NH-19 पर टूटी रैलिंग बनी हादसों का कारण निरसा : निरसा के शाशंबेरिया मोड़ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-19 किनारे लगी रैलिंग का एक हिस्सा पूरी तरह टूटा और अधूरा पड़ा हुआ है, जो राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। स्थानीय लोगों और दुकानदारों का कहना है कि इस टूटी रैलिंग की वजह से कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो NHAI के अधिकारी मौके पर पहुंचे और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने सुध ली। लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी कुंभकरणी नींद में सोए हुए हैं। स्थानीय दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि इस टूटे-फूटे रैलिंग हिस्से को जल्द नहीं हटाया या दुरुस्त किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी और अप्रिय घटना हो सकती है। खासकर रात के समय यह अधूरी रैलिंग हादसों को खुला न्योता दे रही है। लोगों ने प्रशासन और NHAI से तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है, ताकि किसी की जान खतरे में न पड़े।
NH-19 पर टूटी रैलिंग बनी हादसों का कारण निरसा : निरसा के शाशंबेरिया मोड़ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-19 किनारे लगी रैलिंग का एक हिस्सा पूरी तरह टूटा और अधूरा पड़ा हुआ है, जो राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। स्थानीय लोगों और दुकानदारों का कहना है कि इस टूटी रैलिंग की
वजह से कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो NHAI के अधिकारी मौके पर पहुंचे और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने सुध ली। लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी कुंभकरणी नींद में सोए हुए हैं। स्थानीय दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि इस टूटे-फूटे रैलिंग हिस्से को जल्द
नहीं हटाया या दुरुस्त किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी और अप्रिय घटना हो सकती है। खासकर रात के समय यह अधूरी रैलिंग हादसों को खुला न्योता दे रही है। लोगों ने प्रशासन और NHAI से तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है, ताकि किसी की जान खतरे में न पड़े।
- NH-19 पर टूटी रैलिंग बनी हादसों का कारण निरसा : निरसा के शाशंबेरिया मोड़ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-19 किनारे लगी रैलिंग का एक हिस्सा पूरी तरह टूटा और अधूरा पड़ा हुआ है, जो राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। स्थानीय लोगों और दुकानदारों का कहना है कि इस टूटी रैलिंग की वजह से कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो NHAI के अधिकारी मौके पर पहुंचे और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने सुध ली। लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी कुंभकरणी नींद में सोए हुए हैं। स्थानीय दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि इस टूटे-फूटे रैलिंग हिस्से को जल्द नहीं हटाया या दुरुस्त किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी और अप्रिय घटना हो सकती है। खासकर रात के समय यह अधूरी रैलिंग हादसों को खुला न्योता दे रही है। लोगों ने प्रशासन और NHAI से तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है, ताकि किसी की जान खतरे में न पड़े।3
