रीवा जिले के सेमरिया विधानसभा क्षेत्र के बहुरीबांध गाँव की कल्पना प्रजापति ने असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) की चुनौतीपूर्ण परीक्षा पास कर एक मिसाल कायम की है। बिना माँ के बचपन और दो साल पहले पिता का साया उठ जाने के बावजूद, उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा और रिश्तेदारों के सहारे पढ़ाई पूरी की, साथ ही घर के काम भी संभाले। रेलवे की ALP भर्ती परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है, जिसमें टेक्निकल पेपर, साइको टेस्ट और मेडिकल जैसे चरण होते हैं, जो बिजली, मैकेनिकल और फिजिक्स जैसे विषयों को एक साथ कवर करते हैं। गाँव में कोचिंग की सुविधा न होने पर भी, कल्पना ने मोबाइल पर पिछले साल के प्रश्नपत्र (PYQ) देखकर और रात-रात भर जागकर पढ़ाई की। जब परीक्षा का परिणाम आया, तो पूरे परिवार की आँखें खुशी से भर आईं। कल्पना के चयन की खबर मिलते ही, युवा समाजसेवी संजय द्विवेदी उनके घर पहुँचे और उन्हें बहन मानकर श्रीफल तथा गणेश जी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर, कल्पना के हाथों से उनकी माँ और पिता के नाम पर एक-एक पेड़ भी लगवाया गया, जो कल्पना के हौसले की जड़ों के जमने का प्रतीक है। यह जीत सेमरिया क्षेत्र की लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो अब कह सकेंगी कि "कल्पना दीदी बन सकती हैं तो हम क्यों नहीं।" असिस्टेंट लोको पायलट के तौर पर, कल्पना पर हजारों यात्रियों की जान की जिम्मेदारी होगी, उन्हें इंजन की कमान संभालनी होगी, सिग्नल समझने होंगे और रात-दिन ड्यूटी करनी होगी। अब कल्पना स्टील की पटरियों पर देश को आगे बढ़ाएँगी। यह कहानी दर्शाती है कि यदि साधन कम हों, तो भी हौसला कम नहीं होना चाहिए। बहुरीबांध की गलियों से निकली यह बेटी अब देश की रेल चलाएगी।
रीवा जिले के सेमरिया विधानसभा क्षेत्र के बहुरीबांध गाँव की कल्पना प्रजापति ने असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) की चुनौतीपूर्ण परीक्षा पास कर एक मिसाल कायम की है। बिना माँ के बचपन और दो साल पहले पिता का साया उठ जाने के बावजूद, उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा और रिश्तेदारों के सहारे पढ़ाई पूरी की, साथ ही घर के काम भी संभाले। रेलवे की ALP भर्ती परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है, जिसमें टेक्निकल पेपर, साइको टेस्ट और मेडिकल जैसे चरण होते हैं, जो बिजली, मैकेनिकल और फिजिक्स जैसे विषयों को एक साथ कवर करते हैं। गाँव में कोचिंग की सुविधा न होने पर भी, कल्पना ने मोबाइल पर पिछले साल के प्रश्नपत्र (PYQ) देखकर और रात-रात भर जागकर पढ़ाई की। जब परीक्षा का परिणाम आया, तो पूरे परिवार की आँखें खुशी से भर आईं। कल्पना के चयन की खबर मिलते ही, युवा समाजसेवी संजय द्विवेदी उनके घर पहुँचे और उन्हें बहन मानकर श्रीफल तथा गणेश जी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर, कल्पना के हाथों से उनकी माँ और पिता के नाम पर एक-एक पेड़ भी लगवाया गया, जो कल्पना के हौसले की जड़ों के जमने का प्रतीक है। यह जीत सेमरिया क्षेत्र की लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो अब कह सकेंगी कि "कल्पना दीदी बन सकती हैं तो हम क्यों नहीं।" असिस्टेंट लोको पायलट के तौर पर, कल्पना पर हजारों यात्रियों की जान की जिम्मेदारी होगी, उन्हें इंजन की कमान संभालनी होगी, सिग्नल समझने होंगे और रात-दिन ड्यूटी करनी होगी। अब कल्पना स्टील की पटरियों पर देश को आगे बढ़ाएँगी। यह कहानी दर्शाती है कि यदि साधन कम हों, तो भी हौसला कम नहीं होना चाहिए। बहुरीबांध की गलियों से निकली यह बेटी अब देश की रेल चलाएगी।
- रीवा में जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुन रहे हैं। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी और तहसीलदार शिव शंकर शुक्ला सहित कई अन्य अधिकारी भी उपस्थित होकर लोगों की शिकायतों का निवारण कर रहे हैं।1
