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2 hrs ago
user_Mangal chand Mali
Mangal chand Mali
सरदारशहर, चूरू, राजस्थान•
2 hrs ago

More news from Rajasthan and nearby areas
  • Post by Amit Sharma
    1
    Post by Amit Sharma
    user_Amit Sharma
    Amit Sharma
    पत्रकार Jhunjhunun, Rajasthan•
    9 hrs ago
  • सीकर जिले के लोसल नगर पालिका के वार्ड 19 रिपोर्ट कार्ड सामने आया है जिसमे पार्षद ने विकास कार्यों को लेकर खूब बड़े बड़े वादे किए लेकिन वार्ड के कुछ हिस्सों में नही आ रहा है पीने का पानी
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    सीकर जिले के लोसल नगर पालिका के वार्ड 19 रिपोर्ट कार्ड सामने आया है जिसमे पार्षद ने विकास कार्यों को लेकर खूब बड़े बड़े वादे किए लेकिन वार्ड के कुछ हिस्सों में नही आ रहा है पीने का पानी
    user_RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    Sikar, Rajasthan•
    15 hrs ago
  • Post by Pandit Munna Lal Bhargav
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    Post by Pandit Munna Lal Bhargav
    user_Pandit Munna Lal Bhargav
    Pandit Munna Lal Bhargav
    Astrologer धोद, सीकर, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • Post by जगदीश धौलपूरीया
    1
    Post by जगदीश  धौलपूरीया
    user_जगदीश  धौलपूरीया
    जगदीश धौलपूरीया
    सिवानी, भिवानी, हरियाणा•
    16 min ago
  • Post by SSSO News
    1
    Post by SSSO News
    user_SSSO News
    SSSO News
    बीकानेर, बीकानेर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कोई नया नहीं है। दशकों से दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका सच में ईरान से डरता है? विशेषज्ञों के अनुसार “डर” से ज्यादा यह रणनीतिक और सैन्य संतुलन का मामला है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं। पहला कारण है ईरान का परमाणु कार्यक्रम। अमेरिका को आशंका है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। हालांकि ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा और शोध के लिए है, लेकिन पश्चिमी देशों को इस पर संदेह रहता है। दूसरा कारण ईरान की मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव है। ईरान के पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं और उसका प्रभाव इराक, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे देशों तक फैला हुआ है। अमेरिका के कई सैन्य अड्डे मध्य पूर्व में मौजूद हैं, इसलिए किसी भी टकराव की स्थिति में अमेरिकी ठिकाने निशाने पर आ सकते हैं। तीसरा बड़ा कारण है होरमुज़ जलडमरूमध्य। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यदि ईरान इस मार्ग को बाधित करता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। चौथा कारण यह है कि ईरान के समर्थन से काम करने वाले सशस्त्र समूह क्षेत्र में सक्रिय हैं। यदि सीधा युद्ध होता है तो संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में फैल सकता है। इसलिए इसे “डर” की बजाय रणनीतिक सतर्कता कहा जा सकता है। अमेरिका जानता है कि ईरान से सीधा युद्ध आसान नहीं होगा और इसके वैश्विक आर्थिक व राजनीतिक परिणाम गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी और प्रतिबंधों का दौर चलता रहता है, लेकिन खुला युद्ध किसी के हित में नहीं माना जाता।
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    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कोई नया नहीं है। दशकों से दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका सच में ईरान से डरता है? विशेषज्ञों के अनुसार “डर” से ज्यादा यह रणनीतिक और सैन्य संतुलन का मामला है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं।
पहला कारण है ईरान का परमाणु कार्यक्रम। अमेरिका को आशंका है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। हालांकि ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा और शोध के लिए है, लेकिन पश्चिमी देशों को इस पर संदेह रहता है।
दूसरा कारण ईरान की मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव है। ईरान के पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं और उसका प्रभाव इराक, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे देशों तक फैला हुआ है। अमेरिका के कई सैन्य अड्डे मध्य पूर्व में मौजूद हैं, इसलिए किसी भी टकराव की स्थिति में अमेरिकी ठिकाने निशाने पर आ सकते हैं।
तीसरा बड़ा कारण है होरमुज़ जलडमरूमध्य। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यदि ईरान इस मार्ग को बाधित करता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
चौथा कारण यह है कि ईरान के समर्थन से काम करने वाले सशस्त्र समूह क्षेत्र में सक्रिय हैं। यदि सीधा युद्ध होता है तो संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में फैल सकता है।
इसलिए इसे “डर” की बजाय रणनीतिक सतर्कता कहा जा सकता है। अमेरिका जानता है कि ईरान से सीधा युद्ध आसान नहीं होगा और इसके वैश्विक आर्थिक व राजनीतिक परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी और प्रतिबंधों का दौर चलता रहता है, लेकिन खुला युद्ध किसी के हित में नहीं माना जाता।
    user_आईरा समाचार बीकानेर
    आईरा समाचार बीकानेर
    Journalist Bikaner, Rajasthan•
    2 hrs ago
  • Post by Amit Sharma
    1
    Post by Amit Sharma
    user_Amit Sharma
    Amit Sharma
    पत्रकार Jhunjhunun, Rajasthan•
    10 hrs ago
  • Post by Pandit Munna Lal Bhargav
    1
    Post by Pandit Munna Lal Bhargav
    user_Pandit Munna Lal Bhargav
    Pandit Munna Lal Bhargav
    Astrologer धोद, सीकर, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • नई दिल्ली/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी कर कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिक उपलब्ध साधनों से जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलने का प्रयास करें। दूतावास की ओर से कहा गया है कि क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति तेजी से बदल रही है और किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से बचाव के लिए एहतियाती कदम उठाना जरूरी है। हालांकि अब तक अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए आशंकाएं जताई जा रही हैं। भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों से स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने, भीड़भाड़ और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने तथा दूतावास के संपर्क में बने रहने को कहा है। साथ ही यात्रा दस्तावेज तैयार रखने की भी सलाह दी गई है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत निकासी संभव हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एडवाइजरी एहतियात के तौर पर जारी की गई है। फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है और भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
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    नई दिल्ली/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी कर कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिक उपलब्ध साधनों से जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलने का प्रयास करें।
दूतावास की ओर से कहा गया है कि क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति तेजी से बदल रही है और किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से बचाव के लिए एहतियाती कदम उठाना जरूरी है। हालांकि अब तक अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए आशंकाएं जताई जा रही हैं।
भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों से स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने, भीड़भाड़ और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने तथा दूतावास के संपर्क में बने रहने को कहा है। साथ ही यात्रा दस्तावेज तैयार रखने की भी सलाह दी गई है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत निकासी संभव हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एडवाइजरी एहतियात के तौर पर जारी की गई है। फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है और भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
    user_आईरा समाचार बीकानेर
    आईरा समाचार बीकानेर
    Journalist Bikaner, Rajasthan•
    2 hrs ago
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