- झारखंड में आज भी परंपरागत और रोचक खेल है 'मुर्गा लड़ाई'। झारखंड के जनजातीय ओर ग्रामीण इलाकों में लगने वाले ग्रामीण हाट-बाजारों के अलावा कई अन्य स्थानों पर आज भी एक परंपरागत खेल 'मुर्गा लड़ाई' बेहद लोकप्रिय है। इसमें हारने वाला मुर्गा जीतने वाले मुर्गा के मालिक को मिल जाता, कई जिलों में इस लड़ाई को आदिवासियों की संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है. इस छेत्र के समाज के ग्रामीणों में ऐसी मान्यता है कि उनकी कई पीढ़ियों से ये मुर्गा लड़ाई म हुदा के भदवार टाँड़ राजा के जमाने होता आ रहा है। सबसे बड़ी बात है लाखो की संख्या में लोग आते है कोई अपनी घर परिवार को चलाने के लिए ठेला लगता है तो कोई कपड़ा बेचता है तो कोई गन्ना तो कोई होटल खोलकर अपना रोजगार करता है कुछ घंटों के इस मैले में। ये मुर्गा लड़ाई कोई भी कमिटी नही करती ओर न कोई इसका आयोजन कर्ता होता है झारखंड के हर जिले के अलावा उससे सटे कई राज्यो के लोग इस मेले में आते है। जिसे लोग बावड़ी मेला कहते है। करीब 20 फुट के घेरे में दो मुर्गो की लड़ाई होती है. लड़ाई के दौरान मुर्गे की पैंतरेबाजी देखने लायक होती है. लड़ाई में एक चक्र अमूमन सात से 10 मिनट तक चलता है. लड़ाई शुरू होने से पहले और लड़ाई के दौरान लोग मुर्गो पर दांव लगाते हैं. सट्टेबाज लोगों को उकसाते हुए चारों तरफ घूमते रहते हैं. इस दौरान मुर्गे को उत्साहित करने के लिए मुर्गा का मालिक तरह-तरह की आवाजें निकालता रहता है, जिसके बाद मुर्गा और खतरनाक हो जाता है. मुर्गा लड़ाई के लिए मुर्गा पालने के शौकीन लड़ाई में प्रशिक्षित मुर्गे उतारे जाते हैं. लड़ने के लिए तैयार मुर्गे के एक पैर में 'कत्थी' बांधा जाता है ऐसा नहीं कि यह कत्थी कोई व्यक्ति बांध सकता है. इसके बांधने की भी अपनी कला है. कत्थी बांधने का कार्य करने वालों को 'कातकीर' कहा जाता है जो इस कला में माहिर होता है. मुर्गे आपस में कत्थी द्वारा एक दूसरे पर वार करते रहते हैं. इस दौरान मुर्गा लहुलूहान हो जाता है. जो मुर्गा गिर या बैठ जाता इस लड़ाई में तभी समाप्त होती है जब तक मुर्गा घायल न हो जाए या मैदान छोड़कर भाग जाए. तब तक जीत हार का मान्य नही होता। जानकार बताते हैं कि मुर्गा को लड़ाकू बनाने के लिए खास तौर पर न केवल प्रशिक्षण दिया जाता है बल्कि उसके खान-पान पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. लड़ाई के लिए तैयार किए जाने वाले मुर्गे को ताकतवर बनाने के लिए उन्हें सूखी मछली का घोल, किशमिश, उबला हुआ मक्का और विटामिन के इंजेक्शन तक दिए जाते हैं.1
- मासूम लड़की और भेड़िया1
- https://youtu.be/LzigYFWRecY?si=9yATbOTrk35Srmgz धीरन किसकु की रोड एक्सीडेंट में मृत्यु होने के बाद,गांव में पसरा मातम1
- धनबाद कोयलांचल में मकर संक्रांति 2 दिन होने के कारण लोगों में अजमंजश देखी गई लेकिन बाजारों में लोगों की भीड़ देखने को बनती है लोग दही चूड़ा अच्छा तिलकुट एवं अन्य सामग्री लेने के लिए दुकानों में जुटे आइए हम आपको दिखाते हैं तिलकुट किस प्रकार बनता है और आपके घर तक पहुंचता है हमने इस संबंध में कई दुकानदारों से बात की तो उन्होंने क्या कुछ कहा आइए जानते हैं इस खबर में1
- Tata Steel Company के jhariya Division के अंतर्गत सिजुआ क्षेत्र के रामपुर व कंचनपुर जो लीज होल्ड एरिया के अंतर्गत आता है!जिस एरिया मे कोयला का उतखनन बड़े पैमाने मे होता है जिस कारण लगभग दर्जानाधिक नए एवं पुराने घरों मे दरार का होना आम बात हो गई है जिससे ग्रामीणों मे भय का माहौल बना हुआ है इसको लेकर ग्रामीणों ने अपने अपने घरों का रिपेयरिंग के लिए प्रबंधन से वार्ता करने के पश्चात वर्ष 2019 से कई बार आवेदन भी दे चुके है परन्तु अभी तक कोई साकारात्मक पहल नही कि जा रही है दबाव पड़ने पर कुछ नामचीन वयक्ति का कार्य किया गया है जो उचित नही था भुक्तभोगी और अत्यंत निर्धन जब भी इस विषय को लेकर मौखिक एवं लिखित रूप से वार्तालाप करता है तो टालमटोल करने लगते है कभी पुराने दर होने के कारण ठीकेदारों के द्वारा कार्य नही करने एवं पुनः नए दर पर टेंडर निकलने कि बात बोलकर आज लगभग 5 से 6 वर्षो से ग्रामीणों को यही कहानी सुनाया जा रहा है प्रश्न तो यह है कि खनन प्रभावित एरिया मे जनहित कि मुद्दे पर प्रबंधन कितना संवेदनशील है इससे अनुमान लगाया जा सकता है!4
- ग्रामीणों के आंदोलन का असर: नरेश रजवार हादसे में कंपनी ने दिया मुआवजा1
- निरसा हटिया मोड़ के समीप सिंह लोक बस का टायर फटने के कारण यह घटना घटी है। यह बस कोलकाता से आरा बिहार जा रही थी।1