- नागौद राजघराने से जुड़े चर्चित गोलीकांड मामले में अब बाबा राजा (रूपेंद्र सिंह) का पक्ष भी सामने आ गया है। इस घटना को लेकर जिले में गरमागरम बहस छिड़ी हुई है, जहाँ आत्मरक्षा और जानबूझकर किए गए हमले के दावे आमने-सामने हैं। बाबा राजा का कहना है कि उन पर पहले हमला हुआ, उनके साथ मारपीट की गई और अपनी जान का खतरा महसूस होने पर उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई। इसके ठीक विपरीत, योगिता सिंह और उनके परिवार का आरोप है कि यह फायरिंग जानबूझकर की गई थी। इस पूरे प्रकरण में कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जैसे कि 11 जून को परसमनिया गढ़ी में आखिर क्या हुआ था, और सुनीता सिंह कौन हैं। फिलहाल, सच क्या है, इसका अंतिम फैसला पुलिस जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अदालत में सामने आने वाले सबूतों के आधार पर ही होगा।1
- रीवा जिले के नगर परिषद डभौरा स्थित कोटा नदी में दो गौवंश फंस गए थे, जिन्हें श्री गौदर्शन लोक कल्याण संस्था नगर परिषद डभौरा संचालित गौशाला के संचालक जयप्रकाश साहू की तत्परता से सुरक्षित बचाया गया। चरवाहों ने गौवंशों के फंसे होने की सूचना साहू को दी थी, जिसके बाद उन्होंने तत्काल गौसेवकों के साथ नदी में पहुँचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इस सफल बचाव अभियान के बाद दोनों गौवंशों को सुरक्षित बाहर निकालकर गौशाला पहुँचाया गया। इस कार्य के लिए क्षेत्र के लोगों ने गौशाला संचालक और कर्मचारियों की प्रशंसा की है।1
- रीवा के सुहागी पहाड़ से शाम के समय का एक बेहद ही मनमोहक और मंत्रमुग्ध कर देने वाला नज़ारा सामने आया है, जो दर्शकों के मन को मोह लेने में सक्षम है।1
- लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी। यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि चाहे कोई भी हो, उसे अपना निर्धारित काम अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। यदि काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही बरती जाती है या उसे समय पर पूरा नहीं किया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को इसका भुगतान करना पड़ेगा।1
- कैबिनेट द्वारा रीवा, देवास और गुना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन के लिए एक आउटसोर्स प्रणाली से संबंधित पायलट प्रोजेक्ट को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस निर्णय के तहत, इन तीन जिलों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन आउटसोर्सिंग के माध्यम से किया जाएगा।1
- सतना जिले के मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। यहाँ अधिकारियों के संरक्षण में कथित तौर पर एक नौवीं कक्षा का छात्र मरीजों की ओपीडी पर्ची काटते हुए कैमरे में कैद किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना मझगवां CHC की अव्यवस्थाओं और कारनामों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने की प्रवृत्ति को उजागर करती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखकर शासकीय कार्य कर रहा यह नाबालिग छात्र मझगवां CHC के ब्लॉक बीएमओ के सरकारी वाहन चालक का बेटा है। उसे अस्पताल के अति संवेदनशील ओपीडी काउंटर पर बैठाया गया था। यह काउंटर वह महत्वपूर्ण स्थान है जहाँ मरीजों का प्राथमिक डेटा दर्ज किया जाता है और पर्ची के आधार पर ही उनका आगे का इलाज तय होता है। ऐसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदार पद पर एक अप्रशिक्षित और नाबालिग बच्चे को बैठाया जाना अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले में, जिला पंचायत सदस्य के पति अन्नू सिंह मतहा पर आरोप है कि उन्होंने एक सेल्समैन पर अपनी गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया। यह घटना कथित तौर पर तब हुई जब उन्हें मुफ्त शराब नहीं मिली।1