवस्था को बहाल करने के कार्य में तत्काल जुट गईं।4